स्पेन में 100 किमी वर्ल्ड चैंपियनशिप में चमके अमर सिंह देवांदा, नया नेशनल रिकॉर्ड बनाकर हासिल किया 23वां स्थान भारतीय वायुसेना के जवान अमर सिंह देवांदा ने स्पेन में आयोजित 100 किमी वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड 10 मिनट से अधिक समय से तोड़ा और 23वां स्थान हासिल किया. अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा रनिंग के मंच पर भारत का परचम लहराते हुए भारतीय वायुसेना के धावक अमर सिंह देवांदा ने स्पेन की धरती पर असाधारण प्रदर्शन दर्ज कराया है। स्पेन में संपन्न हुई आईएयू 100 किमी वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेते हुए अमर सिंह ने बेहद कठिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच 100 किलोमीटर की लंबी दूरी केवल 6 घंटे 49 मिनट 17 सेकंड में नाप दी। दुनिया भर से आए सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय धावकों के कड़े मुकाबले के बीच उन्होंने धैर्य और गति का ऐसा तालमेल दिखाया कि वे शीर्ष 25 प्रतिभागियों में शामिल होकर 23वें स्थान पर रहे। अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड को 10 मिनट से ज्यादा सुधारा इस वैश्विक प्रतियोगिता में अमर सिंह देवांदा का प्रदर्शन सिर्फ फिनिश लाइन पार करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया। इस रेस के दौरान उन्होंने अपने पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड में 10 मिनट से भी अधिक समय का सुधार किया। लंबी दूरी की अल्ट्रा दौड़ में जहां कुछ पलों का अंतर तय करने में महीनों का पसीना बह जाता है, वहां दस मिनट से ज्यादा की कटौती उनके उत्कृष्ट शारीरिक स्तर और मानसिक एकाग्रता को साबित करती है। स्पेन के चुनौतीपूर्ण माहौल में उन्होंने शुरुआती चरण से लेकर रेस के अंतिम किलोमीटर तक अपनी तय गति को बिना लड़खड़ाए बरकरार रखा। चीथवाड़ी से लेकर बेंगलूरु तक की कड़ी ट्रेनिंग राजस्थान में जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चीथवाड़ी गांव के रहने वाले अमर सिंह की यह कामयाबी रातोंरात नहीं मिली है। इस स्तर तक पहुंचने के लिए उन्होंने वर्षों का कठोर अभ्यास किया है। भारतीय वायुसेना में सेवारत होने के साथ ही उन्होंने अपनी खेल तैयारियों को धार देने के लिए बेंगलूरु को अपना प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र चुना है। अल्ट्रा मैराथन जैसी बेहद थकाऊ दौड़ के लिए न केवल शारीरिक सहनशीलता बल्कि जबरदस्त मानसिक दृढ़ता की दरकार होती है, जिसके लिए वे नियमित रूप से कड़ी दिनचर्या का पालन करते रहे हैं। अल्ट्रा रनिंग में पहले भी बना चुके हैं ऐतिहासिक कीर्तिमान अमर सिंह देवांदा इससे पूर्व भी लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का मान बढ़ा चुके हैं। 24 घंटे की नॉनस्टॉप दौड़ प्रतियोगिता में उन्होंने 282.881 किलोमीटर की दूरी पूरी करके राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया था। इसके अतिरिक्त, वे एशिया-ओशिनिया 24 घंटे रेस के चैंपियन का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं। अब स्पेन में 100 किलोमीटर की स्पर्धा में अपने पुराने कीर्तिमान को ध्वस्त करने के साथ ही उनके उपलब्धियों के खाते में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। वायुसेना की सेवा और खेल का अनुशासित संतुलन अमर सिंह की यात्रा इस मायने में भी अनुकरणीय है कि वे देशसेवा के अपने नियमित दायित्वों के साथ इस खेल को साध रहे हैं। भारतीय वायुसेना की सक्रिय ड्यूटी निभाने के बाद बचे समय में कठोर वर्कआउट, डाइट और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की योजना बनाना उनके कड़े अनुशासन को दर्शाता है। एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर वैश्विक ट्रैक पर देश का झंडा फहराने का उनका यह सफर खेल जगत और युवाओं के लिए प्रेरणा का सबब बना हुआ है। इसका आप पर असर यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स और अल्ट्रा रनिंग के क्षेत्र में उभरते अवसरों को रेखांकित करती है। • भारत में: देश में गैर-पारंपरिक और अल्ट्रा मैराथन खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इससे उभरते धावकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। • राजस्थान में: ग्रामीण अंचल के युवाओं को सीमित संसाधनों के बावजूद खेलों में