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  "type": "article",
  "title": "श्रीगंगानगर में नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले गरमाई सियासत, पार्षद को गैंगस्टर के नाम से धमकी मिलने पर तीन लोगों पर केस दर्ज",
  "summary": "श्रीगंगानगर नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले निर्दलीय पार्षद को धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस ने निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।",
  "content": "श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति चुनाव से ठीक पहले स्थानीय सियासत में जबरदस्त हलचल मच गई है। चुनावी मुकाबले के बीच अब पुलिस केस और गंभीर आरोपों का दौर शुरू हो चुका है। एक निर्दलीय पार्षद ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि उन्हें अज्ञात फोन कॉल के जरिए एक खास उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता पार्षद हेमराज चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। इस प्राथमिकी में निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, स्थानीय व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह को नामजद किया गया है।\n\nप्राप्त विवरण के अनुसार, पार्षद को आई कॉल में कथित रूप से एक गैंगस्टर के नाम का सहारा लिया गया ताकि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। फोन करने वाले ने साफ तौर पर कहा कि मतदान के दिन पार्षद को संजय मुंदड़ा के पक्ष में ही अपना वोट देना होगा। इस घटनाक्रम के उजागर होते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और मामले की तकनीकी जांच आरंभ कर दी गई है। श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति की कुर्सी के लिए मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अजय दावड़ा और पार्टी से बगावत कर निर्दलीय के रूप में उतरे संजय मुंदड़ा के बीच बना हुआ है। मतदान से ऐन पहले इस तरह की धमकी का मामला सामने आने से समूचे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।\n\nगैंगस्टर के नाम पर दबाव बनाने का सनसनीखेज आरोप\nनिर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने पुलिस थाने में औपचारिक तहरीर देकर पूरे घटनाक्रम का ब्योरा दिया है। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर एक कुख्यात गैंगस्टर के नाम की धौंस जमाई। उसने दो टूक लहजे में निर्देश दिया कि नगर परिषद सभापति चुनाव में उन्हें केवल और केवल निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के पक्ष में ही मतदान करना होगा। पार्षद का कहना है कि कॉल के दौरान उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया और अनुचित तरीके से मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इस बातचीत के बाद पार्षद ने सुरक्षा की चिंता जताते हुए सीधे पुलिस से संपर्क किया और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए केस दर्ज करवाया।\n\nसंजय मुंदड़ा, अशोक चांडक और मुकेश शाह पर कानूनी शिकंजा\nपार्षद हेमराज चौधरी की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन प्रमुख व्यक्तियों के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज की है। इसमें निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के अलावा नामी व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह शामिल हैं। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की वास्तविक सच्चाई अभी साबित होना बाकी है। पुलिस की जांच टीम अब तकनीकी विश्लेषण में जुट गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिस मोबाइल नंबर से धमकी भरी कॉल आई थी, वह किसके नाम पर पंजीकृत है, वास्तविक कॉल करने वाला कौन था और फोन पर वास्तव में किस गैंगस्टर के नाम का उल्लेख किया गया था। इस पड़ताल में संबंधित नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टावर लोकेशन जैसे अहम डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।\n\nअजय दावड़ा बनाम संजय मुंदड़ा: रोचक हुआ चुनावी गणित\nश्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति का मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अजय दावड़ा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं पार्टी के भीतर बगावत का झंडा उठाकर संजय मुंदड़ा बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं। इस दोतरफा खींचतान में नगर परिषद के प्रत्येक निर्वाचित पार्षद का समर्थन दोनों ही गुटों के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। सभापति पद की कुर्सी हासिल करने के लिए पार्षदों को अपने पाले में खींचने की सियासी कवायद लगातार चल रही थी, लेकिन मतदान से पहले धमकी के इस मामले ने पूरे चुनावी माहौल को बेहद तनावपूर्ण और संवेदनशील बना दिया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष तफ्तीश पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कॉल के पीछे वास्तविक सूत्रधार कौन था और इस धमकी के पीछे क्या साजिश थी।