सीकर में रीको से बीकानेर बाइपास लिंक मार्ग को मिली वन मंजूरी, 450 मीटर अधूरे हिस्से का काम जल्द सीकर में रीको औद्योगिक क्षेत्र और बीकानेर बाइपास के बीच 450 मीटर अटकी सड़क को वन विभाग से पहले चरण की मंजूरी मिल गई है, जिससे भारी वाहनों को शहर से गुजरे बिना सीधा रास्ता मिलेगा। राजस्थान के सीकर में रीको औद्योगिक क्षेत्र को बीकानेर बाइपास से सीधे जोड़ने वाली अहम सड़क परियोजना की सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई है। साल 2018 से लंबित पड़ी इस मांग पर वन विभाग ने स्टेज-1 क्लीयरेंस दे दी है। इसके तहत स्मृति वन क्षेत्र की 1.35 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे दोनों प्रमुख बिंदुओं के बीच सीधी कनेक्टिविटी का मार्ग प्रशस्त हुआ है। 450 मीटर का पेंच और आठ साल का इंतजार इस संपर्क मार्ग का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका था, लेकिन स्मृति वन इलाके में आने वाले लगभग 450 मीटर लंबे हिस्से के कारण पूरा प्रोजेक्ट ठप पड़ा था। इसी वन भूमि के अटके रहने से उद्योग और हाईवे के बीच सीधा मार्ग चालू नहीं हो पा रहा था। स्थानीय उद्यमियों ने इस लिंक रोड की मांग वर्ष 2018 में उठाई थी, जिसे अब करीब आठ साल के लंबे इंतजार के बाद प्रशासनिक धरातल पर गति मिली है। शर्तों की पूर्ति और 23 लाख रुपये का भुगतान सहायक वन संरक्षक सौरभकुमार ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि डायवर्जन के लिए स्टेज-1 मंजूरी औपचारिक रूप से जारी हो चुकी है। अब नगर सुधार न्यास यानी यूआईटी को विभाग द्वारा निर्धारित आवश्यक औपचारिकताओं और शर्तों को पूरा करना होगा, जिसके उपरांत अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यूआईटी ने इस पहले चरण की हरी झंडी मिलते ही डायवर्जन प्रक्रिया के तहत 23 लाख रुपये की निर्धारित राशि वन विभाग में जमा भी करा दी है। 100 फीट चौड़ा सीधा कॉरिडोर परियोजना के तकनीकी विवरण के अनुसार स्मृति वन से निकलने वाला यह 450 मीटर लंबा हिस्सा 100 फीट चौड़ाई में निर्मित किया जाएगा। इतनी चौड़ाई तय होने से औद्योगिक इकाइयों से आने-जाने वाले बड़े ट्रकों और ट्रेलरों को तेज और बाधारहित आवागमन मिल सकेगा। अंतिम स्वीकृति की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही मौके पर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। शहर के मुख्य मार्गों पर जाम से निजात वर्तमान समय में रीको इंडस्ट्रियल एरिया से माल ढोने वाले भारी वाहन शहर की प्रमुख सड़कों से होकर गुजरने को मजबूर हैं। इसका सीधा नकारात्मक असर जयपुर रोड तथा उसके आसपास के क्षेत्रों पर दिखता है, जहां दिनभर ट्रकों के कारण यातायात का भारी दबाव और जाम की स्थिति बनी रहती है। नया लिंक मार्ग चालू होते ही भारी वाहनों को शहरी आबादी के बीच से गुजरे बिना सीधे बीकानेर हाईवे पर पहुंचने का वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। व्यापारिक सुगमता और ईंधन की बचत इस नई कनेक्टिविटी का लाभ न केवल रीको बल्कि जयपुर रोड से बीकानेर हाईवे की दिशा में जाने वाले आम वाहन चालकों को भी मिलेगा। औद्योगिक इकाइयों तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पाद बाहर भेजने में लगने वाले समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। शहर के अंदर भारी ट्रैफिक का दबाव घटने से स्थानीय नागरिकों को जाम और प्रदूषण से राहत