# राजस्थान निकाय चुनाव का दूसरा चरण संपन्न, 147 निकायों में दर्ज हुआ 70 प्रतिशत से अधिक मतदान

> राजस्थान में 147 नगर निकायों के दूसरे चरण में शाम 6 बजे तक 70.01 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। धोरीमन्ना में सर्वाधिक 91.59 प्रतिशत और कोटा में सबसे कम 57.02 प्रतिशत वोट पड़े।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunava-ka-dusara-charana-snpanna-147-nikayon-men-darja-hua-70-pratishata-se-adhika-matadana-31243 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान निकाय चुनाव, राजस्थान राजनीति, मतदान प्रतिशत, धोरीमन्ना, कोटा नगर निगम, राजस्थान निर्वाचन आयोग

राजस्थान में स्थानीय सरकार चुनने की प्रक्रिया के तहत 147 नगरीय निकायों में दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो गया है। शाम 6 बजे वोटिंग प्रक्रिया समाप्त होने तक प्रदेश भर में औसतन 70.01 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। शहरी लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और स्थानीय प्रतिनिधि चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं।

## मतदाताओं की भागीदारी और चुनाव आयोग के आंकड़े
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस दूसरे चरण में कुल 87 लाख 63 हजार से अधिक पंजीकृत मतदाता वोट डालने के लिए पात्र थे। इनमें से 61 लाख 35 हजार से अधिक लोगों ने अपने नागरिक अधिकार का उपयोग करते हुए अपने वोट दर्ज कराए। शाम 6 बजे तक के इन आंकड़ों से साफ है कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के मतदाताओं में नगर निकायों के चुनाव को लेकर गहरा उत्साह देखा गया। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये प्राथमिक आंकड़े हैं तथा अंतिम समीक्षा के बाद इनमें मामूली संशोधन देखने को मिल सकता है।

## शीर्ष और न्यूनतम वोटिंग वाले क्षेत्र
दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान मतदान प्रतिशत के मामले में बाड़मेर जिले का धोरीमन्ना क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां 91.59 प्रतिशत मतदाताओं ने पोलिंग बूथ पर पहुंचकर अपने वोट डाले। इसके विपरीत कोटा नगर निगम क्षेत्र में सबसे कम मतदान देखने को मिला, जहां कुल 57.02 प्रतिशत वोटरों ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। जिला स्तरीय विश्लेषण में खैरथल-तिजारा 88.32 प्रतिशत वोटिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फलोदी में 86.80 प्रतिशत और कोटपूतली-बहरोड़ में 86.04 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा अलवर जिले में 85.22 प्रतिशत तथा बाड़मेर में 85.17 प्रतिशत वोट डाले गए।

## अन्य जिलों में मतदान का ब्योरा
राज्य के मध्य और पूर्वी जिलों में भी भारी उत्साह देखा गया। भीलवाड़ा में 83.88 प्रतिशत, भरतपुर में 83.65 प्रतिशत, नागौर में 83.26 प्रतिशत, झालावाड़ में 83.19 प्रतिशत और बारां में 83.07 प्रतिशत वोट पड़े। वहीं डीग में 83.04 प्रतिशत, दौसा में 82.88 प्रतिशत, धौलपुर में 82.06 प्रतिशत, डीडवाना-कुचामन में 81.90 प्रतिशत और बूंदी में 81.48 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। उत्तरी सीमावर्ती जिले हनुमानगढ़ में 80.01 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि चित्तौड़गढ़ में 79.80 प्रतिशत वोट पड़े।

