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  "title": "तेलंगाना के बुनकर वेल्दी हरिप्रसाद की कला के मुरीद हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, माचिस की डिब्बी में आने वाली साड़ी भी की तैयार",
  "summary": "तेलंगाना के राजन्ना सिरीसिल्ला के हथकरघा बुनकर वेल्दी हरिप्रसाद ने बिना मशीनों के कपड़े पर जी20 लोगो तैयार कर देश का ध्यान खींचा है, जिसकी सराहना स्वयं प्रधानमंत्री ने भी की है.",
  "content": "तेलंगाना के राजन्ना सिरीसिल्ला जिले के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले बुनकर ने अपनी बेजोड़ हथकरघा कला के दम पर देश की सीमाओं को लांघकर देशव्यापी पहचान बनाई है. कपड़ा नगरी के नाम से मशहूर इस इलाके के कुशल कारीगर वेल्दी हरिप्रसाद ने अपने अनूठे हुनर से देश के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा है. उनका यह असाधारण हुनर साफ तौर पर यह साबित करता है कि इंसानी हाथों की मेहनत आज भी बड़ी से बड़ी आधुनिक मशीनों को कड़ी चुनौती दे सकती है.\n\nबिना मशीनों के तैयार किया जी20 का शानदार लोगो\nजब साल 2022-23 में भारत को जी20 की अध्यक्षता करने का ऐतिहासिक अवसर मिला, तब वेल्दी हरिप्रसाद ने इस गौरवशाली पल को अपनी कला के माध्यम से अमर बनाने का मन बनाया. बिना किसी आधुनिक मशीन या तकनीकी मदद के, उन्होंने बेहद जटिल और बारीक बुनाई के जरिए एक ही कपड़े पर आधिकारिक G20 India 2023 का लोगो तैयार कर दिया. इस बेहद कठिन कलाकृति को पूरा करने में महीनों की कड़ी मेहनत, अटूट धैर्य और बारीकी की जरूरत थी. इस अनूठे कपड़े को तैयार करने के बाद उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष भेंट के रूप में भेजा था.\n\n'मन की बात' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की सराहना\nइस अद्भुत हस्तशिल्प को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बुनकर के असाधारण टैलेंट की जमकर प्रशंसा की. प्रधानमंत्री ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 95वें एपिसोड में वेल्दी हरिप्रसाद की कला का विशेष रूप से उल्लेख किया था. उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि देश के एक दूरदराज क्षेत्र से मिला यह अनोखा उपहार भारत की आत्मनिर्भर कला और पारंपरिक बुनाई की अद्भुत ताकत को प्रदर्शित करता है. इस राष्ट्रीय सम्मान ने सिरीसिल्ला के बुनकर समुदाय का मान पूरे देश में बढ़ा दिया.\n\nमाचिस की डिब्बी में समा जाने वाली अनोखी साड़ी\nवेल्दी हरिप्रसाद का जादुई हुनर केवल जी20 लोगो की बुनाई तक ही सीमित नहीं है. वह अपनी अन्य कई हैरान कर देने वाली कलाकृतियों के लिए भी काफी मशहूर हैं. हरिप्रसाद ने एक ऐसी महीन रेशमी साड़ी का निर्माण किया है जो इतनी पतली है कि उसे समेटकर माचिस की एक छोटी सी डिब्बी के अंदर सुरक्षित रखा जा सकता है. इस साड़ी की बुनाई इतनी बारीक है कि इसे एक साधारण सुई के छेद से भी आसानी से आर-पार निकाला जा सकता है. इसके अलावा, उन्होंने अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर के लिए माता सीता की एक विशेष स्वर्ण साड़ी का भी निर्माण किया था, जिसमें सोने के असली धागों का उपयोग किया गया था.\n\nपारंपरिक कला को मिली नई दिशा\nसिरीसिल्ला के बुनकरों की यह प्रेरक गाथा दर्शाती है कि अगर कला में गहराई और काम के प्रति सच्ची लगन हो, तो छोटे से कस्बे का हुनर भी देश के सबसे बड़े मंचों तक अपनी धाक जमा सकता है. आज यहां के हथकरघा बुनकर अपनी कड़ी मेहनत से न केवल तेलंगाना बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर रहे हैं. उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली नई पीढ़ी के लिए भी अपनी प्राचीन कला और विरासत को संजोए रखने की एक बेहतरीन प्रेरणा है.\n\nइसका आप पर असर\n• पूरे भारत में: यह देश के समृद्ध हथकरघा इतिहास और स्थानीय कारीगरों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, जिससे लोगों को स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है.\n• तेलंगाना में: सिरीसिल्ला के स्थानीय बुनकर समुदाय की दृश्यता और बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे वहां के कारीगरों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वेल्दी हरिप्रसाद कौन हैं?\nवह तेलंगाना के टेक्सटाइल टाउन राजन्ना सिरीसिल्ला के एक बेहद कुशल हथकरघा बुनकर हैं, जो अपनी बेजोड़ बुनाई कला के लिए जाने जाते हैं.\n\n2. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए क्या विशेष उपहार तैयार किया था?\nभारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान, उन्होंने बिना किसी आधुनिक मशीन की मदद के एक ही कपड़े पर जी20 का आधिकारिक लोगो हाथों से बुनकर पीएम मोदी को उपहार स्वरूप भेजा था.\n\n3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके उपहार पर क्या प्रतिक्रिया दी थी?\nपीएम मोदी ने अपने रेडियो शो 'मन की बात' के 95वें एपिसोड में हरिप्रसाद की तारीफ की और कहा कि यह अनूठा उपहार भारत की आत्मनिर्भर कला और पारंपरिक बुनाई की ताकत को दिखाता है.\n\n4. वेल्दी हरिप्रसाद द्वारा बनाई गई माचिस की साड़ी की क्या विशेषता है?\nउन्होंने एक ऐसी महीन रेशमी साड़ी बनाई है जो इतनी पतली है कि माचिस की डिब्बी में आ सकती है और सुई के छेद से भी पार हो सकती है.\n\n5. क्या उन्होंने अयोध्या राम मंदिर के लिए भी कुछ तैयार किया था?\nहाँ, उन्होंने अयोध्या के श्री राम मंदिर के लिए सोने के असली धागों का उपयोग करके माता सीता के लिए एक विशेष स्वर्ण साड़ी तैयार की थी.\n\nप्रेरणा और सबक\n• धैर्य और सटीकता: महान कलाकृतियों के निर्माण में जल्दबाजी नहीं की जा सकती; जी20 लोगो या माचिस की साड़ी जैसी कृतियों के लिए असीम धैर्य की आवश्यकता होती है.\n• कला को बड़े अवसरों से जोड़ना: अपनी पारंपरिक कला को देश की ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़ने से काम को बड़ी पहचान मिलती है.\n• नवाचार की सीमाएं पार करना: सुई के छेद से गुजरने वाली साड़ी बनाकर यह साबित होता है कि पारंपरिक विधाओं में भी अनोखे प्रयोग किए जा सकते हैं.\n• सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: अपनी जड़ों से जुड़े रहकर और कड़ी मेहनत से आधुनिक मशीनी युग में भी पुरानी लोक कलाओं को जीवित रखा जा सकता है.",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-07-25",
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