राजस्थान निकाय चुनाव: अजमेर नगर निगम में बीजेपी का किला ढाने को कांग्रेस ने झोंकी ताकत, सामान्य महिला महापौर सीट पर दिग्गजों की नजर अजमेर नगर निगम चुनाव में 80 वार्डों के लिए प्रत्याशी मैदान में उतर चुके हैं। सामान्य महिला श्रेणी के लिए आरक्षित महापौर की कुर्सी हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने अपने परिवारों की महिलाओं को चुनावी दंगल में उतार दिया है। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच अजमेर नगर निगम क्षेत्र में राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कुल 80 वार्डों वाले इस विशाल नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने आधिकारिक प्रत्याशियों की सूचियों को अंतिम रूप देकर चुनाव मैदान में उतार दिया है। उम्मीदवारों के नामांकन और पर्चा दाखिल करने की प्रक्रिया के साथ ही शहर के हर कोने में चुनावी प्रचार का दौर तेज हो चुका है। अजमेर नगर निगम लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का एक मजबूत और अभेद्य किला माना जाता रहा है, जहां पार्टी का अपना पारंपरिक दबदबा रहा है। हालांकि, इस बार कांग्रेस पार्टी ने जिस योजनाबद्ध तरीके से चुनावी बिसात बिछाई है और स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाया है, उससे मुकाबला पहले की तुलना में कहीं अधिक कड़ा और अनिश्चित दिखाई दे रहा है। दोनों ही प्रमुख दल अब हर एक वार्ड में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। महापौर की सामान्य महिला सीट ने बढ़ाई दिग्गजों की दिलचस्पी अजमेर के इस नगर निगम चुनाव में केवल वार्ड पार्षद बनने तक ही मुकाबला सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित महापौर की कुर्सी को हासिल करने के लिए पर्दे के पीछे और मैदान में भारी कशमकश चल रही है। राज्य सरकार की आरक्षण व्यवस्था के तहत इस बार अजमेर नगर निगम में महापौर का पद महिला सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया है। महापौर पद के सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित होते ही शहर के तमाम वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं की नजरें इस शीर्ष पद पर टिक गई हैं। यही मुख्य कारण है कि अजमेर के कई दिग्गज राजनीतिक परिवारों ने अपने घर की महिलाओं को सीधे चुनावी दंगल में उतारने की रणनीति बनाई है। कई वार्डों में बड़े नेताओं की पत्नियां, बेटियां और बहुएं पार्षद पद के लिए दावेदारी पेश करती हुई नजर आ रही हैं। इन दिग्गज नेताओं का प्राथमिक मकसद किसी भी तरह पहले अपनी पारिवारिक महिला प्रत्याशी को पार्षद का चुनाव जिताना है, ताकि उसके बाद निगम बोर्ड के गठन के समय महापौर की कुर्सी के लिए दावेदारी को मजबूती से पेश किया जा सके। आरक्षण के पिछले समीकरणों पर नजर डालें तो पिछली बार अजमेर नगर निगम में महापौर की सीट महिला अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के लिए आरक्षित थी, जिसके तहत ब्रजलता हाड़ा ने महापौर पद की कमान संभाली थी। ब्रजलता हाड़ा के कार्यकाल के दौरान सत्ताधारी पक्ष की ओर से शहर में व्यापक विकास कार्य करवाने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस लगातार इन दावों पर सवाल उठाता रहा और उसका आरोप था कि जमीनी स्तर पर जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकीं। इसके अलावा, स्वच्छता सर्वेक्षण और शहर की दैनिक सफाई व्यवस्था के मामले में भी अजमेर का प्रदर्शन लगातार गिरता दिखाई दिया, जिसको लेकर स्थानीय नागरिकों में काफी असंतोष देखने को मिला। अब महापौर पद का आरक्षण बदल जाने से पूरा राजनीतिक समीकरण नए सिरे से तैयार हो रहा है। सामान्य वर्ग से आने वाली कई महिला नेताओं के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है, जिससे इस बार चुनाव लड़ने की इच्छुक महिलाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। बड़ी संख्या में निर्दलीय महिला प्रत्याशी भी मैदान में उतरकर अपने भाग्य की आजमाइश कर रही हैं। वार्डों का जातिगत गणित, आरक्षण और परिसीमन का असर अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में सामाजिक और जातिगत संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। कुल 80 वार्डों में से 20 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जबकि 16 सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित की गई हैं। इनके अलावा, नगर निगम के दो वार्ड पुष्कर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं और इन दोनों ही वार्डों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया गया है। साथ ही, सभी 80 वार्डों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत का वैधानिक आरक्षण भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इस बहुस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के चलते इस बार रिकॉर्ड संख्या में महिला उम्मीदवार पार्षद बनने की रेस में सीधी भागीदारी निभा रही हैं। आरक्षण के नियमों के साथ-साथ हाल ही में हुए परिसीमन की प्रक्रिया ने भी वार्डों के पुराने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पुलट