सरकारी सहायता से वंचित कोटा के मलखंभ कलाकारों ने बिखेरी चमक, टीवी शो 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में पहुंचे कोटा की हरदोल व्यायामशाला के प्रतिभावान मलखंभ खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों और सरकारी मदद के बिना 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है। राजस्थान के शैक्षणिक केंद्र के रूप में मशहूर कोटा शहर के युवाओं ने इस बार शिक्षा के क्षेत्र से अलग हटकर खेल के मैदान में अपनी अद्भुत प्रतिभा का परचम लहराया है। कोटा की हरदोल व्यायामशाला के युवा और बेहद प्रतिभावान मलखंभ खिलाड़ियों ने देश के सबसे बड़े और अत्यंत लोकप्रिय टीवी रियलिटी शो 'इंडिया गॉट टैलेंट' के भव्य मंच पर अपनी असाधारण कला का प्रदर्शन कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इन बच्चों ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट प्रतिबद्धता और जोखिम भरे हैरतअंगेज करतबों के बल पर इस प्रतिष्ठित शो के सेमीफाइनल तक का रास्ता तय किया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इन खिलाड़ियों द्वारा हासिल की गई यह मील का पत्थर जैसी सफलता पूरे कोटा क्षेत्र सहित राजस्थान के लिए गौरव का विषय बन चुकी है। यह उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा की एक अनोखी मिसाल है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते हैं। प्रणाली प्रजापत और सुनीता के संघर्ष की कहानी मलखंभ की राष्ट्रीय स्तर की कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी प्रणाली प्रजापत ने खेल के प्रति अपने लगाव और अनुभवों को साझा किया है। प्रणाली पिछले सात वर्षों से इस पारंपरिक और प्राचीन भारतीय खेल विधा से जुड़ी हुई हैं। इस लंबे सफर के दौरान उन्होंने बिहार खेलो इंडिया और 36वें नेशनल गेम्स जैसी कई बड़ी और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया है और पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। प्रणाली का कहना है कि राज्य सरकारों द्वारा अन्य खेलों के खिलाड़ियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति और वित्तीय मदद प्रदान की जाती है, लेकिन मलखंभ जैसे पारंपरिक खेल को अभी तक सरकारी स्तर पर वह उचित प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता नहीं मिल सकी है जिसकी वह हकदार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से उन्हें सही मार्गदर्शन, आधुनिक बुनियादी ढांचा और वित्तीय सहयोग मिले, तो वे मलखंभ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओलंपिक खेलों तक ले जा सकती हैं और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत सकती हैं। इसी टीम की एक अन्य होनहार खिलाड़ी सुनीता ने 'इंडिया गॉट टैलेंट' के मंच पर बिताए अपने रोमांचक पलों के बारे में बताया। उन्होंने साझा किया कि मुंबई के स्टूडियो में शो की रिकॉर्डिंग से पहले टीम ने लगभग 15 दिनों तक लगातार बेहद कठिन और सघन प्रशिक्षण लिया। रात-रात भर चलने वाले इस अभ्यास सत्र के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी कला को और निखारा। सुनीता के अनुसार, उन्होंने शो में ब्लॉकबस्टर फिल्म 'अवतार' की थीम पर आधारित एक विशेष एक्ट और रोल प्ले तैयार किया था। इस अद्भुत प्रदर्शन को देखकर शो के निर्णायकों के पैनल में शामिल प्रसिद्ध अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा, सांसद और सिद्धू सर ने बच्चों की कला की खड़े होकर सराहना की और उनका हौसला बढ़ाते हुए पूरा समर्थन देने का वादा किया। कोच गोपाल सिसोदिया और हरदोल व्यायामशाला का योगदान इस पूरी सफलता के पीछे हरदोल व्यायामशाला के संचालक, राष्ट्रीय रेफरी और मुख्य कोच गोपाल सिसोदिया का वर्षों का कड़ा संघर्ष और तपस्या छिपी है। मीडिया से बातचीत करते हुए कोच सिसोदिया ने बताया कि उनकी इस व्यायामशाला में वर्तमान समय में 500 से अधिक बच्चे और युवा खिलाड़ी नियमित रूप से आते हैं