## मध्यम और निचले मतदान वाले जिले
प्रदेश के कुछ प्रमुख शहरों और जिलों में मतदान का प्रतिशत 60 से 77 प्रतिशत के बीच दर्ज हुआ। ब्यावर में 77.69 प्रतिशत, बालोतरा में 75.18 प्रतिशत, श्रीगंगानगर में 75.10 प्रतिशत, बीकानेर में 75.09 प्रतिशत और चूरू में 74.74 प्रतिशत मतदान हुआ। इसी क्रम में डूंगरपुर में 71.98 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 71.36 प्रतिशत, जोधपुर में 71.10 प्रतिशत, पाली में 70.70 प्रतिशत तथा उदयपुर में 70.07 प्रतिशत वोट पड़े। अजमेर में 69.77 प्रतिशत, सीकर में 67.81 प्रतिशत, सिरोही में 66.90 प्रतिशत और जयपुर जिले में 62.88 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने वोट डाले। कुल मिलाकर अलवर जिला सर्वाधिक मतदान वाले प्रमुख जिलों में शामिल रहा, जबकि कोटा नगर निगम का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहा।

## इसका आप पर असर
**राजस्थान के नागरिकों पर प्रभाव:** स्थानीय निकाय चुनावों में भारी मतदान का सीधा असर अगले कार्यकाल के दौरान शहरों के विकास, नागरिक सुविधाओं और बजट आवंटन पर पड़ेगा।

- **राजस्थान में:** 147 निकायों के निवासी अब अपनी-अपनी नई नगर सरकारों द्वारा बेहतर सड़कों, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और पानी आपूर्ति से जुड़े फैसलों के अमल की उम्मीद कर सकते हैं।
- **स्थानीय स्तर पर:** जिन क्षेत्रों में 80 से 90 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, वहां नगर परिषदों और नगर पालिकाओं पर नागरिक समस्याओं को तेजी से सुलझाने का नैतिक दबाव रहेगा।
- **कोटा और कम मतदान वाले क्षेत्रों में:** कम वोटिंग प्रतिशत वाले इलाकों में नागरिकों को अपनी स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम और जन प्रतिनिधियों के साथ अधिक सक्रियता से जुड़ना होगा।
- **प्रशासनिक असर:** नए चुने गए बोर्ड और वार्ड पार्षदों का कार्यकाल शुरू होते ही स्थानीय विकास योजनाओं के बजट आवंटन और काम में तेजी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
राजस्थान में नगर सरकारों का कार्यकाल पूरा होने तथा स्थानीय निकायों में नए बोर्ड गठन के नियम के तहत दूसरे चरण का मतदान आयोजित किया गया।

- **नगरीय निकाय चुनाव चक्र:** 147 शहरों और कस्बों में प्रशासनिक कामकाज और विकास परियोजनाओं को लोकतांत्रिक जनप्रतिनिधियों के हाथों में सौंपने के लिए निर्वाचन आयोग ने यह चरण संपन्न कराया।
- **धोरीमन्ना में रिकॉर्ड मतदान का कारण:** छोटे कस्बों और नवगठित निकायों में स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत संपर्क के कारण मतदाता अधिक सक्रियता से बूथों तक पहुंचते हैं।
- **कोटा में कम वोटिंग की वजह:** बड़े महानगरीय क्षेत्रों में अमूमन शहरी उदासीनता और व्यस्तताओं के चलते मतदान का प्रतिशत तुलनात्मक रूप से कम रह जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान में निकाय चुनाव के दूसरे चरण में कुल कितना मतदान हुआ?
प्रदेश की 147 निकायों में कुल 70.01 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

### 2. दूसरे चरण में सबसे ज्यादा और सबसे कम मतदान कहां दर्ज हुआ?
धोरीमन्ना में सबसे ज्यादा 91.59 प्रतिशत और कोटा नगर निगम में सबसे कम 57.02 प्रतिशत वोट पड़े।

### 3. दूसरे चरण के दौरान कुल कितने मतदाताओं ने अपने वोट डाले?
कुल 87 लाख 63 हजार से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 61 लाख 35 हजार से ज्यादा लोगों ने मतदान किया।

### 4. सर्वाधिक मतदान वाले प्रमुख जिले कौन से रहे?
खैरथल-तिजारा (88.32%), फलोदी (86.80%), कोटपूतली-बहरोड़ (86.04%), अलवर (85.22%) और बाड़मेर (85.17%) शीर्ष जिलों में शामिल रहे।

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