# रांची में 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग: बीकानेर के हरिप्रकाश सींवर ने जीते दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक

> रांची में चल रही 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता में राजस्थान के बीकानेर निवासी हरिप्रकाश सींवर ने व्यक्तिगत परस्यूट में स्वर्ण सहित कुल तीन पदक हासिल किए हैं.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/ranchi-men-78vin-rashtriya-traika-saikilinga-bikaner-ke-hariprakash-sinwar-ne-jite-do-svarna-aura-eka-kansya-padaka-55941 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरिप्रकाश सींवर, ट्रैक साइकिलिंग, बीकानेर खेल, राष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता, श्रवण कुमार भाम्भू, रांची प्रतियोगिता

झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित की जा रही 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता में राजस्थान के बीकानेर के साइकिलिस्ट हरिप्रकाश सींवर ने असाधारण खेल कौशल का प्रदर्शन किया है. देशभर के विभिन्न राज्यों से आए शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए हरिप्रकाश ने जूनियर वर्ग में अब तक दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक अपने नाम कर लिए हैं. राष्ट्रीय पटल पर हासिल की गई इस कामयाबी से बीकानेर जिले के साथ-साथ पूरे राजस्थान के खेल जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई है.

## व्यक्तिगत परस्यूट में 3 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर जीता स्वर्ण
इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक रांची के खेल मैदान पर किया जा रहा है. जूनियर वर्ग के मुकाबलों में हरिप्रकाश सींवर की सबसे प्रमुख उपलब्धि व्यक्तिगत परस्यूट स्पर्धा में सामने आई. इस कड़े मुकाबले में उन्होंने निर्धारित दूरी को मात्र 3 मिनट 37 सेकंड में पूरा करते हुए पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया.

ट्रैक साइकिलिंग की स्पर्धाओं में वेलोड्रोम पर तेज रफ्तार के साथ-साथ शरीर का संतुलन, सटीक पेडलिंग और निरंतर ताकत बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. सेकंड के सौवें हिस्से से तय होने वाले इन मुकाबलों में मानसिक दृढ़ता भी उतनी ही जरूरी होती है. हरिप्रकाश ने इस स्पर्धा में शुरुआत से ही अपनी गति और लय पर नियंत्रण बनाए रखा और 3 मिनट 37 सेकंड का शानदार समय दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इसके अतिरिक्त अन्य स्पर्धाओं में भी बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखते हुए वे अब तक कुल दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं.

## कोच श्रवण कुमार भाम्भू ने बताया सालों के कठोर अभ्यास का परिणाम
हरिप्रकाश की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर उनके कोच श्रवण कुमार भाम्भू ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है. कोच के अनुसार, यह सफलता किसी एक दिन या कुछ हफ्तों के प्रयास से नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों का कठोर अनुशासन, कड़ा शारीरिक श्रम और निरंतर किया गया अभ्यास शामिल है.

कोच का कहना है कि साइकिलिंग जैसे तकनीकी और स्टेमिना-आधारित खेल में आगे बढ़ने के लिए केवल स्वाभाविक प्रतिभा होना पर्याप्त नहीं होता. इसके लिए प्रतिदिन वेलोड्रोम और सड़कों पर पसीना बहाना पड़ता है, खानपान और फिटनेस का कठोर ध्यान रखना होता है और अपनी तकनीकी कमियों को लगातार सुधारना पड़ता है. बड़े मुकाबलों के दबाव में शांत रहकर पेडल की गति बनाए रखना ही एक अच्छे साइकिलिस्ट की पहचान होती है. हरिप्रकाश ने इन सभी मानकों पर लंबे समय तक काम किया, जिसके परिणामस्वरूप वे राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करने में सफल रहे.

## स्थानीय खेल जगत में जश्न का माहौल और युवाओं के लिए प्रेरणा
हरिप्रकाश द्वारा राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप में तीन पदक जीतने की सूचना मिलते ही बीकानेर में खेल प्रेमियों और साथी खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी जताई. खेल संगठनों और स्थानीय खिलाड़ियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे जिले के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि हरिप्रकाश की यह सफलता राजस्थान के युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बनेगी. सीमित संसाधनों के बावजूद अगर निरंतर समर्पण और सही मार्गदर्शन में तैयारी की जाए, तो राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगिताओं में भी पोडियम तक पहुंचा जा सकता है. रांची में चल रही 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता 4 नवंबर तक जारी रहेगी, जहां हरिप्रकाश की इस उपलब्धि ने राजस्थान को खेल मानचित्र पर एक बार फिर गर्व की अनुभूति कराई है.

## इसका आप पर असर
राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर ट्रैक साइकिलिंग में तीन पदक जीतने की यह उपलब्धि राजस्थान और बीकानेर के उभरते खिलाड़ियों के लिए बुनियादी ढांचे और प्रोत्साहन के नए अवसर तैयार कर सकती है.

