{
  "type": "article",
  "title": "राजस्थान सरकारी स्कूल अब चौथे नंबर पर, मदन दिलावर बोले, विद्यार्थी कमजोर रहे तो शिक्षक का इन्क्रीमेंट रुकेगा",
  "summary": "राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि 80 में से 40 से कम अंक लाने वाले विद्यार्थी के शिक्षक का इन्क्रीमेंट रुक सकता है और तबादला भी हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन साल में राजस्थान की शिक्षा रैंकिंग 14वें से चौथे स्थान पर पहुंच गई है।",
  "content": "राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी कक्षा का विद्यार्थी 80 में से 40 अंक तक नहीं पहुंच पाता, तो उस कक्षा के शिक्षक को जवाब देना होगा। ऐसे शिक्षक की सालाना सैलरी बढ़ोतरी यानी इन्क्रीमेंट रोकी जा सकती है। इसके अलावा उसे किसी दूरदराज क्षेत्र में तबादले का सामना भी करना पड़ सकता है। हालांकि दिलावर ने यह भी कहा कि सरकार का मकसद शिक्षकों को दबाव में रखना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का वास्तविक स्तर सुधारना है।\n\nकेवल पास-फेल नहीं, असली सीख की होगी परख\nदिलावर ने कहा कि बरसों से परीक्षा परिणाम का प्रतिशत ही सफलता का पैमाना मानी जाती रही है, जबकि पढ़ाई की असली गुणवत्ता पर किसी का ध्यान नहीं गया। उन्होंने एक खास उदाहरण दिया। 80 में से महज 13 अंक पाने वाले विद्यार्थी को भी पास बता दिया जाता है और कुछ शिक्षक 100 प्रतिशत रिजल्ट का दावा ठोककर गर्व से इसे अपनी उपलब्धि बताते हैं। लेकिन 13 अंक लाने वाला बच्चा सीखने के मामले में बेहद कमजोर होता है। मंत्री ने कहा कि अब केवल आंकड़ों की जगह विद्यार्थियों के वास्तविक प्रदर्शन और उनके ज्ञान के स्तर पर ध्यान देना जरूरी हो गया है।\n\nशिक्षकों की नाराजगी पर दिलावर का खुलासा\nमदन दिलावर ने माना कि उनके कई फैसलों से सरकारी शिक्षक नाखुश हैं। उन्होंने कहा, \"शिक्षक सोचते हैं कि मैं हर दिन कोई नया नियम लेकर आ जाता हूं। कभी स्कूल में मोबाइल पर रोक लगाई, कभी विद्यार्थियों के न्यूनतम अंक तय किए और कभी शराब या गुटखा खाकर स्कूल आने वालों की सूची बनवाने के निर्देश दिए।\" उन्होंने साफ कहा कि ये सभी कदम शिक्षा तंत्र को सुधारने की मंशा से उठाए गए हैं और आगे भी जब जरूरत पड़ेगी, विद्यार्थियों के भले के लिए जरूरी निर्णय लिए जाते रहेंगे।\n\nतीन साल में 14वें से चौथे पायदान पर पहुंचा राजस्थान\nदिलावर ने बताया कि पिछले तीन साल में राजस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। राज्य की शिक्षा रैंकिंग जो कभी देश में 14वें नंबर पर थी, वह अब सुधरकर चौथे स्थान पर आ गई है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सरकार की शिक्षा सुधार नीतियों और शिक्षकों की लगन की वजह से आया है।\n\nमेरिट सूची में सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को दी टक्कर\nमंत्री दिलावर ने दावा किया कि पहली बार राजस्थान के सरकारी स्कूलों के बच्चे मेरिट सूची में जगह बनाने में कामयाब हुए हैं। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये फीस वसूलने वाले कई नामी निजी स्कूल भी अब सरकारी स्कूलों से पीछे रह गए हैं। उनका कहना था कि वह दौर समाप्त हो गया जब माना जाता था कि निजी स्कूल ही बढ़िया पढ़ाई का एकमात्र जरिया हैं। आज सरकारी स्कूल भी पूरी तरह सक्षम हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों को अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा भी मिले। दिलावर ने कहा कि वह इस सुधार की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: शिक्षकों की प्रदर्शन-आधारित जवाबदेही का यह मॉडल दूसरे राज्यों को भी सरकारी स्कूलों में सुधार लाने की दिशा में प्रेरित कर सकता है।\n• राजस्थान में: सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि शिक्षकों की जवाबदेही तय होने से बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मदन दिलावर ने शिक्षकों को क्या चेतावनी दी?\nउन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी 80 में से 40 से कम अंक लाता है तो संबंधित शिक्षक से जवाब मांगा जा सकता है, उसका इन्क्रीमेंट रोका जा सकता है और दूरदराज क्षेत्र में तबादला भी हो सकता है।\n\n2. यह बयान कहां दिया गया?\nयह बयान टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया।\n\n3. 100 प्रतिशत रिजल्ट के दावों पर मंत्री ने क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि 80 में से महज 13 अंक पाने वाले विद्यार्थी को भी पास दिखाकर कुछ शिक्षक 100 प्रतिशत रिजल्ट का दावा करते हैं, जबकि ऐसा विद्यार्थी वास्तव में बेहद कमजोर होता है।\n\n4. राजस्थान की शिक्षा रैंकिंग में क्या बदलाव आया?\nपिछले तीन साल में राजस्थान की शिक्षा रैंकिंग देश में 14वें स्थान से चौथे स्थान पर आ गई है।\n\n5. शिक्षक मदन दिलावर के किन फैसलों से नाखुश हैं?\nस्कूल में मोबाइल बैन, विद्यार्थियों के न्यूनतम अंक तय करना और शराब या गुटखा लेकर आने वाले शिक्षकों की सूची बनाने के निर्देश पर शिक्षकों में नाराजगी है।\n\n6. क्या अब सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से आगे हैं?\nशिक्षा मंत्री का दावा है कि पहली बार राजस्थान के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने मेरिट सूची में जगह बनाई है और लाखों रुपये फीस लेने वाले कई निजी स्कूल अब पीछे हैं।\n\n7. सरकार का शिक्षा क्षेत्र में मुख्य लक्ष्य क्या है?\nसरकार का लक्ष्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा भी देना है, न कि केवल रिजल्ट का प्रतिशत बढ़ाना।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-sarakari-skula-aba-chauthe-nnbara-para-madan-dilawar-bole-vidyarthi-kamajora-rahe-to-shikshaka-ka-inkrimenta-rukega-3560",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-06-28",
  "tags": [
    "राजस्थान शिक्षा",
    "मदन दिलावर",
    "सरकारी स्कूल",
    "शिक्षक जवाबदेही",
    "इन्क्रीमेंट",
    "शिक्षा सुधार",
    "टोंक",
    "शिक्षा रैंकिंग"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}