राजस्थान निकाय चुनाव में जीत की गूंज दिल्ली तक: गणपति पूजन में पीएम मोदी ने राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से पूछा- जश्न है? जानें सभी जिलों का पूरा हाल राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा की जीत का असर दिल्ली तक देखा गया है, जहां पीएम मोदी ने राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से जश्न को लेकर चुटकी ली; वहीं राज्य के विभिन्न जिलों में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों को साधने और सभापति पदों के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक नया उत्साह भर दिया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कई महत्वपूर्ण नगर निकायों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी पकड़ मजबूत की है, जिसके बाद न केवल जयपुर बल्कि देश की राजधानी नई दिल्ली तक इस जीत की गूंज सुनाई दे रही है। एक तरफ जहां दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान सरकार के मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से मुलाकात के दौरान राज्य में चल रहे चुनावी जश्न का जिक्र किया, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के विभिन्न जिलों में स्थानीय स्तर पर नए बोर्ड के गठन और अध्यक्ष व सभापति पदों को हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच शह और मात का खेल शुरू हो गया है। इसके साथ ही, प्रशासनिक स्तर पर कुछ बड़े फैसले लिए गए हैं, तो कुछ जिलों से दुखद खबरें भी सामने आई हैं। राजसमंद और प्रदेश में पंचायती राज लॉटरी का स्थगन राजस्थान के राजसमंद जिले में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर होने वाली आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से टाल दिया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी अरुण कुमार हसीजा ने इस प्रशासनिक निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि वर्तमान समय में पूरी प्रशासनिक मशीनरी शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के संचालन और उसकी व्यवस्थाओं में पूरी तरह से व्यस्त है। इसी व्यस्तता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि नगर निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण लॉटरी की नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। जैसे ही नई तिथियां निर्धारित होंगी, आम जनता और संबंधित उम्मीदवारों को समय रहते इसकी सूचना दे दी जाएगी। पूर्व में निर्धारित समय सारिणी के अनुसार अब आरक्षण लॉटरी का आयोजन नहीं किया जाएगा। इस बीच, राज्य स्तर पर पंचायती राज विभाग ने भी एक बड़ा फैसला लेते हुए आगामी 17 और 18 सितंबर को प्रस्तावित आरक्षण लॉटरी की संपूर्ण प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। विभाग के इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण यह है कि राज्य के सभी जिला कलेक्टर और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी इस समय शहरी निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। अधिकारियों की इस व्यस्तता के कारण विभाग ने तय किया है कि नगरीय निकायों के प्रमुखों के चुनाव संपन्न होने के बाद ही आरक्षण लॉटरी के लिए नया कार्यक्रम जारी किया जाएगा। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को भी औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है, ताकि भविष्य की चुनावी तैयारियों में कोई असमंजस न रहे। जयपुर में अध्यक्षीय चुनाव और सिंबल वितरण की हलचल जयपुर में नगर निकाय चुनाव 2026 के अंतर्गत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत होते ही राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं। अध्यक्ष पद पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार को काबिज कराने के लिए दोनों ही दल बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस दिशा में अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है और पार्टी मुख्यालय से विभिन्न निकायों के लिए नियुक्त किए गए प्रभारियों को आधिकारिक चुनावी सिंबल सौंपे जा रहे हैं। भाजपा कार्यालय में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल देखा गया, जहां विभिन्न निकायों के प्रभारी, जिला अध्यक्ष और स्थानीय विधायक पार्टी नेतृत्व से चुनावी सिंबल प्राप्त करने के बाद अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो रहे हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसी भी निकाय में भीतरघात या बगावत की स्थिति पैदा न हो और पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार ही अध्यक्ष पद के लिए पूरे दमखम के साथ पर्चा दाखिल करे। नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही विभिन्न वार्डों से चुनकर आए पार्षदों और अध्यक्ष पद के दावेदारों की