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  "type": "article",
  "title": "सीकर में बेरुखा हुआ मानसून, सावन में 4 साल की सबसे कम बारिश से फसलों पर गहराया संकट",
  "summary": "राजस्थान के सीकर जिले में इस बार सावन के दौरान महज 101.77 एमएम औसत बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले 4 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। कम बारिश के कारण क्षेत्र के बांध खाली पड़े हैं और बाजरा, मूंगफली व दलहन की फसलों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।",
  "content": "राजस्थान के सीकर जिले में इस वर्ष मानसून का रुख काफी चिंताजनक बना हुआ है। पवित्र सावन माह के दौरान बारिश की भारी कमी के कारण कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सिंचाई विभाग की ओर से जारी हालिया रिपोर्ट दर्शाती है कि सावन के महीने में जिले के भीतर औसत वर्षा का आंकड़ा पिछले 4 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर चला गया है। मानसून सीजन का बड़ा हिस्सा गुजर जाने के बाद भी बादलों की बेरुखी से स्थानीय जलस्रोतों और बांधों में पानी की आवक नगण्य रही है, जिससे खरीफ फसलों को बचाना किसानों के लिए कठिन चुनौती बनता जा रहा है।\n\nसावन माह में बारिश के आंकड़े और पिछले वर्षों से तुलना\nसिंचाई विभाग द्वारा जुटाए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में सावन अवधि के दौरान सीकर में अब तक महज 101.77 एमएम औसत वर्षा ही दर्ज की जा सकी है। यह आंकड़ा पिछले 4 सालों के दौरान दर्ज हुई बारिश की तुलना में काफी कम है। यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में सावन के दौरान 226.44 एमएम बारिश हुई थी, जबकि वर्ष 2024 में 268.05 एमएम और वर्ष 2023 में 268.76 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। इसके अलावा वर्ष 2022 के सावन में भी जिले को 171.06 एमएम वर्षा प्राप्त हुई थी। इस प्रकार बीते साल की तुलना में इस बार सावन में करीब 125 एमएम कम पानी बरसा है, जिससे किसान समुदाय की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।\n\nमानसून सीजन की अवधि और ब्लॉकवार बारिश का वितरण\nसीकर जिले में मानसून की कुल अवधि 15 जून से लेकर 15 सितंबर तक लगभग 92 दिनों की मानी जाती है। चालू सीजन के 71 दिन बीत जाने के बावजूद 25 अगस्त तक जिले की कुल बारिश का आंकड़ा केवल 300 एमएम के आसपास ही पहुंच सका है। जिले की सामान्य औसत वर्षा 535 एमएम मानी जाती है, जिसकी तुलना में वर्तमान आंकड़ा करीब 235 एमएम पीछे चल रहा है। पिछले वर्षों में इसी समान अवधि के दौरान वर्ष 2022 में 282 एमएम, वर्ष 2023 में 387 एमएम, वर्ष 2024 में 535 एमएम और वर्ष 2025 में 535 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।\n\nजिले के विभिन्न ब्लॉकों में बारिश का फैलाव भी काफी असमान रहा है। 15 जून से 25 अगस्त की अवधि के दौरान नीमकाथाना क्षेत्र में वर्ष 2026 के दौरान जिले में सर्वाधिक 258 एमएम वर्षा दर्ज की गई है, हालांकि इसी क्षेत्र में वर्ष 2023 में 484 एमएम और वर्ष 2025 में 411 एमएम बारिश हुई थी। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022 में सीकर शहर में 229 एमएम तथा वर्ष 2024 में रींगस में 413 एमएम सर्वाधिक बारिश दर्ज हुई थी। दूसरी तरफ, सीकर ग्रामीण क्षेत्र लगातार दूसरे साल सबसे कम बारिश वाला इलाका बना हुआ है। वर्ष 2026 में यहाँ मात्र 47 एमएम और वर्ष 2025 में 84 एमएम बारिश दर्ज की गई। पूर्व के वर्षों में देखें तो वर्ष 2024 में नेछवा में 110 एमएम, वर्ष 2023 में रींगस में 121 एमएम और वर्ष 2022 में खंडेला में 109 एमएम की सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड रहा था।