श्रीगंगानगर में पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी का स्लीपर सेल नेटवर्क बेनकाब, तीन आरोपी गिरफ्तार राजस्थान के श्रीगंगानगर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे और सोशल मीडिया के जरिए स्लीपर सेल तैयार कर रहे थे। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में सुरक्षा तंत्र को हिला देने वाली एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार सीमा पार बैठे असामाजिक तत्वों से जुड़े बताए जा रहे हैं। शुरुआती तफ्तीश में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि ये सभी संदिग्ध पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के सीधे संपर्क में थे। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद से केंद्रीय और राज्य की तमाम खुफिया व सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हो गई हैं और गहराई से हर पहलू की जांच की जा रही है। सोशल मीडिया के जरिए तैयार हो रहा था स्लीपर सेल जांच एजेंसियों के अनुसार, इन आरोपियों ने अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने और नेटवर्क का दायरा फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया था। तकनीक का दुरुपयोग करते हुए एक विशेष सोशल मीडिया ग्रुप बनाया गया था जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं को अपने पाले में खींचने और एक मजबूत स्लीपर सेल तैयार करने की नापाक कोशिश की जा रही थी। अब तक की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इस संदिग्ध ग्रुप के भीतर कुल 16 नए लोगों को बतौर सदस्य जोड़ा जा चुका था। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की पुरजोर कोशिश कर रही हैं कि इन 16 नए सदस्यों की असल पहचान क्या है और उन्हें किस खास मकसद या निर्देश के तहत इस ग्रुप का हिस्सा बनाया गया था। रायसिंहनगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई इस पूरे मामले की गूंज तब तेज हुई जब रायसिंहनगर पुलिस ने अपनी खुफिया सूचना के आधार पर जाल बिछाया और तीन संदिग्ध युवकों को धर दबोचा। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार किए गए तीनों युवक पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के साथ लगातार संपर्क में बने हुए थे। हालांकि, एजेंसियां अभी इस बात की गहराई से थाह ले रही हैं कि इन युवकों की इस पाकिस्तानी ऑपरेटर से पहली बार मुलाकात या संपर्क कैसे हुआ, वे किस तरह की भाषा या ऐप के जरिए बातचीत करते थे और इस पूरे स्लीपर सेल नेटवर्क में प्रत्येक की व्यक्तिगत भूमिका क्या तय की गई थी। चूंकि श्रीगंगानगर एक संवेदनशील सीमावर्ती जिला है, इसलिए इस मामले को बेहद उच्च स्तर की गंभीरता के साथ लिया जा रहा है। मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों की हो रही पड़ताल स्थानीय पुलिस के साथ-साथ देश की कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियां भी इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में संयुक्त रूप से जुट गई हैं। इस जांच का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु आरोपियों के मोबाइल फोन, उनके अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट्स, उस गुप्त ग्रुप में हुई चैटिंग और उनके अन्य संभावित सहयोगियों का कच्चा चिट्ठा खंगालना है। अधिकारी इस बात का भी तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या इन तीनों आरोपियों का संपर्क केवल शहजाद भट्टी तक ही सीमित था या फिर इस खतरनाक जासूसी और आतंकी नेटवर्क में देश के भीतर और भी कई लोग सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रहे थे। फिलहाल मामले की तह तक जाने के लिए कड़ाई से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में डिजिटल सबूतों के आधार पर कुछ और बड़े खुलासे होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इसका आप पर असर श्रीगंगानगर में सीमा पार से संचालित स्लीपर सेल नेटवर्क के खुलासे ने देश के सभी सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। • भारत में: सीमावर्ती राज्यों में युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए गुमराह करने वाले राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ केंद्रीय और राज्य एजेंसियां विशेष निगरानी अभियान चलाएंगी। इससे सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों और ग्रुप्स पर नजर रखने के नियमों को और अधिक कड़ा किया जाएगा। • श्रीगंगानगर में: स्थानीय निवासियों और युवाओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की हिदायत दी जाएगी ताकि वे किसी भी अज्ञात या संदिग्ध ऑनलाइन ग्रुप का हिस्सा बनने से बच सकें। जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस सरहद के पास गश्त बढ़ा सकती है और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देने के निर्देश जारी कर सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह साजिश पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स द्वारा भारत के सीमावर्ती जिलों में अशांति फैलाने और स्थानीय युवाओं को अपनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की सोची-समझी रणनीति के तहत रची गई थी। • सोशल मीडिया का दुरुपयोग: आरोपियों ने एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स और ग्रुप्स को सुरक्षित माध्यम मानकर कम उम्र के युवाओं को आसानी से अपने पाले में खींचने का जरिया बनाया। • सीमावर्ती इलाकों को निशाना बनाना: श्रीगंगानगर जैसे संवेदनशील बॉर्डर वाले जिलों में खुफिया तंत्र में सेंध लगाने और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्लीपर सेल खड़े करना विदेशी ऑपरेटरों की पुरानी कार्यशैली रही है। • जांच की वर्तमान स्थिति: पुलिस और खुफिया एजेंसियां पकड़े गए आरोपियों के डिजिटल उपकरणों और चैट के आधार पर यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल थे और उनका अगला लक्ष्य क्या था। सवाल-जवाब 1. श्रीगंगानगर में पुलिस ने कुल कितने युवकों को गिरफ्तार किया है? रायसिंहनगर पुलिस ने इस मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। 2. यह स्लीपर सेल नेटवर्क किसके संपर्क में चलाया जा रहा था? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये युवक पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। 3. सोशल मीडिया ग्रुप में कितने नए लोगों को जोड़ा गया था? जांच के दौरान पता चला है कि इस संदिग्ध ग्रुप में 16 नए लोगों को सदस्य बनाया गया था। 4. इस मामले की जांच कौन सी एजेंसियां कर रही हैं? रायसिंहनगर पुलिस के साथ विभिन्न प्रमुख सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। 5. पुलिस मुख्य रूप से किन चीजों की पड़ताल कर रही है? पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, ग्रुप चैट और अन्य संपर्कों की गहनता से पड़ताल कर रही है। https://trendkia.com/rajasthan/sriganganagar-men-pakistani-haindalara-shehzad-bhatti-ka-slipara-sela-netavarka-benakaba-tina-aropi-giraphtara-57758 TrendKia — Har trend, sabse pehle.