# तापमान में उतार-चढ़ाव से अस्पतालों में बढ़े मौसमी मरीज, स्वास्थ्य अधिकारियों ने जारी की बच्चों और बुजुर्गों के बचाव की सलाह

> मौसम बदलने के साथ ही दिन में हल्की गर्मी और सुबह-शाम ठंड से वायरल और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष एहतियात बरतने को कहा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/tapamana-men-utara-charhava-se-aspatalon-men-barhe-mausami-marija-svasthya-adhikariyon-ne-jari-ki-bachchon-aura-bujurgon-ke-bachav-56487 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्वास्थ्य समाचार, भीलवाड़ा, मौसमी बीमारी, सर्दी जुकाम, संजीव शर्मा, शिशु देखभाल, बुजुर्ग स्वास्थ्य

ऋतु परिवर्तन के दौर में दिन के समय हल्की धूप और सुबह तथा देर रात की ठंडक मानव स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रही है। भीलवाड़ा जिले के सबसे बड़े चिकित्सालय सहित ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों के आउटडोर में सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल बुखार और श्वास संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे मरीजों की कतारें लंबी हो रही हैं। दरअसल तापमान में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव के बीच मानव शरीर को नए मौसम के अनुकूल ढलने में वक्त लगता है। इसी कारण आती और जाती सर्दी के दौरान थोड़ी सी भी असावधानी लोगों को गंभीर संक्रमण की चपेट में धकेल देती है।

## कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले वर्ग पर दोहरा जोखिम
मौसम के इस बदलाव का सबसे त्वरित और प्रतिकूल प्रभाव छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर देखा जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा के अनुसार, इन दोनों आयु वर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिससे संक्रामक वायरस और बैक्टीरिया उन पर जल्दी हावी हो जाते हैं। सुबह और शाम के वक्त तापमान गिरते ही सर्दी-जुकाम और सांस से जुड़ी तकलीफों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील समय में घर के बड़े सदस्यों को बच्चों और वृद्धजनों की दिनचर्या तथा पहनावे पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है।

## सीधी ठंडी हवा से बचाव और कपड़ों का चयन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिनचर्या में मामूली सतर्कता बरतकर मौसमी बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रहा जा सकता है। प्रातःकाल और देर शाम जब वातावरण में गलन अधिक होती है, उस समय गर्म ऊनी कपड़े अनिवार्य रूप से पहनने चाहिए ताकि शरीर सीधी ठंडी हवा के संपर्क में न आए। छोटे बच्चों को सुबह या देर शाम बिना गर्म कपड़ों के बाहर ले जाने से बचना चाहिए। यदि किसी बच्चे को लगातार खांसी, तेज बुखार या सांस लेने में कठिनाई के लक्षण नजर आएं, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत नजदीकी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

## बुजुर्गों की दिनचर्या और संक्रमण से सुरक्षा
बुजुर्ग नागरिकों को भी अपनी नियमित आदतों में मौसम के अनुरूप फेरबदल करने की हिदायत दी गई है। डॉ. संजीव शर्मा ने वरिष्ठ नागरिकों को भोर में जल्दी अथवा देर शाम ठंड के समय घर से बाहर टहलने से बचने की सलाह दी है। उन्हें पर्याप्त विश्राम करने, गर्म कपड़े पहनने और पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन लेने पर जोर देना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनकी तीमारदारी में जुटे परिजनों के लिए हाथों की नियमित सफाई रखना बेहद जरूरी है, जिससे एक-दूसरे में फैलने वाले क्रॉस-इंफेक्शन पर लगाम लगाई जा सके।

