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  "type": "article",
  "title": "सिंचाई पानी के संकट पर राजस्थान के बीकानेर और श्रीगंगानगर बेल्ट में चक्काजाम, व्यापार और मंडियां थमीं",
  "summary": "बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीण इलाकों में रबी फसल के लिए 6 महीने के पक्के रेगुलेशन और अनूपगढ़ शाखा में पानी रिजर्व रखने की मांग पर किसानों ने व्यापक हड़ताल शुरू कर दी है। स्थानीय व्यापारियों और दवा दुकानदारों के समर्थन के बाद प्रमुख कस्बों में कृषि मंडियां और बाजार पूरी तरह बंद हैं।",
  "content": "पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और श्रीगंगानगर कृषि अंचल में रबी की बिजाई से ठीक पहले सिंचाई जल के वितरण को लेकर गतिरोध चरम पर पहुंच गया है। घड़साना, खाजूवाला, रावला और अनूपगढ़ की विस्तृत नहर पट्टी पर काश्तकारों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं और अनिश्चित जलापूर्ति के विरोध में सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। नई मंडी घड़साना में पिछले पंद्रह दिनों से अनवरत चल रहे धरने के बाद भी जब प्रशासनिक स्तर पर कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला, तब संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए व्यापक चक्काजाम का बिगुल फूंका। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक पूरे फसल चक्र को सुरक्षित करने वाली एक निश्चित व्यवस्था कागजों से निकलकर नहरों में लागू नहीं की जाती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन शांत नहीं होगा।\n\nकृषि मंडियों और कस्बाई बाजारों में सन्नाटा, आवश्यक सेवाओं ने भी दिया साथ\nइस आंदोलन की सबसे प्रमुख बात यह है कि इसका दायरा अब केवल खेतों और धरने के तंबुओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे कस्बाई अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य वर्गों का भी खुला समर्थन हासिल हुआ है। खाजूवाला, रावला, घड़साना तथा अनूपगढ़ स्थित सभी मुख्य कृषि उपज मंडियों में व्यापारियों ने खरीद-फरोख्त पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की है। मंडियों के बंद होने से जिंसों की आवक और उठाव पूरी तरह ठप हो गया है, जिसका सीधा असर आसपास के बाजारों पर पड़ा है और मुख्य व्यापारिक गलियारों में वीरानी छाई हुई है। सामान्य किराना और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ आवश्यक दवा विक्रेताओं ने भी किसानों की मांगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए मेडिकल स्टोर बंद रखने का निर्णय लिया है।\n\nसड़कों पर यातायात को बाधित करने के लिए विशेष रूप से खाजूवाला के व्यस्त राजीव सर्किल जैसे मुख्य चौराहों को केंद्रित किया गया है, जहां किसान सुबह से ही जुटने लगे हैं। सीमावर्ती और नहरी इलाकों की जीवनरेखा मानी जाने वाली इन सड़कों पर आवागमन रुकने से अंतर-कस्बा संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। किसी भी प्रकार के टकराव और कानून-व्यवस्था के संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद हैं। संवेदनशील चौराहों और मुख्य मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है ताकि आपातकालीन वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा सके और शांति व्यवस्था कायम रहे।\n\nवार्ता की विफलता के बाद उपजा असंतोष और शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल\nसड़क जाम और बंदी के इस बड़े कदम से पूर्व राज्य सरकार के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को आंदोलनकारी किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में किसान संगठनों ने अपनी बुनियादी समस्याओं और मांगों का विस्तृत ब्योरा शासन के समक्ष प्रस्तुत किया। कई घंटों तक चली लंबी वार्ता के बावजूद जल वितरण के गणित और आधिकारिक आश्वासनों पर दोनों पक्षों के मध्य कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी। किसानों का मानना है कि केवल मौखिक दिलासों से खेत नहीं सींचे जा सकते और जब तक सरकार ठोस आदेश जारी नहीं करती, आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचता है। वार्ता बेनतीजा खत्म होने के तत्काल बाद ही किसान नेताओं ने चक्काजाम लागू करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी।