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  "type": "article",
  "title": "रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, आधुनिक टुकड़ियों और बढ़ते बजट से सशक्त हो रही सेना",
  "summary": "रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में बताया कि रक्षा उत्पादन 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया है और बजट में आधुनिकीकरण के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपए रखे गए हैं।",
  "content": "भारतीय सेनाएं आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को तेजी से ढाल रही हैं और इसमें घरेलू तकनीक सबसे अहम भूमिका निभा रही है। 3 अक्टूबर को जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सुरक्षा तंत्र के कायाकल्प और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा दौर में तकनीक सैन्य अभियानों का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, जिसके बिना आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करना संभव नहीं है।\n\nनई सैन्य टुकड़ियों का गठन और संगठनात्मक बदलाव\nतीनों सेनाओं ने अपने पारंपरिक ढांचे में व्यापक सुधार किए हैं ताकि समकालीन युद्धक्षेत्र की मांगों को पूरा किया जा सके। भारतीय सेना के भीतर विशेष रूप से तैयार की गई असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी नई इकाइयां अब बेहद अहम साबित हो रही हैं। यह इकाइयां आधुनिक परिचालन जरूरतों और रणनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) लगातार नई परियोजनाएं संचालित कर रहा है, जिसके तहत अत्याधुनिक हथियारों, उन्नत मिसाइलों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के परीक्षण तेज गति से किए जा रहे हैं।\n\nरक्षा बजट और आधुनिकीकरण पर बड़ा खर्च\nसशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसी प्रतिबद्धता के तहत सरकार ने लगातार रक्षा आवंटन में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का कुल रक्षा बजट बढ़कर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। इस विशाल बजट में से केवल सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण और नई खरीद के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपए की विशेष व्यवस्था की गई है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि सेनाओं की जरूरतों की पूर्ति स्वदेशी विनिर्माण और भारतीय औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से की जाए। सेनाएं भी अपने प्राथमिक कार्यों को प्राथमिकता देते हुए इस बजट का अनुशासित इस्तेमाल कर रही हैं।\n\nघरेलू उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि\nआत्मनिर्भर भारत की पहल के तहत देश के रक्षा निर्माण और निर्यात दोनों में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए दर्ज किया गया। रक्षा सामग्री के वैश्विक निर्यात में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जो रक्षा निर्यात 2,000 करोड़ रुपए से भी कम था, वह अब बढ़कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। सरकार ने आने वाले समय के लिए और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं, जिसके तहत वर्ष 2029 तक घरेलू रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है।\n\nनिजी क्षेत्र और एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी\nरक्षा निर्माण के परिदृश्य में अब केवल सरकारी उपक्रम ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की कंपनियां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी बड़ा योगदान दे रहे हैं। सरकार ने निजी उद्योगों को समान अवसर प्रदान किए हैं, जिससे नवाचार को गति मिली है। राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि देश की सुरक्षा तैयारी किसी एक विभाग का काम नहीं बल्कि एक साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण है। उन्होंने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उद्योगों के कार्य और नवाचार पर गहरा संतोष व्यक्त किया।\n\nसामरिक निर्भरता समाप्त करने का स्पष्ट विजन\nरक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्राथमिकता मात्र विदेशों से आधुनिक उपकरण खरीदना नहीं है। असली उद्देश्य एक ऐसा मजबूत और एकीकृत रक्षा ढांचा खड़ा करना है जहां सेनाओं की परिचालन संबंधी जरूरतों के मुताबिक स्वदेशी तकनीक तैयार हो। जब भारतीय उद्योग इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेंगे, तभी भारत की रणनीतिक निर्भरता विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर पूरी तरह समाप्त हो सकेगी और देश दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nबढ़ते रक्षा बजट और स्वदेशी उत्पादन के विस्तार से घरेलू विनिर्माण और रोजगार के अवसरों पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा।\n\n• उद्योग और रोजगार पर: रक्षा बजट में 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपए आधुनिकीकरण और खरीद के लिए रखे जाने से घरेलू विनिर्माण इकाइयों और एमएसएमई में लाखों तकनीकी रोजगार पैदा होंगे। निजी कंपनियों को बराबर अवसर मिलने से अनुसंधान, इंजीनियरिंग और हार्डवेयर फैब्रिकेशन से जुड़े पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे।\n• आर्थिक वृद्धि पर: वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए पहुंच चुका है और 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ रुपए करने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा निर्यात भी बढ़कर 40 हजार करोड़ रुपए हो गया है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और औद्योगिक निर्यात को मजबूती मिलेगी।\n• राष्ट्रीय सुरक्षा पर: असनी, भैरव और शक्तिबाण जैसी नई प्लाटून टुकड़ियों से सीमाओं पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता में सुधार हुआ है। स्थानीय स्तर पर विकसित हथियारों के चलते आपातकालीन परिस्थितियों में विदेशी पुर्जों पर निर्भरता नहीं रहेगी।\n• करदाताओं और संसाधनों पर: कुल 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपए के बजट का बड़ा हिस्सा देश के भीतर खर्च होने से पैसा घरेलू अर्थव्यवस्था में वापस आएगा। इससे रक्षा खरीद में होने वाले भारी विदेशी मुद्रा खर्च की बचत होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पहल बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आधुनिक युद्धक्षेत्र में स्वदेशी तकनीक की अनिवार्यता के कारण सामने आई है।\n\n• तकनीकी युद्धक्षेत्र की मांग: आधुनिक संघर्षों में पारंपरिक हथियारों की तुलना में उन्नत सेंसर, मिसाइल सिस्टम और त्वरित सैन्य टुकड़ियां अधिक प्रभावी साबित हो रही हैं। इसीलिए असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी विशेष इकाइयों का गठन किया गया और डीआरडीओ के परीक्षण तेज किए गए।\n• आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति: पहले भारत हथियारों और रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भर था, जिससे संकट के समय आपूर्ति बाधित होने का जोखिम रहता था। इस कमजोरी को दूर करने के लिए घरेलू विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी को नीतिगत प्राथमिकता दी गई।\n• बजटीय प्रतिबद्धता: आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त धन की कमी पुरानी समस्या रही थी, जिसे दूर करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में कुल रक्षा बजट बढ़ाकर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपए किया गया। इसमें आधुनिकीकरण मद को अलग से 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं ताकि सेना की योजनाएं बिना वित्तीय रुकावट पूरी हो सकें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बयान कहां और किस अवसर पर दिया?\nउन्होंने 3 अक्टूबर को जैसलमेर में आयोजित रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं।\n\n2. भारतीय सेना में कौन सी नई प्लाटून टुकड़ियां शामिल की गई हैं?\nभारतीय सेना में असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी नई विशेष सैन्य टुकड़ियों का गठन किया गया है जो आधुनिक परिचालन जरूरतों के अनुकूल हैं।\n\n3. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का कुल रक्षा बजट कितना है?\nवित्त वर्ष 2026-27 में देश का कुल रक्षा बजट 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपए है, जिसमें 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपए आधुनिकीकरण और खरीद के लिए हैं।\n\n4. भारत का वर्तमान रक्षा उत्पादन और निर्यात आंकड़ा क्या है?\nवित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन बढ़कर 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 40 हजार करोड़ रुपए हो गया है।\n\n5. वर्ष 2029 के लिए रक्षा उत्पादन और निर्यात का क्या लक्ष्य निर्धारित किया गया है?\nसरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक देश के रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।",
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  "publishedAt": "2026-11-03",
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