राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, कन्हैयालाल चौधरी का चला जादू तो भरतपुर-झालावाड़ में मिला बड़ा झटका राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम घोषित हो गए हैं, जिसमें कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के प्रभाव वाले क्षेत्रों और प्रमुख शहरों में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है, जबकि भरतपुर और झालावाड़ जैसे संवेदनशील इलाकों में उसे कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा है। राजस्थान के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है, क्योंकि राज्य के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम पूरी तरह साफ हो चुके हैं। इस व्यापक चुनावी प्रक्रिया में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल थीं, जिनके लिए दो चरणों में 9 सितंबर और 11 सितंबर 2026 को मतदान संपन्न हुआ था। कुल 10,167 वार्डों के लिए हुए इस मतदान में जनता ने कहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एकतरफा भारी समर्थन दिया है, तो कहीं विपक्षी कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने बड़े नेताओं के गढ़ में जाकर चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं। यह परिणाम आने वाले समय में राज्य की जमीनी राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। टोंक जिला और कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का जबरदस्त चुनावी प्रदर्शन टोंक जिले के मालपुरा-टोडारायसिंह विधानसभा क्षेत्र के चारों स्थानीय निकायों में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक शक्ति का लोहा मनवाया है। इस शानदार सफलता के पीछे कैबिनेट मंत्री और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की आक्रामक चुनावी प्लानिंग और कुशल सांगठनिक रणनीति को मुख्य वजह माना जा रहा है। उनके प्रभाव वाले सभी क्षेत्रों में बीजेपी ने शानदार जीत के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जिससे स्थानीय स्तर पर पार्टी की स्थिति और मजबूत हो गई है। टोंक जिले में सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत टोडारायसिंह में देखने को मिली। यहां की कुल 35 सीटों में से बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके मुकाबले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस महज 7 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। मालपुरा नगरपालिका में भी बीजेपी ने अपनी बढ़त बरकरार रखी। यहां कुल 40 वार्डों में से बीजेपी ने 22 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। मालपुरा में कांग्रेस की स्थिति इतनी खराब रही कि वह निर्दलीय उम्मीदवारों से भी पीछे रह गई। कांग्रेस को यहां केवल 6 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने 12 सीटों पर जीत हासिल की। इसके अतिरिक्त, डिग्गी क्षेत्र में भी बीजेपी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा, जहां 25 सीटों में से 14 पर पार्टी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को इस निकाय में 10 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि 1 सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई। लांबाहरिसिंह नगरपालिका में भी बीजेपी का दबदबा देखने को मिला, जहां कुल 20 वार्डों में से बीजेपी ने 11 सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस को 6 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 3 सीटें हासिल हुईं। इन आंकड़ों से साफ है कि मालपुरा, टोडारायसिंह, डिग्गी और लांबाहरिसिंह चारों ही निकायों में बीजेपी का बोर्ड बनना पूरी तरह तय हो चुका है। टोंक नगर परिषद में कांग्रेस विधायक सचिन पायलट की साख बरकरार हालांकि टोंक जिले की नगरपालिकाओं में बीजेपी ने भारी बढ़त हासिल की, लेकिन टोंक जिला मुख्यालय की एकमात्र और सबसे महत्वपूर्ण नगर परिषद टोंक में कांग्रेस विधायक सचिन पायलट का राजनीतिक प्रभाव कायम रहा। इस बड़ी नगर परिषद की कुल 59 सीटों में से कांग्रेस पार्टी ने शानदार चुनावी मुकाबला करते हुए 32 सीटों पर जीत दर्ज की और पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। इस जीत के बाद टोंक नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय हो गया है, जिसने जिले में कांग्रेस संगठन की साख को मजबूती से बचाए रखा है। प्रमुख नगर निगमों का हाल: उदयपुर, कोटा, बीकानेर और भीलवाड़ा राज्य के बड़े शहरी केंद्रों और महत्वपूर्ण नगर निगमों में जनता का मिला-जुला रुझान देखने को मिला है। उदयपुर नगर निगम में बीजेपी ने लगातार 7वीं बार शानदार जीत दर्ज कर अपना अभेद्य किला बरकरार रखा है। वहीं, औद्योगिक नगरी कोटा नगर निगम में भी बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की। कोटा के कुल 100 वार्डों में से लगभग 60 सीटों पर जीत दर्ज कर बीजेपी ने पूर्ण बहुमत पाया, जबकि कांग्रेस केवल 20 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। दूसरी ओर, बीकानेर नगर निगम में बड़ा उलटफेर हुआ। कांग्रेस ने शानदार रणनीति के साथ चुनावी मैदान मारते हुए 42 सीटें जीतीं और बीजेपी के पिछले 10 साल पुराने मजबूत बोर्ड को सत्ता से उखाड़ फेंका। भीलवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस को अपनी एक बड़ी रणनीतिक चूक का भारी नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी कई वार्डों में तय समय पर अपना नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं कर पाए, जिसकी वजह से कई वार्डों में बीजेपी के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए और भीलवाड़ा में बीजेपी का बोर्ड बनना बेहद आसान हो गया। दिग्गज नेताओं के गृह क्षेत्रों में बड़े