\n\nइसी आंदोलन के दबाव और नहरी तंत्र के संचालन पर उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग में एक बड़ा फेरबदल किया है। देर शाम जारी एक सरकारी आदेश के तहत हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को उनके पद से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर अब अरुण कुमार सिडाना को सिंचाई विभाग के नए मुख्य अभियंता का कार्यभार सौंपा गया है। हालांकि इस उच्चस्तरीय प्रशासनिक बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि महकमे में कुर्सियां बदलने से किसानों का संकट हल नहीं होने वाला है। किसानों का रुख दो-टूक है कि जब तक नहर में पानी का प्रवाह और तय रेगुलेशन सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक किसी भी अधिकारी की तैनाती उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।\n\nस्थायी रेगुलेशन और अनूपगढ़ शाखा के लिए सुरक्षित पानी की पुख्ता मांग\nकिसानों के इस संघर्ष का मुख्य केंद्र बिंदु नहरी पानी के बंटवारे का तकनीकी नियमन है। काश्तकारों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि अनूपगढ़ शाखा के हिस्से का पानी अनिवार्य रूप से आरक्षित रखा जाए ताकि टेल क्षेत्र के काश्तकारों को उनके हिस्से का पूरा पानी मिल सके। इसके साथ ही किसान चार में से दो ग्रुप के आधार पर छह महीने की अवधि के लिए एक स्थायी रेगुलेशन व्यवस्था लागू करने की मांग पर अड़े हैं। किसानों का तर्क है कि रबी फसलों की बुवाई से लेकर उनकी कटाई तक पानी की एक निश्चित समय-सारणी होना बेहद जरूरी है। यदि किसानों को अग्रिम तौर पर यह पता नहीं होगा कि अगले छह महीनों में उन्हें किस अंतराल पर कितनी बार सिंचाई का पानी मिलेगा, तो वे अपनी फसलों की बुवाई की सही योजना नहीं बना सकेंगे और पूरी खेती घाटे का सौदा बन जाएगी।\n\nखरीफ फसलों के नुकसान की विशेष गिरदावरी और फसल बीमा योजना का सवाल\nनहरों में पानी की मांग के साथ-साथ किसानों ने हाल ही में बीती खरीफ फसल के दौरान हुए भारी नुकसान का मुद्दा भी पूरी मजबूती से उठाया है। आंदोलनकारी संगठनों ने मांग की है कि मौसम की मार और प्रतिकूल परिस्थितियों से बर्बाद हुई खरीफ फसलों की तत्काल विशेष गिरदावरी करवाई जाए। राजस्व और कृषि विभाग के जरिए पारदर्शी तरीके से नुकसान का सटीक आकलन होना चाहिए। किसानों का कहना है कि इसी विशेष गिरदावरी के आंकड़ों के आधार पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के तहत पात्र किसानों को क्लेम की वास्तविक राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे किसानों का कहना है कि जब तक पूर्व में हुए नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे आगामी फसल चक्र के लिए आवश्यक संसाधन नहीं जुटा पाएंगे।\n\nमुख्य अभियंता के साथ आगामी बैठक पर टिकी सभी की निगाहें\nसड़कों पर जारी तनाव और मंडियों में पसरे सन्नाटे के बीच प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर गतिरोध तोड़ने की कवायद भी जारी है। आज सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर अमरजीत मेहरडा के साथ किसान नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना जताई गई है। इस संभावित बातचीत में अनूपगढ़ शाखा के सुरक्षित पानी, छह माह के पक्के रेगुलेशन के प्रारूप और खरीफ मुआवजे को लेकर बिंदुवार चर्चा हो सकती है। क्षेत्र के हजारों किसान और स्थानीय नागरिक इस वार्ता के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि आज की इस वार्ता में सिंचाई विभाग और सरकार किसानों की प्रमुख चिंताओं पर कोई स्पष्ट और लिखित निर्णय लेते हैं, तभी गतिरोध खत्म होने के आसार बनेंगे; अन्यथा किसान संगठनों ने अपने विरोध को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की चेतावनी दे रखी है।\n\nइसका आप पर असर\nइस चक्काजाम और मंडी बंदी का सबसे बड़ा असर रबी फसल की बुवाई की तैयारियों और स्थानीय आवागमन पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सिंचाई जल और फसल बीमा से जुड़ी यह हड़ताल देश भर में नहरी जल प्रबंधन की खामियों को रेखांकित करती है। समय पर समाधान न होने से उत्तर-पश्चिमी खाद्यान्न बेल्ट में तिलहन और गेहूं के उत्पादन की समय-सारणी प्रभावित हो सकती है।\n• बीकानेर और श्रीगंगानगर में: खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ में मंडियां और दवा दुकानें बंद रहने से दैनिक व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पूरी तरह ठप हो गई है। राजीव सर्किल सहित प्रमुख नहरी चौराहों पर चक्काजाम से आम मुसाफिरों और किसानों का अंतर-कस्बा संपर्क अवरुद्ध हो गया है।