राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद में राजस्थान की श्रेया कुमावत ने उठाई आवाज़, दिल्ली विधानसभा में संभाली विपक्ष की कमान भीलवाड़ा के शाहपुरा की श्रेया कुमावत ने राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए दिल्ली विधानसभा में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर अपनी बात रखी। देश की राजधानी में स्थित दिल्ली विधानसभा के भीतर पर्यावरण सुरक्षा पर आयोजित एक विशेष राष्ट्रीय सत्र में राजस्थान की युवा आवाज गूंजी। भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा क्षेत्र की छात्रा श्रेया कुमावत ने राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 के राष्ट्रीय मंच पर अपने राज्य की नुमाइंदगी की। पूरे देश से छांटे गए 95 चुनिंदा बाल प्रतिनिधियों में जगह बनाकर उन्होंने न केवल अपने जिले बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया। हजारों छात्रों के बीच से तय हुआ राष्ट्रीय मंच का सफर इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न विद्यालयों से कक्षा 8वीं से लेकर 12वीं तक के हजारों विद्यार्थियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। चयन की प्रक्रिया काफी प्रतिस्पर्धी रही, जिसमें सबसे पहले क्षेत्रीय स्तर पर 400 योग्य छात्र-छात्राओं को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके उपरांत कड़े मूल्यांकन के अंतिम चरण में केवल 95 बाल प्रतिनिधियों को दिल्ली विधानसभा में अपनी बात रखने का अवसर प्राप्त हुआ, जिनमें राजस्थान से श्रेया का चयन हुआ। विपक्षी मंत्री की भूमिका में टिकाऊ विकास पर जोर सदन के भीतर विधायी कामकाज के प्रारूप में आयोजित इस सत्र में श्रेया कुमावत ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की विपक्षी मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने सदन के पटल पर रासायनिक प्रभावों, प्रकृति संरक्षण और टिकाऊ विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तार्किक विचार रखे। इस विशेष आयोजन में छात्र-छात्राओं ने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों पक्षों की भूमिकाएं निभाते हुए समसामयिक पर्यावरणीय संकटों पर गहन विचार-विमर्श किया और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। जमीनी स्तर पर प्रकृति संरक्षण की मुहिम श्रेया का यह चयन केवल भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लंबे समय से धरातल पर प्रकृति बचाने के अभियानों में सक्रिय रही हैं। वे स्थानीय स्तर पर बीज संरक्षण करने, सीड बॉल तैयार करने, सघन पौधरोपण करने तथा हर घर हरियाली मुहिम को आगे बढ़ाने में निरंतर जुटी हैं। इसके अलावा प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश देकर आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को जागरूक करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। आयोजन और सम्मान राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 का यह प्रतिष्ठित आयोजन पर्यावरण संरक्षण गतिविधि (पीएसजी) की ओर से आयोजित किया गया था, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मेजबानी और संयोजन का दायित्व मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल (MRIS) ने संभाला। राष्ट्रीय सत्र के समापन पर भाग लेने वाले सभी बाल प्रतिनिधियों को प्रशस्ति-पत्र और मोमेंटो भेंट कर उनकी प्रतिबद्धता और प्रयासों को सम्मानित किया गया। इसका आप पर असर युवाओं में पर्यावरण जागरूकता और विधायी प्रक्रियाओं की समझ बढ़ाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण व्यावहारिक अवसर प्रदान करती है। • राजस्थान में: भीलवाड़ा और शाहपुरा क्षेत्र के छात्रों को जमीनी पर्यावरण पहलों और राष्ट्रीय मंचों पर अपनी भागीदारी दर्ज कराने की सीधी प्रेरणा मिलती है। इससे स्थानीय स्तर पर सीड बॉल निर्माण और पौधरोपण जैसी गतिविधियों में स्कूली बच्चों की सहभागिता बढ़ेगी। • भारत में: कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए ऐसे राष्ट्रीय मंच नीति निर्माण, संसदीय प्रक्रियाओं और पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक समाधान सीखने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। युवा पीढ़ी को वास्तविक नीतिगत बहसों से जोड़कर भविष्य के नीति निर्माता तैयार करने में मदद मिलती है। • पर्यावरण अभियानों में: प्लास्टिक मुक्त भारत और हर घर हरियाली जैसे अभियानों को स्कूली स्तर पर व्यावहारिक रूप से अपनाने का बढ़ावा