# राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फिल्मकार राधेश्याम पीपलवा को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा, कोंकणी फिल्म मोग आसुम बनी सर्वश्रेष्ठ

> 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सीकर के फिल्मकार राधेश्याम पीपलवा की फिल्म ‘मोग आसुम’ को सर्वश्रेष्ठ कोंकणी फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात में आयोजित समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rashtrapati-droupadi-murmu-ne-philmakara-radheshyam-pipalwa-ko-rashtriya-philma-puraskara-se-navaja-konkani-philma-mog-asum-bani-s-38245 · **Language:** Hindi
**Tags:** राधेश्याम पीपलवा, मोग आसुम, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, द्रौपदी मुर्मू, फतेहपुर शेखावाटी, सीकर, कोंकणी सिनेमा

गुजरात के एकता नगर में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी निवासी राधेश्याम पीपलवा को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2024 की फिल्मों की श्रेणी में उनकी कोंकणी भाषा की फीचर फिल्म ‘मोग आसुम’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कोंकणी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप में लंबे समय से सिनेमा जगत में सक्रिय पीपलवा के लिए यह उपलब्धि उनके रचनात्मक सफर का एक नया शिखर साबित हुई है।

## राजस्थान से पांच राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
राधेश्याम पीपलवा की इस सफलता को सिनेमाई जगत में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि वह राजस्थान से पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपने नाम करने वाले एकमात्र फिल्मकार बन गए हैं। उन्होंने केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक पटल पर भी भारतीय सिनेमा की सशक्त छाप छोड़ी है। उनके निर्देशन और निर्माण में बनी विभिन्न कृतियों को देश और दुनिया के अलग-अलग प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में अब तक 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वह पूर्व में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की राष्ट्रपति जूरी के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

## ‘मोग आसुम’: मानवीय संवेदनाओं और विरह की मार्मिक अभिव्यक्ति
राष्ट्रीय मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली फिल्म ‘मोग आसुम’ का शाब्दिक अर्थ ‘प्यार बना रहे’ होता है। यह कृति मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों के ताने-बाने, प्रेम और विरह की नाजुक परतों को बड़ी ही संजीदगी से पर्दे पर उकेरती है। फिल्म की पटकथा एक ऐसे वैवाहिक जोड़े के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां जीवनसाथी की असमय मृत्यु के बाद पति और पूरे परिवार के जीवन में गंभीर भावनात्मक उथल-पुथल शुरू हो जाती है। बिछोह के बाद भी रिश्तों में बनी रहने वाली आत्मीयता और शोक के बीच आगे बढ़ने के मानसिक संघर्ष को इसमें बहुत गहराई से दर्शाया गया है।

## प्रवासी जीवन और पारिवारिक दूरियों का सजीव चित्रण
यह फिल्म केवल एक गृहस्थ परिवार के दुख तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन अनगिनत लोगों की आंतरिक व्यथा को भी आवाज देती है जो रोजगार या अन्य विवशताओं के कारण अपनी मातृभूमि और परिवार से मीलों दूर रहने के लिए बाध्य हैं। दूर देश में रह रहे व्यक्तियों और घर पर राह देख रहे परिजनों के बीच की यादों, भावनात्मक जुड़ाव तथा कठिन परिस्थितियों में जीवन को नए सिरे से अपनाने की यात्रा इस कहानी का मूल आधार है। संवेदनाओं से लबरेज यही भावनात्मक धरातल इस सिनेमाई प्रयास को आम दर्शकों के दिलों के करीब ले जाता है।

## फतेहपुर शेखावाटी से राष्ट्रीय पटल तक का प्रेरक सफर
एक छोटे ग्रामीण और कस्बाई परिवेश से निकलकर फिल्म निर्माण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में लगातार उत्कृष्टता हासिल करना युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। फतेहपुर शेखावाटी की पृष्ठभूमि से आने वाले राधेश्याम पीपलवा ने यह प्रमाणित किया है कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद निष्ठा, लगन और अथक परिश्रम से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। उनकी यह उपलब्धि स्थानीय कलाकारों और स्वतंत्र फिल्मकारों में नई उम्मीद जगाती है।

## आगामी परियोजना: राजस्थानी और हिंदी में संस्कृति को समर्पित फिल्म
पीपलवा वर्तमान समय में राजस्थान और हिंदी भाषा में बनने वाली एक महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्माण और निर्देशन पर काम कर रहे हैं। यह आगामी परियोजना राजस्थान और पूरे देश की लोक कला, समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक संगीत और खेल परंपराओं को समर्पित होगी। इस फिल्म के जरिए राजस्थान की गौरवशाली विरासत और समूचे भारत की सांस्कृतिक विविधता को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी है। उनके अनुसार, यह नई फिल्म अगले दो से तीन महीनों के भीतर दर्शकों के बीच रिलीज की जा सकती है।