\n• स्थानीय काश्तकारों के लिए: छह महीने के पक्के रेगुलेशन के बिना किसान रबी फसलों के बीज और खाद के निवेश को लेकर भारी असमंजस में हैं। यदि नहरों में अनूपगढ़ शाखा का पानी तय चक्र के अनुसार नहीं छूटा तो बिजाई में देरी से प्रति एकड़ उपज घट सकती है।\n• अनाज व्यापारियों और आढ़तियों के लिए: मंडियों में नीलामी और खरीद-फरोख्त रुकने से लाखों रुपये के दैनिक कृषि व्यापार का टर्नओवर थम गया है। हड़ताल लंबी खिंचने पर कृषि जिंसों के परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मजदूरों की दैनिक आय पर गहरा असर पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह आंदोलन सिंचाई पानी की अनिश्चितता और खरीफ फसल के दौरान हुए नुकसान की भरपाई न मिलने के चलते भड़का है। नई मंडी घड़साना में पंद्रह दिनों से जारी धरने के बाद भी प्रशासनिक वार्ता विफल रहने से आक्रोश बढ़ा।\n\n• सिंचाई पानी का अनिश्चित चक्र: किसान रबी की बुवाई से पहले चार में से दो ग्रुप के आधार पर छह महीने की स्थायी रेगुलेशन व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि जलापूर्ति पूर्व-निर्धारित रहे। नहरों में अनूपगढ़ शाखा का पानी आरक्षित न रहने के कारण टेल क्षेत्र के खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा था।\n• सरकारी वार्ता का बेनतीजा रहना: बुधवार को राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत में कोई लिखित या ठोस सहमति नहीं बन सकी। प्रशासनिक स्तर पर जल आवंटन को लेकर कोई ठोस वादा न मिलने से नाराज होकर संयुक्त किसान मोर्चा ने चक्काजाम का आह्वान किया।\n• फसल खराबे और बीमा क्लेम की अनदेखी: खरीफ सीजन में प्राकृतिक कारणों से हुए फसल नुकसान की विशेष गिरदावरी समय पर पूरी नहीं की गई। इसके चलते प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रभावित किसानों को मुआवजा और क्लेम राशि मिलने में भारी अड़चन आ रही है।\n• प्रशासनिक स्तर पर अविश्वास: सरकार द्वारा मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को हटाकर अरुण कुमार सिडाना को नियुक्त किए जाने के बावजूद किसान संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि उनका मानना है कि नीतिगत निर्णय लिए बिना मात्र अधिकारी बदलने से नहरों में पानी नहीं आएगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किसान किन मुख्य इलाकों में चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं?\nकिसान खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों में चक्काजाम कर रहे हैं, जिसमें खाजूवाला का राजीव सर्किल मुख्य प्रदर्शन स्थल है।\n\n2. किसानों की जल वितरण को लेकर प्रमुख तकनीकी मांग क्या है?\nकिसान अनूपगढ़ शाखा के लिए पानी आरक्षित रखने और चार में से दो ग्रुप के आधार पर छह महीने का स्थायी रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहे हैं।\n\n3. घड़साना में यह विरोध प्रदर्शन कितने दिनों से चल रहा है?\nनई मंडी घड़साना में सिंचाई पानी की उपलब्धता को लेकर किसानों का आंदोलन पिछले 15 दिनों से लगातार चल रहा है।\n\n4. हनुमानगढ़ सिंचाई विभाग में सरकार ने क्या प्रशासनिक बदलाव किया?\nसरकार ने हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को पद से हटाकर उनकी जगह अरुण कुमार सिडाना को नया मुख्य अभियंता नियुक्त किया है।\n\n5. किसानों ने फसल बीमा और मुआवजे को लेकर क्या मांग उठाई है?\nकिसानों ने खराब हुई खरीफ फसलों की तत्काल विशेष गिरदावरी कराने और उसके आधार पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा देने की मांग की है।\n\n6. क्या इस आंदोलन को अन्य व्यापारिक वर्गों का समर्थन मिला है?\nहां, खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की कृषि मंडियों के व्यापारियों तथा मेडिकल स्टोर संचालकों ने प्रतिष्ठान बंद रखकर समर्थन दिया है।\n\n7. आगामी दौर में किसानों की किस अधिकारी से बातचीत प्रस्तावित है?\nकिसान नेताओं की सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर अमरजीत मेहरडा के साथ आगे की वार्ता प्रस्तावित है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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