# रेवाड़ी से जयपुर के बीच बिछेगी 191 किमी नई रेल पटरी, सर्वे और डीपीआर को रेलवे बोर्ड की हरी झंडी

> हरियाणा के रेवाड़ी से राजस्थान के नीमराणा और कोटपूतली होते हुए जयपुर तक 191 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के डीपीआर और फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 5.73 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rewari-se-jaipur-ke-bicha-bichhegi-191-kimi-nai-rela-patari-sarve-aura-dpr-ko-railway-board-ki-hari-jhndi-53638 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रेलवे, जयपुर रेल मंडल, रेवाड़ी जयपुर रेल लाइन, नीमराणा उद्योग, रेल इंफ्रास्ट्रक्चर, अश्विनी वैष्णव, राव राजेंद्र सिंह

उत्तर भारत में रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के लिए एक नई रेलवे लाइन परियोजना पर काम तेज हो गया है। हरियाणा के रेवाड़ी जंक्शन से शुरू होकर राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरते हुए जयपुर तक लगभग 191 किलोमीटर लंबा नया रेल गलियारा तैयार करने की योजना बनाई गई है। रेलवे बोर्ड ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर और फाइनल लोकेशन सर्वे को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस कदम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और राजस्थान की राजधानी के बीच यात्रा करने वालों को भविष्य में एक सुगम वैकल्पिक मार्ग मिलने का रास्ता साफ हुआ है।

## वर्तमान रेल मार्ग का दबाव और नए विकल्प की जरूरत
दिल्ली और जयपुर के बीच वर्तमान समय में चलने वाली अधिकांश यात्री और मालगाड़ियां मुख्य रूप से रेवाड़ी, अलवर और बांदीकुई वाले रास्ते से होकर गुजरती हैं। दशकों पुराने इस रेल मार्ग पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। लंबी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियों, उपनगरीय पैसेंजर ट्रेनों और भारी मालवाहक गाड़ियों के एक ही ट्रैक पर चलने के कारण अक्सर परिचालन में देरी होती है। कई बार मेंटेनेंस या तकनीकी कारणों से पूरा नेटवर्क प्रभावित हो जाता है। नया रेल गलियारा अस्तित्व में आने के बाद अलवर और बांदीकुई रूट का भार काफी हद तक बंट सकेगा। रेलवे परिचालन को लचीलापन मिलेगा और ट्रेनों की समयबद्धता में भी बड़ा सुधार देखा जा सकेगा।

## किन प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगा नया ट्रैक
सर्वे के तहत प्रस्तावित 191 किलोमीटर लंबा यह नया ट्रैक हरियाणा के रेवाड़ी जंक्शन से आगे बढ़कर राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेगा। इसके बाद यह लाइन शाहजहांपुर, नीमराणा, बहरोड़, कोटपूतली, पावटा-प्रागपुरा और शाहपुरा जैसे कस्बों से होते हुए जयपुर पहुंचेगी। अब तक इनमें से अधिकतर कस्बे केवल राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े थे और वहां सीधे रेल संपर्क का अभाव था। इस नई रेल लाइन के बिछने से यह पूरा इलाका देश के मुख्य ब्रॉडगेज नेटवर्क पर आ जाएगा। स्थानीय निवासियों को लंबी दूरी की यात्राओं के लिए नजदीकी बड़े रेलवे स्टेशनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे दैनिक यात्रा काफी आसान हो जाएगी।