उलटफेर इन स्थानीय निकाय चुनावों ने कई बड़े राजनीतिक चेहरों को उनके खुद के गृह क्षेत्रों में आत्मचिंतन करने पर मजबूर कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ जिले में कांग्रेस ने अप्रत्याशित रूप से बेहतरीन प्रदर्शन किया है। झालावाड़ नगर परिषद सहित खानपुर, भवानी मंडी और डग के नगरीय निकायों में कांग्रेस ने शानदार बढ़त बनाई है। हालांकि, झालरापाटन, मनोहर थाना और अकलेरा निकायों में बीजेपी सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत रखने में सफल रही है। इसके साथ ही, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भी बीजेपी के सारे चुनावी समीकरण ध्वस्त हो गए। पाली में कांग्रेस ने बेहद आक्रामक तरीके से बीजेपी को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार कामयाबी के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "यह परिणाम प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जनता का स्पष्ट जनादेश है।" भरतपुर और अजमेर में निर्दलीयों की बनी सरकार कुछ क्षेत्रों में जनता ने मुख्य राजनीतिक दलों से अपनी नाराजगी जताते हुए निर्दलीय उम्मीदवारों पर सबसे अधिक भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर नगर निगम में स्थानीय जनता खराब सड़कों की खस्ताहाल हालत और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की अनदेखी से काफी नाराज थी। इसका असर नतीजों पर भी साफ दिखा, जहां भरतपुर के 65 वार्डों में से 36 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। यहां बीजेपी सिर्फ 20 और कांग्रेस महज 7 सीटें ही जीत पाई, जिसके चलते अब भरतपुर में बोर्ड बनाने की पूरी चाबी निर्दलीय पार्षदों के पास आ गई है। इसी प्रकार अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में भी कांटे की टक्कर देखने को मिली। यहां कांग्रेस को 37 और बीजेपी को 32 सीटें हासिल हुईं, जबकि 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया। अब अजमेर में भी बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों की नजरें निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर टिकी हुई हैं। बारां और केकड़ी में नए राजनीतिक दलों का उदय इन नगरीय निकाय चुनावों में कुछ नए दलों की एंट्री ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। बारां जिले में आम आदमी पार्टी (AAP) ने अप्रत्याशित रूप से जीत दर्ज कर स्थानीय निकाय में प्रवेश किया है। वहीं, केकड़ी क्षेत्र में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए किंगमेकर की भूमिका हासिल कर ली है, जिससे स्थानीय स्तर पर नई सत्ता के गठन में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। आगामी पंचायत चुनावों से पहले खराब सड़कों और बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज करना बड़ी पार्टियों के लिए एक बड़ी सीख साबित हुआ है। इसका आप पर असर राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव परिणामों का सीधा असर स्थानीय विकास योजनाओं और नागरिक सुविधाओं पर पड़ेगा। • राजस्थान में: विभिन्न शहरों में नवनिर्वाचित बोर्ड जल्द ही कामकाज संभालेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर सड़क मरम्मत और साफ-सफाई के अटके हुए कामों में तेजी आने की उम्मीद है। • स्थानीय निवासियों के लिए: भरतपुर, अजमेर और केकड़ी जैसे क्षेत्रों में जहां त्रिशंकु परिणाम आए हैं, वहां निर्दलीय पार्षदों की सौदेबाजी के कारण बोर्ड गठन में देरी हो सकती है, जिससे प्रशासनिक फैसले प्रभावित होंगे। • राजनीतिक प्रभाव: टोंक, कोटा और उदयपुर में मजबूत बोर्ड बनने से स्थानीय विकास परियोजनाओं के बजट आवंटन और क्रियान्वयन में तेजी आएगी। ऐसा क्यों हुआ यह चुनावी नतीजे स्थानीय मुद्दों, सांगठनिक सक्रियता और राजनीतिक रणनीतियों के तालमेल का परिणाम हैं। • स्थानीय जन-आक्रोश: भरतपुर जैसे प्रमुख शहरों में खराब सड़कों और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की अनदेखी के कारण जनता ने बड़ी पार्टियों के खिलाफ जाकर भारी संख्या में निर्दलीयों को चुना। • रणनीतिक चूक: भीलवाड़ा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा नामांकन दाखिल करने में की गई गंभीर गलती ने बीजेपी के लिए जीत की राह बेहद आसान बना दी। • दिग्गजों की प्रतिष्ठा: टोंक में कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की आक्रामक चुनावी प्लानिंग और वार्ड-स्तर पर बेहतरीन प्रबंधन के कारण बीजेपी को टोडारायसिंह और मालपुरा में भारी बढ़त मिली। सवाल-जवाब 1. टोंक जिले की टोडारायसिंह नगरपालिका में बीजेपी को कितनी सीटें मिलीं? टोडारायसिंह में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 35 सीटों में से 28 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं। 2. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में क्या परिणाम रहे? भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में से निर्दलीयों ने 36 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 20 और कांग्रेस को केवल 7 सीटें मिलीं। 3. बीकानेर नगर निगम में किस पार्टी का बोर्ड बना? बीकानेर में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर बीजेपी के 10 साल पुराने बोर्ड को सत्ता से बेदखल कर दिया है। 4. राजस्थान निकाय चुनाव कितने चरणों में आयोजित किए गए थे? यह चुनाव दो चरणों में 9 सितंबर और 11 सितंबर 2026 को आयोजित किए गए थे, जिसमें कुल 309 नगरीय निकायों के परिणाम घोषित हुए हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunava-men-bjp-ka-shakti-pradarshana-kanhaiya-lal-choudhary-ka-chala-jadu-to-bharatpur-jhalawar-men-mila-bara-jh-32247 TrendKia — Har trend, sabse pehle.