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  "title": "राजस्थान निकाय चुनावों में हार के बाद भारत आदिवासी पार्टी ने की सख्त कार्रवाई, बांसवाड़ा कार्यकारिणी भंग और डूंगरपुर अध्यक्ष बदले गए",
  "summary": "राजस्थान निकाय चुनावों में खराब प्रदर्शन की गाज भारत आदिवासी पार्टी पर गिरी है। पार्टी ने बांसवाड़ा की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है और डूंगरपुर के जिला अध्यक्ष को भी उनके पद से हटा दिया है।",
  "content": "राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारत आदिवासी पार्टी के भीतर कड़े संगठनात्मक कदम उठाए गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत ने बांसवाड़ा जिले की संपूर्ण जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह बड़ा निर्णय बांसवाड़ा नगर परिषद, कुशलगढ़ नगरपालिका और गढ़ी नगरपालिका के चुनावी परिणामों की गहराई से समीक्षा करने के बाद लिया गया है, जहां पार्टी समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। इसके अलावा डूंगरपुर जिले में भी संगठनात्मक फेरबदल करते हुए जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत को उनके पद से हटा दिया गया है।\n\n \n\nकमजोर प्रदर्शन के बाद बांसवाड़ा में बड़ी कार्रवाई\n निकाय चुनावों के नतीजों ने पार्टी संगठन को तगड़ा झटका दिया है, जिसके चलते नेतृत्व को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। पार्टी अध्यक्ष मोहनलाल रोत के अनुसार, बांसवाड़ा जिले की तीनों स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने वाले समर्थित प्रत्याशी उम्मीदों पर बिल्कुल खरे नहीं उतर सके। चुनाव परिणामों की समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद बांसवाड़ा की पूरी जिला कार्यकारिणी को समाप्त करने की घोषणा की गई, ताकि संगठन में नई जान फूंकी जा सके और कमियों को दूर किया जा सके।\n\n \n\nचुनावी मैदान में उतरी थीं बड़ी संख्या\n इन चुनावों के दौरान पार्टी ने कई क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें डूंगरपुर नगर परिषद में 12, बांसवाड़ा नगर परिषद में 20, प्रतापगढ़ नगर परिषद में 6 और सलूंबर नगर परिषद सहित अन्य पालिकाओं को मिलाकर कुल 79 उम्मीदवार चुनावी मैदान में खड़े किए गए थे। हालांकि, इन तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी के केवल 8 उम्मीदवार ही चुनावी वैतरणी पार करने में सफल हो पाए। इन विजेता उम्मीदवारों में डूंगरपुर नगर परिषद के 3 वार्ड, सांगवाड़ा नगरपालिका के 4 वार्ड और सलूंबर नगर परिषद का मात्र 1 वार्ड ही शामिल रहा, जिससे पार्टी का जीत प्रतिशत काफी कम रहा।\n\n \n\nडूंगरपुर में अध्यक्ष पद को लेकर हुआ बदलाव\n बांसवाड़ा की तरह ही डूंगरपुर जिले में भी सांगठनिक बदलाव किए गए हैं, हालांकि इसके पीछे की प्रक्रिया अलग रही। डूंगरपुर जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत को पदमुक्त किए जाने के पीछे पार्टी के संविधान का हवाला दिया गया है। पार्टी के आंतरिक नियमों के अनुसार एक जिला अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का निर्धारित होता है। उनका यह तयशुदा कार्यकाल पूरा हो चुका था, जिसके चलते उन्हें नियमों के दायरे में रहते हुए उनके पद से हटा दिया गया है।\n\n \n\nआगे क्या होगी पार्टी की रणनीति\n इन बड़े बदलावों के बाद अब सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि बांसवाड़ा में पार्टी नई कमान किसे सौंपेगी और डूंगरपुर का अगला जिला अध्यक्ष कौन बनेगा। फिलहाल संगठन की ओर से इन दोनों ही महत्वपूर्ण जिलों में नई नियुक्तियों को लेकर किसी भी नए नाम का ऐलान नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में पार्टी नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपकर संगठन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।\n\nइसका आप पर असर\nस्थानीय निकाय चुनाव परिणामों और उसके बाद संगठनात्मक बदलावों का सीधा असर क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों और पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर पड़ेगा।\n\n  - भारत में: यह घटना दिखाती है कि कैसे छोटे और क्षेत्रीय दल भी अब स्थानीय चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद जवाबदेही तय करने लगे हैं। इससे राजनीतिक दलों में आंतरिक अनुशासन और चुनावी समीक्षा का दबाव बढ़ेगा।\n\n  - बांसवाड़ा और डूंगरपुर में: स्थानीय मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व परिवर्तन को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है। जब तक नई कार्यकारिणी और अध्यक्षों की घोषणा नहीं होती, तब तक क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां धीमी रह सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबांसवाड़ा और डूंगरपुर में यह सांगठनिक कार्रवाई हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और आंतरिक नियमों के अनुपालन के कारण की गई है।\n\n  - खराब चुनावी प्रदर्शन: पार्टी ने बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में कुल 79 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल 8 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी।\n\n  - समीक्षा बैठक का निर्णय: चुनाव परिणामों के विश्लेषण के बाद बांसवाड़ा में उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने पर राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला लिया।\n\n  - कार्यकाल पूरा होना: डूंगरपुर में जिला अध्यक्ष को हटाने की वजह उनके तीन साल के निर्धारित कार्यकाल का पूरा होना रही, जिसे पार्टी संविधान के नियमों के तहत लागू किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत आदिवासी पार्टी ने बांसवाड़ा में जिला कार्यकारिणी क्यों भंग की?\nनिकाय चुनाव में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक खराब रहने के कारण यह कार्रवाई की गई।\n\n2. डूंगरपुर के जिला अध्यक्ष को क्यों हटाया गया?\nजिला अध्यक्ष अनुतोष रोत का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के कारण उन्हें नियमों के तहत पदमुक्त किया गया।\n\n3. पार्टी ने कुल कितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे?\nपार्टी ने विभिन्न परिषदों और पालिकाओं में कुल 79 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल 8 उम्मीदवार ही जीत सके।\n\n4. पार्टी के कितने उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे?\nकेवल 8 उम्मीदवार जीते, जिनमें डूंगरपुर में 3, सांगवाड़ा में 4 और सलूंबर में 1 वार्ड शामिल था।\n\n5. क्या बांसवाड़ा और डूंगरपुर में नए नामों की घोषणा कर दी गई है?\nफिलहाल दोनों ही जगहों पर नई नियुक्तियों का ऐलान नहीं किया गया है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-15",
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