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  "title": "शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध मृत्यु पर आक्रोश, न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने संतों का महाधरना",
  "summary": "सिरोही के शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध मृत्यु के बाद साधु-संतों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस थाने के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।",
  "content": "राजस्थान के सिरोही जिले में संतों की असामयिक और संदिग्ध मृत्यु को लेकर धार्मिक समाज में असंतोष चरम पर पहुंच गया है। शिवगंज क्षेत्र में संत त्रिवेणीगिरी महाराज के अचानक चले जाने और उनकी मृत्यु के हालात स्पष्ट न होने से आक्रोशित साधु-संतों ने अब बड़े आंदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है। स्थानीय पुलिस द्वारा अब तक की गई प्रारंभिक जांच की दिशा से असंतुष्ट होकर बड़ी संख्या में संत समाज के लोग शिवगंज थाने के ठीक सामने धरने पर बैठ गए हैं। धरना दे रहे साधुओं का स्पष्ट कहना है कि इस पूरे प्रकरण में बिना किसी ढिलाई के निष्पक्ष छानबीन होनी चाहिए, घटना से जुड़े प्रत्येक प्रत्यक्ष और डिजिटल साक्ष्य का बारीकी से परीक्षण किया जाना चाहिए और यदि इसमें किसी की संलिप्तता सामने आती है तो दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।\n\nशिवगंज थाने के सामने संतों का डेरा और वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने की मांग\nशनिवार सुबह 11 बजे तय कार्यक्रम के अनुसार साधु-संतों ने शिवगंज पुलिस थाने का घेराव करने का आह्वान किया था। आह्वान के पश्चात बड़ी संख्या में संन्यासियों और श्रद्धालुओं ने थाने के मुख्य द्वार के सामने अपना पड़ाव डाल दिया। धरने पर बैठे संतों ने सिरोही के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को सीधे धरना स्थल पर आकर बातचीत करने की मांग रखी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर जब तक शीर्ष अधिकारी स्वयं मौके पर आकर इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच का ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। संतों ने इस न्याय की लड़ाई में 36 कौम के आम नागरिकों और सनातन परंपरा में विश्वास रखने वाले सभी वर्गों से खुलकर समर्थन देने का अनुरोध किया है।\n\nथाने के बाहर निरंतर हर-हर महादेव और सनातन बचाओ के उद्घोष गूंज रहे हैं। सभा को संबोधित करते हुए प्रमुख साधु-संतों ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य केवल निष्पक्ष न्याय हासिल करना है, किसी से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। संतों का तर्क है कि घटनाक्रम से जुड़े तमाम वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों की फॉरेंसिक और वैज्ञानिक समीक्षा कराई जानी चाहिए ताकि कोई भी संदेह शेष न रहे। संतों ने आशंका जताई कि प्रारंभिक स्तर पर मामले को सामान्य रूप से देखा जा रहा है, जबकि इसमें आपराधिक षड्यंत्र अथवा हत्या का अंदेशा भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। संत समाज ने पुलिस प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि वह किसी भी बाहरी या राजनीतिक दबाव में आए बिना वस्तुनिष्ठ होकर अनुसंधान करे।\n\nधरना स्थल पर पहुंचे पूर्व सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा\nशिवगंज में जारी इस तनावपूर्ण माहौल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद साधु-संतों से मुलाकात की और उनकी मांगों की जानकारी ली। धरना स्थल पर सिरोही के पुलिस अधीक्षक को बुलाए जाने की मांग लगातार तेज होती रही। प्रदर्शन के दौरान एकत्र जनसमूह में से कुछ लोगों ने सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया। हालांकि संत समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक पूज्य संत की अस्वाभाविक मौत के कारणों का सच जानने और न्याय सुनिश्चित करने का सवाल है। संतों का कहना है कि उनकी निगाहें अब जिला प्रशासन और राज्य पुलिस के भावी कदमों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या औपचारिक रुख अपनाते हैं।\n\nझुंझुनूं के लोहार्गल धाम में संत सूरजदास महाराज की मृत्यु का ताजा संदर्भ\nसंत त्रिवेणीगिरी महाराज की मृत्यु का यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब कुछ ही दिनों पूर्व राजस्थान के झुंझुनूं जिले में भी साधु की संदिग्ध मौत पर ऐसा ही जनाक्रोश देखा गया था। झुंझुनूं के प्रसिद्ध तीर्थ लोहार्गल धाम स्थित बरखंडी बाबा मंदिर के संत सूरजदास महाराज का शव पहाड़ी इलाके में एक गहरी खाई के भीतर झाड़ियों में फंसा हुआ मिला था। उस घटना के सामने आते ही पूरे अंचल में भारी हड़कंप मच गया था। संत समाज ने तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए हत्या की प्रबल आशंका जताई थी और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि महाराज के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान और विधिवत तरीके से खाई से बाहर नहीं निकाला गया तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। उस समय संतों के उग्र तेवरों को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत भारी पुलिस बल तैनात किया था और लोहार्गल धाम में भारी भीड़ जमा हो गई थी।