सीकर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बदलेगी तस्वीर, भढ़ाढर में 10 करोड़ से तैयार होगा 50 ई-बसों का आधुनिक डिपो पीएम ई-बस सेवा के तहत सीकर में 50 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है, जिसके लिए भढ़ाढर में 10 करोड़ रुपये की लागत से नया चार्जिंग और पार्किंग डिपो बनाया जाएगा। सीकर शहर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत शहर की सड़कों पर जल्द ही 50 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। इन बसों के नियमित रखरखाव और संचालन को सुचारू बनाने के लिए भढ़ाढर इलाके में एक विशाल और आधुनिक ई-बस डिपो विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। नगर परिषद ने इस परियोजना के बुनियादी ढांचे और आवश्यक सुविधाओं के निर्माण हेतु लगभग 10 करोड़ रुपये का विस्तृत वित्तीय प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगे डिपो निर्माण का खर्च भढ़ाढर में बनने वाले इस ई-बस डिपो के निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त वित्तीय हिस्सेदारी तय की गई है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 10 करोड़ रुपये में से 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार के कोष से जारी की जाएगी। इस फॉर्मूले के तहत केंद्र सरकार की ओर से लगभग 6 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होने की उम्मीद है। इस आवंटित बजट का उपयोग डिपो परिसर की जमीन को तैयार करने, प्रशासनिक भवन बनाने और बसों के तकनीकी रखरखाव से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं खड़ी करने में किया जाएगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पार्किंग की विशेष व्यवस्थाएं नगर परिषद के एईएन प्रवीण कुमार ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि डिपो में 50 ई-बसों की क्षमता के अनुसार सुरक्षित पार्किंग क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके अलावा, बसों को समय पर चार्ज करने के लिए उच्च क्षमता वाले चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित किए जाएंगे। डिपो में बसों के तकनीकी निरीक्षण, धुलाई, मरम्मत और दैनिक संचालन की निगरानी के लिए जरूरी कार्यालयी ढांचे के साथ-साथ चालक दल और तकनीकी कर्मचारियों के लिए विश्राम कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। चार्जिंग व्यवस्था इस डिपो का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, ताकि रूट पर बसों का फेरा बिना किसी तकनीकी रुकावट के लगातार चलता रहे। दूसरे चरण के तहत सीकर को मिलेंगी 50 इलेक्ट्रिक बसें पीएम ई-बस सेवा के दूसरे चरण के तहत सीकर शहर को इन आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का आवंटन किया जा रहा है। डिपो का निर्माण कार्य पूरा होते ही शहर में बसों की आपूर्ति और उनके नियमित संचालन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाएगा। वर्तमान समय में सीकर की स्थानीय जनता आवागमन के लिए मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा और निजी वाहनों पर निर्भर है। ऐसे में 50 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से आम यात्रियों और दैनिक यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का एक बेहद सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद विकल्प हासिल होगा। संयुक्त कमेटी करेगी रूट और यात्री किराए का निर्धारण शहर के प्रमुख इलाकों को इस सेवा से जोड़ने के लिए रूट तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। ई-बसों के रूट का अंतिम निर्धारण जिला प्रशासन, नगर परिषद, यूआईटी, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के अधिकारियों को मिलाकर बनाई गई एक विशेष संयुक्त कमेटी करेगी। यह कमेटी प्रमुख बाजारों, सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों की जरूरतों और संभावित यात्री संख्या का व्यापक अध्ययन करेगी। इसके अलावा, यही संयुक्त कमेटी यात्रियों की जेब को ध्यान में रखते हुए उचित किराया तालिका भी तय करेगी। शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ नगर परिषद क्षेत्र की सीमा से सटी ग्राम पंचायतों और ढाणियों को भी इन रूटों से जोड़ने की योजना है, जिससे ग्रामीण अंचल के दैनिक यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रदूषण और ध्वनि से मिलेगी राहत, बदलेगा शहर का स्वरूप इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा सड़कों पर उतरने से पारंपरिक डीजल और पेट्रोल चालित वाहनों के मुकाबले वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जाएगी। इससे शहर की हवा साफ रखने और ट्रैफिक प्रबंधन