और मलखंभ की बारीकियों का अभ्यास करते हैं। इनमें से 50 से अधिक खिलाड़ी ऐसे हैं जो विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर देश भर में अपना और कोटा का नाम रोशन कर चुके हैं। हाल ही में उत्तराखंड में नेशनल ओलंपिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित की गई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राजस्थान की रोनक राठौड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धाओं में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इसके अतिरिक्त, 17 और 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में राजस्थान की मलखंभ टीम ने इतिहास में पहली बार ओवरऑल टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता, जिसमें कोटा की इस व्यायामशाला के 7 प्रतिभावान खिलाड़ी शामिल थे। कोच गोपाल सिसोदिया ने बेहद गर्व के साथ कहा कि उनकी व्यायामशाला के बच्चों ने देश के सबसे बड़े मंच पर सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, इस गर्व के क्षण के बीच उन्होंने अपना दर्द और निराशा भी साझा की। उन्होंने बताया कि इस प्राचीन भारतीय खेल और सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान समय में सरकार की ओर से उन्हें कोई विशेष वित्तीय मदद या सरकारी अनुदान प्राप्त नहीं हो रहा है। खिलाड़ियों के आने-जाने, खुराक और खेल उपकरणों का पूरा खर्च केवल स्थानीय दानदाताओं, समाजसेवियों और रोटरी क्लब के आर्थिक सहयोग से ही संभव हो पा रहा है। रोटरी क्लब और प्रबुद्ध समाज की मदद के लिए भावुक अपील रोटरी क्लब की सक्रिय सदस्य श्रद्धा ठाकुर ने बच्चों की इस अभूतपूर्व सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हरदोल व्यायामशाला से जुड़े अधिकतर बच्चे और खिलाड़ी बेहद गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों से आते हैं। इन बच्चों के पास आगे बढ़ने के लिए न तो कोई सरकारी वजीफा है और न ही बेहतर खेल सुविधाएं। इसके बावजूद, इन बच्चों ने अपनी मेहनत के दम पर देश के सबसे बड़े टेलीविजन शो के सेमीफाइनल तक पहुंचकर पूरे कोटा का मान बढ़ाया है। उन्होंने कोटा के नागरिकों, उद्योगपतियों और समाजसेवियों से अपील की है कि वे इन गरीब और प्रतिभावान बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए खुलकर आर्थिक मदद करें। रोटरी क्लब के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खींची ने भी बच्चों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोटा के इन नन्हें कलाकारों ने लगातार दो महीनों तक देश और दुनिया के सामने टीवी के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया है। हर हफ्ते आने वाले इन कड़े मुकाबलों को देखकर हर कोटावासी गर्व महसूस करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मलखंभ को राज्य खेल का दर्जा प्राप्त है और वहां खिलाड़ियों को बड़े पैमाने पर सरकारी फंडिंग व नौकरियां मिलती हैं, लेकिन राजस्थान में फिलहाल इस प्राचीन कला के लिए वित्तीय सहयोग का भारी अभाव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सफलता के बाद राजस्थान सरकार भी इस खेल पर ध्यान देगी और इन खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करेगी। इसका आप पर असर यह उपलब्धि खेल प्रेमियों और युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि दृढ़ संकल्प के जरिए किसी भी वित्तीय बाधा को पार किया जा सकता है। • भारत में: देश भर में पारंपरिक और क्षेत्रीय खेलों से जुड़े युवा खिलाड़ियों को यह विश्वास मिलेगा कि सीमित संसाधनों में भी वे अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित कर सकते हैं। इससे कॉर्पोरेट घरानों और गैर-सरकारी संगठनों का ध्यान इन उपेक्षित खेलों की ओर आकर्षित होगा जिससे उन्हें भविष्य में वित्तीय सहायता मिल सके। • कोटा और राजस्थान में: कोटा के इन प्रतिभाशाली बच्चों की शानदार सफलता से राजस्थान सरकार पर पारंपरिक खेलों