# राजस्थान निकाय चुनाव: प्रमुख पदों के नामांकन का आखिरी दिन, सीकर से लेकर उदयपुर तक राजनीतिक हलचल तेज

> राजस्थान में निकाय प्रमुख पदों के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन है। सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जिससे कई जगहों पर सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikay-chunav-pramukh-pado-ke-namankan-ka-akhiri-din-sikar-se-lekar-udaipur-tak-rajneetik-halchal-tez-32767 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान निकाय चुनाव, बीजेपी कांग्रेस मुकाबला, फतेहपुर नगर परिषद, उदयपुर नगर निगम, निकाय प्रमुख नामांकन

जयपुर में राजस्थान निकाय चुनाव के तहत आज निकाय प्रमुख के नामांकन का आखिरी दिन तय किया गया है। राज्यभर के विभिन्न निकायों में अपना बोर्ड स्थापित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों ही प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए हर संभव जुगत भिड़ा रहे हैं। जिन स्थानीय निकायों में पार्टियों को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है, वहां अध्यक्ष पद की कुर्सी पाने के लिए अंदरूनी खींचतान और लॉबिंग का दौर चरम पर पहुंच गया है।

## पार्षदों की बाड़ाबंदी और कड़ी निगरानी
राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत पार्षदों के साथ-साथ समर्थन देने वाले निर्दलीयों को भी सुरक्षित ठिकानों पर रोक कर रखा है, जिसे बाड़ाबंदी कहा जा रहा है। प्रत्येक पार्षद की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि ऐन वक्त पर पाला न बदला जा सके। जैसे-जैसे नामांकन दाखिल करने की समय सीमा नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने में जुटी हुई हैं, जिससे चुनावी सरगर्मी और बढ़ गई है।

## सीकर और उदयपुर में सियासी उलटफेर
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पार्टियों के भीतर चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। अधिकतम निकायों में अपना बोर्ड काबिज करने के लिए दोनों दल सभापति पद के वास्ते निर्दलीयों को भी मैदान में उतारने से नहीं चूक रहे हैं। इस कड़ी में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर सीकर जिले की फतेहपुर नगर परिषद में सामने आया है, जहां बहुमत न होने के बावजूद बीजेपी ने निर्दलीय पार्षद मंजू भिंडा को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बना दिया है। दूसरी ओर, उदयपुर नगर निगम में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद अभी तक महापौर पद के लिए उम्मीदवार का नाम तय नहीं हो पाया है, क्योंकि वहां पूरा मामला पेचीदा जातीय समीकरणों में उलझ कर रह गया है।

## इसका आप पर असर
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में चल रही राजनीतिक उठापटक का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज और स्थानीय विकास कार्यों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** राज्य स्तर पर स्थानीय निकायों के गठन में हो रही यह रस्साकशी शहरी क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता से जुड़े छोटे प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करती है।
- **राजस्थान में:** सीकर और उदयपुर जैसे प्रभावित जिलों के नागरिकों को नए नेतृत्व के चयन और बोर्ड गठन के लिए अपने स्थानीय प्रतिनिधियों के फैसलों का इंतजार करना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
निकाय प्रमुखों के चुनाव में राजनीतिक दलों के बीच यह खींचतान स्थानीय स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने की होड़ के कारण पैदा हुई है।

- **बहुमत का गणित:** कई निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक बन गई है, जिसके चलते उन्हें रिझाने की होड़ मची है।
- **जातीय समीकरण:** उदयपुर जैसे बड़े नगर निगमों में विभिन्न जातियों के प्रभाव और संतुलन को साधने की मजबूरी के कारण शीर्ष पदों के लिए नाम तय करने में देरी हो रही है।
- **फतेहपुर का उलटफेर:** सीकर की फतेहपुर नगर परिषद में संख्या बल कम होने के बावजूद बीजेपी द्वारा रणनीतिक रूप से निर्दलीय को उम्मीदवार बनाना इस बात का प्रमाण है कि दल हर हाल में बोर्ड पर कब्जा करना चाहते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान निकाय चुनाव में नामांकन की अंतिम तिथि कब है?
निकाय प्रमुख के पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज ही है।

### 2. किन दो प्रमुख दलों के बीच मुख्य मुकाबला चल रहा है?
यह मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच हो रहा है।

### 3. सीकर जिले की किस नगर परिषद में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है?
सीकर जिले की फतेहपुर नगर परिषद में बड़ा उलटफेर हुआ है।

### 4. फतेहपुर में बीजेपी ने किसे अपना प्रत्याशी घोषित किया है?
अल्पमत में होने के बावजूद बीजेपी ने निर्दलीय पार्षद मंजू भिंडा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

### 5. उदयपुर नगर निगम में महापौर के नाम पर फैसला क्यों नहीं हो पाया है?
उदयपुर में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद मामला जटिल जातीय समीकरणों में उलझ गया है।

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