# सीकर और बीकानेर के युवाओं ने छेड़ी जंग, मिलावट के खिलाफ 700 किमी पैदल चलकर दिल्ली पहुंचेगी यात्रा

> खाने-पीने की चीजों में मिलावट और खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल के विरोध में बीकानेर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक 700 किलोमीटर लंबी 'फूड रियलिटी मार्च' निकाली जा रही है, जिसका मंगलवार को फतेहपुर शेखावाटी पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/sikar-aura-bikaner-ke-yuvaon-ne-chheri-jnga-milavata-ke-khilapha-700-kimi-paidala-chalakara-delhi-pahunchegi-yatra-30757 · **Language:** Hindi
**Tags:** खाद्य सुरक्षा, फूड रियलिटी मार्च, मिलावट, सीकर न्यूज, बीकानेर न्यूज, फतेहपुर शेखावाटी, जंतर-मंतर

खानपान की वस्तुओं में मिलावट, हानिकारक रसायनों के बढ़ते प्रयोग और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सीकर तथा बीकानेर इलाके के युवाओं ने एक बड़ा जनआंदोलन शुरू किया है। 'फूड रियलिटी मार्च' के बैनर तले बीकानेर से शुरू हुई यह पदयात्रा दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाएगी, जिसकी कुल दूरी 700 किलोमीटर से अधिक है। चार सितंबर से शुरू हुआ यह पैदल कारवां मंगलवार सुबह फतेहपुर शेखावाटी पहुंचा, जहां बुधगिरी मढ़ी के नजदीक स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पूरा अभियान गांव-गांव और नगर-नगर पहुंचकर लोगों को भोजन में मिलावट और सेहत के लिए नुकसानदेह केमिकल्स के प्रति सचेत कर रहा है। इस पूरी पदयात्रा की कमान दमित गहलोत के हाथों में है, जबकि जयंत मूंड-मूंड के मार्गदर्शन में इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, अगले 25 दिनों के दौरान यह काफिला रतनगढ़, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, सीकर, जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़ और गुरुग्राम से गुजरते हुए अंत में दिल्ली पहुंचेगा। इस सफर के दौरान जगह-जगह लोगों से संवाद स्थापित कर उन्हें रोजाना इस्तेमाल होने वाले खानपान की गुणवत्ता परखने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया है कि बाजार में बिकने वाले नकली दूध, मावा, पनीर, आटा और मसालों में मिलावट आम जनता की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुकी है। इसके अलावा, फलों और फसलों की पैदावार बढ़ाने या उन्हें जल्दी पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले जहरीले रसायनों पर भी गहरी चिंता प्रकट की गई है। युवाओं का मानना है कि खाद्य सुरक्षा केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आने वाली नस्लों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ता है।

इस 'फूड रियलिटी मार्च' के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कुल 12 मुख्य मांगें रखी जा रही हैं। इनमें मिलावट करने वाले कारोबारियों के खिलाफ सख्त सजा का नियम बनाने, फलों और फसलों को पकाने में काम आने वाले खतरनाक रसायनों पर पूरी तरह रोक लगाने और खाद्य उत्पादों के पैकेट पर हिंदी भाषा में साफ-साफ जानकारी छापने की बात शामिल है। इसके अलावा, हर जिले में मुफ्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने और मिलावट से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग भी उठाई गई है। पदयात्रियों का कहना है कि महज कानून बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि मैदान पर उसकी असरदार निगरानी और सख्ती से पालना भी उतनी ही जरूरी है।

बीकानेर से उठी यह आवाज अब धीरे-धीरे दिल्ली की तरफ अग्रसर हो रही है। रास्ते में पड़ने वाले तमाम कस्बों और गांवों से गुजरते हुए ये पदयात्री आम नागरिकों को अपनी इस मुहिम के साथ जोड़ रहे हैं। आयोजकों की योजना के मुताबिक, दिल्ली पहुंचने के बाद जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा और सरकार के सामने अपनी तमाम मांगें रखी जाएंगी। युवाओं की साफ मांग है कि देश के आम नागरिकों को शुद्ध, सुरक्षित और मिलावट रहित खानपान उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कड़े कदम उठाने चाहिए और मौजूदा व्यवस्था को पूरी सख्ती से अमलीजामा पहनाना चाहिए।

## इसका आप पर असर
खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ शुरू हुए इस बड़े आंदोलन का सीधा असर आम消费者 की सेहत, मिलावटखोरों पर नकेल और खाद्य सुरक्षा कानूनों के क्रियान्वयन पर पड़ेगा।

- **भारत में:** देश भर के उपभोक्ताओं के लिए यह आंदोलन शुद्ध और मिलावट रहित खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाने की मांग को बढ़ावा देता है। इससे भविष्य में खाद्य सुरक्षा मानकों में सुधार होने की उम्मीद जगती है।
- **फतेहपुर शेखावाटी और सीकर में:** स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजमर्रा के खानपान की गुणवत्ता के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिससे वे मिलावटी दूध, मावा और मसालों की पहचान कर सकें। इससे स्थानीय बाजारों में मिलावटखोरों पर नैतिक दबाव बढ़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
बाजार में बिकने वाले नकली खाद्य उत्पादों और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों के अनियंत्रित इस्तेमाल के कारण इस पदयात्रा की जरूरत पड़ी।

- **व्यापक मिलावट:** बाजार में नकली दूध, मावा, पनीर, आटा और मसालों की खुलेआम बिक्री आम जनता के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है।
- **त्वरित पैदावार के रसायन:** फसलों और फलों को जल्दी पकाने या उनका उत्पादन कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए घातक केमिकल्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
- **कानूनी सख्ती की कमी:** मौजूदा कानूनों की प्रभावी निगरानी और सख्त पालना न होने के कारण मिलावटखोरों के हौंसले बुलंद हैं, जिसके खिलाफ युवा सड़कों पर उतरे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फूड रियलिटी मार्च कहाँ से कहाँ तक निकाली जा रही है?
यह पदयात्रा बीकानेर से शुरू होकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक जा रही है।

### 2. इस पदयात्रा की कुल दूरी कितनी है?
यह पदयात्रा 700 किलोमीटर से अधिक लंबी है।

### 3. यह मार्च कब शुरू हुआ था और फतेहपुर शेखावाटी कब पहुँचा?
यह मार्च 4 सितंबर को शुरू हुआ था और मंगलवार सुबह फतेहपुर शेखावाटी पहुँचा।

### 4. इस पदयात्रा का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस पदयात्रा का नेतृत्व दमित गहलोत कर रहे हैं और जयंत मूंड-मूंड इसका मार्गदर्शन कर रहे हैं।

### 5. सरकार के सामने कुल कितनी प्रमुख मांगें रखी जा रही हैं?
सरकार के सामने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी 12 प्रमुख मांगें रखी जा रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
युवाओं का यह पैदल मार्च सामाजिक बदलाव और नागरिक अधिकारों के लिए खड़े होने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

- **बड़ी समस्या के खिलाफ पहल:** व्यक्तिगत स्तर पर चुप बैठने के बजाय एक गंभीर सामाजिक समस्या के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठाई जा सकती है।
- **जागरूकता अभियान:** किसी भी बड़े बदलाव की शुरुआत जमीन से जुड़कर लोगों को शिक्षित करने और उन्हें जोड़ने से होती है।
- **दृढ़ संकल्प:** 700 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा यह साबित करती है कि पक्के इरादे से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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