राजस्थान निकाय चुनाव का घमासान, मनाने के बावजूद मैदान में डटे हैं बीजेपी और कांग्रेस के बागी राजस्थान के 309 निकायों के चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों दलों के सैकड़ों बागी मैदान डटे हैं, जिससे कई जगहों पर मुकाबला त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय हो गया है। राजस्थान में निकाय चुनाव के लिए बिछी सियासी बिसात की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपनी पार्टियों के भीतर उपजी बगावत पर एक हद तक काबू पा लिया है, लेकिन दोनों ही दलों के लिए राह अभी आसान नहीं बची है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दोनों ही पार्टियों के सैकड़ों बागी नेता अभी भी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि पार्टियों ने इन बागी चेहरों को मनाने के लिए कोई कोर-कसर छोड़ी हो। राजनीतिक दलों के नुमाइंदों ने रूठों को मनाने के हर संभव हथकंडे अपनाए, लेकिन बागियों ने साफ तौर पर पार्टी पदाधिकारियों को आँखें दिखा दीं। जमीनी हालात और बिगड़ते माहौल को भांपते हुए कई स्थानीय पदाधिकारी उस वक्त चुप हो गए, हालांकि उन्होंने अभी तक पूरी तरह से हार नहीं मानी है। चुनावी समीकरण और डैमेज कंट्रोल की रणनीति पार्टी उच्च स्तर पर यह लगातार प्रयास किया जा रहा है कि जो बागी उम्मीदवार अभी भी मैदान में डटे हुए हैं, वे ज्यादा सक्रिय भूमिका न निभा सकें ताकि चुनावी नुकसान यानी डैमेज को कम से कम किया जा सके। राजस्थान के भरतपुर नगर निगम और कोटपुतली नगर परिषद में इस बार का चुनावी मुकाबला सबसे ज्यादा कठिन और दिलचस्प बताया जा रहा है। इन दोनों ही इलाकों में लगभग हर एक वार्ड में पाँच-पाँच से ज्यादा प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, सूबे की राजधानी जयपुर में भी भाजपा और कांग्रेस के भीतर बागी तेवर काफी बुलंद बने हुए हैं। इस बगावत के कारण कई सीटों पर मुकाबला सीधे की बजाय त्रिकोणीय या फिर चतुष्कोणीय होने के पूरे आसार बन गए हैं। इस स्थिति से निपटने और बागी तेवरों पर लगाम लगाने के लिए अब दोनों ही दल इन बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना चुके हैं। कुल उम्मीदवारों और वार्डों का पूरा गणित राज्य के कुल 309 स्थानीय निकायों के लिए हो रहे इन चुनावों के दौरान इस बार रिकॉर्ड संख्या में नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। चुनाव आयोग द्वारा कागजों की स्क्रूटनी यानी छंटनी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विभिन्न प्रकार की कमियों के चलते 17 हजार से अधिक नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए थे। अब पूरे सूबे के भीतर कुल 10 नगर निगमों, 51 नगर परिषदों और 248 नगर पालिकाओं के अंतर्गत आने वाले 10245 वार्डों के लिए कुल 38891 प्रत्याशी मैदान में आमने-सामने हैं। इन सभी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए आगामी 9 सितंबर और 11 सितंबर को दो चरणों के तहत मतदान संपन्न कराया जाएगा। इसके ठीक बाद आगामी 14 सितंबर को इन तमाम चुनावों के आधिकारिक परिणाम घोषित किए जाएंगे। आधिकारिक टिकटों का आवंटन नहीं होने से बुरी तरह नाराज होकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के सैकड़ों दावेदारों ने अपने नामांकन दाखिल कर दिए थे। पूरे प्रदेश भर में जितने भी कुल नामांकन भरे गए थे, उनमें से कुल 10112 दावेदारों ने आखिरी तारीख तक अपने नाम वापस ले लिए थे। अब भी मैदान में डटे हैं दोनों दलों के बागी इन तमाम उम्मीदवारों में भाजपा के करीब 1000 और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लगभग 432 बागी नेता अभी भी शामिल हैं। इन सभी को शांत करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद यानी हर संभव कूटनीतिक नीति का खुलकर इस्तेमाल किया गया। नाम वापसी के अंतिम दिन कई जगहों पर आपस में छीना-झपटी और मारपीट की खबरें सामने आईं तथा इससे जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। हालांकि, इन तमाम प्रशासनिक और अंदरूनी कोशिशों के बाद भी पार्टियों के सामने खड़ी चुनौतियाँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जानकारों का कहना है कि तमाम प्रयासों के बावजूद आज भी भाजपा के 400 से अधिक और कांग्रेस के 600 से ज्यादा बागी नेता चुनावी मैदान में डटे हुए हैं। इसके साथ ही, एक राहत भरी बात यह भी सामने आई है कि पूरे प्रदेश भर में भाजपा और कांग्रेस पार्टी समेत कुल 77 पार्षद निर्विरोध रूप से चुन लिए गए हैं। खाली छोड़े गए वार्ड और सबसे कम प्रत्याशियों वाले निकाय राज्य के 309 निकायों के कुल 10245 वार्डों में से भाजपा और कांग्रेस दोनों ने मिलकर करीब ढाई हजार वार्ड ऐसे हैं जिन्हें पूरी तरह से खाली छोड़ दिया है। इनमें से कई जगह ऐसी हैं जहाँ भाजपा ने अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा तो वहीं कुछ स्थानों पर कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी खड़े करने से परहेज किया। इसके पीछे कई तरह की वजहें गिनाई जा रही हैं, जिनमें सबसे बड़ी वजह उन खास वार्डों का किसी एक पार्टी की तरफ पूरी तरह से एकतरफा होना माना जा रहा है। जिन-जिन वार्डों में भाजपा और कांग्रेस को अपनी जीत की दूर-दूर तक कोई संभावना नजर नहीं आई, वहाँ उन्होंने अपने उम्मीदवार उतारने से साफ किनारा कर लिया। इसके अलावा, कुछ जगहों पर पार्टी के घोषित प्रत्याशियों ने डैडलाइन पर अपने नामांकन वापस लेकर अपनी ही पार्टियों को करारा झटका दे दिया, तो कुछ वार्डों में सिंबल यानी चुनाव चिह्न काफी देरी से पहुँचे। बागियों की मान-मन्नौव्वल की तमाम कोशिशों के बावजूद अधिकांश वार्डों में अब भी कड़ा मुकाबला त्रिकोणीय ही बना हुआ है। यदि सबसे कम उम्मीदवारों वाले निकायों की बात करें तो बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगरपालिका में केवल 20 वार्डों के लिए महज 41 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि इसी जिले की गुढ़ामालानी नगरपालिका के 20 वार्डों में केवल 44 प्रत्याशी ही चुनावी रण में डटे हैं। इसका आप पर असर राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में बागियों और बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के मैदान में होने का सीधा असर चुनावी नतीजों और स्थानीय विकास कार्यों पर पड़ेगा। • भारत में: राजनीतिक दलों के भीतर हो रही इस बगावत से चुनावी मुकाबले त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय हो गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सत्ता समीकरण बदल सकते हैं। • राजस्थान में: भरतपुर, कोटपुतली और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में प्रत्येक वार्ड में कई उम्मीदवारों के डटे होने से कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा और मतदाताओं के सामने अधिक विकल्प होंगे। सवाल-जवाब 1. राजस्थान निकाय चुनावों में कुल कितने वार्डों के लिए चुनाव हो रहे हैं? राजस्थान के 309 निकायों के कुल 10245 वार्डों के लिए चुनाव हो रहे हैं। 2. चुनाव के लिए कुल कितने प्रत्याशी मैदान में हैं? स्क्रूटनी और नाम वापसी के बाद पूरे सूबे के वार्डों के लिए कुल 38891 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। 3. राजस्थान निकाय चुनावों के लिए मतदान कब-कब होगा? इन चुनावों के लिए दो चरणों में 9 सितंबर और 11 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। 4. मतदान के बाद चुनाव के परिणाम कब घोषित किए जाएंगे? सभी चरणों का मतदान संपन्न होने के बाद 14 सितंबर को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। 5. कितने बागी उम्मीदवार अभी भी चुनावी मैदान में डटे हुए हैं? विभिन्न प्रयासों के बावजूद भाजपा के 400 से ज्यादा और कांग्रेस के 600 से अधिक बागी उम्मीदवार मैदान में डटे हैं। 6. किन निकायों में सबसे कम प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं? बालोतरा जिले की धोरीमन्ना और गुढ़ामालानी नगरपालिकाओं में सबसे कम प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunava-ka-ghamasana-manane-ke-bavajuda-maidana-men-date-hain-bjp-aura-congress-ke-bagi-27639 TrendKia — Har trend, sabse pehle.