थार का सफेद सोना: पोषक तत्वों का भंडार बना ऊंटनी का दूध, जानिए क्यों बढ़ रही है मांग बाड़मेर और जैसलमेर समेत रेगिस्तानी जिलों में मिलने वाला ऊंटनी का दूध अब पोषक गुणों और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के चलते एक बेहतरीन नेचुरल हेल्थ टॉनिक के रूप में पहचाना जा रहा है। पारंपरिक रूप से घरों में चाय बनाने और बच्चों के पोषण के लिए गाय या भैंस का दूध ही हमेशा से पहली पसंद रहा है। हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी आंचल में अब ऊंटनी का दूध स्वास्थ्य जगत में एक नई पहचान बना रहा है। अपनी अद्भुत पोषण क्षमता और औषधीय गुणों के चलते पोषण विशेषज्ञ और चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञ इसे सफेद सोना कहकर पुकार रहे हैं। कभी थार के पशुपालकों के सामान्य खानपान तक सीमित रहने वाला यह उत्पाद आज हेल्थ मार्केट और आधुनिक वैज्ञानिक शोधों के केंद्र में आ चुका है। रेगिस्तानी जिलों से निकलकर पोषण की मुख्यधारा में थार के विशाल रेगिस्तानी इलाकों में सदियों से ऊंटनी के दूध को सेहत का अनमोल खजाना समझा जाता रहा है। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, बालोतरा और जालौर जैसे जिलों में ऊंट बहुतायत में पाए जाते हैं, जिसके चलते इन इलाकों में यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, वसा, लैक्टोज, कैल्शियम, पोटेशियम और आवश्यक विटामिन मौजूद होते हैं। यह अनूठा पोषक ढांचा इसे आम खाद्य सामग्री से अलग एक शक्तिशाली सुपरफूड की श्रेणी में लाकर खड़ा करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता और जैव सक्रिय प्रोटीन का कमाल ऊंटनी के दूध की रोग प्रतिरोधक क्षमता को लेकर आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक डॉ रमेश धनदे ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, इसमें लैक्टोफेरिन, लाइसोजाइम और इम्युनोग्लोबुलिन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण जैव सक्रिय प्रोटीन पाए जाते हैं। ये घटक मानव शरीर के भीतर पहुंचकर रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को दोगुना तक बढ़ा देते हैं। यही मुख्य वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे केवल पेट भरने वाली पारंपरिक खुराक नहीं मानते, बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने वाला आहार बताते हैं। डायबिटीज नियंत्रण में इंसुलिन जैसा प्रभाव स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंटनी का दूध बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए एक संपूर्ण प्राकृतिक हेल्थ टॉनिक का काम करता है। विशेषकर मधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए यह बेहद असरदार माना गया है। ऊंटनी के दूध में इंसुलिन के समान गुण और तत्व पाए जाते हैं, जो रक्त में शर्करा के स्तर को संतुलित और नियंत्रित रखने में सीधे तौर पर मदद करते हैं। कम वसा, अधिक विटामिन C और त्वचा के लिए फायदे गाय, भैंस, भेड़ या बकरी के दूध की तुलना में ऊंटनी का दूध काफी पतला और बहुत कम चिपचिपा होता है। इसमें फैट की मात्रा काफी कम पाई जाती है, जबकि विटामिन C की मात्रा गाय और भैंस के दूध से अधिक होती है। इसके भीतर मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा की कोशिकाओं को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मददगार होते हैं, जिसके कारण अब इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में भी किया जाने लगा है। पाचन, दिल और हड्डियों को देता है मजबूती बाड़मेर आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक डॉ रमेश कुमार धनदे के अनुसार, यह अनूठा दूध केवल शुगर नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाचन तंत्र को सुधारने, हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाने तथा हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर रखने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। वर्तमान में बाड़मेर के स्थानीय बाजारों में ऊंटनी का दूध 100 रुपये प्रति लीटर के भाव से आसानी से बिक रहा है, जिससे पशुपालकों को भी अच्छा संबल मिल रहा है। इसका आप पर असर ऊंटनी के दूध की बढ़ती लोकप्रियता स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों और स्थानीय पशुपालकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। • भारत में: पोषण विशेषज्ञ इसे सुपरफूड के तौर पर देख रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों और आहार में इसकी मांग बढ़ सकती है। जो लोग गाय-भैंस के दूध के विकल्प या डायबिटीज नियंत्रण के लिए प्राकृतिक उपाय खोज रहे हैं, उनके लिए यह एक उपयोगी विकल्प बन रहा है। • बाड़मेर और जैसलमेर में: स्थानीय बाजारों में यह 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है, जिससे इलाके के पशुपालकों को आय का नया जरिया मिल रहा है। पारंपरिक रूप से पशुपालन करने वाले परिवारों के लिए दूध की इस बढ़ती मांग से आर्थिक स्थिरता में मदद मिल सकती है। • रोगियों के लिए: डायबिटीज के मरीज और पाचन समस्याओं से जूझ रहे लोग इसे अपने खानपान में डॉक्टर की सलाह से शामिल कर सकते हैं। इसमें इंसुलिन जैसे गुण और जैव सक्रिय प्रोटीन होने के कारण यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है। • ब्यूटी इंडस्ट्री: एंटीऑक्सीडेंट्स और अधिक विटामिन C की मौजूदगी के कारण इसका उपयोग सौंदर्य उत्पादों में भी बढ़ रहा है। त्वचा की देखभाल से जुड़े उत्पाद खरीदने वाले उपभोक्ताओं को आने वाले समय में इसके नए विकल्प मिल सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ ऊंटनी के दूध के तेजी से लोकप्रिय होने की मुख्य वजह इसके भीतर पाए जाने वाले दुर्लभ बायोएक्टिव घटक और आधुनिक स्वास्थ्य शोध हैं। यह पारंपरिक पेय से आधुनिक सुपरफूड में कैसे बदला, इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं। • बायोएक्टिव प्रोटीन की मौजूदगी: आयुर्वेद विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार इसमें लैक्टोफेरिन, लाइसोजाइम और इम्युनोग्लोबुलिन पाए जाते हैं। ये तत्व मानव शरीर में संक्रमण फैलाने वाले रोगाणुओं से मुकाबला करने की क्षमता को काफी बढ़ा देते हैं। • इंसुलिन जैसे गुण: आधुनिक जीवनशैली में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच लोग प्राकृतिक समाधान तलाश रहे हैं। ऊंटनी के दूध में मौजूद इंसुलिन-समान घटक शुगर को नियंत्रित करने में सीधे तौर पर मददगार पाए गए हैं। • हल्का और कम फैट वाला स्वरूप: आम गाय और भैंस के दूध की तुलना में यह काफी पतला होता है और इसमें चिकनाई या वसा बहुत कम होती है। इसके अलावा इसमें विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है, जो इसे पाचन और त्वचा दोनों के लिए अधिक सुपाच्य बनाता है। • रेगिस्तानी क्षेत्रों में प्राकृतिक उपलब्धता: बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, बालोतरा और जालौर जैसे थार के जिलों में ऊंटों की आबादी पर्याप्त मात्रा में है। स्थानीय स्तर पर प्रचुर उपलब्धता के चलते इसका बाजार और वितरण दायरा आसानी से विकसित हो रहा है। सवाल-जवाब 1. ऊंटनी के दूध को 'सफेद सोना' क्यों कहा जा रहा है? अपने प्रचुर पोषक तत्वों, कम फैट, अधिक विटामिन C और दुर्लभ जैव सक्रिय प्रोटीन्स के कारण पोषण विशेषज्ञ इसे सफेद सोना कहते हैं। 2. ऊंटनी का दूध किन रोगों के नियंत्रण में असरदार माना गया है? यह डायबिटीज नियंत्रण में अत्यधिक असरदार है और पाचन तंत्र, हड्डियों, जोड़ों तथा दिल को मजबूत बनाने में मदद करता है। 3. इम्युनिटी बढ़ाने में यह दूध किस तरह काम करता है? इसमें लैक्टोफेरिन, लाइसोजाइम और इम्युनोग्लोबुलिन जैसे प्रोटीन पाए जाते हैं, जो शरीर की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता दोगुनी करते हैं। 4. गाय-भैंस के दूध की तुलना में ऊंटनी का दूध कैसा होता है? यह गाय-भैंस के दूध के मुकाबले पतला, कम चिपचिपा, कम फैट वाला और विटामिन C से भरपूर होता है। 5. बाड़मेर के बाजार में ऊंटनी का दूध किस भाव पर बिक रहा है? बाड़मेर के स्थानीय बाजार में ऊंटनी का दूध 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। 6. राजस्थान के किन जिलों में ऊंटनी बहुतायत में पाई जाती है? यह बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, बीकानेर और जालौर सहित अन्य रेगिस्तानी इलाकों में बहुतायत में पाई जाती है। https://trendkia.com/rajasthan/thar-ka-sapheda-sona-poshaka-tatvon-ka-bhndara-bana-untani-ka-dudha-janie-kyon-barha-rahi-hai-manga-46875 TrendKia — Har trend, sabse pehle.