करियर बनाने की प्रेरणा मिलेगी। राज्य के स्थानीय खेल अकादमियों और क्लबों में लंबी दूरी की दौड़ को लेकर रुचि में इजाफा होगा। • सैन्य कर्मियों के लिए: सशस्त्र बलों के जवानों में ड्यूटी के साथ खेलों में उच्च स्तर पर जाने का आत्मविश्वास बढ़ेगा। खेल कोटे और फिटनेस के जरिए आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे। • फिटनेस समुदाय: मैराथन और लंबी दूरी के शौकिया धावकों को बेहतर पेसिंग और ट्रेनिंग के तरीके अपनाने की सीख मिलेगी। वे अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को नए सिरे से निर्धारित कर सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ अमर सिंह देवांदा का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन वर्षों के सुनियोजित अभ्यास और रणनीतिक निष्पादन का परिणाम है। • वैज्ञानिक प्रशिक्षण व्यवस्था: अमर सिंह ने अपनी मुख्य ट्रेनिंग के लिए बेंगलूरु को केंद्र बनाया जहां आधुनिक खेल तकनीक और अनुकूल वातावरण उपलब्ध था। इस नियंत्रित अभ्यास ने उनके शारीरिक स्टेमिना को शिखर पर पहुंचाया। • पूर्व अनुभवों का लाभ: वे पहले से 24 घंटे की रेस और एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर जीत दर्ज कर चुके थे। इन कठिन अंतरराष्ट्रीय दौरों के अनुभव ने उन्हें स्पेन के ट्रैक पर गति संतुलित रखने में मदद की। • स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण: रेस में उनका मकसद केवल दौड़ पूरी करना नहीं बल्कि अपने पूर्व नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ना था। इसी मानसिक तैयारी के चलते वे रेस की शुरुआत से अंत तक बिना थके गति बनाए रखने में सफल रहे। सवाल-जवाब 1. अमर सिंह देवांदा ने 100 किमी वर्ल्ड चैंपियनशिप में क्या उपलब्धि हासिल की? उन्होंने स्पेन में आयोजित प्रतियोगिता में 100 किमी की दौड़ 6 घंटे 49 मिनट 17 सेकंड में पूरी कर 23वां स्थान पाया और अपना पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। 2. उन्होंने अपने पिछले राष्ट्रीय रिकॉर्ड में कितने समय का सुधार किया? अमर सिंह ने अपने पिछले राष्ट्रीय रिकॉर्ड के समय में 10 मिनट से अधिक की कटौती कर नया कीर्तिमान बनाया। 3. अमर सिंह देवांदा किस संस्था में कार्यरत हैं और वे मूलतः कहां के रहने वाले हैं? वे भारतीय वायुसेना में सेवारत हैं और राजस्थान के जयपुर ग्रामीण स्थित चीथवाड़ी गांव के निवासी हैं। 4. अल्ट्रा रनिंग में उनके नाम अन्य कौन से प्रमुख रिकॉर्ड दर्ज हैं? उनके नाम 24 घंटे की दौड़ में 282.881 किलोमीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज है और वे एशिया-ओशिनिया 24 घंटे रेस के चैंपियन भी रह चुके हैं। 5. अमर सिंह अपनी खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी कहां रहकर करते हैं? उन्होंने अपनी उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और फिटनेस की तैयारी के लिए बेंगलूरु को अपना प्रमुख केंद्र बनाया हुआ है। प्रेरणा और सबक चीथवाड़ी से अंतरराष्ट्रीय पोडियम के करीब तक का अमर सिंह का सफर लगन और समय प्रबंधन की अनूठी मिसाल है। • कर्तव्य और जुनून का संतुलन: वायुसेना की नियमित सैन्य सेवा के बावजूद उन्होंने अपने खेल के शौक को कभी पीछे नहीं छूटने दिया। व्यक्ति चाहे जिस पेशे में हो, समय का सही प्रबंधन करके अपने सपनों को साकार कर सकता है। • सतत आत्म-सुधार: दूसरों से तुलना करने के बजाय उन्होंने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड को 10 मिनट से बेहतर करने पर ध्यान केंद्रित किया। वास्तविक प्रगति खुद के पुराने स्तर को पीछे छोड़ने में निहित होती है। • धैर्य और मानसिक मजबूती: 100 किलोमीटर की दौड़ केवल पैरों के दम पर नहीं बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति से जीती जाती है। विपरीत परिस्थितियों में शांत रहकर लक्ष्य पर टिके रहना ही सफलता की कुंजी है। • जड़ों से जुड़कर शिखर तक: एक छोटे गांव की गलियों से निकलकर वैश्विक स्तर पर चमकना यह सिद्ध करता है कि प्रतिभा पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। अटूट लगन किसी भी बाधा को पार करा सकती है। https://trendkia.com/rajasthan/spena-men-100-kimi-varlda-chainpiyanashipa-men-chamake-amar-singh-dewanda-naya-neshanala-rikorda-banakara-hasila-kiya-23van-sthana-41808 TrendKia — Har trend, sabse pehle.