सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिन एसटी-26 ने दिया दो शावकों को जन्म, कुल संख्या पहुंची 58 राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघिन एसटी-26 अपने दो नन्हे शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में दिखाई दी है, जिससे अभयारण्य में बाघों की कुल आबादी बढ़कर 58 हो गई है। राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर उत्साहजनक खबर सामने आई है। जंगल के भीतर लगाए गए स्वचालित कैमरा ट्रैप में बाघिन एसटी-26 अपने दो नए शावकों के साथ घूमती हुई दर्ज की गई है। इस नई आमद के बाद अभयारण्य में बाघों, बाघिनों और शावकों को मिलाकर पूरी संख्या अब 58 तक पहुंच चुकी है। इस घटनाक्रम ने रिजर्व में बाघों के फलते-फूलते कुनबे और प्राकृतिक आवास की सफलता पर मुहर लगा दी है। कैमरा ट्रैप में दर्ज हुई मां और शावकों की हलचल वन अधिकारियों द्वारा अभयारण्य के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीवों की निरंतर निगरानी के लिए स्वचालित उपकरण लगाए गए थे। इन्हीं कैमरों के जरिए यह पुख्ता हुआ कि एसटी-26 ने पहली दफा मातृत्व प्राप्त किया है और दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहे हैं। जंगल के प्राकृतिक माहौल में नवजात पीढ़ी का इस तरह सुरक्षित सामने आना यह दर्शाता है कि इलाके में मां और बच्चों दोनों के लिए सुरक्षित परिस्थितियां मौजूद हैं। स्थानीय स्तर पर जन्मी बाघिन ने बढ़ाया वंश अभिलेखों के मुताबिक बाघिन एसटी-26 का जन्म इसी रिजर्व के जंगलों में हुआ था। वह सरिस्का की जानी-मानी बाघिन एसटी-14 की संतान है, जिसका पूरा जीवन और विकास इसी वन क्षेत्र में बीता है। इसी मिट्टी में पली-बढ़ी बाघिन द्वारा अब नई संतानों को जन्म देना अभयारण्य के प्राकृतिक चक्र की एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। वर्तमान में इस बाघिन और उसके दोनों शावकों की मुख्य आवाजाही अकबरपुर रेंज के दायरे में देखी जा रही है। अकबरपुर रेंज और सीमावर्ती इलाकों में गश्त तेज शावकों के दिखने की पुष्टि होते ही वन प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना हो गया है। उच्चाधिकारियों ने संबंधित वन क्षेत्र के मैदानी कर्मचारियों को खास सतर्कता बरतने के कड़े आदेश दिए हैं। फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित करें। साथ ही स्वचालित कैमरों की रिकॉर्डिंग के जरिए बाघ परिवार की दैनिक गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है ताकि शावकों की सुरक्षा में कोई चूक न हो। संरक्षण प्रयासों से बढ़ा सैलानियों का आकर्षण टाइगर रिजर्व में कुल आबादी का 58 के आंकड़े को छूना साबित करता है कि यहां का पर्यावरण और सुरक्षा व्यवस्था वन्यजीवों के संवर्धन के लिए बहुत मुफीद साबित हुई है। इस सफलता से वन प्रबंधन की कार्यप्रणाली को बल मिला है और देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों तथा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों में खासा उत्साह पैदा हो गया है। कभी संकट से जूझ चुका यह पार्क अब देश के प्रमुख और सफल वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसका आप पर असर सरिस्का में बाघों की बढ़ती तादाद से स्थानीय इकोटूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और वन सुरक्षा के नियम और कड़े किए जाएंगे। • भारत में: देश में बाघ संरक्षण परियोजनाओं की मजबूती साबित होती है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव प्रबंधन की नीतियों को प्रोत्साहन मिलेगा। आम नागरिकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए जैव विविधता संरक्षण के सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। • अलवर और राजस्थान में: अलवर जिले में सफारी और पर्यटन गतिविधियों में आने वाले समय में तेजी देखने को मिलेगी। स्थानीय गाइडों, टैक्सी चालकों और होटल कारोबारियों की आजीविका को नई ऊर्जा मिलेगी। • पर्यटकों के लिए: अभयारण्य का रुख करने वाले सैलानियों के लिए जंगल में बाघ और शावक देखने के मौके पहले से काफी बढ़ जाएंगे। हालांकि अकबरपुर रेंज के संवेदनशील इलाकों में सफारी मार्गों पर आवाजाही के नियमों का अधिक सख्ती से पालन करना होगा। • वन सीमा के ग्रामीणों के लिए: जंगल के आसपास बसे ग्रामीणों को वन सीमा के नजदीक आवाजाही के दौरान अधिक सतर्क रहना होगा। वन विभाग द्वारा गश्त बढ़ने से मानवीय दखल पर रोक लगेगी और सुरक्षा तंत्र मजबूत रहेगा। ऐसा क्यों हुआ सरिस्का में बाघों के परिवार में यह विस्तार अनुकूल प्राकृतिक आवास, पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों और स्थानीय स्तर पर सफल प्रजनन चक्र का सीधा परिणाम है। • अनुकूल प्राकृतिक माहौल: सरिस्का टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक वातावरण और पर्याप्त शिकार आधार बाघों के सहज प्रजनन के लिए आदर्श साबित हुआ है। अनुकूल परिस्थितियों के कारण बाघिन एसटी-26 ने अपनी पहली पीढ़ी को सुरक्षित जन्म दिया। • स्थानीय वंशावली की निरंतरता: बाघिन एसटी-26 खुद इसी अभयारण्य की प्रसिद्ध बाघिन एसटी-14 की संतान है और यहीं की परिस्थितियों में पली-बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर विकसित वयस्क बाघिनों का प्रजनन चक्र बाहर से लाए गए बाघों की तुलना में अधिक सहज रहता है। • चौबीसों घंटे स्वचालित ट्रैकिंग: जंगल में लगाए गए स्वचालित कैमरा ट्रैप और लगातार मैदानी गश्त ने वन्यजीवों को शिकारियों और अनावश्यक मानवीय दखल से मुक्त रखा। इसी सघन सुरक्षा कवच की वजह से बाघिन सुरक्षित रूप से शावकों का पालन कर पा रही है। सवाल-जवाब 1. सरिस्का में बाघिन एसटी-26 के साथ कितने शावक देखे गए हैं? बाघिन एसटी-26 के साथ स्वचालित कैमरा ट्रैप में दो नन्हे शावक देखे गए हैं। 2. नए शावकों के जन्म के बाद सरिस्का में बाघों की कुल संख्या कितनी हो गई है? इन दो नए शावकों के शामिल होने के बाद सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की कुल आबादी 58 पहुंच चुकी है। 3. बाघिन एसटी-26 किसकी संतान है? वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार बाघिन एसटी-26 सरिस्का की ही प्रसिद्ध बाघिन एसटी-14 की संतान है। 4. बाघिन और उसके शावक किस वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं? बाघिन और दोनों शावकों की मुख्य आवाजाही सरिस्का की अकबरपुर रेंज के भीतर दर्ज की गई है। 5. शावकों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने क्या कदम उठाए हैं? वन विभाग ने फील्ड स्टाफ को नियमित गश्त करने और कैमरा ट्रैप के जरिए 24 घंटे सघन निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। https://trendkia.com/rajasthan/sariska-tiger-reserve-men-baghina-st-26-ne-diya-do-shavakon-ko-janma-kula-snkhya-pahunchi-58-48695 TrendKia — Har trend, sabse pehle.