# राजसमंद के कानावास में फसलों पर जंगली सूअरों का धावा, बर्बादी देख किसानों ने लगाई विशेष गिरदावरी की गुहार

> राजसमंद जिले के कानावास गांव में जंगली सूअरों के झुंड मक्का और बाजरे की खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। भारी नुकसान से त्रस्त किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजे और वन विभाग से गश्त बढ़ाने की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajsamand-ke-kanawas-men-phasalon-para-jngali-suaron-ka-dhava-barbadi-dekha-kisanon-ne-lagai-vishesha-giradavari-ki-guhara-42350 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजसमंद, भीम उपखंड, छापली, कानावास, जंगली सूअर, फसल खराबा, किसान समस्या, गिरदावरी

राजसमंद जिले के अंतर्गत भीम उपखंड में स्थित छापली ग्राम पंचायत के कानावास गांव में कृषि संकट गहरा गया है। इलाके के काश्तकारों की तैयार खड़ी फसलों पर जंगली सूअरों का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। खेतों में झुंड बनाकर घुस रहे ये जानवर पौधों को बुरी तरह रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं। कई महीनों के पसीने और खेती में लगाई गई पूरी जमा पूंजी के चंद पलों में नष्ट होने से ग्रामीणों में भारी निराशा और गहरा रोष व्याप्त है। हालात से परेशान होकर स्थानीय काश्तकारों ने उपखंड प्रशासन और वन विभाग से मामले में तुरंत दखल देने की मांग उठाई है।

## शाम ढलते ही खेतों में धावा बोल रहे हैं दर्जनों जानवर
कानावास के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों ने रिहायशी बस्तियों से सटे कृषि भूखंडों को अपना नया ठिकाना बना लिया है। जैसे ही शाम ढलती है और अंधेरा छाने लगता है, ये जानवर बड़ी तादाद में खेतों की तरफ रुख करते हैं। रात के सन्नाटे में दर्जनों की संख्या में आने वाले ये सूअर खेतों के चारों तरफ लगाई गई मजबूत बाड़ और अन्य सुरक्षा इंतजामों को तोड़ते हुए भीतर दाखिल हो जाते हैं। खेतों में घुसने के बाद वे मक्का, बाजरा और अन्य मौसमी फसलों को अपने खुरों तले बुरी तरह कुचलकर जमींदोज कर रहे हैं।

## लागत और मेहनत डूबने से परिवारों पर छाया आर्थिक संकट
इस पूरे ग्रामीण अंचल में अधिकांश परिवारों की आजीविका केवल खेतीबाड़ी पर टिकी हुई है। पहले से कमजोर आर्थिक स्थिति से जूझ रहे इन किसानों ने मौजूदा फसल चक्र के लिए महंगे दामों पर बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाइयां खरीदी थीं। इसके अलावा बोरिंग के पानी से सिंचाई करने में भी किसानों का भारी भरकम बजट खर्च हुआ था। अब फसलों के बड़े पैमाने पर चौपट हो जाने के कारण यह सारी लागत डूब चुकी है। परिवारों के भरण पोषण, दैनिक खर्चों के प्रबंधन और पिछले कर्जों को चुकाने को लेकर काश्तकार गंभीर मानसिक तनाव और परेशानी से घिर गए हैं।

## राजस्व और कृषि विभाग के संयुक्त सर्वे की उठी मांग
लगातार हो रही बर्बादी से आहत कानावास के किसानों ने एक मंच पर आकर प्रशासनिक तंत्र और वन विभाग के सामने अपनी समस्याएं रखी हैं। काश्तकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि इन हमलों को समय पर नहीं रोका गया तो उनके सामने रोजी-रोटी और भुखमरी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इस संबंध में ग्रामीणों ने मुख्य रूप से यह मांग रखी है कि राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर गांव के प्रभावित खेतों का स्थलीय मुआयना करें।

किसानों ने मांग उठाई है कि मौके पर तत्काल गिरदावरी कराई जाए ताकि वास्तविक नुकसान का सही ब्योरा तैयार किया जा सके और प्रभावितों को शासन की ओर से उचित आर्थिक सहायता या मुआवजा मिल सके। इसके साथ ही वन विभाग से कृषि बस्तियों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने तथा जंगली सूअरों को खेतों से दूर खदेड़ने के लिए वैज्ञानिक और कारगर कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

