सीकर में जन्माष्टमी की रात बाबा श्याम का पंचामृत अभिषेक, अब दो दिन शालिग्राम स्वरूप में मिलेगा दर्शन खाटूश्यामजी मंदिर में जन्माष्टमी की रात 12 बजे पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा श्याम अगले दो दिन मूल शालिग्राम रूप में दर्शन देंगे, इसके बाद 9 सितंबर को विशेष तिलक शृंगार होगा। राजस्थान के सीकर में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी की रात कुछ खास नजारा देखने को मिला। रात ठीक 12:00 बजे बाबा श्याम का पंचामृत से स्नान और अभिषेक किया गया, और इसके तुरंत बाद मंदिर प्रशासन ने ऐलान किया कि अगले दो दिन बाबा श्याम अपने असली यानी मूल शालिग्राम स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। आधी रात के अभिषेक के बाद सतरंगी फूलों से सजे बाबा श्याम अभिषेक पूरा होने के बाद बाबा श्याम का विशेष शृंगार किया गया, जिसमें उनके मूल स्वरूप को सतरंगी फूलों से सजाया गया। मंदिर में आमतौर पर सुबह की शृंगार आरती और शाम की संध्या आरती के वक्त ही बाबा श्याम को सजाया जाता है, लेकिन जन्माष्टमी जैसे मौकों पर इससे अलग विशेष शृंगार बहुत कम देखने को मिलता है, जिससे यह पल भक्तों के लिए और भी खास बन जाता है। महाआरती संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं में पंजीरी का प्रसाद बांटा गया। जन्माष्टमी पर भी घटी भक्तों की भीड़, रात में उमड़ा जनसैलाब इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर खाटूश्यामजी मंदिर में भक्तों की तादाद उम्मीद से कम नजर आई। सुबह मंगला आरती और शृंगार आरती के समय मंदिर में अच्छी खासी भीड़ रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, भक्तों की संख्या घटती चली गई। दोपहर तक हालात यह हो गए कि इस विशेष पर्व पर भी भीड़ आम दिनों के मुकाबले कम दिखी। हालांकि देर शाम होते-होते तस्वीर बदली और भक्तों की संख्या में फिर बढ़ोतरी दर्ज हुई। रात 12:00 बजे जब महाआरती हुई, तब मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दो दिन शालिग्राम रूप, फिर तिलक शृंगार, जानें पूरा शेड्यूल आने वाले दो दिन तक बाबा श्याम अपने मूल यानी शालिग्राम स्वरूप में ही भक्तों को दर्शन देते रहेंगे। मंदिर परंपरा के मुताबिक महीने में गिने-चुने दिन ही होते हैं जब बाबा श्याम अपने इस मूल रूप में नजर आते हैं, इसलिए भक्तों के लिए यह मौका खास माना जाता है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि तिलक शृंगार की तैयारियों के चलते 8 सितंबर को मंदिर के कपाट बंद रखे जाएंगे। इसके एक दिन बाद, यानी 9 सितंबर को बाबा श्याम का विशेष तिलक शृंगार किया जाएगा। इसके बाद 10 सितंबर की सुबह मंगला आरती से भक्त फिर से बाबा श्याम के तिलक शृंगार वाले स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। क्यों कहलाते हैं बाबा श्याम हारे का सहारा? बाबा श्याम को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है और उन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है। इसके पीछे महाभारत काल की एक कथा जुड़ी है। कथा के अनुसार, भीम के पौत्र बर्बरीक महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ने के लिए तैयार थे। तभी भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का वेश धारण कर उनके पास पहुंचे और उनसे शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना सिर काटकर श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया। बर्बरीक के इस त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे। तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के रूप में प्रसिद्ध हैं। इसका आप पर असर अगर आप बाबा श्याम के मूल शालिग्राम स्वरूप या तिलक शृंगार के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो आने वाले दिनों की तारीखें आपके लिए जरूरी हैं। • देश भर के भक्तों के लिए: जन्माष्टमी के बाद अगले दो दिन बाबा श्याम अपने असली शालिग्राम रूप में दर्शन देंगे, जो साल में कम ही मौकों पर होता है। जो भक्त इस दुर्लभ स्वरूप के दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें यही समय चुनना चाहिए। • सीकर में रहने वाले या वहां जाने वालों के लिए: 8 सितंबर को तिलक शृंगार की तैयारी के चलते मंदिर के कपाट बंद रहेंगे, इसलिए उस दिन दर्शन के लिए न जाएं। 9 सितंबर को विशेष तिलक शृंगार होगा और 10 सितंबर को सुबह मंगला आरती से मंदिर फिर आम भक्तों के लिए खुलेगा। • भीड़ का अंदाजा लगाकर जाएं: इस बार जन्माष्टमी पर दोपहर के समय भीड़ सामान्य दिनों से भी कम रही, इसलिए शांति से दर्शन करने वाले भक्तों के लिए दोपहर का समय बेहतर हो सकता है, जबकि रात की महाआरती में भारी भीड़ उमड़ती है। सवाल-जवाब 1. पंचामृत अभिषेक कब हुआ? कृष्ण जन्माष्टमी की रात 12:00 बजे बाबा श्याम का पंचामृत से स्नान और अभिषेक किया गया। 2. अभिषेक के बाद बाबा श्याम किस रूप में दर्शन देंगे? अभिषेक के बाद अगले दो दिन बाबा श्याम अपने मूल शालिग्राम स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। 3. मंदिर के कपाट कब बंद रहेंगे? तिलक शृंगार की तैयारी के चलते 8 सितंबर को मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। 4. तिलक शृंगार कब होगा और दर्शन कब से शुरू होंगे? 9 सितंबर को बाबा श्याम का विशेष तिलक शृंगार होगा और 10 सितंबर को सुबह मंगला आरती से भक्त फिर दर्शन कर सकेंगे। 5. इस बार जन्माष्टमी पर भीड़ कैसी रही? सुबह मंगला और शृंगार आरती में भीड़ ज्यादा रही, लेकिन दोपहर तक भक्तों की संख्या सामान्य दिनों से भी कम हो गई, हालांकि रात की महाआरती में भारी भीड़ उमड़ी। 6. बाबा श्याम को हारे का सहारा क्यों कहा जाता है? महाभारत में बर्बरीक द्वारा श्रीकृष्ण को शीश दान करने से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया था कि वे कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे। 7. प्रसाद के रूप में क्या बांटा गया? महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को पंजीरी का प्रसाद वितरित किया गया। 8. मंदिर कमेटी के किस पदाधिकारी ने यह जानकारी दी? श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने तिलक शृंगार और कपाट बंद होने की जानकारी दी। https://trendkia.com/rajasthan/sikar-men-janmashtami-ki-rata-baba-shyam-ka-pnchamrita-abhisheka-aba-do-dina-shaligram-svarupa-men-milega-darshana-28090 TrendKia — Har trend, sabse pehle.