# रावतभाटा में आवासीय क्षेत्र के पास कचरे का अंबार, बेजुबान पशु खा रहे प्लास्टिक और लोग जहरीले धुएं से परेशान

> चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में नगर पालिका कार्यालय के नजदीक स्थित डंपिंग यार्ड ने रहवासियों का जीना दूभर कर दिया है। कचरा जलने से हवा जहरीली हो रही है, बेसहारा मवेशी प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं और बिजली-पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rawatbhata-men-avasiya-kshetra-ke-pasa-kachare-ka-anbara-bejubana-pashu-kha-rahe-plastika-aura-loga-jaharile-dhuen-se-pareshana-43016 · **Language:** Hindi
**Tags:** चित्तौड़गढ़, रावतभाटा, नगर पालिका, डंपिंग यार्ड, स्वच्छ भारत अभियान, गोवंश

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले रावतभाटा में नगर पालिका के ठीक सामने बुनियादी नागरिक सुविधाओं की गंभीर विफलता सामने आ रही है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा शहर के विकास को लेकर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थानीय निवासियों को अव्यवस्था, अनदेखी और प्रशासनिक उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति नगर पालिका कार्यालय से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित शिव कॉलोनी आवासीय योजना के पास बने डंपिंग यार्ड को लेकर पैदा हो चुकी है, जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय कार्यालय के एकदम नजदीक होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते पूरी शिव कॉलोनी के पास कचरे का एक विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। शहर भर से इकट्ठा किया जाने वाला सारा कचरा इसी आवासीय इलाके के मुहाने पर लाकर अनलोड किया जा रहा है। इस व्यवस्था के कारण पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैल चुकी है, जिसके चलते स्थानीय बाशिंदों के लिए खुली हवा में सामान्य रूप से सांस लेना भी दूभर हो गया है। क्षेत्र में सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।

## मक्खी-मच्छरों का जमावड़ा और बीमारियों का बढ़ता खतरा
आवासीय बस्ती के बिल्कुल पास कचरे का अनियंत्रित ढेर लगने से हालात दिनों-दिन बदतर होते जा रहे हैं। गंदगी के इस विशालकाय भंडार के कारण पूरे इलाके में मक्खियों और मच्छरों की भरमार हो गई है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि आसपास के मकानों में रहने वाले परिवार दिन के समय भी अपने घरों की खिड़कियां और दरवाजे खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह कचरा स्थल अब सीधे तौर पर संक्रमण फैलाने का मुख्य केंद्र बन चुका है। डेंगू, मलेरिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों के साथ-साथ अन्य संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका लगातार बनी हुई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नगर पालिका की इस घोर लापरवाही की कीमत उन्हें अपने परिवार के स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर चुकानी पड़ रही है।

## भूखे मवेशी निगल रहे प्लास्टिक और कचरा
इस डंपिंग यार्ड की सबसे हृदयविदारक स्थिति वहां मंडराने वाले बेसहारा मवेशियों की दशा को देखकर सामने आती है। पेट भरने की मजबूरी में बेजुबान गोवंश कचरे के इन बदबूदार ढेरों में भोजन तलाशते नजर आते हैं। वहां पड़े सड़े-गले अवशेषों के साथ भारी मात्रा में पॉलीथिन और प्लास्टिक खाने की वजह से ये जानवर घातक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

इतना ही नहीं, मवेशियों द्वारा कचरे के ढेरों को इधर-उधर बिखेर देने से गंदगी मुख्य रास्तों और बस्तियों की ओर तेजी से फैल रही है। जमीनी स्तर पर ऐसे हालात यह साफ दर्शाते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत किए जाने वाले प्रशासनिक दावे केवल कागजी फाइलों और वादों तक ही सिमट कर रह गए हैं।

## प्लास्टिक जलाने से उठ रहा जहरीला धुआं
क्षेत्रवासियों की परेशानी केवल बदबू और कचरे के फैलाव तक सीमित नहीं है। नगर पालिका के कर्मचारियों द्वारा कचरे के बड़े ढेरों में नियमित रूप से आग लगा दी जाती है। इस कचरे में भारी तादाद में पॉलीथिन और रासायनिक प्लास्टिक उत्पाद मौजूद रहते हैं, जिनके सुलगने से बेहद जहरीला और घना धुआं वातावरण में घुल जाता है।

यह विषैला धुआं सीधा शिव कॉलोनी और आसपास की आवासीय बसाहटों में भर जाता है। इसके लगातार सांस के जरिए शरीर में जाने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों में दमा, सांस की तकलीफ, खांसी और फेफड़ों से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं।

## विद्युत लाइनों में ट्रिपिंग और पेयजल संकट
डंपिंग यार्ड की अव्यवस्था अब शहर के बुनियादी ढांचे को भी सीधा नुकसान पहुंचा रही है। इसका असर बिजली और पानी जैसी अति आवश्यक सेवाओं पर पड़ रहा है। इस संबंध में बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता सौदास मीणा ने खुलासा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

