सीकर में आस्था का अनूठा अनुष्ठान, एक साथ पूजे जाएंगे 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंग सीकर के श्री गोविंदम भवन में 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन के लिए श्रद्धालुओं द्वारा हाथों से विशेष रूप से शिवलिंग तैयार किए जा रहे हैं। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सालासर रोड के श्री गोविंदम भवन में एक भव्य धार्मिक आयोजन की तैयारी चल रही है, जहां कुल 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा। गौ ग्रास संस्थान और श्री गोपीनाथ गोशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विवाहित जोड़े भाग लेकर भगवान शिव की आराधना करेंगे। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्थापित होने वाले शिवलिंग किसी मशीन से नहीं बनाए जा रहे हैं, बल्कि पिछले तीन दिनों से दर्जनों श्रद्धालु अपने हाथों से इन्हें गढ़ने में दिन-रात जुटे हुए हैं। हाथों से तैयार हो रहे हैं विशेष शिवलिंग पार्थिव शिवलिंग निर्माण के कार्य में लगातार जुटे कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। आयोजकों ने जानकारी दी है कि आगामी 19 सितंबर तक करीब सवा दो लाख से अधिक शिवलिंग पूरी तरह तैयार कर लिए जाएंगे, जिसके अगले दिन यानी 20 सितंबर को वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के साथ इनका सामूहिक पूजन संपन्न होगा। इन शिवलिंगों को बनाने की प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती जा रही है। काली मिट्टी और चिकनी मिट्टी के मिश्रण में शुद्ध घी मिलाया जा रहा है, ताकि जब अनुष्ठान के दौरान इन पर जल अर्पित किया जाए, तो ये पानी के संपर्क में आने के तुरंत बाद बिखरें या घुलें नहीं। मिट्टी को भली-भांति गूंथने के बाद हर एक शिवलिंग को करीने से अलग आकार दिया जा रहा है। इतने वृहद स्तर पर हाथों से पार्थिव शिवलिंग तैयार करना सभी साधकों और भक्तों के लिए एक बेहद अनूठा अनुभव साबित हो रहा है। भव्य अनुष्ठान और गोसेवा का अनूठा संकल्प आगामी 20 सितंबर का दिन इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण होगा, जब एक साथ 2.15 लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंगों की पूजा की जाएगी और पूरा परिसर मंत्रोच्चार से गूंज उठेगा। इस भव्य अनुष्ठान में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में विवाहित जोड़ों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा करना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र विधान माना जाता है। अपने हाथों से मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसकी विधिवत पूजा करना और फिर धार्मिक संस्कारों के साथ अनुष्ठान पूर्ण करना अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीकर में होने जा रहा यह आयोजन लाखों शिवलिंगों की स्थापना, हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और गोसेवा के महान संकल्प को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है। गोसेवा के विस्तार से जुड़ा है आयोजन इस वृहद धार्मिक अनुष्ठान को केवल भगवान शिव की आराधना तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके मूल में गोसेवा का पवित्र संदेश भी गहराई से निहित है। आयोजकों के अनुसार गौ ग्रास संस्थान पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार गोमाता को हरा चारा उपलब्ध कराने और अन्य कल्याणकारी गोसेवा कार्यों में सक्रियता से जुटा हुआ है। इस बड़े आयोजन के माध्यम से गोसेवा के दायरे को और अधिक विस्तृत करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस संगठन से जोड़ा जा सके। गौ ग्रास संस्थान द्वारा मुख्य रूप से विभिन्न गोशालाओं में मवेशियों के लिए निशुल्क चारे की व्यवस्था करने का सराहनीय कार्य किया जाता है। इसका आप पर असर यह धार्मिक आयोजन सीकर क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के लिए एक बड़े सामूहिक उत्सव का अवसर लेकर आया है। • भारत में: यह आयोजन सनातन संस्कृति में सामूहिक अनुष्ठानों और गोसेवा के प्रति लोगों की आस्था को और अधिक मजबूत करता है। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों से देश भर के धार्मिक केंद्रों में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। • सीकर में: सालासर रोड स्थित श्री गोविंदम भवन और आसपास के इलाकों में 20 सितंबर को भारी भीड़ जुटने की संभावना है, जिससे यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। स्थानीय श्रद्धालुओं और विवाहित जोड़ों को इस भव्य अनुष्ठान में सीधे तौर पर भाग लेने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होगा। ऐसा क्यों हुआ यह धार्मिक और अनुष्ठानिक आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने और गोवंश के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। • सामूहिक सहभागिता: आयोजकों ने इतनी बड़ी संख्या में भक्तों को जोड़ने और गोसेवा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस मेगा अनुष्ठान की रूपरेखा तैयार की है। • गोसेवा का विस्तार: गौ ग्रास संस्थान पिछले 15 वर्षों से लगातार गोशालाओं में चारे की व्यवस्था कर रहा है, और इस आयोजन के जरिए इस नेक काम को और अधिक व्यापक बनाना मुख्य लक्ष्य है। • पारंपरिक विधि: वैदिक परंपरा के तहत सावन या अन्य पवित्र अवसरों पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करने की प्राचीन प्रथा को आधुनिक समय में बड़े पैमाने पर जीवंत किया जा रहा है। सवाल-जवाब 1. सीकर में यह धार्मिक आयोजन कहां आयोजित किया जा रहा है? यह आयोजन सीकर के सालासर रोड स्थित श्री गोविंदम भवन में किया जा रहा है। 2. इस अनुष्ठान में कुल कितने पार्थिव शिवलिंगों की पूजा होगी? इस कार्यक्रम के दौरान कुल 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा। 3. पार्थिव शिवलिंगों को तैयार करने का कार्य कौन कर रहा है? पिछले तीन दिनों से दर्जनों श्रद्धालु अपने हाथों से इन विशेष शिवलिंगों को बनाने में जुटे हुए हैं। 4. इन शिवलिंगों को बनाते समय मिट्टी में क्या मिलाया जा रहा है? शिवलिंग पानी में बिखरें नहीं, इसके लिए काली और चिकनी मिट्टी में शुद्ध घी मिलाया जा रहा है। 5. पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किस तारीख को होगा? सभी शिवलिंगों का सामूहिक पूजन 20 सितंबर को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होगा। 6. यह आयोजन मुख्य रूप से किन संस्थाओं द्वारा आयोजित किया जा रहा है? यह आयोजन गौ ग्रास संस्थान और श्री गोपीनाथ गोशाला की ओर से किया जा रहा है। 7. गौ ग्रास संस्थान गोसेवा के क्षेत्र में कितने समय से सक्रिय है? यह संस्थान पिछले करीब 15 वर्षों से गोसेवा के कार्यों में लगातार सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। https://trendkia.com/rajasthan/sikara-men-astha-ka-anutha-anushthana-eka-satha-puje-jaenge-2-15-lakha-parthiva-shivlinga-33488 TrendKia — Har trend, sabse pehle.