के लिए एक समर्पित बजट और खेल नीति बनाने का दबाव बढ़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ पारंपरिक खेलों में भी करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे जिससे नई खेल प्रतिभाएं सामने आएंगी। ऐसा क्यों हुआ यह असाधारण सफलता खिलाड़ियों की कड़े अभ्यास और स्थानीय समुदाय के निरंतर सहयोग का परिणाम है, क्योंकि सरकारी स्तर पर इस खेल को लगातार नजरअंदाज किया गया है। • कठिन प्रशिक्षण और प्रतिबद्धता: कोच गोपाल सिसोदिया के मार्गदर्शन में हरदोल व्यायामशाला के बच्चे प्रतिदिन कई घंटों तक कड़ा अभ्यास करते हैं। टीवी शो के लिए खिलाड़ियों ने लगातार 15 दिनों तक मुंबई के स्टूडियो में देर रात तक अभ्यास किया ताकि वे अपने एक्ट को त्रुटिहीन बना सकें। • सरकारी फंडिंग का अभाव: राजस्थान सरकार द्वारा पारंपरिक खेलों जैसे मलखंभ के लिए कोई विशेष छात्रवृत्ति या अनुदान नीति नहीं बनाई गई है। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस खेल को व्यापक सरकारी सहायता मिलती है। • स्थानीय समाजसेवियों का सहारा: सरकारी मदद न मिलने के कारण रोटरी क्लब और कोटा के दानदाताओं ने खिलाड़ियों की यात्रा, उपकरण और खुराक के खर्चों को उठाने के लिए हाथ मिलाया। इसी सामूहिक सहयोग की वजह से खिलाड़ी बिना किसी रुकावट के राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सके। सवाल-जवाब 1. कोटा की किस व्यायामशाला के बच्चों ने 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल में जगह बनाई है? कोटा की हरदोल व्यायामशाला के प्रतिभावान मलखंभ खिलाड़ियों ने 'इंडिया गॉट टैलेंट' के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया है। 2. इस टीवी शो के दौरान बच्चों ने किस विशेष थीम पर अपना प्रदर्शन किया था? खिलाड़ियों ने मुंबई के स्टूडियो में 15 दिनों तक कड़ी प्रैक्टिस कर ब्लॉकबस्टर फिल्म 'अवतार' की थीम पर एक शानदार एक्ट पेश किया था। 3. हरदोल व्यायामशाला के मुख्य कोच कौन हैं और वहां कितने बच्चे अभ्यास करते हैं? व्यायामशाला के मुख्य कोच गोपाल सिसोदिया हैं और वर्तमान में उनकी संस्था में 500 से अधिक खिलाड़ी नियमित रूप से मलखंभ का अभ्यास करते हैं। 4. उत्तराखंड में हाल ही में आयोजित प्रतियोगिता में राजस्थान की किस खिलाड़ी ने दो कांस्य पदक जीते? उत्तराखंड में नेशनल ओलंपिक एसोसिएशन के टूर्नामेंट में कोटा की रोनक राठौड़ ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। 5. सरकारी सहायता न मिलने के कारण इन खिलाड़ियों के खर्चों की व्यवस्था कौन कर रहा है? इन खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खुराक और यात्रा का पूरा खर्च स्थानीय समाजसेवियों, दानदाताओं और रोटरी क्लब के सहयोग से उठाया जा रहा है। प्रेरणा और सबक कोटा के इन गरीब बच्चों की यात्रा हमें सिखाती है कि साधन भले ही सीमित हों, लेकिन यदि हौसला बुलंद हो तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है। • दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत: हरदोल व्यायामशाला के अधिकांश खिलाड़ी बेहद गरीब परिवारों से आते हैं, लेकिन उन्होंने गरीबी को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया और अपनी लगन से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। • परंपरा का गौरव: आधुनिक खेलों की चकाचौंध के बीच इन बच्चों ने अपनी प्राचीन भारतीय संस्कृति और मलखंभ जैसी पारंपरिक कला का दामन थामे रखा और इसे एक बड़े मंच पर सम्मान दिलाया। • सामुदायिक एकजुटता का बल: यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी व्यवस्थाएं पीछे हट जाती हैं, तब समाज की एकजुटता और रोटरी क्लब जैसे संगठनों की मदद से बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/sarakari-sahayata-se-vnchita-kota-ke-malkhamb-kalakaron-ne-bikheri-chamaka-tivi-sho-india-s-got-talent-ke-semiphainala-men-pahunch-31331 TrendKia — Har trend, sabse pehle.