सवाई माधोपुर में वन्यजीव प्रेमियों का तांता, तीन माह बाद शुरू हुई सफारी सवाई माधोपुर के प्रसिद्ध रणथंभौर नेशनल पार्क में तीन महीने के ब्रेक के बाद पर्यटन सत्र की धमाकेदार शुरुआत हुई। पारंपरिक स्वागत और उत्सव के माहौल के बीच पहले ही दिन सैकड़ों देसी-विदेशी पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया। सवाई माधोपुर की फिजाओं में वन्यजीव प्रेमियों की चहल-पहल एक बार फिर लौट आई है। तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद रणथंभौर नेशनल पार्क के द्वार जैसे ही सैलानियों के लिए खुले, गणेश धाम स्थित मुख्य द्वार पर जबरदस्त उल्लास देखने को मिला। मानसून की अवधि में पर्यटन गतिविधियों पर लगी रोक हटने के साथ ही नए पर्यटन सत्र का आगाज पारंपरिक राजस्थानी अंदाज में हुआ। ढोल-नगाड़ों की थाप, लोक धुनों की गूंज और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियों के बीच सैलानियों का स्वागत किया गया। वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने देसी और विदेशी आगंतुकों को तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया, जिसके बाद सफारी वाहनों का काफिला जंगल की ओर रवाना हुआ। पहले ही दिन बड़ी संख्या में पहुंचे सैलानियों ने साबित कर दिया कि प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को उनके मूल परिवेश में निहारने का आकर्षण कितना गहरा है। गणेश धाम पर लोक संस्कृति के रंग और प्रशासनिक मौजूदगी पर्यटन सत्र के उद्घाटन अवसर पर पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार को आकर्षक रंगोलियों से सजाया गया था। स्थानीय लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। इस अवसर पर प्रशासनिक और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिला कलेक्टर कानाराम, मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह, उपवन संरक्षक मानस सिंह तथा उपवन संरक्षक पर्यटन संजीव शर्मा ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर सफारी वाहनों को रवाना किया। अधिकारियों ने आगंतुकों को सुरक्षित और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं। पहले ही दौर की सफारी में सैकड़ों की तादाद में प्रकृति प्रेमी जंगल की सैर पर निकले। इनमें स्कूली छात्र-छात्राओं की भी अच्छी-खासी तादाद रही, जो वन्यजीवों की दुनिया को करीब से देखने को लेकर बेहद उत्साहित दिखे। स्वयं जिला कलेक्टर कानाराम ने भी अपनी धर्मपत्नी के साथ प्रथम पारी में सफारी का आनंद लिया और व्यवस्थाओं को परखा। बाघों के दीदार की आस और समृद्ध जैव विविधता लगभग नब्बे दिनों के ठहराव के बाद पार्क में दाखिल हुए पर्यटकों के चेहरों पर रोमांच साफ झलक रहा था। बारिश के मौसम के बाद पूरा जंगल हरी चादर ओढ़े नजर आ रहा है, जिसकी प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। सैलानी केवल बाघ के दीदार की उम्मीद लेकर ही नहीं पहुंचे, बल्कि जंगल के समूचे पारिस्थितिकी तंत्र का अनुभव करने आए हैं। रणथंभौर की गिनती देश के उन चुनिंदा अभयारण्यों में होती है, जहां बाघों के अलावा भी वन्यजीवों की भारी विविधता मौजूद है। यहां आने वाले लोगों को अक्सर तेंदुआ, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर तथा जलीय क्षेत्रों में मगरमच्छ आसानी से देखने को मिल जाते हैं। वन प्रशासन ने सैलानियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई पुख्ता इंतजाम किए हैं। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि पार्क परिसर में नियमों की अवहेलना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जंगल के नैसर्गिक माहौल और वन्यजीवों की दिनचर्या में किसी भी तरह का इंसानी दखल न हो, इसकी सख्त निगरानी की जा रही है। सरिस्का का आकर्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा राजस्थान का वन्यजीव पर्यटन केवल रणथंभौर तक सीमित नहीं है, बल्कि अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व भी इस परिदृश्य का एक प्रमुख स्तंभ है। अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों, सघन जंगलों और समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर से घिरा सरिस्का भी देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। रणथंभौर और सरिस्का दोनों ही राज्य में बाघ संरक्षण और ईको-टूरिज्म के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं। सवाई माधोपुर में सफारी की शुरुआत होने से स्थानीय व्यापार जगत में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। मानसून के दौरान सुस्त पड़े होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, हैंडीक्राफ्ट की दुकानें और सफारी वाहन संचालकों के कारोबार में अब तेजी आने के पूरे आसार हैं। पहले दिन उमड़ी भीड़ ने स्थानीय पर्यटन उद्योग को एक नई ऊर्जा दी है। जिला प्रशासन और वन विभाग का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पूरे सत्र में सैलानियों को सुगम, सुरक्षित और अनुशासित सफारी अनुभव प्रदान किया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन दोनों का संतुलन बना रहे। इसका आप पर असर रणथंभौर नेशनल पार्क के खुलने से राज्य के पर्यटन उद्योग और वन्यजीव प्रेमियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा। • भारत में: देश भर के वन्यजीव प्रेमी और फोटोग्राफर अब सर्दियों के सत्र के लिए अपनी जंगल सफारी की योजना बना सकते हैं। मानसून के बाद सघन हरियाली के बीच बाघ, तेंदुए और अन्य दुर्लभ जीवों को देखने का यह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। • राजस्थान में: सवाई माधोपुर और आसपास के जिलों में होटल, होमस्टे, टैक्सी और गाइड जैसे पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को नया काम मिलेगा। तीन महीने की मंदी के बाद स्थानीय कारीगरों और छोटे दुकानदारों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। • छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए: पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विद्यार्थियों के लिए फील्ड स्टडी और शैक्षणिक भ्रमण के अवसर फिर से शुरू हो गए हैं। स्कूल और कॉलेज अब प्रकृति के बीच जाकर जैव विविधता को समझने के लिए ग्रुप टूर आयोजित कर सकते हैं। • सैलानियों के लिए: पार्क भ्रमण के दौरान वन विभाग द्वारा तय किए गए सुरक्षा और गति नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा। जंगल के नियमों का उल्लंघन करने पर सफारी प्रतिबंध या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ रणथंभौर नेशनल पार्क को हर साल मानसूनी बारिश और वन्यजीवों के प्रजनन चक्र के चलते तीन महीने के लिए बंद रखा जाता है, जिसके समापन के बाद इसे विधिवत खोला गया है। • मानसूनी बंदी का नियम: मानसून के दौरान भारी बारिश से वन क्षेत्र के कच्चे रास्ते और ट्रैक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे वाहनों का संचालन खतरनाक हो जाता है। इसके अलावा बारिश का मौसम वन्यजीवों का मुख्य प्रजनन काल होता है, जिसके चलते उन्हें मानवीय दखल से दूर रखना आवश्यक होता है। • नियमित सत्र की शुरुआत: हर वर्ष अक्टूबर माह की शुरुआत में मौसम सामान्य होते ही पर्यटन सत्र फिर से शुरू किया जाता है। तीन माह के ठहराव के बाद सड़कों की मरम्मत और आवश्यक सुरक्षा जांच पूरी कर पार्क के द्वार खोले जाते हैं। • प्रशासनिक तैयारी: वन विभाग ने सत्र शुरू करने से पहले सफारी रूटों का निरीक्षण किया और गणेश धाम पर औपचारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले दिन मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था और वाहन संचालन का जायजा लिया। सवाल-जवाब 1. रणथंभौर नेशनल पार्क कितने समय बाद पर्यटकों के लिए खोला गया है? मानसून के चलते तीन महीने के अंतराल के बाद रणथंभौर नेशनल पार्क को फिर से खोला गया है। 2. पर्यटन सत्र के पहले दिन सैलानियों का स्वागत किस प्रकार किया गया? गणेश धाम मुख्य द्वार पर पर्यटकों का राजस्थानी परंपरा से तिलक लगाकर, रंगोली सजाकर और लोक नृत्य व संगीत के साथ स्वागत किया गया। 3. सफारी वाहनों को किस द्वार से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया? वाहनों को सवाई माधोपुर स्थित गणेश धाम के मुख्य प्रवेश द्वार से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा हरी झंडी दिखाई गई। 4. पहले दिन सफारी की शुरुआत में कौन-से प्रमुख अधिकारी मौजूद थे? जिला कलेक्टर कानाराम, मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह, उपवन संरक्षक मानस सिंह और उपवन संरक्षक पर्यटन संजीव शर्मा मौके पर उपस्थित थे। 5. रणथंभौर में बाघों के अलावा कौन-से अन्य प्रमुख वन्यजीव पाए जाते हैं? यहाँ बाघों के अलावा तेंदुआ, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर और मगरमच्छ जैसे जीव पाए जाते हैं। 6. राजस्थान में रणथंभौर के अलावा दूसरा कौन-सा बड़ा टाइगर रिजर्व प्रसिद्ध है? अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व राजस्थान का दूसरा प्रमुख वन्यजीव केंद्र है। https://trendkia.com/rajasthan/sawai-madhopur-men-vanyajiva-premiyon-ka-tanta-tina-maha-bada-shuru-hui-saphari-40918 TrendKia — Har trend, sabse pehle.