राजस्थान में मानसून की विदाई से पहले फिर सक्रिय होगा सिस्टम, जयपुर और कोटा समेत कई जिलों में 26 से 28 सितंबर तक बारिश का अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राजस्थान के कई हिस्सों में 26 से 28 सितंबर के बीच बारिश की संभावना जताई है। उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के पास बने मौसम तंत्र और पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के मौसम में यह बड़ा बदलाव देखा जाएगा। राजस्थान से मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के एक बड़े हिस्से में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 26 सितंबर से 28 सितंबर के दौरान राज्य के पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिमी संभागों में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और गर्जना के साथ बौछारें गिरेंगी। दो अलग-अलग दिशाओं से आ रहे मौसमी तंत्रों के मिले-जुले असर के कारण यह बदलाव देखने को मिल रहा है। बारिश की इस नई गतिविधि को देखते हुए मौसम विभाग ने विभिन्न इलाकों के लिए पीली चेतावनी यानी येलो अलर्ट जारी किया है और आम जनमानस से सतर्कता बरतने का आग्रह किया है। यदि आप आने वाले दिनों में यात्रा या किसी बाहरी कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं, तो इस अद्यतन पूर्वानुमान पर ध्यान देना जरूरी है। पूर्वी डिप्रेशन और पश्चिमी विक्षोभ का संयुक्त प्रभाव मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में पूर्वी भारत के ऊपर बना गहरा अवदाब यानी डीप डिप्रेशन धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। यह प्रणाली इस समय उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के ऊपर डिप्रेशन के रूप में केंद्रित है। अगले 24 घंटों के भीतर इसके और अधिक शिथिल होकर स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र यानी वेल मार्क लो प्रेशर एरिया (WML) में परिवर्तित होने की पूरी संभावना बनी हुई है। इस तंत्र के पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ने से राजस्थान के पूर्वी और मध्यवर्ती इलाकों में भरपूर नमी पहुंचेगी। इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो रहा है। इन दोनों प्रणालियों की आपसी जुगलबंदी से प्रदेश के कई संभागों में मौसम का रुख तेजी से बदलेगा। जयपुर, कोटा और भरतपुर संभाग में गरज-चमक के साथ बारिश मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक 26 सितंबर से 28 सितंबर के मध्य भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के जिलों के अलावा शेखावाटी अंचल में गर्जना के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार हैं। खासतौर पर 26 सितंबर को धौलपुर जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में मेघगर्जन, वज्रपात और तेज रफ्तार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। इस दौरान हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। जयपुर, कोटा और भरतपुर संभाग के प्रमुख शहरों में दोपहर बाद या शाम के वक्त अचानक मौसम में तब्दीली देखने को मिल सकती है, जिससे आसमान में घने बादल छाने और झमाझम बौछारें पड़ने की उम्मीद है। पश्चिमी राजस्थान के जिलों में असर और तापमान का हाल पश्चिमी राजस्थान के मौसम की बात करें तो सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव 27 और 28 सितंबर को मुख्य रूप से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू जिलों में दिखाई देगा। इन जिलों में कहीं-कहीं हल्की वर्षा या बूंदाबांदी दर्ज की जा सकती है। वर्षा की इन गतिविधियों से बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में गिरावट आएगी, जिससे पिछले कुछ दिनों से बनी उमस और असहनीय गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि सुदूर पश्चिमी सीमावर्ती जिलों जैसे बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क ही बना रहेगा और वहां बारिश की संभावना काफी कम है। दक्षिणी राजस्थान में स्थिति और मौसम विभाग की गाइडलाइन दक्षिणी राजस्थान के पर्वतीय और मैदानी जिलों जैसे उदयपुर, सलूंबर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सिरोही में स्थानीय स्तर पर बनने वाली मौसमी परिस्थितियों के कारण बादलों की गरज के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र इन जिलों के लिए समय-समय पर तात्कालिक चेतावनियां जारी कर रहा है। मौसम विभाग ने किसानों और नागरिकों को सलाह दी है कि मेघगर्जन और आकाशीय बिजली चमकने के समय खुले खेतों, बड़े पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों व टावरों के समीप कतई शरण न लें। बारिश और बिजली की स्थिति में पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों के भीतर रहना ही श्रेयस्कर होगा। इसका आप पर असर राजस्थान में बारिश के इस नए दौर का सीधा असर दैनिक जीवन और कृषि कार्यों पर पड़ेगा। • राजस्थान में: 26 से 28 सितंबर के बीच कोटा, जयपुर और भरतपुर संभाग के नागरिकों को अचानक होने वाली बारिश और उमस से राहत मिलेगी। धौलपुर और बीकानेर क्षेत्र के किसानों को सलाह दी जाती है कि वे कटी हुई फसलों को भीगने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर ढककर रखें। • भारत में: उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण पड़ोसी राज्यों में भी आंशिक रूप से मौसम बदलेगा। इस मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटकों और वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम की चेतावनी देखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। ऐसा क्यों हुआ यह मौसमी बदलाव दो अलग-अलग वायुमंडलीय प्रणालियों के एक साथ प्रभाव में आने के कारण हो रहा है। • पूर्वी डिप्रेशन का कमजोर होना: उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के ऊपर बना डीप डिप्रेशन धीरे-धीरे शिथिल होकर वेल मार्क लो प्रेशर एरिया में बदल रहा है, जिससे मध्य भारत से होते हुए राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में प्रचुर नमी आ रही है। • पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता: उत्तर-पश्चिमी भारत में ऊपरी वायुमंडल में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है, जो इस नमी के साथ मिलकर राज्य में बादलों का निर्माण और बारिश की स्थिति पैदा कर रहा है। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में बारिश का नया दौर कब से कब तक जारी रहेगा? मौसम विभाग के अनुसार राज्य में बारिश की यह गतिविधि 26 सितंबर से 28 सितंबर तक बनी रहेगी। 2. 26 सितंबर को किन जिलों के लिए विशेष चेतावनी जारी की गई है? 26 सितंबर को धौलपुर और आसपास के इलाकों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 3. क्या पश्चिमी राजस्थान के सभी जिलों में बारिश होगी? नहीं, बारिश मुख्य रूप से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू में होगी, जबकि बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। 4. मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली चमकने पर क्या सुरक्षा निर्देश दिए हैं? मौसम विभाग ने बिजली कड़कने के दौरान खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों या बिजली के खंभों के पास न खड़े होने और सुरक्षित भवनों में शरण लेने की सलाह दी है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-weather-update-rain-alert-issued-for-jaipur-kota-and-26-to-28-september-district-forecast-before-monsoon-retreats-38779 TrendKia — Har trend, sabse pehle.