\n\nजांच के बाद सामने आएंगे तथ्य, चुनाव पर टिकी नजरें\nएफआईआर दर्ज करने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारी तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ शिकायत में दर्ज तमाम बिंदुओं की सिलसिलेवार तस्दीक कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। वर्तमान में इस मामले में केवल शिकायतकर्ता पार्षद के आरोप और प्राथमिकी में शामिल नाम ही सामने आए हैं। नामजद आरोपियों की तरफ से यदि कोई आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे भी निष्पक्ष जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। मतदान से ठीक पहले घटे इस पूरे घटनाक्रम ने श्रीगंगानगर की सियासत का तापमान चरम पर पहुंचा दिया है। अब शहरवासियों और राजनीतिक जानकारों की नजरें एक तरफ जहां पुलिस की जांच पर हैं, वहीं दूसरी ओर सभापति पद के लिए होने वाले मतदान के नतीजों पर भी टिकी हुई हैं।\n\nइसका आप पर असर\nश्रीगंगानगर नगर परिषद चुनाव में गैंगस्टर के नाम से धमकी मिलने और नामजद केस दर्ज होने से स्थानीय शासन और चुनावी शुचिता पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• भारत में: स्थानीय निकाय चुनावों में धनबल और बाहुबल के इस्तेमाल के बढ़ते मामलों पर चुनाव सुधार और सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो सकती है। लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने की घटनाओं से चुनावी निष्पक्षता की निगरानी कड़ी करने की जरूरत रेखांकित होती है।\n• श्रीगंगानगर में: नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले उपजे इस विवाद के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था और पार्षदों की सुरक्षा को लेकर चौकसी बढ़ा दी गई है। स्थानीय मतदाताओं और पार्षदों पर राजनीतिक तनाव का सीधा असर पड़ रहा है, जिससे आगामी सभापति के चुनाव परिणाम और नगर परिषद के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।\n• स्थानीय प्रशासन के लिए: पुलिस प्रशासन पर बिना किसी राजनीतिक दबाव के कॉल करने वाले और साजिशकर्ताओं की पहचान जल्द से जल्द उजागर करने का भारी दबाव है। साइबर सेल और तकनीकी टीमों को कॉल डिटेल्स और लोकेशन खंगालने का तत्काल जिम्मा दिया गया है।\n• चुनावी समीकरण पर: निर्दलीय पार्षदों की भूमिका इस चुनाव में बेहद निर्णायक हो गई है, जिससे दोनों प्रमुख गुटों के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nश्रीगंगानगर नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में दोनों पक्षों के बीच बेहद नजदीकी मुकाबला और बगावत इस पूरे विवाद का मुख्य कारण बनी है।\n\n• पार्टी में बगावत और करीबी मुकाबला: भारतीय जनता पार्टी द्वारा अजय दावड़ा को अधिकृत उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी से बागी होकर संजय मुंदड़ा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए, जिससे मुकाबला कड़ा हो गया। दोनों खेमों के बीच जीत के लिए आवश्यक बहुमत जुटाने की होड़ ने हर एक निर्दलीय पार्षद के वोट को बेहद कीमती बना दिया।\n• निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश: शिकायतकर्ता हेमराज चौधरी के अनुसार, मतदान को प्रभावित करने के उद्देश्य से अज्ञात कॉलर ने एक गैंगस्टर के नाम का सहारा लेकर उन पर संजय मुंदड़ा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाया। हालांकि यह फोन कॉल किसने की और किसके इशारे पर की गई, इसकी सत्यता अभी पुलिस जांच में स्पष्ट होना बाकी है।\n• तीन लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत: पार्षद द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में निर्दलीय उम्मीदवार संजय मुंदड़ा, व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के नाम शामिल किए जाने से मामला कानूनी पचड़े में बदल गया। पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डेटा रिकॉर्ड्स और नंबर की मिल्कियत की पड़ताल कर वास्तविक कारणों और भूमिका की जांच कर रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. श्रीगंगानगर में किस चुनाव को लेकर विवाद हुआ है?\nश्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव को लेकर यह विवाद सामने आया है।\n\n2. धमकी मिलने की शिकायत किस पार्षद ने दर्ज कराई है?\nनिर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने पुलिस में धमकी भरा फोन आने की शिकायत दर्ज कराई है।\n\n3. पार्षद को किसके पक्ष में वोट डालने के लिए कहा गया था?\nपार्षद के अनुसार, उन्हें निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के पक्ष में मतदान करने के लिए धमकाया गया था।\n\n4. दर्ज की गई एफआईआर में किन लोगों के नाम शामिल हैं?\nएफआईआर में निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह के नाम दर्ज किए गए हैं।\n\n5. सभापति पद के लिए मुख्य मुकाबला किन प्रत्याशियों के बीच है?\nयह मुकाबला भाजपा प्रत्याशी अजय दावड़ा और निर्दलीय के रूप में उतरे भाजपा के बागी संजय मुंदड़ा के बीच है।\n\n6. पुलिस इस मामले में क्या कदम उठा रही है?\nपुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और फोन कॉल से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों व कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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    "श्रीगंगानगर",
    "नगर परिषद चुनाव",
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