# सीकर में आधुनिक श्रवण कुमार: 21 साल के पोते ने 42 किलो जल के साथ दादी को कांवड़ में बैठाकर पूरी की 45 किलोमीटर की पैदल यात्रा

> सीकर के 21 वर्षीय राहुल कुमार ने अपनी बुजुर्ग दादी लच्छी देवी को कांवड़ में बैठाकर 45 किलोमीटर की अनोखी पैदल यात्रा पूरी की। इस कांवड़ के एक पलड़े में दादी बैठी थीं तो दूसरे पलड़े में 42 किलो जल रखा था।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/sikar-men-21-sala-ke-pote-ne-42-kilo-jala-ke-satha-dadi-ko-kawad-men-baithakara-puri-ki-45-kilomitara-ki-paidala-yatra-20350 · **Language:** Hindi
**Tags:** सीकर न्यूज, कांवड़ यात्रा, श्रवण कुमार, लोहार्गल, सावन 2025

सावन के महीने में सीकर जिले से परिवार के प्रति अगाध प्रेम और अनोखी भक्ति का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। पौराणिक कथाओं में जिस तरह श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर तीर्थ यात्रा कराई थी, उसी आधुनिक तर्ज पर 21 साल के राहुल कुमार अपनी बुजुर्ग दादी लच्छी देवी को कांवड़ में बैठाकर पैदल तीर्थ यात्रा पर निकले। उन्होंने कुल 45 किलोमीटर की इस कठिन और अनूठी पदयात्रा को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस विशेष कांवड़ के एक पलड़े में उनकी दादी बैठी हुई थीं, जबकि दूसरे पलड़े में जल से भरी स्टील की मटकियां रखी हुई थीं। राहुल की इस यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था की मिसाल पेश की, बल्कि बुजुर्गों की सेवा और सम्मान का एक अनूठा उदाहरण भी समाज के सामने रखा है।

 

## लोहार्गल से शुरू हुई यात्रा और सीकर में स्वागत

राहुल ने अपनी यह यात्रा शेखावाटी के मिनी हरिद्वार के रूप में प्रसिद्ध तीर्थराज लोहार्गल से शुरू की थी। वे वहां स्थित गौमुख से जल लेकर अपने पैतृक गांव रामपुरा की ओर रवाना हुए थे। उन्होंने 20 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे अपनी इस यात्रा का आगाज किया था। सफर के दौरान उन्होंने पहले दिन की रात रामपुरा में और दूसरे दिन पिपराली में विश्राम किया था। इसके बाद वे तीसरे दिन सीकर पहुंचे, जहां नगर सेठ के रूप में विख्यात कल्याण मंदिर में उनका अत्यंत जोरदार और भव्य स्वागत किया गया। इस पूरी यात्रा के दौरान उनके परिवार के अन्य सदस्य भी लगातार उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे और उनका उत्साहवर्धन कर रहे थे। अंततः 23 अगस्त की शाम को वे अपनी इस यात्रा को पूरा करते हुए सकुशल अपने गांव वापस लौट आए।

 

## एक पलड़े में 42 किलो जल और दूसरे में बैठीं दादी

इस अनोखी कांवड़ का कुल वजन लगभग 81 किलोग्राम था। राहुल के मुताबिक, एक पलड़े में 42 किलो जल से भरी स्टील की मटकियां सजाई गई थीं, जबकि दूसरे पलड़े पर एक चौकी रखकर उस पर उनकी दादी लच्छी देवी को बैठाया गया था। शुरुआत में राहुल का विचार सिर्फ लोहार्गल से लगभग एक-एक क्विंटल जल लाने का था, लेकिन तभी उन्होंने एक प्रसिद्ध श्रवण कुमार का भजन सुना। उसी भजन ने उनके मन में विचार जगाया कि क्यों न दादी को भी कांवड़ में बैठाकर यह यात्रा की जाए। राहुल का मानना है कि कांवड़ में केवल जल भरकर लाना तो आम बात है, लेकिन वे कुछ ऐसा करना चाहते थे जो समाज के लिए एक प्रेरणा बने। उनके मन में यह भावना आई कि आज के आधुनिक दौर में भी सतयुग जैसे संस्कार और सेवाभाव को जीवित रखा जा सकता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपनी दादी को कांवड़ में बैठाकर इस पदयात्रा की शुरुआत कर दी थी।