- **भारत में:** राष्ट्रीय चैंपियनशिप में क्षेत्रीय एथलीटों के बेहतरीन प्रदर्शन से जूनियर स्तर पर साइकिलिंग की प्रतिस्पर्धा मजबूत होती है. इससे भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए राष्ट्रीय कैंपों में नए और सक्षम साइकिलिस्टों की पहचान करने में मदद मिलेगी.
- **राजस्थान और बीकानेर में:** बीकानेर के खिलाड़ी द्वारा दो स्वर्ण और एक कांस्य जीतने से स्थानीय खेल अकादमियों में साइकिलिंग को लेकर युवाओं का रुझान बढ़ेगा. इसके अलावा जिले में आधुनिक ट्रैक सुविधाओं और उच्च स्तरीय कोचिंग की मांग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
- **आगामी प्रतियोगिताओं पर प्रभाव:** 4 नवंबर तक जारी रहने वाली इस 78वीं राष्ट्रीय प्रतियोगिता से शीर्ष साइकिलिस्टों की आधिकारिक राष्ट्रीय रैंकिंग निर्धारित होगी. इस प्रदर्शन के बाद हरिप्रकाश के सामने खेल कोटा और राष्ट्रीय स्तर की आगामी प्रतियोगिताओं के सीधे रास्ते खुल सकते हैं.
- **युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा:** जिला स्तर पर अभ्यास करने वाले साइकिलिस्टों को सीमित संसाधनों में भी राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने का व्यावहारिक भरोसा मिलता है. यह सफलता अन्य युवाओं को भी अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण अपनाने के लिए प्रेरित करेगी.

## ऐसा क्यों हुआ
रांची में आयोजित इस प्रतियोगिता में हरिप्रकाश सींवर की सफलता वर्षों के सुनियोजित प्रशिक्षण, वेलोड्रोम पर शारीरिक संतुलन और व्यक्तिगत परस्यूट में सटीक गति नियंत्रण के चलते संभव हो सकी.

- **कठोर और निरंतर प्रशिक्षण:** कोच श्रवण कुमार भाम्भू के अनुसार हरिप्रकाश ने कई वर्षों तक नियमित अभ्यास और सख्त अनुशासन का पालन किया. साइकिलिंग में आवश्यक स्टेमिना, ताकत और तकनीकी दक्षता को निखारने के लिए उन्होंने निरंतर मेहनत की थी.
- **व्यक्तिगत परस्यूट में सटीक टाइमिंग:** 3 मिनट 37 सेकंड का समय दर्ज कर स्वर्ण जीतने के लिए ट्रैक पर गति और ताकत का निरंतर समन्वय आवश्यक था. हरिप्रकाश ने दबाव के क्षणों में भी अपनी गति बनाए रखी, जिससे वे शीर्ष स्थान प्राप्त करने में सफल रहे.
- **राष्ट्रीय मंच पर निरंतर लय:** देशभर के जूनियर एथलीटों के बीच 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलने वाले बहु-दिवसीय टूर्नामेंट में मानसिक मजबूती बनाए रखना अहम था. इसी निरंतरता के चलते उन्होंने प्रतियोगिता में एक नहीं, बल्कि कुल तीन पदक अपने नाम किए.

## सवाल-जवाब

### 1. 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता कहां आयोजित की जा रही है?
इस प्रतियोगिता का आयोजन झारखंड के रांची में किया जा रहा है.

### 2. हरिप्रकाश सींवर ने इस प्रतियोगिता में अब तक कुल कितने पदक जीते हैं?
हरिप्रकाश ने जूनियर वर्ग में अब तक कुल तीन पदक जीते हैं, जिनमें दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक शामिल हैं.

### 3. हरिप्रकाश ने व्यक्तिगत परस्यूट स्पर्धा में स्वर्ण पदक किस समय के साथ हासिल किया?
उन्होंने व्यक्तिगत परस्यूट स्पर्धा में 3 मिनट 37 सेकंड का समय दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया.

### 4. हरिप्रकाश सींवर किस जिले और राज्य से संबंध रखते हैं?
वे राजस्थान के बीकानेर जिले से ताल्लुक रखते हैं.

### 5. हरिप्रकाश के कोच का नाम क्या है और उन्होंने इस जीत पर क्या कहा?
उनके कोच का नाम श्रवण कुमार भाम्भू है, जिन्होंने इस सफलता को कई वर्षों की मेहनत, अनुशासन और कड़े अभ्यास का परिणाम बताया.

### 6. रांची में यह राष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता कब से कब तक आयोजित हो रही है?
यह 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता 31 अक्टूबर से शुरू हुई है और 4 नवंबर तक चलेगी.

## प्रेरणा और सबक
बीकानेर के हरिप्रकाश सींवर की राष्ट्रीय सफलता यह सिखाती है कि समर्पित प्रशिक्षण, अनुशासन और लंबे समय तक किया गया अभ्यास बड़े मंचों पर जीत दिलाता है.

- **दीर्घकालिक अनुशासन की शक्ति:** बड़ी उपलब्धियां अचानक नहीं मिलतीं, बल्कि कई वर्षों के अनवरत और अनुशासित अभ्यास से तैयार होती हैं.
- **दबाव में संयम बनाए रखना:** व्यक्तिगत परस्यूट जैसी तकनीकी स्पर्धा में 3 मिनट 37 सेकंड में स्वर्ण जीतना यह दिखाता है कि दबाव में भी संतुलन और गति पर नियंत्रण रखना कितना आवश्यक है.
- **मार्गदर्शन और आत्म-सुधार का महत्व:** कोच के साथ मिलकर अपनी कमियों पर लगातार काम करना और शारीरिक फिटनेस को प्राथमिकता देना ही एक सामान्य खिलाड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर चैंपियन बनाता है.

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