कर दिया है। शहर के कई ऐसे पुराने और अनुभवी पार्षद थे जो बीते कई वर्षों से अपने पारंपरिक वार्डों में लगातार जनता के बीच काम कर रहे थे और आगामी चुनाव के लिए अपनी जमीन मजबूत कर रहे थे। लेकिन परिसीमन के बाद जब वार्डों की भौगोलिक सीमाएं बदलीं, तो कई नेताओं के पुराने वार्ड या तो आरक्षित श्रेणी में चले गए या उनका दायरा बदल गया। इस वजह से कई दिग्गज नेताओं को अपनी पुरानी चुनावी जमीन छोड़कर नए और अनजान वार्डों में जाकर चुनाव लड़ने की तैयारियां करनी पड़ रही हैं। नए भौगोलिक इलाकों के जुड़ने और पुराने वोट बैंक के बिखराव के कारण प्रत्याशियों के सामने नए सिरे से मतदाताओं को साधने की गंभीर चुनौती पैदा हो गई है। अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में नए और पुराने चेहरों का घमासान अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नगर निगम के कुल 37 वार्ड आते हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के ही प्रमुख स्थानीय नेताओं की साख दांव पर लगी हुई है। इस क्षेत्र में बीजेपी के शहर अध्यक्ष रमेश सोनी की चुनावी उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में जमकर चर्चाएं चल रही हैं। माना जा रहा है कि रमेश सोनी खुद अथवा उनकी पत्नी चुनाव मैदान में उतरकर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। वहीं, अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकर हेड़ा भी अपनी पत्नी को पार्षद का चुनाव लड़ाने की पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं, ताकि आगे चलकर महापौर पद की रेस में शामिल हुआ जा सके। पारिवारिक दावेदारियों की इस कड़ी में बोराज-हाथीखेड़ा के सरपंच लाल सिंह रावत भी पीछे नहीं हैं और वे अपनी मां को पार्षद पद का चुनाव लड़ाने के लिए मैदान में उतार रहे हैं। इसके अलावा, बीजेपी महिला मोर्चा की शहर अध्यक्ष भारतीय श्रीवास्तव के चुनाव लड़ने की रणनीति भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। भारतीय श्रीवास्तव अपने पुराने पारंपरिक वार्ड के बजाय परिसीमन के बाद बने किसी नए सामान्य वार्ड से किस्मत आजमाने की तैयारी कर रही हैं। परिसीमन के कारण अजमेर उत्तर के लगभग सभी 37 वार्डों में पुराने चुनावी समीकरण टूट चुके हैं, जिससे उम्मीदवारों को नए मोहल्लों और कॉलोनियों में जाकर अपनी पैठ बनाने के लिए अत्यधिक मेहनत करनी पड़ रही है। अजमेर दक्षिण क्षेत्र में दिग्गजों की साख और महापौर पद की रेस नगर निगम के बाकी बचे 41 वार्ड अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। अजमेर दक्षिण में भी भारतीय जनता पार्टी के सामने अपने दशकों पुराने वर्चस्व और राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने की कड़ी परीक्षा है। यहां पार्टी के पूर्व सभापति सुरेंद्र सिंह शेखावत अपने परिवार की महिला सदस्य, यानी अपनी पत्नी या फिर अपनी पुत्रवधू को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। सुरेंद्र सिंह शेखावत के अलावा शहर के कई अन्य रसूखदार और वरिष्ठ नेता भी अपनी पत्नियों और पारिवारिक महिलाओं को पार्षद का टिकट दिलाकर चुनावी दौड़ में आगे रखने का प्रयास कर रहे हैं। चूंकि इस बार महापौर की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, इसलिए अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के 41 वार्डों में होने वाली चुनावी जंग सिर्फ वार्ड स्तर तक सीमित नहीं रहने वाली है। कई प्रमुख राजनीतिक घराने और संभावित उम्मीदवार अभी से ही इस गणित में लगे हुए हैं कि पार्षद का चुनाव जीतते ही महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी को सबसे मजबूत तरीके से कैसे पेश किया जाए। इसी दूरगामी रणनीति के तहत दक्षिण क्षेत्र के दिग्गज नेता अपने-अपने वार्डों में भारी संसाधन और पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बीजेपी के सामने गढ़ बचाने की चुनौती और दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टि से अजमेर नगर निगम को भारतीय जनता पार्टी का एक अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है, जहां से पार्टी लगातार जीत दर्ज करती आई है। हालांकि, इस बार के चुनाव में पार्टी को स्थानीय स्तर पर गहरी सत्ता विरोधी लहर (एंटी इनकंबेंसी) का सामना करना पड़ रहा है। शहर की खस्ताहाल सफाई व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं का अभाव, सड़कों की बदहाली और स्थानीय नागरिक समस्याओं को लेकर जनता के बीच पनपे असंतोष को विपक्ष यानी कांग्रेस एक बड़ा चुनावी हथियार बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। इस नगर निगम चुनाव के परिणाम केवल नए पार्षदों या महापौर का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि यह बीजेपी के दो सबसे बड़े स्थानीय स्तम्भों की राजनीतिक पकड़ का भी परीक्षण करेंगे। अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और वर्तमान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी तथा अजमेर दक्षिण क्षेत्र से बीजेपी विधायक अनीता भदेल के कंधों पर अपने-अपने इलाकों में पार्टी