# सांवलिया सेठ के खजाने से निकले 29 करोड़ से ज्यादा, अभी कई चरणों की गिनती बाकी

> राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित सांवलियाजी मंदिर के भंडार से अब तक 29 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि मिल चुकी है। अभी सोने-चांदी और छोटे नोटों की गिनती बाकी है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/sanwaliya-seth-ke-khajane-se-nikale-29-karora-se-jyada-abhi-kai-charanon-ki-ginati-baki-39825 · **Language:** Hindi
**Tags:** सांवलिया सेठ, चित्तौड़गढ़, मंदिर दान, मंडफिया, राजस्थान समाचार

चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित विख्यात कृष्णधाम सांवलियाजी मंदिर में भगवान सांवलिया सेठ के खजाने की गिनती लगातार जारी है। चतुर्दशी के मौके पर पारंपरिक रूप से खोले गए इस दानपात्र की आठ चरणों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन आठ चरणों के पूरा होने के बाद मंदिर प्रशासन को अब तक कुल 29 करोड़ 6 लाख 31 हजार 230 रुपये की भारी-भरकम नकद राशि प्राप्त हो चुकी है। हालांकि यह आंकड़ा अभी अंतिम नहीं है क्योंकि मंदिर की गिनती का काम अभी भी पूरी तरह संपन्न नहीं हुआ है।

## विभिन्न चरणों में हुई करोड़ों रुपयों की गिनती
मंदिर के दानपात्र से निकली नकदी की यह गणना कई अलग-अलग चरणों में पूरी की गई है। शुरुआती चरणों में ही करोड़ों रुपये सामने आए थे। पहले चरण में 7 करोड़ 53 लाख 60 हजार रुपये निकले थे, जबकि दूसरे चरण में 7 करोड़ 51 लाख 94 हजार रुपये की गिनती हुई। इसके बाद तीसरे चरण में 5 करोड़ 58 लाख 2 हजार रुपये और चौथे चरण में 4 करोड़ 97 लाख 26 हजार 600 रुपये की राशि गिनी गई। पांचवें चरण में 1 करोड़ 66 लाख रुपये, छठे चरण में 81 लाख 65 हजार रुपये और सातवें चरण में 25 लाख 85 हजार रुपये की नकदी सामने आई। इन शुरुआती सात चरणों को मिलाकर कुल राशि 28 करोड़ 54 लाख 62 हजार 600 रुपये तक पहुंच गई थी। इसके पश्चात, आठवें चरण में 51 लाख 68 हजार 630 रुपये की राशि गिनी गई, जिसे सुरक्षित बैंक में जमा करवा दिया गया है। इस ताजा राशि के जुड़ने के बाद कुल नकद दान का यह आंकड़ा 29 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर गया है।

## झलझुलनी मेले के कारण रोकना पड़ा था कार्य
परंपरा के अनुसार सांवलिया सेठ का यह भंडार अमावस्या से ठीक एक दिन पहले खोला गया था। इसके तुरंत बाद झलझुलनी मेले का भव्य आयोजन होना था, जिसके चलते दान राशि की गिनती के इस बड़े काम को कुछ दिनों के लिए रोकना पड़ा था। मेले के समापन के करीब चार दिन बाद प्रशासनिक टीम ने इस गिनती के कार्य को दोबारा से सुचारू रूप से शुरू किया, जिसके बाद अब तक आठ चरणों का काम पूरा हो चुका है। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ और दान को लेकर हमेशा एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है।

## सोने-चांदी और चिल्लर की गिनती होना अभी बाकी
नकद राशि के इस बड़े भंडार के अलावा मंदिर प्रशासन के पास अभी कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य शेष हैं। छोटे नोटों और सिक्कों यानी चिल्लर की गिनती का काम अभी चल रहा है। इसके साथ ही, भक्तों द्वारा श्रद्धा के साथ अर्पित किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का वजन करना भी बाकी है। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त होने वाले दान का पूरा विवरण भी अभी जोड़ा जाना है। यही कारण है कि मौजूदा नकद आंकड़ा मंदिर को मिले कुल दान की अंतिम तस्वीर नहीं पेश करता है। जब ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, तब इस बार के कुल दान का वास्तविक और अंतिम आंकड़ा सामने आएगा। सांवलिया सेठ के दरबार में आने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर नकद के साथ बहुमूल्य धातुएं भी भेंट करते हैं, जो मंदिर में आने वाले लोगों के लिए हमेशा से एक विशेष आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

## इसका आप पर असर
सांवलियाजी मंदिर के इस बड़े दान संग्रह का स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** देश भर के बड़े धार्मिक स्थलों पर दान प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर श्रद्धालुओं में जागरूकता बढ़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलता है।
- **चित्तौड़गढ़ में:** मंडफिया और आसपास के इलाकों में मेलों और त्योहारों के दौरान भारी भीड़ के प्रबंधन के लिए विशेष प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ती है। मंदिर के विकास कार्यों और स्थानीय व्यापार को इस चढ़ावे से अप्रत्यक्ष रूप से गति मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
मंदिर के खजाने से निकलने वाली यह भारी-भरकम राशि श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और परंपराओं का परिणाम है।

- **धार्मिक परंपरा:** मंदिर का दानपात्र तय समय पर यानी अमावस्या से एक दिन पहले खोले जाने की पुरानी परंपरा है, जिसके बाद पारदर्शी तरीके से चरणों में गिनती की जाती है।
- **मन्नतें पूरी होना:** देश भर से आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर श्रद्धा के साथ नगदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं भगवान को अर्पित करते हैं।
- **त्योहारी सीजन:** झलझुलनी मेले जैसे बड़े आयोजनों के कारण मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दान पात्र में आने वाली सामग्री में भी भारी इजाफा होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. सांवलियाजी मंदिर कहां स्थित है?
यह प्रसिद्ध कृष्णधाम राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया में स्थित है।

### 2. मंदिर का दानपात्र कुल कितनी नकद राशि दे चुका है?
आठवें चरण तक की गिनती पूरी होने के बाद अब तक कुल 29 करोड़ 6 लाख 31 हजार 230 रुपये की नकद राशि मिल चुकी है।

### 3. दानपात्र की गिनती में देरी क्यों हुई थी?
झलझुलनी मेले के आयोजन के कारण दान राशि की गिनती का काम कुछ दिनों के लिए रोकना पड़ा था।

### 4. क्या सोने और चांदी के आभूषणों की गिनती हो चुकी है?
नहीं, सोने-चांदी के आभूषणों का वजन और उनकी गिनती अभी बाकी है।

### 5. मंदिर का भंडार कब खोला गया था?
मंदिर का भंडार अमावस्या से ठीक एक दिन पहले परंपरा के अनुसार खोला गया था।

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