तेलंगाना में मिला 300 साल पुराना 27 किलो का ताला, दो चाबियों से खुलता है इसका राज तेलंगाना में एक बेहद दुर्लभ और विशाल ताला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसका वजन 27.5 किलोग्राम है। यह प्राचीन ताला अपनी अनूठी जटिल कार्यप्रणाली और ऐतिहासिक बनावट के कारण लोगों को हैरान कर रहा है। आज के आधुनिक और डिजिटल सुरक्षा के समय में जहां फिंगरप्रिंट और पासवर्ड का बोलबाला है, वहीं पुरानी धरोहरों की दुनिया से एक ऐसा मामला सामने आया है जो लोगों को हैरान कर रहा है। तेलंगाना राज्य में एक ऐसा प्राचीन ताला मिला है जो अपने भारी वजन और अनोखे तरीके से खुलने की खूबी के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया है। इस अनोखी वस्तु को देखने के लिए लोग खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं और इसकी कारीगरी की तारीफ कर रहे हैं। विशाल वजन और ऐतिहासिक महत्व इस अद्भुत ताले का वजन करीब 27.5 किलोग्राम है, जो इसे किसी भी सामान्य ताले से बिल्कुल अलग बनाता है। स्थानीय स्तर पर ऐतिहासिक वस्तुओं को सहेजने वाले एक संग्रहकर्ता के पास मौजूद यह ताला पुरानी राजशाही परंपराओं की याद दिलाता है। जानकारों के अनुसार यह कलाकृति लगभग 200 से 300 वर्ष पुरानी है और इसे राजा-महाराजाओं के कालखंड का माना जाता है। खोलने की जटिल और अनूठी प्रक्रिया इतिहास के जानकार गंगाधर राव बताते हैं कि इस ताले की आंतरिक संरचना और इसे खोलने का तरीका आज के दौर के तालों से बेहद भिन्न और पेचीदा है। इस भारी भरकम धातु के उपकरण को अनलॉक करने की विधि किसी रहस्यमयी खजाने के ताले जैसी प्रतीत होती है। इसे सुचारू रूप से खोलने के लिए दो अलग-अलग प्रणालियों और दो चाबियों की आवश्यकता पड़ती है। सबसे पहले इसके मुख्य हिस्से में लगी पहली चाबी को हटाना होता है और उसके बाद दूसरी चाबी को निश्चित छिद्र में डालकर दो बार घुमाना पड़ता है, तब जाकर इसका भारी कुंडा बाहर आता है। राजमहलों और किलों की सुरक्षा का साधन इतने भारी और मजबूत तालों का प्रयोग सदियों पहले साधारण रिहायशी मकानों में नहीं किया जाता था। इन्हें मुख्य रूप से विशाल किलों, शाही राजमहलों के बड़े दरवाजों और महत्वपूर्ण सुरक्षा चौकियों पर लगाया जाता था ताकि किसी भी बाहरी आक्रमण या चोरी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। उस समय के कुशल कारीगरों द्वारा लोहे पर की गई नक्काशी और उनकी मेहनत आज के दौर में भी लोगों को अचंभित कर देती है। प्राचीन वास्तुकला और इंजीनियरिंग की मिसाल वर्तमान समय में इस तरह के कलात्मक और भारी-भरकम लोहे के ताले मिलना लगभग नामुमकिन है। यह दुर्लभ वस्तु न सिर्फ पुरानी शिल्प कला का उत्कृष्ट नमूना है बल्कि देश के समृद्ध इतिहास और वास्तुकला की बेहतरीन झलक भी प्रस्तुत करती है। इस तरह के प्राचीन अवशेष इस बात का प्रमाण हैं कि बिना किसी आधुनिक मशीनरी के भी हमारे पूर्वज बेहद मजबूत तकनीक विकसित करने में पूरी तरह सक्षम थे। सवाल-जवाब 1. इस ताले का वजन कितना है? इस प्राचीन ताले का वजन 27.5 किलोग्राम है। 2. यह ताला कितना पुराना है? यह ताला लगभग 200 से 300 साल पुराना और राजा-महाराजाओं के समय का है। 3. इस ताले को खोलने के लिए क्या करना पड़ता है? इसे खोलने के लिए दो अलग-अलग प्रणालियों और दो चाबियों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसमें पहली चाबी हटाने के बाद दूसरी चाबी को दो बार घुमाना होता है। 4. इस तरह के तालों का इस्तेमाल कहां किया जाता था? सैकड़ों साल पहले इनका इस्तेमाल बड़े-बड़े किलों, राजमहलों के शाही दरवाजों और सुरक्षा चौकियों पर किया जाता था। https://trendkia.com/rajasthan/telangana-mein-mila-300-saal-purana-27-kilo-ka-tala-49833 TrendKia — Har trend, sabse pehle.