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  "type": "article",
  "title": "सिरोही जिले के आबूरोड में सांड ने भाजपा जिला मंत्री के मासूम बच्चे को सींगों से हवा में उछाला, मां भी चोटिल",
  "summary": "राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड में एक आवारा सांड ने भाजपा नेता के तीन वर्षीय बेटे पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बच्चे को बचाने की कोशिश में उसकी मां भी घायल हो गई हैं।",
  "content": "सिरोही जिले के आबूरोड क्षेत्र में आने वाली शिवाजी कॉलोनी में एक आवारा सांड के हमले में तीन साल का एक मासूम बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित बच्चे की पहचान निशांत के रूप में हुई है, जो भाजपा जिला मंत्री दुर्गेश राव का बेटा है। शाम के समय हुई इस दर्दनाक घटना ने आवारा पशुओं के आतंक और उन्हें नियंत्रित करने में स्थानीय प्रशासन की नाकामी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस हादसे के बाद से पूरी कॉलोनी और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच डर और गुस्से का माहौल है।\n\nघर के बाहर खेलते समय अचानक हुआ हमला\nयह खौफनाक हादसा 11 सितंबर की शाम को करीब साढ़े छह बजे पेश आया। तीन वर्षीय निशांत अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था, तभी वहां एक आवारा सांड अचानक आ धमका। इससे पहले कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति स्थिति को समझ पाता या बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जा पाता, सांड ने आक्रामक रुख अपना लिया। सांड ने सीधे मासूम निशांत पर हमला बोला और उसे अपने नुकीले सींगों पर उठाकर बेरहमी से जमीन पर पटक दिया। इस अचानक हुए हमले से वहां खेल रहे बच्चों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया।\n\nबच्चे को बचाने की कोशिश में मां भी घायल\nचीख-पुकार सुनकर दुर्गेश राव की पत्नी अपने बेटे को बचाने के लिए तुरंत बाहर दौड़ीं। बच्चे को सांड के चंगुल से छुड़ाने के प्रयास में वह खुद भी उसकी चपेट में आ गईं और चोटिल हो गईं। इस दौरान आस-पास के पड़ोसियों ने सूझबूझ और बहादुरी दिखाई। स्थानीय लोग तुरंत लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और सांड को वहां से खदेड़ने में कामयाब रहे, जिससे बच्चे की जान बच सकी। इस जानलेवा हमले में निशांत के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं, जिसके बाद उसे तुरंत उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।\n\nसड़कों पर मवेशियों के कारण मंडराता हादसों का खतरा\nशिवाजी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि आबूरोड में आवारा पशुओं द्वारा लोगों को निशाना बनाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूरे शहर के प्रमुख मार्गों, व्यस्त बाजारों और आवासीय कॉलोनियों में आवारा सांडों और अन्य मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। सड़कों के बीचों-बीच सांडों की आपसी लड़ाई होना यहां एक आम बात बन चुकी है। इस वजह से पैदल चलने वाले राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। नागरिकों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार करते हैं और उससे पहले कोई ठोस कदम नहीं उठाते।\n\nनगरपालिका को चेतावनी और सख्त कार्रवाई की मांग\nइस हादसे के बाद भाजपा जिला मंत्री दुर्गेश राव ने स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) से मुलाकात कर उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए दुर्गेश राव ने मांग की है कि आबूरोड की सड़कों पर घूम रहे सभी आवारा पशुओं को तुरंत पकड़कर सुरक्षित गौशालाओं में भेजा जाए। इसके अलावा, उन्होंने उन पशुपालकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है जो अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगरपालिका प्रशासन ने इस समस्या का स्थायी और जल्द समाधान नहीं निकाला, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।\n\nइसका आप पर असर\nयह दर्दनाक घटना सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाले गंभीर खतरों और स्थानीय प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है।\n\n• भारत में: सड़कों पर आवारा पशुओं की बेकाबू मौजूदगी पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के लिए एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बनी हुई है। अपने पशुओं को खुला छोड़ने वाले मालिकों पर भारी जुर्माना लगाने से देश भर में ऐसे हादसों को कम किया जा सकता है।\n• आबूरोड (सिरोही) में: स्थानीय निवासियों को बच्चों को घर से बाहर अकेले भेजने या शाम के समय सड़कों पर टहलते वक्त बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी क्षेत्र में आक्रामक पशुओं का झुंड दिखने पर तुरंत स्थानीय नगरपालिका प्रशासन से संपर्क कर उन्हें हटाने की मांग करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआबूरोड में हुई यह गंभीर घटना स्थानीय नगरपालिका की लापरवाही और पशुपालकों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये का मिला-जुला नतीजा है। सार्वजनिक सड़कों से आवारा पशुओं को नियमित रूप से न हटाए जाने के कारण रिहायशी इलाके असुरक्षित हो गए हैं।\n\n• पशुपालकों की लापरवाही: कई स्थानीय पशुपालक दूध निकालने के बाद चारे के खर्च से बचने के लिए अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं। इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण आवासीय क्षेत्रों में आवारा सांडों और गायों का जमावड़ा लगा रहता है।\n• नगरपालिका की निष्क्रियता: स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका द्वारा सड़कों से आवारा जानवरों को पकड़ने और उन्हें गौशालाओं में भेजने के लिए नियमित अभियान नहीं चलाए जा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर की जाने वाली इस ढिलाई के कारण सड़कों पर हादसों का खतरा बढ़ गया है।\n• सख्त कानूनी कार्रवाई का अभाव: मवेशियों को आवारा छोड़ने वाले मालिकों के खिलाफ भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई न होने से लोगों में कोई डर नहीं है। इसके चलते वे बेखौफ होकर अपने जानवरों को सार्वजनिक मार्गों पर छोड़ देते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आवारा सांड के हमले में घायल हुआ बच्चा कौन है?\nघायल बच्चा तीन वर्षीय निशांत है, जो भाजपा जिला मंत्री दुर्गेश राव का बेटा है।\n\n2. सांड के हमले की यह घटना कब और कहां हुई?\nयह घटना 11 सितंबर की शाम को करीब साढ़े छह बजे सिरोही के आबूरोड स्थित शिवाजी कॉलोनी में हुई।\n\n3. घटना के दौरान बच्चे की मां कैसे घायल हो गईं?\nहमलावर सांड से अपने बेटे को बचाने के लिए दौड़ने के दौरान बच्चे की मां भी सांड की चपेट में आ गईं और चोटिल हो गईं।\n\n4. दुर्गेश राव ने नगरपालिका प्रशासन से क्या मांगें की हैं?\nउन्होंने मांग की है कि सभी आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित गौशालाओं में भेजा जाए और सड़कों पर मवेशियों को खुला छोड़ने वाले मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।\n\n5. यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन को क्या चेतावनी दी है?\nस्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि नगरपालिका ने जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-12",
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