को व्यवस्थित करने में सीधी मदद मिलेगी। इस पूरी योजना से सीकर के सार्वजनिक यातायात का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में प्रशासन का मुख्य ध्यान भढ़ाढर में डिपो का निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाने और उसके तुरंत बाद सभी 50 ई-बसों को सड़कों पर उतारने की तैयारियों पर केंद्रित है। इसका आप पर असर सीकर में 50 ई-बसों के संचालन और भढ़ाढर में डिपो बनने से दैनिक यात्रियों को सस्ता, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त परिवहन मिलेगा। • सीकर शहर में: ऑटो रिक्शा पर निर्भर रहने वाले स्थानीय यात्रियों को शहर के प्रमुख बाजारों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के लिए नियमित बस सेवा मिलेगी। इससे दैनिक यात्रा के खर्च और समय में बचत होगी। • आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में: नगर परिषद सीमा से सटी ढाणियों और गांवों के कामगारों व छात्रों को शहर आने-जाने के लिए सीधा सार्वजनिक साधन उपलब्ध होगा। इससे दूरदराज के इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। • पर्यावरण और स्वास्थ्य पर: डीजल-पेट्रोल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के चलने से शहर में धुएं और तेज आवाज के प्रदूषण में कमी आएगी। इससे शहर की हवा स्वच्छ बनेगी और निवासियों को राहत मिलेगी। • यातायात प्रबंधन में: व्यक्तिगत वाहनों और अत्यधिक ऑटो के दबाव से मुख्य सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या नियंत्रित होगी। संयुक्त कमेटी द्वारा तय रूट से सार्वजनिक यातायात अधिक सुव्यवस्थित हो जाएगा। ऐसा क्यों हुआ सीकर में वर्तमान समय में संगठित सार्वजनिक बस सेवा का अभाव है और जनता मुख्य रूप से ऑटो रिक्शा पर निर्भर है। केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के दूसरे चरण के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों में हरित शहरी परिवहन को बढ़ावा देने के लिए यह पहल की गई है। • डिपो और चार्जिंग की अनिवार्य आवश्यकता: इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पहले उनके लिए विशेष चार्जिंग ग्रिड और सुरक्षित नाइट पार्किंग स्थल होना तकनीकी रूप से आवश्यक है। इसी वजह से भढ़ाढर में 10 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी डिपो विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। • केंद्र-राज्य साझेदारी की नीति: शहरी परिवहन को सुदृढ़ बनाने के लिए 60:40 के वित्तीय अनुपात का प्रावधान है, जिसके तहत केंद्र 6 करोड़ और राज्य सरकार 4 करोड़ रुपये वहन करेगी। यह वित्तीय व्यवस्था परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने के लिए बनाई गई है। • बढ़ता शहरीकरण और ट्रैफिक दबाव: शहर के विस्तार और कोचिंग सेंटरों व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बढ़ती भीड़ के कारण एक व्यवस्थित और प्रदूषण रहित बस नेटवर्क की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। संयुक्त कमेटी इसी आधार पर रूट और किराया तय कर रही है। सवाल-जवाब 1. सीकर में पीएम ई-बस सेवा के तहत कितनी बसें चलाई जाएंगी? सीकर शहर में पीएम ई-बस सेवा के दूसरे चरण के अंतर्गत 50 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। 2. ई-बस डिपो किस स्थान पर और कितनी लागत से बनेगा? ई-बस डिपो भढ़ाढर में बनाया जाएगा और इसके निर्माण पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रस्ताव है। 3. डिपो निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार का खर्च अनुपात क्या होगा? कुल 10 करोड़ की लागत में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार (लगभग 6 करोड़ रुपये) और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। 4. भढ़ाढर डिपो में क्या-क्या प्रमुख सुविधाएं विकसित की जाएंगी? डिपो में बसों की पार्किंग, चार्जिंग पॉइंट्स, तकनीकी मेंटेनेंस की सुविधाएं और कर्मचारियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं होंगी। 5. ई-बसों के रूट और किराए का निर्धारण कौन करेगा? जिला प्रशासन, नगर परिषद, यूआईटी, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त कमेटी रूट और यात्री किराया तय करेगी। 6. क्या इन बसों की सुविधा शहर के बाहर के इलाकों को भी मिलेगी? हाँ, संयुक्त कमेटी की योजना नगर परिषद क्षेत्र से सटी ढाणियों और ग्रामीण इलाकों को भी रूट से जोड़ने की है। https://trendkia.com/rajasthan/sikar-men-pablika-transaporta-ki-badalegi-tasvira-bhhadhadhar-men-10-karora-se-taiyara-hoga-50-i-bason-ka-adhunika-dipo-37627 TrendKia — 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