# सीमा पार से हथियारों और ड्रग्स की तस्करी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कोर्ट में पेश की तीसरी चार्जशीट

> राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स तस्करी के मामले में जयपुर की विशेष अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इस सिंडिकेट का जाल राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में फैला हुआ था।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/sima-para-se-hathiyaron-aura-drugs-ki-taskari-national-investigation-agency-ne-court-men-pesha-ki-tisari-chargesheet-48782 · **Language:** Hindi
**Tags:** एनआईए, ड्रग्स तस्करी, हथियार तस्करी, जयपुर कोर्ट, यूएपीए, राजस्थान क्राइम, ड्रोन तस्करी

देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक बड़े मामले में कानूनी शिकंजा कस दिया है। एजेंसी ने सीमा पार से संचालित होने वाले हथियार और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के सिलसिले में अपनी तीसरी चार्जशीट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की है। यह महत्वपूर्ण चार्जशीट 17 अक्टूबर 2026 को जयपुर स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट में दाखिल की गई है। इस कार्रवाई से उत्तर भारत में सक्रिय एक बड़े आपराधिक नेटवर्क की परतें उघड़ कर सामने आई हैं।

## ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर गिराई जाती थी खेप
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि इस सिंडिकेट का संचालन सीधे तौर पर सीमा पार बैठे असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा था। अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ये तस्कर आधुनिक तकनीक का सहारा लेते थे और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था। अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक भारतीय क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से आधुनिक विदेशी हथियार, भारी मात्रा में गोला-बारूद और प्रतिबंधित हेरोइन की खेप आसमान से नीचे गिराई जाती थी।

## तीन राज्यों में फैला था नेटवर्क
जैसे ही ड्रोन के जरिए भेजी गई यह सामग्री भारतीय सीमा के भीतर पहुंचती थी, स्थानीय स्तर पर सक्रिय तस्करों के गुर्गे तुरंत मुस्तैद हो जाते थे। वे इस अवैध सामग्री को सुरक्षित उठाकर देश के भीतर विभिन्न ठिकानों तक पहुंचाते थे। एनआईए के खुलासे के अनुसार, इस आपराधिक नेटवर्क की जड़ें मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में फैली हुई थीं और ये तीनों राज्य तस्करों की गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बने हुए थे।

## दो नए आरोपियों के नाम शामिल
जयपुर अदालत में पेश की गई इस नवीनतम चार्जशीट में एजेंसी ने दो नए व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। इन दोनों की पहचान सत्यनारायण मेघवाल और साहिल गोदारा के रूप में की गई है, जिन्हें इस साल जुलाई के महीने में गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी ने इन दोनों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही, इस मामले में पहले से नामजद छह अन्य आरोपियों के विरुद्ध भी यूएपीए के तहत कई अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गई हैं।

## पहले भी दाखिल हो चुकी हैं चार्जशीट
इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले में जांच एजेंसी की तरफ से यह कोई पहली कानूनी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी इस मामले में दो बार चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। पहली चार्जशीट 14 अगस्त 2025 को जबकि दूसरी चार्जशीट 5 फरवरी 2026 को अदालत में पेश की गई थी। इन क्रमिक चार्जशीट के जरिए मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

## एन्क्रिप्टेड चैट और युवाओं को निशाना बनाने की साजिश
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर से बचने के लिए तस्कर पूरी तरह से हाई-टेक और गुप्त तरीकों का उपयोग कर रहे थे। आपसी संवाद और साजिश रचने के लिए वे सुरक्षित एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का सहारा लेते थे, लेकिन तकनीकी सर्विलांस के जरिए उनके इन डिजिटल सुरागों को डिकोड कर लिया गया। एजेंसी की जांच के अनुसार, इस सिंडिकेट का मुख्य उद्देश्य केवल अवैध धन कमाना नहीं था, बल्कि इसके पीछे देश के युवाओं को नशे के जाल में धकेलना और उस काले धन से देश में अशांति फैलाना था। इस पूरे मामले में आगे की जांच अभी जारी है ताकि इस नेटवर्क के अन्य मोर्चों का भी पर्दाफाश किया जा सके।

## इसका आप पर असर
सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई से देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमावर्ती राज्यों में अवैध गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** सीमावर्ती राज्यों में सक्रिय आपराधिक और आतंकवादी सिंडिकेट पर शिकंजा कसा जाएगा। सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के अवैध नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों और आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी हैं।
- **राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में:** इन तीनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने वाले तस्करों के स्थानीय मददगारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
सीमा पार से होने वाली इस अवैध गतिविधियों के पीछे तस्करों का मुख्य उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना और आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करना था। आधुनिक तकनीकों और गुप्त रास्तों का उपयोग करके इस सिंडिकेट को लंबे समय से संचालित किया जा रहा था।

- **तकनीकी साधनों का उपयोग:** सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए आरोपी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार से ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाते थे।
- **आपराधिक गठजोड़:** सीमा पार बैठे आकाओं और स्थानीय गुर्गों के बीच गहरे तालमेल के कारण यह नेटवर्क राजस्थान, पंजाब और हरियाणा तक फैल गया था।
- **वित्तीय और सामाजिक उद्देश्य:** इस सिंडिकेट का मकसद केवल अवैध हथियारों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि नशीले पदार्थों की बिक्री से मिलने वाले धन का उपयोग करके अराजकता फैलाना भी था।

## सवाल-जवाब

### 1. एनआईए ने तीसरी चार्जशीट कब और कहां दाखिल की?
एनआईए ने 17 अक्टूबर 2026 को जयपुर की एनआईए स्पेशल कोर्ट में यह चार्जशीट दाखिल की।

### 2. इस चार्जशीट में किन दो नए आरोपियों के नाम जोड़े गए हैं?
इस चार्जशीट में सत्यनारायण मेघवाल और साहिल गोदारा के नाम शामिल किए गए हैं जिन्हें जुलाई में गिरफ्तार किया गया था।

### 3. हथियार और ड्रग्स भारत में कैसे पहुंचाए जाते थे?
सीमा पार से ड्रोन का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास विदेशी हथियार, गोला-बारूद और हेरोइन गिराई जाती थी।

### 4. यह अवैध नेटवर्क मुख्य रूप से किन राज्यों में फैला हुआ था?
यह पूरा सिंडिकेट मुख्य रूप से राजस्थान, पंजाब और हरियाणा राज्यों में सक्रिय था।

### 5. एनआईए इससे पहले इस मामले में कब चार्जशीट दाखिल कर चुकी है?
एनआईए इससे पहले 14 अगस्त 2025 और 5 फरवरी 2026 को दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

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