मिलने के साथ ही मालवाहक वाहनों के फेरे भी तेज हो सकेंगे। इसका आप पर असर इस लिंक मार्ग के बनने से सीकर शहर के निवासियों को भारी ट्रैफिक से राहत मिलेगी और औद्योगिक माल ढुलाई में समय की बचत होगी। • सीकर शहर में: भारी ट्रकों का प्रवेश शहर के अंदरूनी मार्गों पर पूरी तरह बंद हो सकेगा। जयपुर रोड और मुख्य चौराहों पर लगने वाले दैनिक जाम और प्रदूषण से स्थानीय लोगों को तुरंत मुक्ति मिलेगी। • औद्योगिक इकाइयों के लिए: रीको क्षेत्र से बीकानेर हाईवे तक सीधी 100 फीट चौड़ी सड़क उपलब्ध होगी। इससे कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई में लगने वाला समय और परिवहन लागत दोनों कम होंगे। • जयपुर रोड के मुसाफिरों के लिए: बीकानेर की ओर जाने वाले सामान्य वाहनों को शहर के संकरे हिस्सों में नहीं फंसना पड़ेगा। वे सीधे इस बाईपास लिंक का उपयोग करके अपनी यात्रा समय पर पूरी कर सकेंगे। • सड़क निर्माण समयसीमा पर: यूआईटी द्वारा औपचारिकताएं और अंतिम मंजूरी पूरी होते ही 450 मीटर का निर्माण शुरू होगा। 23 लाख रुपये जमा होने के बाद अब फाइल अंतिम प्रशासनिक चरण में पहुंच चुकी है। ऐसा क्यों हुआ स्मृति वन की 1.35 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि के रास्ते में आने के कारण यह 450 मीटर सड़क 2018 से अटकी हुई थी, जिसे अब पर्यावरण नियमों के तहत पहली प्रशासनिक मंजूरी मिली है। • वन भूमि का पेच: प्रस्तावित सड़क का 450 मीटर का हिस्सा स्मृति वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। वन संरक्षण नियमों के तहत बिना केंद्रीय व विभागीय मंजूरी के किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित था। • आठ साल का लंबा इंतजार: रीको के उद्यमियों ने सबसे पहले 2018 में इस लिंक रोड की मांग उठाई थी। लंबी औपचारिकताओं और भूमि डायवर्जन प्रक्रिया के कारण इस फाइल को आगे बढ़ने में करीब आठ वर्ष लग गए। • यूआईटी द्वारा शुल्क भुगतान: स्टेज-1 क्लीयरेंस के बाद नगर सुधार न्यास ने 23 लाख रुपये का आवश्यक शुल्क वन विभाग को जमा कराया है। इस वित्तीय और प्रक्रियात्मक प्रगति के बाद ही परियोजना की अंतिम बाधा हटी है। सवाल-जवाब 1. रीको से बीकानेर बाइपास सड़क का काम क्यों रुका हुआ था? स्मृति वन क्षेत्र में आने वाले लगभग 450 मीटर लंबे हिस्से के लिए वन भूमि का डायवर्जन न होने के कारण यह निर्माण अटका हुआ था। 2. इस सड़क परियोजना के लिए कितनी वन भूमि का डायवर्जन किया जाएगा? इस सड़क लिंक के निर्माण के लिए स्मृति वन क्षेत्र की 1.35 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन किया जाएगा। 3. यूआईटी ने वन विभाग में कितनी राशि जमा कराई है? स्टेज-1 मंजूरी मिलने के बाद नगर सुधार न्यास यानी यूआईटी ने 23 लाख रुपये वन विभाग में जमा कराए हैं। 4. प्रस्तावित 450 मीटर सड़क की चौड़ाई कितनी होगी? स्मृति वन से गुजरने वाली इस सड़क के अधूरे हिस्से की चौड़ाई 100 फीट रखी जाएगी। 5. इस नए लिंक मार्ग से शहर के किस इलाके को जाम से राहत मिलेगी? इस मार्ग से भारी ट्रकों का शहर में प्रवेश रुकेगा, जिससे विशेष रूप से जयपुर रोड और मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक जाम कम होगा। https://trendkia.com/rajasthan/sikar-men-riico-se-bikaner-baipasa-linka-marga-ko-mili-vana-mnjuri-450-mitara-adhure-hisse-ka-kama-jalda-40053 TrendKia — Har trend, sabse pehle.