सक्रियता कई गुना बढ़ गई है। आने वाले एक-दो दिनों में नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद ही अध्यक्ष पद के लिए चुनावी मैदान की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो पाएगी। राजसमंद वार्ड 44: भाजपा के बागी हिम्मत कुमार मेहता की जीत राजसमंद नगर परिषद के चुनाव परिणामों में कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले हैं, जिनमें सबसे प्रमुख नाम हिम्मत कुमार मेहता का है। हिम्मत कुमार मेहता ने भारतीय जनता पार्टी से बगावत करते हुए राजसमंद के वार्ड संख्या 44 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस कड़े मुकाबले में उन्होंने जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया। चुनाव जीतने के बाद मेहता अपना आधिकारिक जीत का प्रमाण पत्र लेने के लिए रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। राजसमंद की रिटर्निंग अधिकारी ओम प्रभा ने नवनिर्वाचित पार्षद हिम्मत कुमार मेहता को जीत का प्रमाण पत्र सौंपा और उन्हें पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए हिम्मत कुमार मेहता ने अपनी भविष्य की राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे आगे किस राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे या किस पार्टी में शामिल होंगे, इसका फैसला वे अकेले नहीं लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्ड नंबर 44 की जनता ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसी जनता की राय और मशविरे के आधार पर ही वे अपने भविष्य का राजनीतिक कदम उठाएंगे। अजमेर नगर निगम में शह और मात का खेल: निर्दलीयों की बढ़ी पूछ अजमेर नगर निगम के चुनाव नतीजों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है क्योंकि यहां किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। अजमेर नगर निगम के कुल 80 वार्डों के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिनमें कांग्रेस को सबसे अधिक 37 सीटें मिली हैं, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा को 32 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। इस त्रिशंकु स्थिति में नगर निगम का बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक 41 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए अब निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने की कोशिशें बेहद तेज हो गई हैं। बहुमत के आंकड़े से दूर खड़ी भाजपा ने तुरंत हरकत में आते हुए निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में वार्ड नंबर 37 से नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षद मदन सिंह रावत को साधने के लिए भाजपा के कई दिग्गज नेता सक्रिय हो गए। राज्य सरकार के मंत्री सुरेश रावत, विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक वासुदेव देवनानी और शहर भाजपा अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मदन सिंह रावत से व्यक्तिगत मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने रावत को पार्टी का पारंपरिक दुपट्टा (पटका) पहनाकर उनका स्वागत किया और निगम बोर्ड के गठन में भाजपा का साथ देने की अपील की। उधर, कांग्रेस भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है और वह भी बहुमत जुटाने के लिए निर्दलीय पार्षदों के लगातार संपर्क में है। पाली में शोक की लहर: नवनिर्वाचित पार्षद अबरार खान का आकस्मिक निधन पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मारवाड़ जंक्शन नगरपालिका के वार्ड संख्या 7 से नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षद अबरार खान का अचानक निधन हो गया है। चुनाव में मिली शानदार जीत के तुरंत बाद आए इस दुखद समाचार से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि अबरार खान को अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें तुरंत मारवाड़ जंक्शन के स्थानीय सरकारी अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय डॉक्टरों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार देकर तुरंत पाली के जिला ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लेकर पाली पहुंचे, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अबरार खान ने अभी हाल ही में निर्दलीय के रूप में चुनाव जीता था और क्षेत्र के लोग उनकी जीत का जश्न मना रहे थे, लेकिन इस अनहोनी ने खुशियों को मातम में बदल दिया। मौत की खबर सुनते ही मारवाड़ जंक्शन के बाजारों में सन्नाटा पसर गया और अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। राजसमंद नगर परिषद में सभापति पद के लिए तेज हुई लॉबिंग राजसमंद नगर परिषद के चुनाव नतीजे पूरी तरह से स्पष्ट होने के बाद अब सबसे बड़ा मुकाबला सभापति की कुर्सी को लेकर शुरू हो चुका है। घोषित परिणामों के अनुसार, राजसमंद नगर