\n\nबांधों में पानी की आवक का अभाव और फसलों पर खतरा\nबारिश में आई इस भारी गिरावट का सीधा असर जिले के प्रमुख बांधों और जलस्रोतों पर पड़ा है। पिछले वर्ष जुलाई माह में हुई अच्छी वर्षा के चलते रायपुर पाटन, कोट, कोटड़ी, भूदोली और हरिपुरा समेत कई स्थानीय बांधों में पानी की पर्याप्त आवक दर्ज की गई थी। हालांकि इस बार स्थिति पूरी तरह विपरीत है और जिले के किसी भी बांध में पानी की कोई खास आवक नहीं हो सकी है। पिछले करीब 15 दिनों से आसमान में बादलों का आना-जाना बना हुआ है और उमस भी अधिक है, परंतु तेज बारिश न होने से खेतों में बोई गई फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है।\n\nविशेष रूप से बाजरा, मूंगफली और दलहन जैसी मुख्य खरीफ फसलों की वृद्धि नमी की कमी के कारण रुकने लगी है। खेतों में सूखती फसलों को बचाने के लिए किसान अब मजबूरन नलकूपों और कुओं के माध्यम से सिंचाई का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनकी लागत भी बढ़ रही है।\n\nसिंचाई विभाग की चेतावनी और 15 सितंबर का दृष्टिकोण\nजिले में जल संकट और मौसम की स्थिति पर बात करते हुए सिंचाई विभाग के एक्सईएन नथमल खेदड़ ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष पूर्ववर्ती वर्षों की तुलना में वर्षा का स्तर काफी कम रहा है। इसी वजह से जिले के तमाम जल निकायों और बांधों में पानी का संचयन नगण्य के बराबर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 15 सितंबर को मानसून की आधिकारिक विदाई तक बारिश की यही चाल बनी रहती है, तो जिले के अधिकांश बांध पूरी तरह खाली ही रह जाएंगे।\n\nइसका आप पर असर\nसीकर जिले में मानसून की कमी का सीधा असर कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता पर पड़ रहा है।\n\n• राजस्थान में: राज्य के पश्चिमी और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कम बारिश से भूमिगत जल स्तर में गिरावट आने और कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को सिंचाई की लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।\n• सीकर में: जिले के किसानों को बाजरा, मूंगफली और दलहन की फसलों को बचाने के लिए कुओं और नलकूपों से अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे बिजली और डीजल का खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा, 15 सितंबर तक पर्याप्त बारिश न होने पर रायपुर पाटन, कोट, कोटड़ी, भूदोली और हरिपुरा जैसे बांधों के खाली रहने से आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई जल का गंभीर संकट पैदा हो सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सावन 2026 में सीकर जिले में कितनी बारिश दर्ज की गई है?\nसिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार सावन में अब तक औसतन केवल 101.77 एमएम बारिश दर्ज हुई है, जो पिछले 4 वर्षों में सबसे कम है।\n\n2. सीकर में पूरे मानसून सीजन में अब तक कुल कितनी बारिश हुई है?\n15 जून से 25 अगस्त तक जिले में कुल करीब 300 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत 535 एमएम से 235 एमएम कम है।\n\n3. सीकर के किस ब्लॉक में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है?\nसीकर ग्रामीण ब्लॉक में सबसे कम बारिश हुई है, जहाँ 2026 में महज 47 एमएम और 2025 में 84 एमएम वर्षा दर्ज की गई थी।\n\n4. बारिश की कमी का किन फसलों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है?\nपर्याप्त नमी न मिलने के कारण बाजरा, मूंगफली और दलहन जैसी फसलों में सूखा पड़ने और उत्पादन घटने का संकट गहरा गया है।\n\n5. 15 सितंबर तक पर्याप्त बारिश न होने पर क्या स्थिति बनेगी?\nसिंचाई विभाग के एक्सईएन नथमल खेदड़ के अनुसार, यदि 15 सितंबर तक मानसूनी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो जिले के अधिकांश बांध खाली रह जाएंगे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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    "सीकर मौसम",
    "राजस्थान मानसून",
    "सीकर बारिश",
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