सेप्टिक टैंक हादसे में छात्रा की मौत के बाद डीग के 40 से ज्यादा मदरसों पर जांच का शिकंजा डीग जिले के मील मदरसे में सेप्टिक टैंक हादसे में 16 साल की छात्रा की मौत के बाद प्रशासन ने मेवात इलाके के 40 से ज्यादा आवासीय मदरसों की जांच के आदेश दिए हैं, मदरसे को पंजीकरण के लिए तीन दिन का वक्त दिया गया है। राजस्थान के डीग जिले में एक बालिका मदरसा में सेप्टिक टैंक साफ कराते समय हुई 16 साल की छात्रा की मौत ने पूरे मेवात क्षेत्र के मदरसों की जांच का रास्ता खोल दिया है। गोपालगढ़ थाना इलाके के मील गांव स्थित इस मदरसे में तीन दिन पहले गुरुवार रात हुए इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा छात्राएं भी घायल हुई थीं। रविवार को अफसरों का दौरा, बदबू से लगाने पड़े मास्क रविवार को भरतपुर रेंज की आईजी डॉ. प्रीति चंद्रा, डीग कलेक्टर मयंक मनीष और एसपी कुंबले शरण गोपीनाथ मील मदरसे पहुंचे। छात्रावास में इतनी तेज बदबू फैली थी कि अफसरों को मास्क लगाकर अंदर जाना पड़ा। इस हालत को देखकर आईजी ने मदरसा संचालन समिति को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि जब अफसर कुछ मिनट भी वहां नहीं रुक पा रहे, तो सोचिए वहां रहने वाली बच्चियां रोज किस हाल में गुजारा करती होंगी। उन्होंने नाबालिग छात्राओं से सेप्टिक टैंक साफ करवाने के तरीके को अमानवीय बताया। पंजीकरण तक नहीं था, तीन दिन की मोहलत निरीक्षण में एक और गंभीर बात सामने आई, मदरसे ने राज्य सरकार के नियमों के हिसाब से अपना पंजीकरण तक नहीं कराया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने मदरसा ट्रस्ट को तीन दिन के अंदर पंजीकरण पूरा करने का नोटिस थमा दिया है। अगर तय समय में यह काम नहीं हुआ तो मदरसे का संचालन ही बंद कराया जा सकता है। अब जिले के सभी 40 से ज्यादा मदरसों पर नजर आईजी डॉ. प्रीति चंद्रा ने जांच अधिकारी को साफ निर्देश दिया कि सिर्फ मील मदरसे तक सीमित न रहें, बल्कि मेवात इलाके के हर आवासीय मदरसे का निरीक्षण किया जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा और सफाई से जुड़ा कोई भी समझौता कहीं और भी सामने न आ जाए। डीग जिले में इस वक्त करीब 40 से ज्यादा मदरसे चल रहे हैं, और अब इन सभी की बारी-बारी से पड़ताल होगी। इसके साथ ही कलेक्टर ने पहले ही एक पांच सदस्यीय जांच समिति बना रखी है, जिसने अपना काम शुरू कर दिया है। यह समिति ट्रस्ट से जुड़े सभी जरूरी कागजात जुटाकर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी। गुरुवार रात हुआ था हादसा दरअसल तीन दिन पहले गुरुवार की रात मील मदरसे में छात्राओं से ही सेप्टिक टैंक साफ करवाया जा रहा था, तभी यह हादसा हो गया। इसमें 16 साल की एक छात्रा की जान चली गई, जबकि एक दर्जन से ज्यादा बच्चियां घायल हो गईं। घटना की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और मौके पर टीमें पहुंच गईं। इसी के बाद कलेक्टर ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। इसका आप पर असर • भारत में: यह घटना देशभर के अनरजिस्टर्ड आवासीय मदरसों और छात्रावासों की निगरानी बढ़ाने का दबाव बना सकती है। • भरतपुर-डीग में: यहां के अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि प्रशासन अब जिले के सभी 40 से ज्यादा मदरसों में सुरक्षा और सफाई व्यवस्था की जांच करेगा, जिससे बच्चों की स्थिति सुधरने की उम्मीद है। सवाल-जवाब 1. हादसा कहां और कब हुआ? यह हादसा डीग जिले के गोपालगढ़ थाना इलाके के मील गांव स्थित बालिका मदरसे में तीन दिन पहले गुरुवार रात हुआ। 2. हादसे में किसकी मौत हुई? सेप्टिक टैंक साफ कराते समय 16 साल की एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से ज्यादा छात्राएं घायल हुईं। 3. निरीक्षण में क्या सामने आया? निरीक्षण में पता चला कि छात्रावास में तेज बदबू फैली थी और मदरसे का राज्य सरकार के नियमों के तहत पंजीकरण तक नहीं हुआ था। 4. मदरसा ट्रस्ट को क्या नोटिस मिला? जिला प्रशासन ने ट्रस्ट को तीन दिन के भीतर पंजीकरण कराने का नोटिस दिया है, वरना मदरसे के संचालन पर कार्रवाई होगी। 5. अब आगे क्या होगा? आईजी के निर्देश पर डीग जिले के सभी 40 से ज्यादा आवासीय मदरसों का निरीक्षण किया जाएगा और कलेक्टर की पांच सदस्यीय समिति अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी। https://trendkia.com/rajasthan/septika-tainka-hadase-men-chhatra-ki-mauta-ke-bada-deeg-ke-40-se-jyada-madarason-para-jancha-ka-shiknja-9014 TrendKia — Har trend, sabse pehle.