का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी है। अगर इन क्षेत्रों के वार्डों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो इसका सीधा असर वासुदेव देवनानी और अनीता भदेल की स्थानीय राजनीतिक साख और पकड़ पर पड़ेगा। यही कारण है कि ये दोनों ही वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत रूप से चुनावी रणनीतियों की निगरानी कर रहे हैं। कांग्रेस के लिए सेंध लगाने का अवसर और अंदरूनी खींचतान की बाधा दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के लिए इस बार अजमेर नगर निगम के बीजेपी गढ़ में बड़ी सेंध लगाने का एक अनुकूल अवसर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र राठौड़ और शहर कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार जयपाल के कुशल नेतृत्व में पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकजुटता का संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस नेता लगातार बीजेपी शासन के दौरान नगर निगम में हुए कथित भ्रष्टाचार, सफाई व्यवस्था की विफलता और नागरिक समस्याओं को जनता के सामने प्रमुखता से उठा रहे हैं। हालांकि, टिकटों के बंटवारे के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान और असंतोष सार्वजनिक रूप से बाहर आ गया है, जो पार्टी की संभावनाओं के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है। विशेष रूप से पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट से जुड़े प्रमुख नेताओं, जैसे विजय जैन और हेमंत भाटी के समर्थकों तथा कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में टिकट वितरण को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। यदि टिकट वितरण से उपजा यह अंदरूनी असंतोष चुनाव प्रचार और मतदान के दौरान बना रहा, तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस प्रत्याशियों को उठाना पड़ सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए पार्टी आलाकमान और स्थानीय वरिष्ठ नेता तुरंत डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं तथा हर कदम फूंक-फूंककर रख रहे हैं ताकि गुटबाजी को खत्म कर चुनाव में बीजेपी को कड़ी चुनौती दी जा सके। इसका आप पर असर यह चुनाव अजमेर की शहरी व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं और स्थानीय नेतृत्व का भविष्य तय करेगा। • अजमेर और राजस्थान में: अगले पांच वर्षों के लिए शहर की सफाई व्यवस्था, सड़कों का रखरखाव, पानी-बिजली के मुद्दे और बुनियादी विकास परियोजनाएं इस चुनाव के नतीजों पर निर्भर करेंगी। • देशभर के लिए संकेत: राजस्थान के इस निकाय चुनाव के परिणाम राज्य की बड़ी राजनीतिक दिशा और शहरी क्षेत्रों में राजनीतिक दलों की पकड़ का संकेत देंगे। • स्थानीय निवासियों के लिए: परिसीमन के कारण कई वार्डों की सीमाएं बदलने से स्थानीय नागरिकों के पार्षद प्रतिनिधि और प्रशासनिक केंद्र बदल गए हैं। • महिला प्रतिनिधित्व पर प्रभाव: महापौर का पद सामान्य महिला श्रेणी के लिए आरक्षित होने से नगर निगम बोर्ड में महिला नेतृत्व का सीधा असर देखने को मिलेगा। सवाल-जवाब 1. अजमेर नगर निगम में कुल कितने वार्ड हैं? अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं, जिनमें चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। 2. इस बार अजमेर नगर निगम के महापौर का पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित है? इस बार अजमेर नगर निगम में महापौर का पद सामान्य महिला (General Female) श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया है। 3. पिछली बार अजमेर की महापौर कौन थीं और तब क्या आरक्षण था? पिछली बार अजमेर नगर निगम की महापौर ब्रजलता हाड़ा थीं और उस समय महापौर का पद अनुसूचित जाति महिला (Female SC) के लिए आरक्षित था। 4. अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में जातिगत आरक्षण का क्या गणित है? 80 वार्डों में से 20 सीटें अनुसूचित जाति (SC), 16 सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), और पुष्कर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 2 वार्ड अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। सभी वार्डों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण भी लागू है। 5. अजमेर उत्तर और अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में कितने-कितने वार्ड आते हैं? अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 37 वार्ड आते हैं, जबकि अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 41 वार्ड आते हैं। 6. अजमेर उत्तर और अजमेर दक्षिण में बीजेपी के किन बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है? अजमेर उत्तर से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और अजमेर दक्षिण से बीजेपी विधायक अनीता भदेल की प्रतिष्ठा अपने-अपने क्षेत्रों में दांव पर लगी है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunava-ajmer-nagara-nigama-men-bjp-ka-kila-dhane-ko-congress-ne-jhonki-takata-samanya-mahila-mahapaura-sita-para-26619 TrendKia — Har trend, sabse pehle.