## प्रशासन की त्वरित पहल की राह देख रहे हैं किसान
वर्तमान समय में समूचे कानावास क्षेत्र के काश्तकार राहत की उम्मीद में स्थानीय उपखंड प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिकारी जल्द से जल्द मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लें और उन्हें इस आफत से मुक्ति दिलाएं। ग्रामीणों ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर विभाग ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वे अपने हक और आजीविका की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाने को विवश हो जाएंगे।

## इसका आप पर असर
खेतों में जंगली सूअरों के हमलों से किसानों की फसलें बर्बाद होने से उनकी आजीविका और स्थानीय अनाज आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है।

- **राजस्थान में:** राज्य सरकार के राजस्व और कृषि विभाग द्वारा नुकसान की गिरदावरी कराने से प्रभावित कृषकों के लिए मुआवजा प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पीड़ित काश्तकारों को नुकसान के आकलन के लिए संबंधित पटवारी या ग्राम कृषि पर्यवेक्षक से तुरंत संपर्क साधना होगा।
- **राजसमंद में:** कानावास और छापली पंचायत क्षेत्र के किसानों की मक्का व बाजरे की फसल चौपट होने से उनके सामने कर्ज चुकाने और भरण-पोषण का बड़ा संकट आ गया है। स्थानीय काश्तकार वन विभाग की टीम से संपर्क करके रिहायशी इलाकों के निकट रात्रि गश्त शुरू करने का दबाव बना सकते हैं।
- **फसल सुरक्षा पर:** खेतों के सामान्य बाड़ प्रबंध नाकाम होने के कारण किसानों को अब अधिक मजबूत तारबंदी या वैज्ञानिक उपायों की आवश्यकता होगी। इससे आगामी फसलों की सुरक्षा पर काश्तकारों का अतिरिक्त वित्तीय खर्च बढ़ सकता है।
- **अनाज आपूर्ति पर:** मक्का और बाजरा जैसी मौसमी फसलों के बड़े पैमाने पर खराब होने से स्थानीय ग्रामीण हाट में चारे और अनाज की किल्लत पैदा हो सकती है। इसका सीधा असर पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों के दैनिक राशन पर दिखाई दे सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
जंगली सूअरों के झुंडों ने जंगलों से सटे ग्रामीण कृषि क्षेत्रों को आसान भोजन की तलाश में अपना ठिकाना बना लिया है। खेतों में खड़ी लहलहाती फसलें और रात के समय खेतों की कमजोर सुरक्षा इन हमलों का मुख्य कारण बनी है।

- **भोजन की तलाश:** प्राकृतिक वनक्षेत्रों में आहार की कमी के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों के समीप स्थित मक्का और बाजरे के खेतों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पौष्टिक और तैयार फसलों की मौजूदगी इन झुंडों को खेतों में खींच लाती है।
- **कमजोर सुरक्षा व्यवस्था:** खेतों के चारों तरफ लगाई गई सामान्य बाड़ दर्जनों की संख्या में आने वाले भारी-भरकम सूअरों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। जानवर आसानी से बाड़ को तोड़कर भीतर प्रवेश कर जाते हैं।
- **वन विभाग की कम गश्त:** ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग द्वारा रिहायशी और कृषि सीमाओं पर नियमित गश्त और रोकथाम के ठोस वैज्ञानिक उपाय समय पर नहीं किए गए। निरंतर निगरानी न होने से जानवरों के झुंड बेधड़क बस्तियों के नजदीक डेरा जमाने लगे हैं।
- **अनसुलझी समस्या:** फसलों के नुकसान के बाद तत्काल प्रशासनिक सर्वे या गिरदावरी न होने से किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। इससे काश्तकारों पर आर्थिक बोझ निरंतर बढ़ता चला जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजसमंद जिले के किस गांव में जंगली सूअरों का आतंक देखा जा रहा है?
भीम उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत छापली ग्राम पंचायत के कानावास गांव में जंगली सूअरों का भारी आतंक देखा जा रहा है।

### 2. जंगली सूअरों के हमले से किन फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है?
खेतों में घुसकर सूअरों के झुंड ने मुख्य रूप से मक्का, बाजरा और अन्य मौसमी फसलों को रौंदकर नष्ट किया है।

### 3. जंगली सूअर किस समय खेतों में दाखिल होते हैं?
ये जानवर शाम ढलते ही या फिर रात के सन्नाटे में दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर खेतों में घुसते हैं।

### 4. प्रभावित किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से क्या मुख्य मांगें रखी हैं?
किसानों ने राजस्व व कृषि विभाग से संयुक्त सर्वे, विशेष गिरदावरी कराकर मुआवजा देने और वन विभाग से गश्त बढ़ाने की मांग की है।

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