सीकर में दिव्यांग छात्रों के लिए खोले जाएंगे विशेष संदर्भ कक्ष, राजस्थान सरकार ने जारी किया बजट और दिशा-निर्देश सीकर जिले के सभी 12 ब्लॉकों में दिव्यांग छात्रों को पढ़ाई और थेरेपी सहायता देने के लिए विशेष संदर्भ कक्ष स्थापित किए जाएंगे, जिसके लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रति ब्लॉक 20,000 रुपये का बजट मंजूर किया है। सीकर जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए एक बेहद सकारात्मक और बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले के सभी 12 ब्लॉकों में विशेष संदर्भ कक्ष तैयार किए जाएंगे। इन कमरों को बनाने का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले छात्र-छात्राओं को उनकी सामान्य पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ उनके अनुकूल अन्य रचनात्मक और पाठ्येतर गतिविधियों में मदद करना है। इस पहल के जरिए बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक शिक्षण सामग्री, अत्याधुनिक उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे प्रदान की जाएंगी, जिससे उनका शैक्षणिक सफर आसान हो सके। विशेष शिक्षकों की निगरानी में होगी पढ़ाई और थेरेपी राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के मुताबिक, इन संदर्भ कक्षों में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें उनकी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं के अनुसार शैक्षणिक और थेरेपी संबंधी जरूरी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही इन कमरों में संसाधन जुटाए जाएंगे। संदर्भ कक्षों में प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की तैनाती की जाएगी, जो इन बच्चों को पाठ्यपुस्तकों को समझने, अभ्यास करने और स्कूल की अन्य गतिविधियों में बिना किसी झिझक के भाग लेने के लिए प्रेरित और तैयार करेंगे। कक्षाओं में मिलेंगे व्हीलचेयर, ब्रेल किट और हियरिंग एड जैसे उपकरण विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मार्ग में आने वाली शारीरिक और मानसिक बाधाओं को दूर करने के लिए इन संदर्भ कक्षों में कई तरह के आधुनिक सहायक उपकरण और शिक्षण सामग्री रखी जाएगी। इनमें शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और स्टैंडिंग फ्रेम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही, दृष्टिबाधित बच्चों के लिए विशेष ब्रेल किट, सुनने में असमर्थ बच्चों के लिए हियरिंग एड और गणितीय गणनाओं को आसान बनाने वाले विशेष कैलकुलेटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सभी उपकरणों का उपयोग संबंधित बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि वे बिना किसी परेशानी के पढ़ाई कर सकें और स्कूल की हर गतिविधि में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। कमरे का चयन और दैनिक संचालन के कड़े नियम प्रशासनिक दिशा-निर्देशों में संदर्भ कक्ष के लिए स्कूल परिसर के भीतर कमरे के चयन को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। संदर्भ कक्ष के लिए केवल ऐसे कमरे का चयन किया जाएगा जो स्कूल के भूतल पर हो या जहां तक दिव्यांग बच्चों की पहुंच बेहद आसान और सुरक्षित हो। इस कमरे में बिजली की सुचारू व्यवस्था, पीने के साफ पानी की सुविधा और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी होंगी। इसके अलावा, योजना में पारदर्शिता और उपकरणों की निगरानी के लिए संदर्भ कक्ष में उपलब्ध सभी सामग्रियों का एक विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि किस उपकरण का कितना उपयोग हो रहा है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। इस पूरे केंद्र का संचालन विशेष शिक्षक की सीधी देखरेख में किया जाएगा। स्कूल समय के दौरान बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार एक निर्धारित समय पर संदर्भ कक्ष में बुलाया जाएगा, ताकि उनकी नियमित पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उन्हें विशेष मार्गदर्शन भी मिल सके। संदर्भ कक्ष के भीतर पढ़ाने के लिए बच्चों की सीखने की व्यक्तिगत क्षमता और गति के अनुसार ही शिक्षण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसके दैनिक संचालन के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य भी निर्धारित किया है, जिसके तहत प्रत्येक संदर्भ कक्ष में रोजाना कम से कम 10 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शैक्षणिक और थेरेपी सहायता प्रदान करना अनिवार्य होगा। पूरे राजस्थान में लागू होगी योजना, सीकर के लिए जारी हुआ बजट सीकर जिले के अलावा इस बेहतरीन व्यवस्था को पूरे राजस्थान राज्य में बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के सभी 378 ब्लॉक मुख्यालयों पर इस तरह के संदर्भ कक्ष संचालित किए जाएंगे। योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय के संदर्भ कक्ष को प्रतिवर्ष 20 हजार रुपये का बजट आवंटित करने का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग संदर्भ कक्ष में आने वाले बच्चों के वास्तविक यात्रा किराए का भुगतान करने, वहां रखे उपकरणों के नियमित रखरखाव, नई शिक्षण सामग्री खरीदने और अन्य आवश्यक प्रबंधों पर किया जाएगा ताकि बच्चों को ब्लॉक स्तर पर ही हर जरूरी सुविधा मिल सके। सीकर जिले के कुल 12 ब्लॉकों के लिए विभाग की ओर से कुल 2.40 