## संतुलित खानपान और हाइड्रेशन का महत्व
सर्द मौसम में शरीर का आंतरिक तापमान स्थिर रखने के लिए भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि दैनिक आहार में ताजी हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दालें और सुपाच्य पौष्टिक व्यंजन शामिल किए जाने चाहिए। शरीर को अंदर से ऊर्जावान बनाए रखने के लिए हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही ग्रहण करना उचित है। दिन की शुरुआत में सुबह का पौष्टिक नाश्ता कभी न छोड़ें और ठंड के बावजूद पर्याप्त मात्रा में पानी पीने का नियम बनाए रखें। बच्चों और बुजुर्गों को बाजार की खुली खाद्य सामग्री, बासी खाना और फ्रिज में रखी अत्यधिक ठंडी चीजों से दूर रखना चाहिए।

## इसका आप पर असर
मौसम में बदलाव के कारण अचानक बढ़ने वाली मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए दैनिक दिनचर्या और खानपान में तुरंत बदलाव करना जरूरी है।

- **भारत में:** देश के विभिन्न हिस्सों में सुबह-शाम ठंड और दिन में धूप के अंतर से वायरल संक्रमण फैल रहा है। सभी नागरिक पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और पर्याप्त पानी पीने की आदत न छोड़ें।
- **भीलवाड़ा में:** जिले के मुख्य और ग्रामीण अस्पतालों के ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। स्थानीय लोग सुबह-शाम ठंडी हवा से बचें और लक्षण गंभीर होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं।
- **बच्चों की देखभाल:** छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से उन्हें निमोनिया और तेज खांसी का खतरा रहता है। अभिभावक सुबह-शाम बच्चों को पूरी बांह के गर्म कपड़े पहनाएं और ठंडे खाद्य पदार्थों से दूर रखें।
- **बुजुर्गों की सुरक्षा:** उम्रदराज लोगों को तापमान में गिरावट के दौरान सीने में जकड़न और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। बुजुर्ग सुबह की सैर का समय धूप निकलने के बाद तय करें और नियमित रूप से ताजा पौष्टिक आहार लें।

## ऐसा क्यों हुआ
दिन और रात के तापमान में असामान्य अंतर आने तथा शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता पर अचानक दबाव पड़ने के कारण मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।

- **तापमान का तीव्र उतार-चढ़ाव:** दिन में हल्की धूप की गर्मी और सुबह-शाम अचानक गलन बढ़ने से शरीर का थर्मोरेगुलेशन तंत्र प्रभावित होता है। अनुकूलन का पर्याप्त समय न मिलने से सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण पैदा करने वाले रोगाणु सक्रिय हो जाते हैं।
- **कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता:** बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण से लड़ने की शारीरिक क्षमता कम होती है। ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आते ही श्वास नली में जलन, जकड़न और बुखार की स्थिति तुरंत उत्पन्न हो जाती है।
- **लापरवाही और खानपान की गलत आदतें:** ठंड के शुरुआती दिनों में गर्म कपड़े न पहनना और बासी या अत्यधिक ठंडी चीजें खाना संक्रमण को न्योता देता है। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीने से डिहाइड्रेशन होता है और शरीर की रक्षा प्रणाली सुस्त पड़ जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. भीलवाड़ा के अस्पतालों में किन बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं?
बदलते मौसम के कारण अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल बुखार और सांस से जुड़ी दिक्कतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

### 2. इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा क्यों रहता है?
इन दोनों वर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिससे वे तापमान में अचानक आए बदलाव और संक्रमण को जल्दी झेल नहीं पाते।

### 3. ठंड के मौसम में खानपान में क्या बदलाव करने चाहिए?
दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दालें और गर्म ताजा आहार शामिल करना चाहिए, जबकि बासी और ठंडी चीजों से बचना चाहिए।

### 4. बच्चों में कौन से लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
यदि बच्चे को लगातार खांसी, तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी हो रही हो, तो बिना देरी किए तुरंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

### 5. बुजुर्गों को सुबह की सैर को लेकर क्या सलाह दी गई है?
बुजुर्गों को भोर में जल्दी और देर शाम ठंड में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने का परामर्श दिया गया है।

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