## इसका आप पर असर
इस पुरस्कार से स्वतंत्र सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं और ग्रामीण पृष्ठभूमि के रचनाकारों को राष्ट्रीय मंच पर सीधी पहचान और प्रोत्साहन मिलता है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** दर्शकों को कोंकणी भाषा की भावनात्मक और मानवीय पहलुओं पर आधारित सार्थक कहानियों को देखने का अवसर मिलेगा। इससे भाषाई सीमाओं से परे जाकर विभिन्न क्षेत्रों के सिनेमा को समझने की रुचि बढ़ेगी।
- **स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए:** छोटे शहरों के स्वतंत्र निर्माताओं के लिए यह उपलब्धि एक मजबूत मिसाल पेश करती है। यह साबित करती है कि बड़े बजट के बिना भी सशक्त कहानी से राष्ट्रीय स्तर की मान्यता हासिल की जा सकती है।
- **राजस्थान के युवाओं के लिए:** शेखावाटी क्षेत्र के नवोदित कलाकारों और कहानीकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्हें स्थानीय संस्कृति और कला को सिनेमाई माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिलेगी।
- **आगामी रिलीज के दर्शकों के लिए:** अगले दो से तीन महीनों में दर्शकों को राजस्थानी संस्कृति, संगीत और खेल परंपराओं पर आधारित नई फिल्म देखने को मिलेगी। इससे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह प्रतिष्ठित सम्मान फिल्म ‘मोग आसुम’ की उत्कृष्ट मानवीय कहानी, संवेदनशील निर्देशन और कोंकणी भाषा की सिनेमाई अभिव्यक्ति को मान्यता देने के लिए प्रदान किया गया है।

- **कलात्मक उत्कृष्टता:** फिल्म में प्रेम, असमय विरह और प्रवासी जीवन के दर्द को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया है। जूरी ने इस मानवीय कहानी और उसके भावनात्मक प्रभाव को सर्वश्रेष्ठ माना।
- **पीपलवा का निरंतर कार्य:** राधेश्याम पीपलवा का सिनेमा लेखन, निर्देशन और निर्माण में लंबा और सफल रिकॉर्ड रहा है। वे अपनी फिल्मों के माध्यम से पूर्व में 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान और चार राष्ट्रीय पुरस्कार पहले ही हासिल कर चुके थे।
- **पारंपरिक मंच का आयोजन:** भारत सरकार के 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के तहत वर्ष 2024 की सर्वश्रेष्ठ कृतियों का मूल्यांकन किया गया। औपचारिक चयन प्रक्रिया के बाद राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान आधिकारिक रूप से प्रदान किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में राधेश्याम पीपलवा को किस फिल्म के लिए सम्मानित किया गया?
उन्हें वर्ष 2024 की कोंकणी भाषा की फीचर फिल्म ‘मोग आसुम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ कोंकणी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।

### 2. यह पुरस्कार समारोह कहां आयोजित किया गया और सम्मान किसने प्रदान किया?
यह समारोह गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित हुआ, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया।

### 3. राधेश्याम पीपलवा मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
वे राजस्थान के सीकर जिले के अंतर्गत आने वाले फतेहपुर शेखावाटी के निवासी हैं।

### 4. राधेश्याम पीपलवा के नाम राजस्थान में क्या विशेष उपलब्धि दर्ज है?
वे राजस्थान से पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करने वाले एकमात्र फिल्मकार हैं।

### 5. पीपलवा की फिल्मों को अब तक कितने अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं?
उनकी फिल्मों को देश-विदेश के विभिन्न फिल्म समारोहों में अब तक 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

### 6. फिल्म ‘मोग आसुम’ का क्या अर्थ है और इसकी कहानी किस विषय पर आधारित है?
‘मोग आसुम’ का अर्थ ‘प्यार बना रहे’ है, और इसकी कहानी पत्नी की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार के विरह, मानवीय संवेदनाओं और रोजी-रोटी के लिए घर से दूर रहने वाले लोगों के दर्द को दर्शाती है।

### 7. राधेश्याम पीपलवा की आगामी फिल्म किस विषय पर केंद्रित होगी?
उनकी आगामी राजस्थानी और हिंदी फिल्म राजस्थान और देश की लोक कला, संस्कृति, संगीत और खेल परंपराओं पर आधारित होगी, जो अगले दो से तीन महीनों में आ सकती है।

## प्रेरणा और सबक
राधेश्याम पीपलवा की यात्रा यह सिखाती है कि सीमित संसाधनों और छोटे कस्बे से शुरुआत करके भी लगन के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता पाई जा सकती है।

- **पृष्ठभूमि से परे संकल्प:** छोटे कस्बे या ग्रामीण परिवेश से होने के बावजूद बड़े लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं। निरंतर अभ्यास और अपनी कला के प्रति समर्पण बड़े मंचों तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है।
- **सार्थक कहानियों पर विश्वास:** व्यावसायिक चमक-दमक के पीछे भागने के बजाय मानवीय भावनाओं और वास्तविक जीवन के संघर्षों पर आधारित कहानियों को चुनना चाहिए। संवेदनशील विषय-वस्तु दर्शकों और आलोचकों दोनों के दिलों को छूती है।
- **निरंतरता ही असली शक्ति:** एक सफलता पर रुकने के बजाय लगातार नई परियोजनाओं पर काम करते रहना चाहिए। 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और पांचवां राष्ट्रीय पुरस्कार पीपलवा की निरंतर सक्रियता का ही परिणाम है।
- **अपनी जड़ों का सम्मान:** राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के बाद भी अपनी क्षेत्रीय संस्कृति, संगीत और विरासत को अपनी रचनाओं का मुख्य आधार बनाए रखना चाहिए।

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