\n\nआश्रमों में संतों की सुरक्षा और मुकदमों की पारदर्शी छानबीन पर उठे सवाल\nशिवगंज और लोहार्गल की घटनाओं ने समूचे प्रदेश में मंदिरों, धार्मिक मठों और आश्रमों में निवास करने वाले साधु-संतों की व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर विमर्श छेड़ दिया है। दूरदराज की पहाड़ियों, जंगलों और एकांत स्थलों पर बने धार्मिक ठिकानों पर सेवा-साधना करने वाले संतों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात अब खुलकर सामने आ रही है। संत समुदाय का कहना है कि ऐसी किसी भी अस्वाभाविक मृत्यु की सूचना मिलने पर पुलिस को शुरुआत से ही अत्यंत गंभीरता और तत्परता दिखानी चाहिए, ताकि किसी भी साक्ष्य के नष्ट होने का खतरा न रहे। शिवगंज में संत त्रिवेणीगिरी महाराज के मामले में भी मुख्य मांग यही है कि साक्ष्यों की पारदर्शी जांच कर वास्तविकता को जनता के सामने लाया जाए। अब यह जिला प्रशासन की कार्यकुशलता पर निर्भर करता है कि वह साधु समाज के विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए कितनी तेजी से निष्पक्ष कदम उठाता है।\n\nइसका आप पर असर\nइस विरोध प्रदर्शन का सीधा असर स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और आसपास के नागरिकों की दिनचर्या पर पड़ रहा है।\n\n• राजस्थान में: राज्य भर के धार्मिक स्थलों और आश्रमों में रहने वाले साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक निगरानी और सतर्कता बढ़ सकती है। इससे संवेदनशील तीर्थ क्षेत्रों और मठों के आसपास पुलिस गश्त को सुदृढ़ किया जा सकता है।\n• सिरोही में: शिवगंज थाने के बाहर जारी इस धरने के कारण क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और आम आवागमन प्रभावित हो सकता है। स्थानीय निवासियों को थाने और मुख्य बाजार के मार्गों पर संभावित भीड़भाड़ और सुरक्षा जांच के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है।\n• न्याय प्रक्रिया में: पुलिस जांच में डिजिटल सबूतों और वीडियो रिकॉर्डिंग के परीक्षण पर विशेष दबाव बना रहेगा। मामले की पारदर्शी जांच से ही स्थानीय समुदाय में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल हो सकेगा।\n• धार्मिक समुदाय पर: राज्य के विभिन्न मठ-मंदिरों से जुड़े संत समाज में एकजुटता बढ़ रही है। यदि प्रशासन शीघ्र निर्णय नहीं लेता है तो आंदोलन का दायरा अन्य जिलों तक भी फैल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह आंदोलन संत त्रिवेणीगिरी महाराज की अस्वाभाविक परिस्थितियों में हुई मृत्यु और उसके बाद पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई से असंतोष के कारण शुरू हुआ है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए संत समाज द्वारा हत्या की आशंका जताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।\n\n• संदिग्ध मौत और अविश्वास: संत त्रिवेणीगिरी महाराज की मृत्यु के सटीक कारणों पर स्थिति स्पष्ट न होने से संत समाज में आशंकाएं गहरा गईं। पुलिस द्वारा शुरुआत में की गई जांच से संतुष्ट न होकर संतों ने हत्या की आशंका जताते हुए मोर्चा खोला।\n• वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति: प्रदर्शनकारी साधु शुरुआत से ही सिरोही के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। मौके पर शीर्ष अधिकारियों की सीधी मौजूदगी न होने से नाराजगी और बढ़ गई।\n• लोहार्गल की हालिया पृष्ठभूमि: कुछ ही दिन पहले झुंझुनूं के लोहार्गल धाम में संत सूरजदास महाराज का शव खाई में मिला था, जिससे संत समाज पहले से ही सुरक्षा को लेकर संवेदनशील और आक्रोशित था। उस पूर्व घटना की पृष्ठभूमि ने शिवगंज में विरोध की गति को और तेज कर दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शिवगंज थाने के बाहर साधु-संत धरना क्यों दे रहे हैं?\nसाधु-संत संत त्रिवेणीगिरी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।\n\n2. धरना स्थल पर संतों की प्रमुख प्रशासनिक मांग क्या है?\nसंतों की मुख्य मांग है कि सिरोही के पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर स्वयं धरना स्थल पर आएं और निष्पक्ष जांच की स्थिति स्पष्ट करें।\n\n3. क्या धरने में कोई राजनीतिक या प्रशासनिक प्रतिनिधि पहुंचा?\nहां, पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने वहां मौजूद साधु-संतों से बातचीत की।\n\n4. हाल ही में झुंझुनूं में किस संत की मृत्यु को लेकर आक्रोश हुआ था?\nझुंझुनूं जिले के लोहार्गल धाम स्थित बरखंडी बाबा मंदिर के संत सूरजदास महाराज की संदिग्ध मौत को लेकर भारी जनआक्रोश देखा गया था।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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