## सफर के समय में 1 से 1.5 घंटे तक की संभावित कटौती
नई रेल लाइन के निर्माण से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम, रेवाड़ी और जयपुर के बीच का फासला तय करने में लगने वाले समय में खासी कमी आने की संभावना जताई गई है। सीधे मार्ग से संचालन होने के चलते यात्रा के कुल समय में करीब 1 से 1.5 घंटे तक की बचत दर्ज की जा सकती है। हालांकि परिचालन से जुड़ी वास्तविक समय सीमा ट्रैक के दोहरीकरण, ट्रेनों की अधिकतम गति, सिग्नलों की तकनीक और स्टेशनों पर ठहराव की संख्या तय होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। इस नए गलियारे का उपयोग राजधानी एक्सप्रेस और तेजस एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम गाड़ियों के लिए भी किया जा सकेगा। इससे दिल्ली से जयपुर होकर अहमदाबाद और मुंबई जाने वाली ट्रेनों को एक अतिरिक्त और अपेक्षाकृत तेज रास्ता मिल सकेगा।

## औद्योगिक हब नीमराणा और कोटपूतली को मिलेगा बड़ा संबल
यह परियोजना केवल आम यात्रियों के सफर को सुगम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान के उत्तरी औद्योगिक गलियारे के लिए लाइफलाइन साबित हो सकती है। नीमराणा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का एक बेहद अहम केंद्र है, जहां जापानी निवेश क्षेत्र के अलावा दर्जनों बहुराष्ट्रीय कंपनियों की उत्पादन इकाइयां स्थित हैं। इसी तरह कोटपूतली क्षेत्र सीमेंट निर्माण और खनन से जुड़े उद्योगों का एक बड़ा केंद्र है। अब तक इन क्षेत्रों का भारी माल ढुलाई कार्य मुख्य रूप से ट्रकों और ट्रेलरों के जरिए सड़कों पर निर्भर रहा है। सीधी रेल लाइन उपलब्ध होने से उद्योगों को कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद बंदरगाहों व अन्य राज्यों तक भेजने में कम लागत वाला विकल्प मिलेगा। इससे सड़क दुर्घटनाओं और लॉजिस्टिक्स खर्च दोनों में गिरावट आने की उम्मीद है।

## सर्वे बजट और आगामी प्रक्रिया
रेलवे बोर्ड ने इस नए मार्ग के फाइनल लोकेशन सर्वे और व्यापक डीपीआर तैयार करने के लिए 5.73 करोड़ रुपये का प्रारंभिक फंड आवंटित किया है। इस सर्वे के दौरान ट्रैक का सटीक अलाइनमेंट, जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता, पुल-पुलियों की संख्या, मिट्टी की क्षमता और स्टेशनों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस परियोजना की कुल निर्माण लागत का सही आकलन डीपीआर के अंतिम रूप लेने के बाद ही सामने आ पाएगा। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट और रेल मंत्रालय से निर्माण कार्य, बजट आवंटन और काम पूरा करने की समय सीमा को लेकर औपचारिक हरी झंडी ली जाएगी।

## जयपुर ग्रामीण के स्टेशनों का भी होगा कायाकल्प
इस बड़े प्रोजेक्ट के साथ ही जयपुर ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अन्य प्रमुख स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को बढ़ाने की प्रक्रिया भी चल रही है। जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह ने हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात करके इस नए कॉरिडोर सहित क्षेत्रीय रेल समस्याओं पर चर्चा की है। इस दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत किशनगढ़-रेनवाल स्टेशन का विकास करने, बधाल स्टेशन के आधुनिक पुनर्विकास और सांभर लेक तथा नरैना जैसे ऐतिहासिक व पर्यटन महत्व वाले स्टेशनों पर प्रमुख रेलगाड़ियों के ठहराव देने के प्रस्तावों पर भी विमर्श हुआ है। इन कदमों से स्थानीय व्यापार, तीर्थाटन और दैनिक यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

