सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार के अचानक गायब होने पर भड़का आक्रोश, परिजनों ने किया चक्काजाम सूरतगढ़ नगर पालिका में वार्ड नंबर 43 के कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार के लापता होने पर परिजनों ने पुलिस उपाधीक्षक दफ्तर के सामने सड़क रोककर प्रदर्शन किया। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ इलाके में एक नवनिर्वाचित स्थानीय जनप्रतिनिधि के अचानक लापता होने की घटना ने भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा कर दिया है। वार्ड नंबर 43 से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार जब बीती रात बीकानेर से अपने घर लौट रहे थे, तब वह संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही उनके परिवार के लोग और स्थानीय वार्डवासी सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं। पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय के बाहर चक्काजाम लापता पार्षद का सुराग न मिलने से आक्रोशित परिजनों और समर्थकों ने पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) कार्यालय के बाहर मुख्य मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। सड़क के बीचों-बीच धरना देकर बैठ जाने से इलाके में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई और गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक कृष्ण कुमार को सुरक्षित खोजकर सामने नहीं लाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। गंभीर आरोप और पुलिस पर सवाल पार्षद के परिजनों ने सत्ताधारी दल पर आगामी पालिकाध्यक्ष चुनाव की वोटिंग को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए पार्षद को गायब कराने की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर सत्ताधारी दल की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कृष्ण कुमार की बहन मोनिका बेनीवाल ने स्थिति को लेकर बेहद गंभीर दावे किए हैं। उनका कहना है कि करीब 20 से 25 पुलिसकर्मी उनके भाई को अपने साथ ले गए थे और उसी के बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है। मोनिका का आरोप है कि पुलिस अधिकारी उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं, जबकि परिवार की केवल एक ही मांग है कि उनके भाई को फौरन सुरक्षित घर पहुंचाया जाए। सूरतगढ़ नगर पालिका में राजनीतिक संतुलन और तनाव इस पूरे मामले ने इतना गंभीर रुख इसलिए भी ले लिया है क्योंकि सूरतगढ़ नगर पालिका बोर्ड के चुनाव बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। नगर पालिका में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों के 16-16 पार्षद जीतकर आए हैं। इनके अलावा एक पार्षद माकपा का है और दो निर्दलीय पार्षद जीतकर सदन में पहुंचे हैं। इस बेहद कांटे के मुकाबले के बीच 21 सितंबर को पालिकाध्यक्ष पद के लिए मतदान होना तय है, जहां एक-एक वोट की कीमत निर्णायक साबित होने वाली है। कृष्ण कुमार के लापता होने से चुनावी गणित और समीकरणों को लेकर राजनीतिक गहमागहमी चरम पर पहुंच गई है। इसका आप पर असर इस घटना से स्थानीय नागरिकों की आवाजाही प्रभावित हुई है और आगामी नगर पालिका चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। • सूरतगढ़ में: डिप्टी एसपी कार्यालय के सामने सड़क जाम होने से आम यात्रियों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि पुलिस जल्द समाधान नहीं निकालती है, तो 21 सितंबर को होने वाले पालिकाध्यक्ष चुनाव तक कानून व्यवस्था की स्थिति और तनावपूर्ण रह सकती है। • राजस्थान भर में: स्थानीय निकाय चुनावों में पार्षदों के लापता होने की घटनाओं से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जनता का भरोसा प्रभावित होता है। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और मतदाता ऐसी स्थितियों में प्रशासन की तटस्थता पर करीबी नजर रखते हैं। • वार्ड 43 के मतदाताओं के लिए: अपने नवनिर्वाचित प्रतिनिधि के गायब होने से क्षेत्र की जनता विकास कार्यों और समस्याओं की सुनवाई को लेकर असमंजस में है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, नागरिक अपनी शिकायतों के समाधान के लिए असमर्थ महसूस कर रहे हैं। • प्रशासन और पुलिस के लिए: लापता पार्षद की सकुशल बरामदगी सुनिश्चित करना पुलिस के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने की प्राथमिक चुनौती बन गया है। अधिकारियों को दोनों पक्षों के आक्रोश को शांत करने के लिए पारदर्शी जांच रिपोर्ट पेश करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद नवनिर्वाचित पार्षद के अचानक लापता होने और सूरतगढ़ नगर पालिका में बराबरी के कड़े राजनीतिक मुकाबले के कारण पैदा हुआ है। • पार्षद का अचानक गायब होना: वार्ड नंबर 43 से जीते कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार बीती रात बीकानेर से लौट रहे थे, तभी वे संदिग्ध रूप से लापता हो गए। उनकी कोई खोजबीन न होने से घबराए परिजनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। • 21 सितंबर का कांटे का चुनाव: सूरतगढ़ नगर पालिका बोर्ड में कांग्रेस और भाजपा दोनों के पास 16-16 पार्षद हैं, जबकि एक माकपा और दो निर्दलीय सदस्य हैं। 21 सितंबर को होने वाले पालिकाध्यक्ष चुनाव में हर एक वोट निर्णायक होने के कारण दोनों खेमों में भारी खींचतान चल रही है। • प्रशासन और प्रतिद्वंद्वियों पर गंभीर आरोप: परिजनों का आरोप है कि वोटिंग समीकरणों को प्रभावित करने के लिए सत्ताधारी दल ने पार्षद को गायब करवाया है। वहीं बहन मोनिका बेनीवाल ने आरोप लगाया कि 20 से 25 पुलिसकर्मी उनके भाई को अपने साथ ले गए थे। • आधिकारिक पक्ष का अभाव: आरोपों पर सत्ताधारी दल या पुलिस की तरफ से तत्काल कोई स्पष्टीकरण न आने से परिजनों और स्थानीय जनता का गुस्सा और भड़क गया। सवाल-जवाब 1. सूरतगढ़ में लापता हुए पार्षद का क्या नाम है? लापता हुए जनप्रतिनिधि का नाम कृष्ण कुमार है, जो कांग्रेस के टिकट पर वार्ड नंबर 43 से पार्षद चुने गए हैं। 2. कृष्ण कुमार कब और कहां से गायब हुए? वे बीती रात बीकानेर से सूरतगढ़ लौटते समय संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। 3. परिजनों ने सड़क जाम कहां और क्यों किया? परिजनों और वार्डवासियों ने पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर कृष्ण कुमार की सकुशल वापसी की मांग की। 4. पार्षद की बहन मोनिका बेनीवाल ने क्या आरोप लगाए हैं? मोनिका बेनीवाल का आरोप है कि 20 से 25 पुलिस वाले उनके भाई को लेकर गए थे और पुलिस परिवार की कोई सुनवाई नहीं कर रही है। 5. सूरतगढ़ नगर पालिका में दोनों प्रमुख पार्टियों की क्या स्थिति है? सूरतगढ़ नगर पालिका में कांग्रेस और भाजपा दोनों के 16-16 पार्षद हैं, जबकि एक पार्षद माकपा और दो निर्दलीय हैं। 6. पालिकाध्यक्ष पद के लिए मतदान कब होना निर्धारित है? सूरतगढ़ में पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर को होना निर्धारित है। https://trendkia.com/rajasthan/suratagarha-men-congress-parshada-krishna-kumar-ke-achanaka-gayaba-hone-para-bharaka-akrosha-parijanon-ne-kiya-chakkajama-33824 TrendKia — Har trend, sabse pehle.