 

## हर 100 मीटर पर विश्राम और मजबूत तैयारी

लंबी दूरी और भारी वजन होने के बावजूद राहुल ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ते रहे। कांवड़ के मुख्य बांस के चारों तरफ अच्छी तरह फोम लपेटी गई थी और उसे मजबूत रस्सियों से बांधा गया था, ताकि यात्रा के दौरान कांवड़ का संतुलन पूरी तरह बना रहे। राहुल भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए आगे बढ़ रहे थे और सफर के दौरान लगभग हर 100 मीटर की दूरी तय करने के बाद थोड़ा विश्राम करते थे। इस कठिन यात्रा में उनके साथ बनवारी लाल बरवड़, रोहित शर्मा, इंद्रपाल शेषमल और मनोज बरवड़ जैसे परिवार के अन्य लोग भी पूरी निष्ठा के साथ उनका सहयोग कर रहे थे।

 

## भावुक हुईं दादी लच्छी देवी

इस अनोखी तीर्थयात्रा का हिस्सा बनीं बुजुर्ग दादी लच्छी देवी इस दौरान बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने पोते और परिवार के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके बच्चे और नाती-पोते बहुत अच्छे हैं, जिन्होंने बुढ़ापे में उन्हें इस प्रकार तीर्थयात्रा करवा दी। उन्होंने आगे कहा कि सारी मेहनत उनके बच्चे कर रहे हैं और भगवान सभी को ऐसे ही आज्ञाकारी नाती-पोते दे। भावुक होते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अब तो उनका समय श्मशान जाने का हो चला है, लेकिन उनके बच्चों ने उन्हें जीते-जी तीर्थों के दर्शन करवा दिए।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह अनोखी यात्रा देश भर में परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान और पारंपरिक संस्कारों की प्रेरणा देती है।

**सीकर में:** लोहार्गल से सीकर तक के मार्ग और स्थानीय मंदिरों के आसपास इस यात्रा के स्वागत के दौरान यातायात व्यवस्था में कुछ समय के लिए बदलाव देखा गया।

## सवाल-जवाब

### 1. राहुल कुमार ने कुल कितने किलोमीटर की यात्रा तय की?
राहुल कुमार ने अपनी बुजुर्ग दादी को कांवड़ में बैठाकर कुल 45 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की।

### 2. कांवड़ का कुल वजन कितना था?
कांवड़ के दोनों पलड़ों का कुल वजन लगभग 81 किलोग्राम था, जिसमें 42 किलो जल और दादी बैठी थीं।

### 3. यह कांवड़ यात्रा कहां से शुरू हुई थी?
यह यात्रा शेखावाटी के मिनी हरिद्वार कहे जाने वाले तीर्थराज लोहार्गल से शुरू हुई थी।

### 4. यात्रा के दौरान दादी लच्छी देवी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
दादी लच्छी देवी बेहद भावुक हो गईं और कहा कि बच्चों ने उन्हें बुढ़ापे में तीर्थयात्रा करवा दी है।

## प्रेरणा और सबक
**प्रेरणा और सबक:**

- **माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा:** राहुल ने साबित किया कि आधुनिक समय में भी अपनों के प्रति समर्पण और सेवाभाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सकती है।
- **अनोखी सोच और रचनात्मकता:** केवल पारंपरिक तरीके से पूजा करने के बजाय समाज के लिए एक सकारात्मक मिसाल पेश करने का साहसिक निर्णय लिया।
- **कड़ी मेहनत और धैर्य:** 81 किलो वजन और 45 किलोमीटर की लंबी पैदल दूरी को बिना थके हर 100 मीटर पर विश्राम करते हुए सफलतापूर्वक पूरा किया।
- **परिवार का सहयोग:** मुश्किल और कठिन लक्ष्यों को हासिल करने में पारिवारिक एकजुटता और हौसला अफजाई सबसे बड़ी ताकत बनती है।

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