परिषद के कुल 45 वार्डों में से भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए 27 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को केवल 14 सीटें ही मिल सकी हैं, जबकि 4 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना परचम लहराया है। भाजपा के पास बहुमत का स्पष्ट आंकड़ा होने के कारण यह तय है कि नगर परिषद में भाजपा का ही बोर्ड बनेगा, लेकिन अब पार्टी के भीतर सभापति पद के उम्मीदवारों के बीच आंतरिक खींचतान और लॉबिंग का दौर शुरू हो गया है। चूंकि राजसमंद नगर परिषद के सभापति का पद इस बार सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित है, इसलिए विभिन्न समाजों से जुड़े दावेदारों ने अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक गलियारों में जैन, पालीवाल और कुमावत समाजों से आने वाले पार्षदों के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है और वे पार्टी आलाकमान के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं। सभापति पद के लिए आज से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है, जिससे राजसमंद की स्थानीय राजनीति में हलचल और अधिक बढ़ गई है। पार्टी के शीर्ष नेता सभी धड़ों को संतुष्ट कर किसी एक नाम पर सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 305 निकायों में अध्यक्ष पद का रण और 4 निकायों में पुनर्मतदान राजस्थान के कुल 305 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आधिकारिक लोक सूचना जारी कर दी गई है। आयोग द्वारा घोषित किए गए पूर्व कार्यक्रम के अनुसार, इन निकायों में अध्यक्ष पद के लिए मतदान और परिणाम की प्रक्रिया 21 और 22 सितंबर को आयोजित की जाएगी। हालांकि, इस चुनावी प्रक्रिया के बीच जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के साथ-साथ सुकेत नगर पालिका में कुछ तकनीकी कारणों से पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया गया है। स्थगित किए गए अध्यक्षीय चुनाव वाले इन चार महत्वपूर्ण नगर निकायों के कुल 10 मतदान केंद्रों पर आगामी 17 सितंबर को सुबह से पुनर्मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन यानी 17 सितंबर को ही वोटों की गिनती की जाएगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इस पुनर्मतदान की मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इन चारों निकायों के लिए अध्यक्ष पद के चुनाव की विस्तृत लोक सूचना अलग से जारी की जाएगी। इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार ही इन चार बड़े निकायों में भी अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री का संदेश और दिल्ली दौरा रद्द होने के मायने अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि विविधता में एकता ही हमारे देश और हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय जनभागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट आस्था होना बेहद आवश्यक है। सीएम ने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे देश के संविधान की मूल भावना को सशक्त बनाने और नागरिक अधिकारों का सम्मान करने का संकल्प लें। इस बीच, राजनीतिक व्यस्तताओं के चलते मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पहले से प्रस्तावित दिल्ली दौरा अचानक रद्द कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, राजस्थान के विभिन्न नगर निकायों के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद राज्य में पैदा हुई नई राजनीतिक परिस्थितियों और बोर्ड गठन से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों के कारण मुख्यमंत्री ने जयपुर में ही रुकने का फैसला किया है। चूंकि कई निकायों में भाजपा को बहुमत मिला है और कई जगह त्रिशंकु बोर्ड बने हैं, इसलिए मुख्यमंत्री स्वयं अपनी देखरेख में संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर रणनीति तैयार कर रहे हैं। आगामी 21 सितंबर को होने वाले महापौर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्षों के चुनावों से पहले पार्टी के सभी विधायकों और नवनिर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखना उनकी पहली प्राथमिकता बनी हुई है। पीएम मोदी और कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के बीच दिल्ली में दिलचस्प बातचीत राजस्थान निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की इस बड़ी जीत की धमक राष्ट्रीय स्तर पर भी महसूस की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत पर राजस्थान की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी के इस बधाई संदेश के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनका विशेष आभार जताया और कहा कि यह ऐतिहासिक जीत आदरणीय प्रधानमंत्री के कुशल मार्गदर्शन, राज्य की जनता के आशीर्वाद और भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार राजस्थान में सुशासन और विकास के संकल्प को पूरा करने के लिए निरंतर काम करती रहेगी। इसी जीत की खुशी का एक बेहद दिलचस्प नजारा नई दिल्ली में भी देखने को मिला। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के सरकारी आवास पर आयोजित गणेश उत्सव के दौरान पारंपरिक गणपति पूजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की मुलाकात हुई। जैसे ही प्रधानमंत्री की नजर राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पर पड़ी, उन्होंने मुस्कुराते हुए राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि राजस्थान में तो लोग चुनाव जीतने का भरपूर जश्न मना रहे हैं। इस पर कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी बड़े ही आदर और गर्व के साथ उत्तर दिया कि जी, बिल्कुल हम चुनाव जीत गए हैं। इस अनौपचारिक बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ गया है। इसका आप पर असर राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के परिणामों और प्रशासनिक बदलावों का आम जनता पर सीधा और व्यावहारिक प्रभाव पड़ेगा। • राजस्थान में स्थानीय प्रशासन: राज्य के 305 शहरी निकायों में नए बोर्ड, सभापति और मेयर 21-22 सितंबर तक कार्यभार संभाल लेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों, साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं से जुड़े फैसलों में तेजी आएगी। • ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया: राजसमंद सहित राज्य के अन्य जिलों में पंचायती राज आरक्षण लॉटरी स्थगित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं और उम्मीदवारों को अंतिम वार्ड आरक्षण सूची के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। • राजनीतिक भागीदारी: अजमेर जैसी जगहों पर निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बढ़ने से स्थानीय स्तर पर जनहित के मुद्दों पर राजनीतिक दलों को अधिक लचीला रुख अपनाना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम नगर निकाय चुनावों की तात्कालिक प्राथमिकताओं और स्थानीय स्तर पर आए त्रिशंकु चुनावी परिणामों के कारण उत्पन्न हुआ है। • आरक्षण लॉटरी टलने का कारण: जिला कलेक्टर्स और अन्य प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह से शहरी निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनावों को संपन्न कराने में व्यस्त हैं, जिसके कारण पंचायती राज लॉटरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना पड़ा। • अजमेर में राजनीतिक रस्साकशी: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में से किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत (41 सीटें) न मिलने के कारण भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए 11 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करना अनिवार्य हो गया है। • राजसमंद में आंतरिक लॉबिंग: राजसमंद में भाजपा को स्पष्ट बहुमत (27 सीटें) तो मिल गया है, लेकिन सामान्य वर्ग की सीट होने के कारण विभिन्न सामाजिक समुदायों (जैन, पालीवाल, कुमावत) के आपसी समीकरणों की वजह से सभापति पद के लिए आंतरिक प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। सवाल-जवाब 1. राजसमंद में पंचायती राज आरक्षण लॉटरी को क्यों स्थगित किया गया है? प्रशासनिक अधिकारी वर्तमान में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के सफल संचालन में व्यस्त हैं, इसलिए इस प्रक्रिया को टाल दिया गया है और नई तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी। 2. अजमेर नगर निगम में किस पार्टी को बहुमत मिला है? अजमेर नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। 80 वार्डों में से कांग्रेस को 37, भाजपा को 32 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिली हैं। 3. राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव कब होंगे? पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इन निकायों में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव 21 और 22 सितंबर को आयोजित किए जाएंगे। 4. जयपुर, जोधपुर और कोटा में पुनर्मतदान कब और क्यों हो रहा है? इन निकायों के कुल 10 बूथों पर तकनीकी कारणों से स्थगित किए गए मतदान के बाद अब 17 सितंबर को पुनर्मतदान और उसी दिन मतगणना होगी। 5. पाली जिले से किस दुखद घटना की खबर आई है? पाली के मारवाड़ जंक्शन नगर पालिका के वार्ड 7 से नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षद अबरार खान का दिल का दौरा पड़ने के कारण आकस्मिक निधन हो गया है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunava-men-jita-ki-gunja-delhi-taka-ganapati-pujana-men-pm-modi-ne-rajyavardhan-singh-rathore-se-puchha-jashna-h-32486 TrendKia — Har trend, sabse pehle.