सार्वजनिक जीवन और शासन में नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष पूरे होने पर राजस्थान के नेताओं ने की विकास यात्रा की सराहना गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री पद तक नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनके सफर को सराहा। सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पच्चीस वर्ष का लंबा कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर राजस्थान के राजनीतिक नेतृत्व ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए इसे जनकल्याण, समर्पण और सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई थी, जहां से आगे बढ़ते हुए उन्होंने देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद यानी प्रधानसेवक के रूप में देश का नेतृत्व संभाला। उनके इस पूरे सफर को पारदर्शिता और दूरगामी नीतियों के लिए याद किया जा रहा है। गुजरात से शुरू हुए प्रयोग बने राष्ट्रीय मॉडल प्रशासनिक सुधारों की दृष्टि से गुजरात में उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई कई नीतियां आज पूरे भारत में प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं। उस दौर में गुजरात के ग्रामीण इलाकों में जल संकट एक गंभीर समस्या थी, जिसका समाधान निकालने के लिए गांवों तक पीने और सिंचाई का पानी पहुंचाने के बड़े प्रयास किए गए। इसके अलावा बालिकाओं की पढ़ाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कन्या शिक्षा को एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया गया। औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र दोनों को संतुलित रखते हुए एक साथ गति देने की नीति ने भी राज्य के आर्थिक परिदृश्य को बदला। आज ये तमाम प्रशासनिक मॉडल पूरे देश के लिए अनुकरणीय व्यवस्था बन चुके हैं। वडनगर की पृष्ठभूमि और शुरुआती संघर्ष का दौर इस पच्चीस वर्षीय राजनीतिक यात्रा की बुनियाद गुजरात के वडनगर कस्बे में उनके संघर्ष भरे बचपन से जुड़ी है। वडनगर रेलवे स्टेशन पर अपने शुरुआती दिनों में पिता के साथ चाय के स्टॉल पर काम करने से लेकर देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचना एक असाधारण यात्रा मानी जाती है। वडनगर रेलवे स्टेशन और वहां के लोग आज भी उनके उन शुरुआती संघर्षों को याद करते हैं। विपरीत पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच से निकलकर राष्ट्र सेवा को जीवन का मुख्य ध्येय बनाना उनके सफर की सबसे प्रमुख विशेषता रही है। वडनगर की उस छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज वैश्विक स्तर पर भारत के नेतृत्व तक विस्तृत हो चुका है। बुनियादी ढांचे से लेकर उच्च तकनीक तक का विस्तार इन ढाई दशकों के दौरान देश के ढांचागत विकास और आधुनिक तकनीक में व्यापक बदलाव दर्ज किए गए हैं। विकास के साथ सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का संतुलन बनाते हुए 'विकास भी, विरासत भी' और 'विज्ञान भी, संस्कृति भी' के मंत्र को शासन की नीतियों का आधार बनाया गया। आधुनिक भारत के निर्माण में सड़क संजाल, रेलवे नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को तेज गति दी गई है। इसके साथ ही रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन, अंतरिक्ष अनुसंधान और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे तकनीकी क्षेत्रों में भारत ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। राजस्थान के नेतृत्व ने की दूरदर्शी दृष्टिकोण की सराहना राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री के इस सेवाकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानसेवक तक की यह यात्रा सुशासन की मिसाल है। उन्होंने रेखांकित किया कि किस तरह जल प्रबंधन, कन्या शिक्षा, कृषि और उद्योगों के विकास के सफल प्रयोग आज पूरे देश के लिए मानक बन चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान राज्य विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर मार्गदर्शन की कामना की। 140 करोड़ नागरिकों के संकल्प से 2047 के लक्ष्य की ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2026 में देश जिस 'विकसित भारत' की रूपरेखा पर काम कर रहा है, वह लक्ष्य प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अवश्य साकार होगा। उन्होंने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए बताया कि एक सदी पहले जब देश की आबादी 40 करोड़ से भी कम थी, उसकी तुलना में आज भारत के पास 140 करोड़ से अधिक नागरिकों की सामूहिक शक्ति मौजूद है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विशाल जनशक्ति एकजुट होकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करेगी। रक्षा, रेलवे, सड़क, सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीक में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता इस प्रगति को निरंतर आगे बढ़ा रही है। इसका आप पर असर सार्वजनिक जीवन में पच्चीस वर्ष पूरे होने का यह राजनीतिक पड़ाव केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे की गति को प्रभावित करता है। • भारत में: केंद्र सरकार की प्रमुख ढांचागत परियोजनाओं जैसे सेमीकंडक्टर विनिर्माण, रेलवे आधुनिकीकरण और डिजिटल कनेक्टिविटी पर निरंतर काम जारी रहेगा। आम नागरिकों के लिए इसका सीधा अर्थ बेहतर परिवहन सुविधाएं, अधिक डिजिटल सेवाएं और विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों का विस्तार होना है। • राजस्थान में: राज्य सरकार ने केंद्र के 'विकसित भारत' एजेंडे के साथ तालमेल बिठाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके