# राजस्थान निकाय चुनावों के नतीजों पर गरमाई सियासत, भाजपा ने माना जनता का आशीर्वाद तो कांग्रेस बोली आंकड़े कह रहे कुछ और

> राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे अपनी सरकार के कामकाज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर जनता की मुहर बताया है, जबकि कांग्रेस ने वोट प्रतिशत और कई शहरों के आंकड़ों का हवाला देकर दावा किया है कि मुकाबला बेहद कड़ा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunavon-ke-natijon-para-garamai-siyasata-bhajapa-ne-mana-janata-ka-ashirvada-to-kangresa-boli-ankare-kaha-rahe-k-32310 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान निकाय चुनाव, भजनलाल शर्मा, गोविंद सिंह डोटासरा, मदन राठौड़, भाजपा कांग्रेस मुकाबला, राजस्थान राजनीति, शहरी निकाय परिणाम

राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए शहरी निकाय चुनाव 2026 के नतीजे सामने आने के बाद राजधानी जयपुर स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में उत्सव का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ समेत कई प्रमुख पदाधिकारी और नवनिर्वाचित पार्षद पार्टी दफ्तर पहुंचे जहां कार्यकर्ताओं ने जोरदार आतिशबाजी कर अपनी जीत का जश्न मनाया। सत्तारूढ़ दल इन परिणामों को पिछले इकतीस महीनों के दौरान किए गए सरकारी विकास कार्यों और नीतियों पर आम जनता की मुहर के रूप में पेश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह जनादेश इस बात का प्रमाण है कि आम नागरिक राज्य सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

## कांग्रेस ने आंकड़ों से पेश की दूसरी तस्वीर
दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इन नतीजों को एकतरफा जीत मानने से साफ इन्कार कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चुनाव परिणामों के दूसरे पहलुओं को सामने रखा और भाजपा के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार अब तक सामने आए वार्डवार आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा का कुल वोट प्रतिशत पैंतीस दशमलव तीन पांच फीसदी रहा है, जबकि कांग्रेस पार्टी को पैंतीस दशमलव तीन पांच फीसदी वोट मिले हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों प्रमुख दलों के बीच मतों के इस अंतर से यह स्पष्ट है कि मुकाबला एकतरफा बिल्कुल नहीं था।

## दलित बहुल वार्डों और परिसीमन पर तीखे हमले
गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि दलित समाज के प्रति सत्तारूढ़ दल के रवैये का सीधा असर इन चुनाव परिणामों पर साफ तौर पर दिखाई दिया है। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है, जबकि इन क्षेत्रों में जनता ने भाजपा को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इसमें नियमों के खिलाफ जाकर फेरबदल किया गया, अन्यथा भाजपा को इतनी सीटें हासिल नहीं हो पातीं। उन्होंने अजमेर और पाली जिलों में कांग्रेस के प्रदर्शन को भाजपा की तुलना में बेहतर बताया। जोधपुर शहर को लेकर उन्होंने जानकारी दी कि वहां कांग्रेस विपक्षी दल से एक सीट आगे चल रही है और वहां कांग्रेस का वोट प्रतिशत बयालीस दशमलव सात फीसदी तथा भाजपा का उनतालीस दशमलव आठ फीसदी दर्ज किया गया है। इसके अलावा उन्होंने बीकानेर में कांग्रेस का बोर्ड स्पष्ट बहुमत के साथ बनने का पूरा दावा भी किया।

## मदन राठौड़ ने गिनाई सरकार की उपलब्धियां
विपक्षी आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने निकाय चुनाव के जनादेश का स्वागत किया और कहा कि नागरिकों ने पिछले इकतीस महीनों की प्रशासनिक सफलताओं पर अपनी स्वीकृति की मुहर लगाई है। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों में पार्टी को लगभग नब्बे प्रतिशत सफलता मिली है और विभिन्न निकायों में संगठन का बहुमत पहले से अधिक मजबूत हुआ है। मदन राठौड़ ने इस बात पर भी संतोष जताया कि राज्य में पहली बार एक राज्य, एक चुनाव की व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जिन स्थानों पर पार्टी को उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले, वहां संगठन स्तर पर गहराई से समीक्षा करने और पाली जैसे कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों पर विशेष मंथन करने की बात भी उन्होंने कही।

## बागियों को लेकर नरमी और केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी
निकाय चुनावों के दौरान पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाकर बगावत करने वाले नेताओं के भविष्य को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने बड़ा बयान दिया। मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यदि बागी नेता अपनी गलती का अहसास करते हुए पार्टी के सामने आते हैं, तो उनके निलंबन को वापस लेने पर सकारात्मक विचार किया जा सकता है। इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी, राष्ट्रीय मंत्री रोहन गुप्ता तथा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी भी मंच पर मौजूद रहे।

## प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा जताते मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को जनता का सीधा आशीर्वाद करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने गांवों के विकास, वार्ड स्तर के सुधारों और कल्याणकारी योजनाओं को समाज के आखिरी पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने का काम पूरी निष्ठा से किया है। उन्होंने बताया कि पार्टी का निकाय विकास संकल्प पत्र सीधे तौर पर जन कल्याण और गरीबों के उत्थान से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ऐसी राजनीतिक इकाई है जो हमेशा जनता के बीच रहकर काम करती है और उनके हर सुख-दुख में साझीदार बनती है। उन्होंने इन परिणामों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर जनता के अटूट विश्वास से भी जोड़ा और एक राज्य, एक चुनाव के निर्णय को जनस्वीकार्य बताया।