सौदास मीणा के मुताबिक नगर पालिका के सफाईकर्मी मृत पशुओं को डंपिंग यार्ड के बाहर खुले क्षेत्र में ही फेंक देते हैं। इन शवों को नोचने के लिए बगुले और दूसरे पक्षी वहां बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं। जब ये भारी पक्षी झुंड में उड़ान भरते हैं, तो पास से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली लाइनों से टकरा जाते हैं। पक्षियों के टकराने से बिजली के तार आपस में छू जाते हैं और पूरी विद्युत लाइन बार-बार ट्रिप हो जाती है। बिजली बार-बार गुल होने के कारण जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) की पंपिंग लाइनें बंद पड़ जाती हैं, जिससे समूची पेयजल आपूर्ति ठप हो जाती है और आम ग्रामीणों को पानी की भीषण किल्लत झेलनी पड़ती है।

## इसका आप पर असर
आवासीय क्षेत्र के पास अनियंत्रित कचरा डंपिंग और धुआं फैलने से स्थानीय जनता के स्वास्थ्य और आवश्यक नागरिक सुविधाओं पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

- **भारत में:** खुले में प्लास्टिक और कचरा जलाने से वायु गुणवत्ता तेजी से खराब होती है और विषैले धुएं से फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां बढ़ती हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि जब तक कचरा निस्तारण के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होता, तब तक शहरी आबादी संक्रामक रोगों के जोखिम में बनी रहेगी।
- **चित्तौड़गढ़ और रावतभाटा में:** शिव कॉलोनी और निकटवर्ती क्षेत्रों के निवासियों को सांस की गंभीर बीमारियों, डेंगू और मलेरिया के सीधे खतरे का सामना करना पड़ रहा है। बिजली लाइनों में बार-बार ट्रिपिंग होने से पीएचईडी की जलापूर्ति बाधित हो रही है, जिससे क्षेत्रवासियों को दैनिक उपयोग के लिए पानी के भारी संकट से जूझना पड़ रहा है।
- **पशुधन सुरक्षा:** खुले कचरे के ढेरों में भोजन तलाशने वाले बेसहारा मवेशी भारी मात्रा में प्लास्टिक खा रहे हैं, जिससे उनकी जान जा रही है। मृत मवेशियों को खुले में फेंके जाने के कारण पर्यावरण दूषित हो रहा है और पक्षियों के टकराने से बिजली तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।
- **नागरिकों के लिए सलाह:** डंपिंग यार्ड के पास रहने वाले लोग जहरीले धुएं से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करें और घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें। बिजली गुल होने की स्थिति को देखते हुए घरेलू उपयोग के लिए पेयजल का पर्याप्त भंडारण पहले से करके रखें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संकट नगर पालिका प्रशासन द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के वैज्ञानिक नियमों की अनदेखी करने और आवासीय बस्ती के समीप अनियोजित डंपिंग करने के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **प्रशासनिक लापरवाही:** नगर पालिका कार्यालय से मात्र कुछ ही दूरी पर स्थित होने के बावजूद अधिकारियों ने कचरा निस्तारण के लिए उचित प्लांट या वैज्ञानिक समाधान तैयार नहीं किया। पूरे शहर का मिश्रित कचरा बिना किसी छंटाई के आवासीय योजना के पास खाली जमीन पर डाला जा रहा है।
- **कर्मचारियों द्वारा कचरे में आग लगाना:** कचरे के बड़े ढेरों को कम करने के लिए कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से प्लास्टिक और पॉलीथिन युक्त कचरे में आग लगा दी जाती है। इस प्रक्रिया से वायुमंडल में अत्यधिक विषैला रासायनिक धुआं फैलता है।
- **मृत मवेशियों का असुरक्षित निस्तारण:** नगर पालिका कर्मियों द्वारा मृत जानवरों को सुरक्षित रूप से दफनाने के बजाय खुले में फेंक दिया जाता है। इस कारण वहां बड़ी संख्या में बगुले और शिकारी पक्षी आते हैं, जो बिजली के तारों से टकराकर बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित कर देते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. रावतभाटा में डंपिंग यार्ड को लेकर मुख्य विवाद क्या है?
नगर पालिका कार्यालय के नजदीक शिव कॉलोनी आवासीय योजना के पास शहर भर का कचरा खुले में डंप किया जा रहा है, जिससे दुर्गंध, बीमारियां और जहरीला धुआं फैल रहा है।

### 2. कचरे के ढेर से बेसहारा मवेशियों पर क्या असर पड़ रहा है?
भूखे गोवंश कचरे के ढेरों में भोजन की तलाश करते हैं और मजबूरी में प्लास्टिक व सड़ा-गला कचरा निगल रहे हैं, जिससे वे गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

### 3. स्थानीय लोगों में किन बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है?
मक्खी-मच्छरों के जमावड़े से डेंगू और मलेरिया का डर है, वहीं प्लास्टिक कचरा जलने से निकलने वाले जहरीले धुएं से दमा और सांस की तकलीफें बढ़ रही हैं।

### 4. डंपिंग यार्ड की वजह से बिजली और पानी की आपूर्ति क्यों बाधित हो रही है?
कनिष्ठ अभियंता सौदास मीणा के अनुसार खुले में फेंके गए मृत मवेशियों को खाने आने वाले पक्षी बिजली लाइनों से टकरा जाते हैं, जिससे लाइन ट्रिप हो जाती है और पीएचईडी की जलापूर्ति ठप हो जाती है।

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