तहत राज्य के भीतर सड़क, रेल और जल संरक्षण की केंद्रीय परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर विशेष प्रशासनिक ध्यान दिया जाएगा। • ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्र: गुजरात मॉडल की तर्ज पर पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों में हर घर तक पेयजल पहुंचाने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने वाली नीतियों को बल मिलेगा। इससे ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलना जारी रहेगा। • आर्थिक लक्ष्य 2047: सौ साल पहले की 40 करोड़ से कम की आबादी के मुकाबले आज 140 करोड़ नागरिकों की क्षमता को आर्थिक उत्पादकता से जोड़ने का लक्ष्य तय है। यह नीतिगत फोकस युवाओं के लिए कौशल विकास और उच्च तकनीकी उद्योगों में भागीदारी की संभावनाओं को बढ़ाएगा। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से शुरू हुए पच्चीस वर्षों के प्रशासनिक कार्यकाल के पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सामने आया है। • पच्चीस वर्षों का ऐतिहासिक संदर्भ: वर्ष 2001 में गुजरात की कमान संभालने के बाद से नरेंद्र मोदी लगातार संवैधानिक और प्रशासनिक पदों पर कार्यरत रहे हैं। इस लंबी अवधि में उनके द्वारा लागू की गई नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करते हुए यह स्मरण किया गया। • क्षेत्रीय से राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार: गुजरात में जल प्रबंधन, औद्योगिक संवर्धन और सामाजिक अभियानों के सफल क्रियान्वयन ने उनके शासन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया था। इसी आधार पर 2014 में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। • संवैधानिक तालमेल और राजनीतिक समर्थन: राजस्थान में सत्तारूढ़ सरकार के मुखिया और संगठन प्रमुख ने अपने आधिकारिक संदेशों के माध्यम से इन नीतियों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता स्पष्ट की। केंद्र और राज्य के बीच विकास प्राथमिकताओं को साझा करने के तहत यह बयान जारी किए गए। सवाल-जवाब 1. नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के कितने वर्ष पूरे हुए हैं? नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक शासन में पच्चीस वर्ष पूरे किए हैं, जिसकी शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हुई थी। 2. गुजरात में उनके कार्यकाल के दौरान किन प्रमुख पहलों को शुरू किया गया था? गुजरात में सूखा प्रभावित गांवों तक पानी पहुंचाना, कन्या शिक्षा को जन-आंदोलन बनाना तथा उद्योग और कृषि को एक साथ गति देने जैसी प्रमुख नीतियां लागू की गई थीं। 3. नरेंद्र मोदी का बचपन किस स्थान से जुड़ा रहा है? उनका बचपन गुजरात के वडनगर कस्बे से जुड़ा रहा है, जहां वे वडनगर रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय के स्टॉल पर काम करते थे। 4. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस अवसर पर क्या संदेश दिया? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पच्चीस वर्षों की सेवा यात्रा को सुशासन की मिसाल बताते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान की पूर्ण प्रतिबद्धता व्यक्त की। 5. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने जनसंख्या और विकास को लेकर क्या बात कही? मदन राठौड़ ने कहा कि सौ साल पहले देश की आबादी 40 करोड़ से कम थी, जबकि आज 140 करोड़ से अधिक देशवासी मिलकर वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करेंगे। 6. शासन की नीतियों में किन प्रमुख तकनीकी और ढांचागत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है? सड़क, रेलवे और डिजिटल बुनियादी ढांचे के साथ-साथ रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर विनिर्माण जैसे उच्च तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रेरणा और सबक एक सामान्य परिवार और कस्बे से निकलकर देश के शीर्ष पद तक पहुंचने की यह यात्रा धैर्य, संकल्प और निरंतर प्रयास से जुड़े महत्वपूर्ण व्यावहारिक सबक देती है। • संघर्ष से लक्ष्य का निर्माण: प्रतिकूल सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद व्यक्ति को अपने व्यापक उद्देश्य से नहीं भटकना चाहिए। वडनगर रेलवे स्टेशन के चाय स्टॉल से शुरू हुआ यह सफर दिखाता है कि शुरुआती बाधाएं भविष्य की संभावनाओं को सीमित नहीं कर सकतीं। • समस्याओं का व्यवस्थित समाधान: किसी बड़ी चुनौती का सामना करने के लिए व्यावहारिक प्रयोगों को नीतिगत समाधान में बदलना आवश्यक है। जल संकट और शिक्षा जैसी पुरानी समस्याओं को जन-आंदोलन का रूप देकर बड़े बदलाव हासिल किए जा सकते हैं। • विरासत और आधुनिकता का संतुलन: प्रगति की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक पहचान को खोए बिना आधुनिक विज्ञान और तकनीक को अपनाना चाहिए। 'विकास भी, विरासत भी' का दृष्टिकोण यह सिखाता है कि परंपरा और आधुनिकता एक दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। • दीर्घकालिक दृष्टिकोण और जनभागीदारी: बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केवल सरकारी तंत्र नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य होती है। 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक शक्ति का भरोसा दिखाता है कि राष्ट्रीय संकल्प जनसहयोग से ही संभव होते हैं। https://trendkia.com/rajasthan/sarvajanika-jivana-aura-shasana-men-narendra-modi-ke-25-varsha-pure-hone-para-rajasthan-ke-netaon-ne-ki-vikasa-yatra-ki-sarahana-44535 TrendKia — Har trend, sabse pehle.