## उत्तराखंड की घटना और पंचायत चुनाव की हुंकार
गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित अपमान का प्रकरण भी उठाया और कहा कि ऐसी राजनीति को जनता कभी स्वीकार नहीं करती। उन्होंने इसके साथ ही यह भी दावा किया कि आने वाले पंचायती राज चुनावों में भाजपा का पूरी तरह सफाया होना तय है। इन शहरी परिणामों के तुरंत बाद दोनों ही प्रमुख दलों ने अब पंचायत चुनावों की तैयारियों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

## कुल वार्ड जीत और बोर्ड गठन की चुनौतियां
राजस्थान के कुल तीन सौ नौ शहरी निकायों के चुनाव परिणामों में वार्डवार जीत के मामले में भाजपा कांग्रेस से आगे रही है। सोमवार शाम तक उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने चार हजार एक इकहत्तर वार्ड और कांग्रेस ने तीन हजार पांच सौ सत्तानवे वार्ड अपने नाम किए हैं। हालांकि कई प्रमुख शहरी निकायों में जमीनी तस्वीर काफी अलग नजर आई है। बीकानेर में जहां कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा छू लिया, वहीं अजमेर और पाली में वह सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी। जोधपुर में दोनों प्रमुख दल बराबरी की स्थिति में रहे और भरतपुर में निर्दलीयों ने सबसे ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया।

## स्थानीय समीकरण तय करेंगे सत्ता की चाबी
इन तमाम नतीजों से यह साफ हो जाता है कि निकाय चुनाव का राजनीतिक निहितार्थ केवल एक दल की जीत या हार तक सीमित नहीं है। हालांकि भाजपा राज्यभर में सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, लेकिन कई बड़े शहरों में अपना बोर्ड स्थापित करने के लिए उसे स्थानीय समीकरणों को साधना होगा। दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए अजमेर, बीकानेर और पाली के परिणाम भले ही राहत देने वाले हों, लेकिन संपूर्ण राज्य के वार्ड आंकड़ों में वह अभी भी पीछे है। अब सभी की निगाहें उन निकायों पर टिकी हुई हैं जहां किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर निर्दलीय उम्मीदवार और छोटे दल बोर्ड गठन में सबसे निर्णायक भूमिका निभाने जा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव परिणामों का असर राज्य के स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक समीकरणों और आगामी पंचायती राज चुनावों पर सीधा पड़ेगा।

- **भारत में:** राज्य स्तर पर यह चुनाव परिणाम इस बात का संकेत देते हैं कि स्थानीय स्तर पर भी दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला बना हुआ है। आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों की रणनीति और जनसंपर्क अभियान इन नतीजों से काफी हद तक प्रभावित होंगे।
- **राजस्थान में:** राज्य के विभिन्न शहरी निकायों में बोर्ड गठन को लेकर अब जोड़-तोड़ और स्थानीय समीकरणों की राजनीति तेज होगी। जिन नगर निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां के नागरिकों को स्थानीय विकास कार्यों के लिए निर्दलीयों और छोटे दलों की भूमिका पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
निकाय चुनाव के नतीजों और दोनों दलों के दावों के पीछे मतदाताओं के स्थानीय मुद्दे, राजनीतिक दल की सांगठनिक ताकत और पिछले कुछ महीनों के प्रशासनिक कामकाज का असर रहा है।

- **सरकार के कामकाज पर आकलन:** सत्तारूढ़ दल ने इन चुनावों को पिछले इकतीस महीनों के दौरान किए गए विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का समर्थन माना है।
- **वोट प्रतिशत का अंतर:** कांग्रेस पार्टी ने वार्डवार पड़े वोटों के आंकड़ों का हवाला देकर यह साबित करने का प्रयास किया है कि दोनों दलों के बीच जनसमर्थन का अंतर बहुत कम है।
- **स्थानीय समीकरण और परिसीमन:** कई बड़े शहरों और आरक्षित वार्डों में स्थानीय मुद्दों, परिसीमन के स्वरूप और दलित मतदाताओं के रुझान ने चुनाव परिणामों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में कुल कितने शहरी निकायों के चुनाव हुए?
राजस्थान में कुल तीन सौ नौ शहरी निकायों के चुनाव संपन्न हुए हैं।

### 2. सोमवार शाम तक के आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने कितने वार्ड जीते?
सोमवार शाम तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा चार हजार एक इकहत्तर वार्ड जीत चुकी थी।

### 3. कांग्रेस पार्टी ने कितने वार्डों में जीत दर्ज की है?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने तीन हजार पांच सौ सत्तानवे वार्ड जीते हैं।

### 4. बीकानेर निकाय चुनाव में किस दल को बहुमत मिला है?
बीकानेर में कांग्रेस पार्टी बहुमत की स्थिति में पहुंच गई है।

### 5. जोधपुर निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की स्थिति क्या रही?
जोधपुर में दोनों दल बराबरी की स्थिति पर रहे हैं।

### 6. किस शहर में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे अधिक सीटें जीतीं?
भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं।

### 7. गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा का वोट प्रतिशत कितना बताया है?
गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार अब तक हुई वार्डों की गणना में भाजपा का वोट प्रतिशत पैंतीस दशमलव तीन पांच फीसदी रहा है।

### 8. मदन राठौड़ ने पार्टी की सफलता के पीछे किस अवधि के कामकाज का जिक्र किया है?
मदन राठौड़ ने पिछले इकतीस महीनों के दौरान राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर लगने का दावा किया है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._