रक्षाबंधन पर भरतपुर के बिहारी जी मंदिर में उमड़ा भक्तों का प्यार, अमेरिका और कनाडा से डाक के जरिए भेजी गईं राखियां भरतपुर के प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में रक्षाबंधन पर अनोखी आस्था देखने को मिलती है, जहां देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भगवान को अपना भाई मानकर राखियां अर्पित करते हैं। भरतपुर स्थित प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर श्रद्धा, विश्वास और अटूट आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। इस ऐतिहासिक मंदिर में भक्त केवल दर्शन के लिए नहीं आते, बल्कि भगवान बिहारी जी को अपने सगे भाई का दर्जा देकर रक्षासूत्र बांधते हैं। मंदिर की यह अनूठी परंपरा और श्रद्धालुओं का गहरा भावनात्मक जुड़ाव केवल स्थानीय क्षेत्र या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि सात समंदर पार तक फैला हुआ है। दूर-दराज के देशों में बसे प्रवासी भारतीय भी रक्षाबंधन के दिन भगवान बिहारी जी को याद करना और उन्हें अपना रक्षक मानना नहीं भूलते हैं। विदेशों से डाक के जरिए पहुंचती हैं राखियां रक्षाबंधन का त्यौहार आते ही भरतपुर के बिहारी जी मंदिर के पते पर देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी लिफाफे पहुंचने शुरू हो जाते हैं। अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका जैसे देशों में रहने वाले भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई राखियां डाक और अंतरराष्ट्रीय कूरियर सेवाओं के जरिए भेजते हैं। हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद इन श्रद्धालुओं के दिल में भगवान बिहारी जी के प्रति भाई का भाव हमेशा जीवंत रहता है। जब ये राखियां मंदिर परिसर में पहुंचती हैं, तो मंदिर के पुजारी पूरे विधि-विधान, संकल्प और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इन सभी रक्षासूत्रों को भगवान बिहारी जी की प्रतिमा पर अर्पित करते हैं। 20 वर्षों की तपस्या और अफ्रीका के परिवार की भावुक कहानी इस मंदिर से जुड़ी अनगिनत कहानियां और चमत्कार भक्तों के मुख से सुनने को मिलते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और प्रेरक प्रसंग अफ्रीका में निवास कर रहे भरतपुर मूल के एक परिवार का है। यह परिवार पिछले लगभग 20 वर्षों से संतान सुख के लिए तरस रहा था और लगातार प्रार्थना कर रहा था। दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद जब उनके घर में किलकारी गूंजी, तो पूरे परिवार ने इसे भगवान बिहारी जी की असीम कृपा और आशीर्वाद का प्रतिफल माना। अपनी इस मनोकामना के पूर्ण होने पर परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर यह परिवार अफ्रीका से सीधे भरतपुर पहुंचा। उन्होंने भगवान बिहारी जी को विशेष रूप से तैयार कराई गई सुंदर पोशाक धारण कराई और अत्यंत भावुक होकर भगवान को राखी बांधी। अर्जियों, नारियल और पूजन सामग्री के साथ जुड़ती है आस्था बिहारी जी मंदिर की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहां श्रद्धालु केवल राखियां ही नहीं भेजते, बल्कि अपनी विविध मनोकामनाओं से भरी लिखित अर्जियां भी डाक से भेजते हैं। भक्त अपनी समस्याओं, इच्छाओं और पारिवारिक सुख-शांति की प्रार्थना पत्र के रूप में लिखकर भेजते हैं। इन अर्जियों के साथ श्रीफल यानी नारियल और पूजन की अन्य आवश्यक सामग्रियां भी भेजी जाती हैं। मंदिर के पुजारी इन अर्जियों और पूजन सामग्री को भगवान के चरणों में समर्पित करके भक्तों की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। जब श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, तो वे स्वयं मंदिर आकर भगवान का धन्यवाद करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन करवाते हैं। इस प्रकार यह मंदिर पूरी दुनिया में फैले भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसका आप पर असर भरतपुर के बिहारी जी मंदिर में रक्षाबंधन उत्सव का सीधा प्रभाव श्रद्धालुओं की धार्मिक परंपराओं और मंदिर प्रबंधन व्यवस्था पर पड़ता है। • भारत में: दूर-दराज के राज्यों में रहने वाले श्रद्धालु डाक व्यवस्था के माध्यम से अपनी राखियां और पूजन सामग्री मंदिर भेज सकते हैं। इससे किसी भी स्थान पर रहते हुए भगवान से जुड़ने की सुविधा मिलती है। • भरतपुर में: स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रक्षाबंधन के दिन मंदिर परिसर में विशेष दर्शन व्यवस्था की जाती है। भारी भीड़ को देखते हुए पूजा-अर्चना के समय में उचित प्रबंधन आवश्यक हो जाता है। • प्रवासी भारतीयों के लिए: विदेशों में रहने वाले भारतवंशी डाक द्वारा अपनी अर्जियां और राखियां समय पर भेजकर अपनी परंपरा को जारी रख सकते हैं। इससे उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से निरंतर जुड़े रहने की अनुभूति होती है। • मनोकामना अर्जियों की प्रक्रिया: जो भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर धन्यवाद देना चाहते हैं, वे मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन करवा सकते हैं। इसके लिए वे मंदिर प्रबंधन से संपर्क कर अग्रिम समय निर्धारित कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. भरतपुर के बिहारी जी मंदिर में रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है? रक्षाबंधन पर श्रद्धालु भगवान बिहारी जी को अपना भाई मानकर राखी बांधते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। 2. किन-किन देशों से भक्त बिहारी जी के लिए राखियां भेजते हैं? अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका सहित विभिन्न देशों में रहने वाले श्रद्धालु डाक के माध्यम से बिहारी जी के लिए राखियां भेजते हैं। 3. डाक से आने वाली राखियों का मंदिर में क्या किया जाता है? डाक द्वारा प्राप्त राखियों को मंदिर प्रबंधन द्वारा पूरे विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ भगवान बिहारी जी को अर्पित किया जाता है। 4. अफ्रीका के निवासी परिवार से जुड़ी क्या खास बात सामने आई? भरतपुर मूल के एक परिवार को लगभग 20 वर्ष बाद संतान सुख मिला, जिसे उन्होंने बिहारी जी का आशीर्वाद मानकर रक्षाबंधन पर भगवान को विशेष पोशाक अर्पित की और राखी बांधी। 5. क्या भक्त मंदिर में अपनी मनोकामना अर्जियां भी भेजते हैं? हाँ, देश-विदेश से भक्त नारियल और पूजन सामग्री के साथ अपनी लिखित अर्जियां भेजते हैं और मनोकामना पूरी होने पर पुनः आकर आभार व्यक्त करते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rakshabndhana-para-bharatpur-ke-bihari-ji-mndira-men-umara-bhakton-ka-pyara-america-aura-canada-se-daka-ke-jarie-bheji-gain-rakhiy-23660 TrendKia — Har trend, sabse pehle.