राजस्थान उपनिरीक्षक भर्ती 2021 धांधली में दो नए संदिग्ध पकड़े गए, लाखों में हुई थी प्रश्नपत्र की सौदेबाजी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा 2021 पेपर लीक मामले में दो और अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए लाखों रुपये चुकाए थे। राजस्थान में वर्ष 2021 की पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा में हुई धांधली की पड़ताल कर रहे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए दो और आरोपियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए व्यक्तियों के नाम नरेन्द्र प्रताप सिंह जाट और अनिल विश्नोई बताए गए हैं। जांच एजेंसी की छानबीन में यह तथ्य सामने आया है कि इन दोनों ने इम्तिहान से ठीक पहले नकल गिरोह की मदद से लीक प्रश्नपत्र हासिल कर उसकी तैयारी की थी और उसी के सहारे परीक्षा केंद्र में पर्चा हल किया था। इस पूरे प्रकरण में एजेंसी लगातार कड़ियां जोड़ रही है और हाल ही में जब इस भर्ती की दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी, तब भी निगरानी तंत्र की मदद से तीन संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया था। सात लाख रुपये देकर हासिल किया था हल पर्चा जांच विवरण के अनुसार, आरोपी नरेन्द्र प्रताप सिंह जाट ने अपने ही गांव के रहने वाले गिरोह के सरगना विनोद रेवाड़ के साथ सात लाख रुपये का सौदा किया था। इस रकम के बदले उसे परीक्षा से पूर्व ही लीक प्रश्नपत्र मुहैया कराया गया था, जिसका अध्ययन करके वह परीक्षा में शामिल हुआ। जब इस परीक्षा के परिणाम आए, तो नरेन्द्र को हिंदी के प्रश्नपत्र में 200 में से 149.09 अंक प्राप्त हुए थे, जबकि सामान्य ज्ञान के भाग में उसने 124.71 अंक अर्जित किए थे। हालांकि, इतने अंक हासिल करने के बावजूद मेरिट सूची में उसका स्थान नीचे रह गया, जिसके चलते अंतिम चयन सूची में उसका नाम नहीं आ सका। मामले से जुड़े मुख्य षड्यंत्रकारी विनोद रेवाड़ को जांच एजेंसी अगस्त 2025 में ही अपनी गिरफ्त में ले चुकी है। कॉन्स्टेबल के माध्यम से बीस लाख रुपये में हुआ था सौदा मामले में पकड़े गए दूसरे आरोपी अनिल विश्नोई को लेकर सामने आया है कि उसने कॉन्स्टेबल शैतानाराम की मध्यस्थता से बीस लाख रुपये में पेपर हासिल किया था। यह प्रश्नपत्र गिरोह के सरगना भूपेन्द्र बिश्नोई के स्तर से पहुंचाया गया था। गैरकानूनी तरीके से मिले इस पर्चे को पढ़ने के बाद अनिल इम्तिहान में बैठा और उसने काफी ऊंचे अंक बटोरे। जारी अंकों के ब्योरे के मुताबिक, अनिल ने हिंदी विषय में 154.69 अंक और सामान्य ज्ञान के पर्चे में 157.38 अंक प्राप्त किए थे। पड़ताल से साफ हुआ है कि दलालों और बिचौलियों का यह संगठित तंत्र इम्तिहान की तारीख से पहले ही अभ्यर्थियों तक गोपनीय पर्चे पहुंचाने का काम कर रहा था। पूरे गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी जांच एजेंसी एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने इन दोनों नई गिरफ्तारियों की पुष्टि की है। इस पूरे सिंडिकेट में शामिल कई प्रमुख चेहरों को पहले ही कानून के शिकंजे में लिया जा चुका है। रिकॉर्ड के अनुसार, मामले से जुड़े भूपेन्द्र सारण को मार्च 2024 में पकड़ा गया था, जबकि बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले कॉन्स्टेबल शैतानाराम को अगस्त 2024 में हिरासत में लिया गया था। वर्ष 2021 की मूल भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र बाहर आने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद उस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था और नए सिरे से पुनर्परीक्षा कराई गई थी। जांच अधिकारियों का मुख्य ध्यान अब उन सभी अभ्यर्थियों और सहयोगियों की पहचान करने पर केंद्रित है, जिनके हाथों तक यह लीक पर्चा पहुंचा था। जून 2026 तक की आधिकारिक जानकारी के आधार पर इस व्यापक धांधली के सिलसिले में कुल 147 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इसका आप पर असर इस कार्रवाई से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और धांधली के खिलाफ चल रही कानूनी जांच का असर अभ्यर्थियों पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। • भारत में: सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सुरक्षा मानकों और नकल विरोधी कानूनों को अधिक कठोर बनाया जा रहा है। इसका सीधा