मिलेगा। आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में बीज संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की आसान तकनीकों को लागू कर सकते हैं। • शैक्षणिक संस्थानों के लिए: स्कूल स्तर पर पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर संसदीय वाद-विवाद और सामाजिक मुद्दों पर व्यावहारिक सहभागिता के मॉडल विकसित होंगे। शिक्षकों और विद्यालयों को ऐसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में छात्रों को तैयार करने का प्रोत्साहन मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह राष्ट्रीय सत्र स्कूली विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति चेतना जगाने और उन्हें लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से नीतिगत मुद्दों पर समाधान खोजने के लिए आयोजित किया गया था। • पर्यावरणीय संकट और युवाओं की भूमिका: जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नई पीढ़ी को नीतिगत विमर्श और व्यावहारिक कदमों से जोड़ना आवश्यक हो गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर बाल संसद की रूपरेखा तैयार की गई। • संसदीय और विधायी समझ का विकास: विद्यार्थियों को सत्तापक्ष और विपक्ष के रूप में लोकतांत्रिक बहस, सवाल-जवाब और नीतिगत समीक्षा का व्यावहारिक अनुभव देना इसका प्राथमिक उद्देश्य था। इससे बच्चों को मंत्रालय-वार जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला। • जमीनी स्तर पर किए गए कार्य: श्रेया का चयन उनके द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे बीज संरक्षण, पौधरोपण और प्लास्टिक मुक्ति जैसे व्यावहारिक अभियानों में उनके योगदान के आधार पर हुआ। बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। सवाल-जवाब 1. राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किसने किया? भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की छात्रा श्रेया कुमावत ने राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। 2. इस राष्ट्रीय सत्र का आयोजन कहां किया गया था? इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली विधानसभा में किया गया था। 3. सदन में श्रेया कुमावत को कौन सी भूमिका सौंपी गई थी? श्रेया कुमावत ने सदन में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की विपक्षी मंत्री की भूमिका निभाई। 4. इस प्रतियोगिता में देशभर से कुल कितने छात्रों ने भाग लिया था और अंतिम चयन कितनों का हुआ? प्रतियोगिता में कक्षा 8वीं से 12वीं के हजारों विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें से क्षेत्रीय स्तर पर 400 और अंतिम चरण में राष्ट्रीय स्तर पर 95 छात्रों का चयन हुआ। 5. इस राष्ट्रीय कार्यक्रम के आयोजक और मेजबान कौन थे? इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण संरक्षण गतिविधि (पीएसजी) द्वारा किया गया और मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल (MRIS) ने मेजबानी व संयोजन की भूमिका निभाई। 6. श्रेया कुमावत पर्यावरण संरक्षण के लिए किन अभियानों में सक्रिय रही हैं? वे पौधरोपण, बीज संरक्षण, सीड बॉल निर्माण, हर घर हरियाली और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़ी रही हैं। प्रेरणा और सबक श्रेया कुमावत की यह उपलब्धि दर्शाती है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी अपनी लगन और पर्यावरण के प्रति निष्ठा से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। • धरातल पर निरंतर कार्य: भाषण देने से पहले जमीनी स्तर पर पौधरोपण, सीड बॉल निर्माण और बीज संरक्षण जैसे ठोस कार्य करना वास्तविक प्रभाव पैदा करता है। • कड़े परिश्रम से अवसर: हजारों प्रतिभागियों की कड़ी प्रतियोगिता के बावजूद निरंतर प्रयास और स्पष्ट दृष्टिकोण से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा जा सकता है। • सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन: कम उम्र में भी प्लास्टिक मुक्त भारत और हर घर हरियाली जैसे अभियानों का नेतृत्व करके समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। • नेतृत्व और संवाद कौशल: लोकतांत्रिक मंचों पर अपनी बात प्रभावी और तार्किक ढंग से रखना एक मूल्यवान क्षमता है जिसे हर छात्र को विकसित करना चाहिए। https://trendkia.com/rajasthan/rashtriya-paryavarana-bala-snsada-men-rajasthan-ki-shreya-kumawat-ne-uthai-avaza-delhi-assembly-men-snbhali-vipaksha-ki-kamana-46061 TrendKia — Har trend, sabse pehle.