राजस्थान निकाय चुनावों में बाड़ाबंदी के बावजूद कांग्रेस पस्त, अजमेर और पाली गंवाकर छह नगर निगमों पर भाजपा का परचम राजस्थान के सात नगर निगम चुनावों में कांग्रेस को भारी झटका लगा है, जहां संख्या बल में आगे होने के बावजूद पार्टी अजमेर और पाली में अपना मेयर नहीं बना पाई और भाजपा ने छह निगमों पर कब्जा कर लिया। राजस्थान के नगरीय निकाय प्रमुखों के हालिया चुनावी नतीजों ने राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर कर दिया है। कुल वोट शेयर में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच अंतर एक फीसदी से भी कम रहा, लेकिन रणनीतिक बिसात पर बाजी पूरी तरह भाजपा के हाथ लगी। पाली और अजमेर जैसे अहम नगर निगमों में कांग्रेस पार्षदों की संख्या के लिहाज से स्पष्ट बढ़त बनाए हुए थी, फिर भी वहां अपना बोर्ड गठित करने में नाकाम रही। निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में खींचने की होड़ में कांग्रेस पिछड़ गई, जबकि पार्षदों को एकजुट रखने के लिए की गई कड़ी बाड़ाबंदी भी मतदान के दिन धरी की धरी रह गई। पाली और अजमेर में कांग्रेस को लगा सबसे तगड़ा झटका इस पूरे चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा निराशाजनक परिणाम पाली और अजमेर नगर निगमों से सामने आए। पाली में 29 वार्ड जीतकर कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, मगर जब मेयर पद के लिए वोट पड़े तो पार्टी प्रत्याशी को केवल 3 मत हासिल हुए। निर्दलीय पार्षदों की बात तो दूर, पार्टी के अपने ही 26 पार्षदों ने क्रास वोटिंग कर बाजी पलट दी। ठीक इसी तरह अजमेर नगर निगम में भी कांग्रेस ने बोर्ड बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, लेकिन भाजपा ने उसकी मजबूत घेराबंदी में सेंधमारी कर जीत छीन ली। सात में से छह नगर निगमों में भाजपा का कब्जा राजस्थान के कुल 309 नगरीय निकायों में 10 नगर निगम शामिल हैं, जिनमें से सात नगर निगमों यानी भरतपुर, भीलवाड़ा, उदयपुर, अजमेर, पाली, बीकानेर और अलवर में निकाय प्रमुखों के चुनाव संपन्न हुए। इन सात में से छह निगमों पर भाजपा काबिज होने में सफल रही। भीलवाड़ा और भरतपुर में तो मतदान की नौबत ही नहीं आई क्योंकि वहां चुनाव से पहले ही भाजपा के मेयर प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए थे। उदयपुर नगर निगम में भाजपा के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत था, जिससे वहां पार्टी को बोर्ड बनाने में कोई रुकावट नहीं आई। कांग्रेस केवल बीकानेर नगर निगम में अपना बहुमत साबित कर सकी और वहीं अपना मेयर बना पाई। अलवर में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं था, लेकिन बढ़त होने के कारण उसने निर्दलीयों को साधकर बोर्ड बना लिया। अजमेर में 4 पार्षदों की दूरी और कर्नाटक तक बाड़ाबंदी अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं, जहां बहुमत हासिल करने के लिए 41 का जादुई आंकड़ा जरूरी था। नतीजों में कांग्रेस के 37 पार्षद चुनकर आए थे, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें गई थीं और 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। कांग्रेस जादुई आंकड़े से महज 4 सीट पीछे थी और उसे तीन निर्दलीयों का समर्थन मिलने का दावा भी किया जा रहा था। किसी भी तरह की टूट-फूट और विरोधी दल की सेंधमारी से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने पार्षदों को राजस्थान में रखने के बजाय सीधे कर्नाटक भेजने का फैसला किया। अजमेर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठौड़ की निगरानी में सभी पार्षदों को हवाई जहाज से बंगलूरू ले जाया गया। वहां एक सुरक्षित बाड़े में सभी को ठहराया गया, जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद पहुंचकर पार्षदों से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। मतदान से ठीक एक दिन पहले रविवार को विशेष विमान से सभी पार्षदों को जयपुर वापस लाया गया। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल भी उनके साथ मौजूद रहे। जयपुर पहुंचने पर पार्षदों को अशोक गहलोत के आवास पर ले जाया गया। इस बीच पार्टी दो मुस्लिम निर्दलीय पार्षदों से भी संपर्क साधने में जुटी हुई थी ताकि जीत सुनिश्चित हो सके। वोटिंग के दिन बिखर गया गणित, अनामिका शर्मा की जीत सोमवार को मतदान के दिन सभी पार्षदों को कड़ी निगरानी के बीच एक बस में बैठाकर जयपुर से सीधे अजमेर लाया गया। अजमेर में मेयर पद के लिए कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल मैदान में थीं, जबकि भाजपा ने अनामिका शर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया था। मुकाबला पूरी तरह सीधा और कांटे का माना जा रहा था, लेकिन गुप्त मतदान के दौरान खेल पलट गया। भाजपा के पास अपने 32 पार्षद थे, जबकि पार्टी से बगावत करके जीते 6 निर्दलीय पार्षद पहले ही उसके साथ आ चुके थे। इसके बाद भाजपा ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए कांग्रेस खेमे के साथ दिख रहे बाकी निर्दलीयों को भी अपनी तरफ मिला लिया। इसका असर यह हुआ कि सभी 11 निर्दलीय पार्षदों के वोट भाजपा की झोली में चले गए। अंतिम परिणाम घोषित हुआ तो भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की किरण गढ़वाल 37 वोटों पर ही सिमट गईं। इस तरह लंबी बाड़ाबंदी, बंगलूरू की सैर और शीर्ष नेतृत्व की मुलाकातों के बाद भी कांग्रेस हाथ मलती रह गई और भाजपा ने अजमेर में अपना बोर्ड बना लिया। इसका आप पर असर राजस्थान के नगर निगम चुनावों में छह प्रमुख शहरों पर भाजपा के काबिज होने से स्थानीय प्रशासन और विकास योजनाओं की दिशा तय होगी। • राजस्थान में: राज्य के छह प्रमुख नगर निगमों में भाजपा का बोर्ड बनने से शहरी योजनाओं के क्रियान्वयन में नया प्रशासनिक तालमेल दिखेगा। आम नागरिकों को नगर निकायों में अपने स्थानीय कार्यों, स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं के लिए नई नीतियों का सामना करना पड़ेगा। • अजमेर और पाली में: दोनों निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस के हाथ से सत्ता निकल जाने से स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा। निर्वाचित निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने के बाद अब सत्तारूढ़ बोर्ड को अपने चुनावी वादों और नागरिक सुविधाओं पर तुरंत काम शुरू करना होगा। • राजनीतिक असर: पार्षदों की क्रास वोटिंग के चलते दलों के भीतर अनुशासन की नई समीक्षा शुरू हो सकती है। आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक दलों को अपनी आंतरिक एकजुटता और निर्दलीयों पर निर्भरता की रणनीति बदलनी होगी। • स्थानीय विकास योजनाएं: नवगठित नगर निगम बोर्डों द्वारा अब शहरों के बजट और अटकी हुई विकास परियोजनाओं को गति दी जाएगी। स्थानीय निवासियों को वार्ड स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए नए नेतृत्व से सीधे संपर्क साधना होगा। ऐसा क्यों हुआ राजस्थान नगर निगम चुनावों में कांग्रेस की बढ़त के बावजूद उसकी हार का मुख्य कारण निर्दलीय पार्षदों को साधने में नाकामी और आंतरिक क्रास वोटिंग रहा। • निर्दलीयों का झुकाव: अजमेर में कांग्रेस के पास 37 और भाजपा के पास 32 सीटें थीं, जिससे 11 निर्दलीय निर्णायक बन गए। भाजपा अपने 6 बागी निर्दलीयों को वापस लाने और बाकी निर्दलीयों को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल रही। • पाली में आंतरिक बगावत: पाली नगर निगम में 29 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस के 26 पार्षदों ने क्रास वोटिंग कर दी। पार्टी का संगठनात्मक नियंत्रण कमजोर रहने के कारण उसके अपने पार्षद भी पाला बदल गए। • असरहीन बाड़ाबंदी: अजमेर के पार्षदों को कर्नाटक के बंगलूरू ले जाने और वरिष्ठ नेताओं की बैठकों के बावजूद गुप्त मतदान के दौरान कांग्रेस अपने गठबंधन को एकजुट नहीं रख सकी। सवाल-जवाब 1. राजस्थान के सात नगर निगमों में से भाजपा ने कितने निगमों पर जीत दर्ज की? भाजपा ने सात में से छह नगर निगमों यानी भरतपुर, भीलवाड़ा, उदयपुर, अजमेर, पाली और अलवर में अपना मेयर बनाने में सफलता हासिल की। 2. अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए चुनावी मुकाबला किनके बीच था? अजमेर में कांग्रेस की प्रत्याशी किरण गढ़वाल और भाजपा की प्रत्याशी अनामिका शर्मा के बीच सीधा मुकाबला था, जिसमें अनामिका शर्मा को 43 और किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। 3. कांग्रेस अपने पार्षदों को बाड़ाबंदी के लिए कहां ले गई थी? कांग्रेस अपने पार्षदों को टूट-फूट से बचाने के लिए फ्लाइट के जरिए कर्नाटक के बंगलूरू ले गई थी, जहां पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनसे मुलाकात की थी। 4. पाली नगर निगम में कांग्रेस को कितने वोट मिले? पाली में 29 वार्ड जीतने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को मेयर चुनाव में केवल 3 वोट मिले, क्योंकि पार्टी के 26 पार्षदों ने क्रास वोटिंग कर दी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikaya-chunavon-men-barabndi-ke-bavajuda-congress-pasta-ajmer-aura-pali-gnvakara-chhaha-nagara-nigamon-para-bjp-ka-parac-36430 TrendKia — Har trend, sabse pehle.