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस बजट के तहत प्रत्येक संदर्भ कक्ष के लिए आवंटित 20 हजार रुपये में से 12 हजार रुपये की राशि बच्चों के वास्तविक किराए या परिवहन खर्च के लिए रखी गई है, जबकि शेष 8 हजार रुपये की राशि का उपयोग वहां मौजूद उपकरणों के रखरखाव, नई पाठ्य सामग्री खरीदने और अन्य दैनिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने में किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने से विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को उनके घर के नजदीक ही स्थानीय स्तर पर बेहतरीन शैक्षणिक सहयोग मिल सकेगा और वे अपनी पढ़ाई को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सकेंगे। इसका आप पर असर यह पहल ब्लॉक स्तर पर मुफ्त सहायक उपकरण और व्यावसायिक सहायता प्रदान करके विशेष आवश्यकता वाले स्कूली बच्चों के लिए कक्षा की पहुंच और शिक्षा की गुणवत्ता में काफी सुधार करेगी। • देश भर में: इस तरह के समावेशी शैक्षिक सुधार अन्य राज्यों के लिए भी दिव्यांग-अनुकूल स्कूली बुनियादी ढांचे के लिए समर्पित बजट आवंटित करने का एक मजबूत उदाहरण पेश करते हैं। इसका मतलब है कि अन्य क्षेत्रीय सरकारें भी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर थेरेपी सहायता मॉडल अपना सकती हैं। • सीकर और राजस्थान में: सीकर के 12 ब्लॉकों में 120 से अधिक दिव्यांग छात्रों को प्रतिदिन समर्पित शैक्षणिक और थेरेपी सत्रों का लाभ मिलेगा। इसके बाद माता-पिता को दूर के जिला केंद्रों की यात्रा नहीं करनी होगी और न ही महंगी थेरेपी और शिक्षण सामग्री का खर्च उठाना होगा। • परिवारों को वित्तीय राहत: सरकार इन संदर्भ कक्षों में आने-जाने वाले छात्रों के वास्तविक यात्रा खर्च के लिए प्रति संदर्भ कक्ष 12,000 रुपये तक की प्रतिपूर्ति करेगी। इससे उन कम आय वाले परिवारों का आर्थिक बोझ सीधे तौर पर कम होगा जो पहले अपने दिव्यांग बच्चों को स्कूल भेजने का किराया उठाने में असमर्थ थे। • बेहतर शिक्षण उपकरण: शारीरिक, दृष्टि या श्रवण संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे छात्रों को ब्रेल किट, हियरिंग एड और स्टैंडिंग फ्रेम जैसे उपकरण मुफ्त मिलेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा उनके लिए पूरी तरह से समझने योग्य और इंटरैक्टिव बन सके। ऐसा क्यों हुआ इन संदर्भ कक्षों की स्थापना समग्र शिक्षा अभियान के ढांचे के तहत सरकारी शिक्षा को समावेशी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुलभ बनाने के राज्य के शासनादेश से प्रेरित है। • राज्य-स्तरीय नीति निर्देश: राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने विशेष शिक्षा को मानकीकृत करने के लिए सत्र 2026-27 के लिए नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश का उद्देश्य सभी 378 ब्लॉकों में दैनिक स्कूली पाठ्यक्रम के साथ सीधे थेरेपी सहायता को जोड़ना है। • पहुंच की कमी को दूर करना: पारंपरिक कक्षाओं में अक्सर विशेष थेरेपी उपकरणों और दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यक शिक्षण उपकरणों की कमी होती है। बिजली, पानी और रैंप की सुविधाओं से लैस समर्पित संदर्भ कक्ष स्थापित करके स्थानीय स्तर पर इस बुनियादी ढांचे की कमी को दूर किया जा रहा है। • वित्तीय आवंटन की आवश्यकता: राज्य सरकार ने प्रत्येक ब्लॉक के लिए 20,000 रुपये का समर्पित बजट तय किया है ताकि परिवहन लागत और उपकरणों का रख-रखाव छात्रों की भागीदारी में बाधा न बने। यह समर्पित बजट ग्रामीण ब्लॉकों में विशेष शिक्षा कार्यक्रमों के लिए धन की कमी की पुरानी समस्या का समाधान करता है। सवाल-जवाब 1. सीकर में बनाए जा रहे नए संदर्भ कक्षों का मुख्य उद्देश्य क्या है? इन संदर्भ कक्षों का उद्देश्य समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाई और थेरेपी में अतिरिक्त सहयोग देना है। 2. ये संदर्भ कक्ष और उनके दिशा-निर्देश किस शैक्षणिक सत्र के लिए जारी किए गए हैं? ये दिशा-निर्देश और संदर्भ कक्ष राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा आगामी सत्र 2026-27 के लिए तय किए गए हैं। 3. इन संदर्भ कक्षों में दिव्यांग बच्चों के लिए कौन से सहायक उपकरण उपलब्ध होंगे? संदर्भ कक्षों में बच्चों की जरूरत के अनुसार ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, स्टैंडिंग फ्रेम, कैलकुलेटर, ब्रेल किट और हियरिंग एड जैसे उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। 4. प्रत्येक संदर्भ कक्ष में रोजाना कितने बच्चों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है? विभाग ने प्रत्येक संदर्भ कक्ष में प्रतिदिन कम से कम 10 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सुविधाएं और शैक्षणिक सहयोग देने का लक्ष्य रखा है। 5. सीकर जिले के लिए कुल कितना बजट निर्धारित किया गया है और इसका खर्च कैसे होगा? सीकर के 12 ब्लॉकों के लिए कुल 2.40 लाख रुपये का बजट तय किया गया है, जिसमें प्रति ब्लॉक 20,000 रुपये मिलेंगे। इसमें से 12,000 रुपये बच्चों के किराये और 8,000 रुपये उपकरणों के रख-रखाव व शिक्षण सामग्री पर खर्च होंगे। https://trendkia.com/rajasthan/sikar-men-divyang-chhatron-ke-lie-khole-jaenge-vishesha-sndarbha-kaksha-rajasthan-sarakara-ne-jari-kiya-bajata-aura-disha-nirdesha-31632 TrendKia — Har trend, sabse pehle.