सुनील कोठारी बने जयपुर के नए मेयर, पार्षदों की वोटिंग में बीजेपी ने कांग्रेस को 29 वोटों से हराया जयपुर नगर निगम में मेयर पद के लिए हुए चुनाव में बीजेपी के सुनील कोठारी ने 89 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 60 मत मिले। जयपुर नगर निगम के नए मुखिया के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के सुनील कोठारी चुन लिए गए हैं। पार्षदों के बीच हुए इस कड़े मुकाबले में कोठारी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज करते हुए नगर निगम की कमान अपने हाथ में ले ली है। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद आए नतीजों में बीजेपी प्रत्याशी को कुल 89 पार्षदों का समर्थन मिला, जिससे उनका मेयर बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। मतदान में किस दल को कितने वोट मिले मेयर पद के लिए डाले गए वोटों की गिनती में कांग्रेस पार्टी को 60 मतों से संतोष करना पड़ा। इस तरह बीजेपी उम्मीदवार ने कांग्रेस को 29 वोटों के सीधे अंतर से हरा दिया। वहीं चुनाव में एक वोट नोटा यानी इनमें से कोई नहीं के खाते में भी गया। पार्षदों के इस संख्या बल ने राजधानी के नगर निगम पर सत्ताधारी दल की पकड़ को और मजबूत कर दिया है। 150 वार्डों के चुनाव से शुरू हुआ था सियासी सफर जयपुर नगर निगम के इस पूरे चुनाव की शुरुआत शहर के 150 वार्डों के लिए हुए आम मतदान से हुई थी। वार्ड स्तर पर मतदाताओं के फैसले के बाद 15 सितंबर को वोटों की गिनती की गई थी। इसके बाद चुनकर आए पार्षदों के पाले में मेयर का चयन करने का अधिकार आया। वार्ड परिणामों के बाद दोनों दलों के बीच बने समीकरणों के बीच अंततः बीजेपी ने पार्षदों के मतदान में भारी बहुमत साबित कर अपना बोर्ड बना लिया। इसका आप पर असर जयपुर नगर निगम में नए मेयर के चुनाव से शहर की नागरिक व्यवस्था और स्थानीय विकास परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है। • जयपुर में: नगर निगम का बोर्ड स्पष्ट बहुमत के साथ बनने से शहर की सफाई, स्ट्रीट लाइट और सड़क निर्माण जैसे रुके हुए विकास कार्यों में तेजी आएगी। नागरिक सेवाओं से जुड़े प्रशासनिक फैसले अब बिना राजनीतिक गतिरोध के जल्द लागू हो सकेंगे। • भारत में: राज्य स्तर पर सत्ताधारी दल के हाथों में नगर निगम की कमान जाने से केंद्र और राज्य पोषित शहरी विकास मिशनों का तालमेल बेहतर होगा। केंद्रीय अनुदान से चलने वाले बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारना अधिक सुगम हो जाएगा। • स्थानीय राजनीति: पार्षदों के इस आंकड़े ने साफ कर दिया है कि निकाय स्तर पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह तय हो चुके हैं। आने वाले समय में विपक्ष की भूमिका निगम की बैठकों में सख्त निगरानी रखने तक सीमित रह सकती है। • कर और सेवाएं: नए बोर्ड के गठन के बाद प्रॉपर्टी टैक्स वसूली और शहरी कचरा प्रबंधन से जुड़ी नई नीतियां तय की जा सकती हैं। शहरवासियों को अपने वार्ड से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब सीधे चुने हुए प्रतिनिधियों का सहारा मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ जयपुर नगर निगम में मेयर का चुनाव 150 वार्डों में चुने गए पार्षदों द्वारा अपने प्रतिनिधि को चुनने की तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ। • सीधा कारण: 15 सितंबर को वार्ड पार्षदों की मतगणना पूरी होने के बाद कानूनी प्रावधानों के अनुसार नए बोर्ड का मुखिया चुनना अनिवार्य था। पार्षदों ने गुप्त मतदान के जरिए अपनी पसंद का मेयर तय किया। • संख्या बल और जोड़-तोड़: चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को 89 और कांग्रेस को 60 पार्षदों का समर्थन मिला, जिससे स्पष्ट बहुमत बीजेपी के पाले में चला गया। एक पार्षद ने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में न जाते हुए नोटा का विकल्प चुना। • निकाय चुनाव की पृष्ठभूमि: राजस्थान भर के नगर निगमों और पालिकाओं में सामान्य चुनाव प्रक्रिया के बाद शीर्ष पदों के लिए पार्षदों के बीच आंतरिक वोटिंग कराई गई थी। इसी चुनावी चक्र के आखिरी चरण में जयपुर नगर निगम के मेयर का यह चुनाव संपन्न हुआ। सवाल-जवाब 1. जयपुर नगर निगम के नए मेयर कौन चुने गए हैं? भारतीय जनता पार्टी के सुनील कोठारी को जयपुर नगर निगम का नया मेयर चुना गया है। 2. सुनील कोठारी को चुनाव में कितने वोट मिले? सुनील कोठारी को कुल 89 पार्षदों के वोट हासिल हुए। 3. कांग्रेस प्रत्याशी को मेयर चुनाव में कितने मत मिले? कांग्रेस के उम्मीदवार को कुल 60 वोट मिले और वे 29 वोटों से चुनाव हार गए। 4. क्या चुनाव में नोटा का भी इस्तेमाल हुआ था? हां, मतदान के दौरान एक पार्षद ने नोटा यानी इनमें से कोई नहीं का विकल्प चुना। 5. जयपुर नगर निगम में कितने वार्डों के लिए चुनाव हुआ था? जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों के लिए मतदान कराया गया था, जिसकी मतगणना 15 सितंबर को हुई थी। https://trendkia.com/rajasthan/sunil-kothari-bane-jaipur-ke-nae-meyara-parshadon-ki-votinga-men-bjp-ne-congress-ko-29-voton-se-haraya-38402 TrendKia — Har trend, sabse pehle.