असर यह होगा कि फर्जीवाड़े से नौकरी पाने की कोशिश करने वालों पर आजीवन प्रतिबंध और जेल की सजा का जोखिम बढ़ गया है। • राजस्थान में: एसआई भर्ती परीक्षा देने वाले ईमानदार उम्मीदवारों के लिए निष्पक्ष मूल्यांकन और पारदर्शी प्रक्रिया का रास्ता साफ हो रहा है। जिन अभ्यर्थियों ने पुनर्परीक्षा दी है, उनकी चयन प्रक्रिया में अब अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले संदिग्धों को बाहर किया जा रहा है। • परीक्षार्थियों के लिए: किसी भी दलाल या गिरोह के झांसे में आकर पेपर खरीदने वाले उम्मीदवारों का करियर हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। पकड़े जाने पर न सिर्फ चयन रद्द होता है, बल्कि आपराधिक मुकदमे और जेल की कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ती है। • प्रशासनिक व्यवस्था पर: पुलिस विभाग और भर्ती बोर्डों में आंतरिक मिलीभगत को समाप्त करने के लिए विभागीय निगरानी बढ़ाई गई है। सरकारी कर्मचारियों या पुलिसकर्मियों द्वारा नकल गिरोह की मदद करने पर तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की नीति लागू हो रही है। ऐसा क्यों हुआ यह कार्रवाई वर्ष 2021 की पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में अनुचित साधनों के संगठित उपयोग और प्रश्नपत्र लीक होने की पुख्ता पुष्टि के बाद अमल में लाई गई है। जांच एजेंसी उन सभी कड़ियों को तलाश रही है जिन्होंने पैसे देकर परीक्षा से पहले गोपनीय पर्चे हासिल किए थे। • संगठित सिंडिकेट का नेटवर्क: परीक्षा से पहले दलालों और सरगनाओं ने प्रश्नपत्र तक अवैध पहुंच बनाकर अभ्यर्थियों को मोटी रकम में बेचने का ताना-बाना बुना था। विनोद रेवाड़ और भूपेन्द्र बिश्नोई जैसे सरगनाओं ने बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचाए। • विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत: इस धांधली को संभव बनाने में विभागीय कर्मियों का हाथ रहा, जिसमें कॉन्स्टेबल शैतानाराम जैसे व्यक्तियों ने 20 लाख रुपये तक की रिश्वतखोरी में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। ऐसे आंतरिक संपर्कों की वजह से गिरोह आसानी से उम्मीदवारों से संपर्क साधने में सफल रहा। • परीक्षा रद्दीकरण और पुनर्परीक्षा: बड़े पैमाने पर पेपर लीक और अनियमितताओं के अकाट्य साक्ष्य मिलने के बाद मूल परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। पुनर्परीक्षा के दौरान और उसके बाद भी जांच एजेंसी उन लोगों की पड़ताल कर रही है जिन्होंने मूल परीक्षा में अनुचित लाभ लिया था। • लगातार जारी धरपकड़: भूपेन्द्र सारण, शैतानाराम और विनोद रेवाड़ की पूर्व में हुई गिरफ्तारियों के दौरान मिली जानकारियों और पूछताछ के आधार पर नए नामों का खुलासा हो रहा है। एजेंसी अब इस बात की छानबीन कर रही है कि यह पर्चा और किन-किन अभ्यर्थियों को बांटा गया था। सवाल-जवाब 1. एसओजी ने हाल ही में किन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है? एसओजी ने राजस्थान एसआई भर्ती 2021 पेपर लीक मामले में नरेन्द्र प्रताप सिंह जाट और अनिल विश्नोई को गिरफ्तार किया है। 2. नरेन्द्र प्रताप सिंह जाट ने पेपर के लिए कितनी रकम दी थी? जांच के अनुसार नरेन्द्र प्रताप सिंह जाट ने अपने गांव के सरगना विनोद रेवाड़ को सात लाख रुपये देकर पेपर खरीदा था। 3. अनिल विश्नोई ने किसके माध्यम से और कितने में पेपर खरीदा था? अनिल विश्नोई ने कथित तौर पर कॉन्स्टेबल शैतानाराम के जरिए भूपेन्द्र बिश्नोई से बीस लाख रुपये में पेपर खरीदा था। 4. नरेन्द्र प्रताप सिंह जाट को परीक्षा में कितने अंक मिले थे? नरेन्द्र को हिंदी में 200 में से 149.09 अंक और सामान्य ज्ञान में 124.71 अंक मिले थे, लेकिन मेरिट में नीचे रहने के कारण उसका चयन नहीं हुआ। 5. अनिल विश्नोई ने परीक्षा में कितने अंक हासिल किए थे? अनिल विश्नोई ने हिंदी में 154.69 अंक और सामान्य ज्ञान के पर्चे में 157.38 अंक हासिल किए थे। 6. इस पेपर लीक मामले में जून 2026 तक कुल कितने आरोपी पकड़े जा चुके हैं? एसओजी की जांच और कार्रवाई के तहत जून 2026 तक कुल 147 आरोपियों की गिरफ्तारी सामने आ चुकी थी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-upanirikshaka-bharti-2021-dhandhali-men-do-nae-sndigdha-pakare-gae-lakhon-men-hui-thi-prashnapatra-ki-saudebaji-36547 TrendKia — Har trend, sabse pehle.