## इसका आप पर असर
रेवाड़ी से जयपुर के बीच नई रेल लाइन बनने से दैनिक यात्रियों और क्षेत्रीय व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** दिल्ली से जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को एक सुगम वैकल्पिक रूट मिलेगा। इससे मुख्य रूट पर भीड़ कम होगी और राजधानी तथा तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के समय की बचत होगी।
- **राजस्थान और हरियाणा में:** नीमराणा, बहरोड़, कोटपूतली और शाहपुरा जैसे क्षेत्रों के लोगों को पहली बार सीधी ब्रॉडगेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इससे इन इलाकों के व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को सड़क के भारी जाम और बसों के महंगे किराए से राहत मिलेगी।
- **औद्योगिक माल ढुलाई:** नीमराणा के ऑटोमोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और कोटपूतली के सीमेंट संयंत्रों को माल भेजने के लिए सीधा रेल नेटवर्क मिलेगा। इससे उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी ट्रकों का दबाव कम होगा।
- **दैनिक समय की बचत:** दिल्ली-जयपुर मार्ग पर यात्रा समय में 1 से 1.5 घंटे तक की कमी आने का अनुमान है। नौकरीपेशा और व्यवसाय के सिलसिले में यात्रा करने वाले लोग उसी दिन अपना सफर आसानी से पूरा कर सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
दिल्ली और जयपुर के बीच बढ़ते औद्योगिक विस्तार और मौजूदा रेल ट्रैक पर अत्यधिक दबाव के चलते इस नए रेल कॉरिडोर की जरूरत महसूस की गई है।

- **मौजूदा ट्रैक पर भारी दबाव:** वर्तमान में दिल्ली-जयपुर रेलगाड़ियां अलवर और बांदीकुई होकर गुजरती हैं, जहां क्षमता से अधिक गाड़ियां चल रही हैं। इस वजह से ट्रेनों की गति धीमी होती है और परिचालन में अक्सर देरी का सामना करना पड़ता है।
- **सीधे रेल संपर्क का अभाव:** राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नीमराणा, बहरोड़ और कोटपूतली जैसे बड़े औद्योगिक और रिहायशी इलाके अब तक सीधे रेलवे ट्रैक से नहीं जुड़े थे। सड़क मार्ग पर निर्भरता अधिक होने से माल ढुलाई महंगी और धीमी हो रही थी।
- **जनप्रतिनिधियों की पहल:** जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेंद्र सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलकर क्षेत्र की कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग उठाई थी। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने डीपीआर और फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 5.73 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।
- **आगामी कदम:** फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद कैबिनेट और रेलवे मंत्रालय से भूमि अधिग्रहण, निर्माण बजट और टेंडर प्रक्रिया को लेकर अंतिम मंजूरी ली जाएगी।

## सवाल-जवाब

### 1. रेवाड़ी-जयपुर नई रेल लाइन की कुल लंबाई कितनी है?
प्रस्तावित नए रेल मार्ग की कुल लंबाई लगभग 191 किलोमीटर है।

### 2. रेलवे बोर्ड ने सर्वे और डीपीआर के लिए कितना बजट मंजूर किया है?
फाइनल लोकेशन सर्वे और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए 5.73 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।

### 3. यह नया रेल मार्ग किन प्रमुख कस्बों से होकर गुजरेगा?
यह ट्रैक रेवाड़ी से शुरू होकर शाहजहांपुर, नीमराणा, बहरोड़, कोटपूतली, पावटा-प्रागपुरा और शाहपुरा होते हुए जयपुर तक जाएगा।

### 4. नई लाइन बनने से यात्रा समय में कितनी बचत होने का अनुमान है?
इस सीधे रेल मार्ग से दिल्ली और जयपुर के बीच यात्रा समय में करीब 1 से 1.5 घंटे तक की बचत होने का अनुमान है।

### 5. इस रेल लाइन से किन उद्योगों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा?
नीमराणा के बहुराष्ट्रीय विनिर्माण हब और कोटपूतली के बड़े सीमेंट व खनन उद्योगों को माल ढुलाई में सबसे अधिक फायदा मिलेगा।

### 6. क्या इस परियोजना के निर्माण कार्य की अंतिम घोषणा हो चुकी है?
नहीं, फिलहाल केवल सर्वे और डीपीआर को मंजूरी मिली है; निर्माण की अंतिम लागत, बजट और समयसीमा की घोषणा डीपीआर के बाद होगी।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._