तीर्थनगरी पुष्कर में आक्रामक बंदरों पर नगर परिषद का शिकंजा, 92 को सुरक्षित पकड़कर दूर जंगल भेजने की तैयारी पुष्कर में श्रद्धालुओं और स्थानीय बाशिंदों के लिए परेशानी का सबब बने 92 बंदरों को नगर परिषद ने पिंजरों में कैद किया है, जिन्हें आबादी से करीब 100 किलोमीटर दूर प्राकृतिक जंगल में छोड़ा जाएगा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पवित्र तीर्थ पुष्कर में श्रद्धालुओं, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए लंबे अरसे से सिरदर्द बने बंदरों के झुंडों को नियंत्रित करने के लिए एक सघन मुहिम शुरू की गई है। शहर की संकरी गलियों और मुख्य बाजारों में लोगों को डराने और सामान छीनने वाले इन जानवरों को योजनाबद्ध तरीके से पकड़ने का काम नगर परिषद ने अपने हाथ में लिया है। इस विशेष अभियान की निगरानी राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत के स्तर पर की जा रही है, जिनके स्पष्ट निर्देशों के उपरांत प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ है। शुरुआती चरण के दौरान ही टीम को उल्लेखनीय कामयाबी हाथ लगी है, जहां कुल 92 बंदरों को पूरी हिफाजत के साथ पिंजरों में बंद किया जा चुका है। पकड़े गए इस समूह में 16 छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी देखभाल और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए आफत बने थे झुंड पुष्कर केवल एक सामान्य कस्बा नहीं बल्कि देश और दुनिया भर के पर्यटकों और आस्थावानों का प्रमुख केंद्र है। यहां रोजाना हजारों की तादाद में लोग पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने और जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में शीश नवाने पहुंचते हैं। हालांकि, बीते कुछ वर्षों के दौरान इस धार्मिक नगरी के आसपास बंदरों की तादाद में अत्यधिक इजाफा हुआ, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। बंदरों के आक्रामक दल घरों की छतों, रिहायशी मकानों और दुकानों में घुसपैठ कर खाद्य सामग्री और कीमती सामान झपट लेते थे। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब बंदरों द्वारा मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों पर जानलेवा हमले करने के मामले सामने आने लगे। इन हमलों ने पूरे बाजार और रिहायशी कॉलोनियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था, जिसे देखते हुए इस प्रशासनिक कार्रवाई को शुरू किया गया। सौ किलोमीटर दूर प्राकृतिक पर्यावास में शिफ्ट करने का खाका अभियान की कार्ययोजना पर रोशनी डालते हुए नगर परिषद के सभापति राजेंद्र बाकोलिया ने स्पष्ट किया कि पकड़े गए इन सभी 92 बंदरों को पुष्कर के सघन आबादी वाले इलाकों से लगभग 100 किलोमीटर दूर एक सुरक्षित वन क्षेत्र में ले जाया जाएगा। इस स्थानांतरण का उद्देश्य इन वन्यजीवों को उनके अनुकूल प्राकृतिक माहौल, स्वच्छ वातावरण और प्रचुर भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे दोबारा मानवीय बस्तियों की ओर रुख न करें। सभापति ने कहा कि स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों को सुरक्षित वातावरण देना नगर परिषद की बुनियादी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यह अभियान केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं है, बल्कि जब तक पूरे पुष्कर क्षेत्र को इनके अनियंत्रित हमलों से स्थायी रूप से मुक्त नहीं कर दिया जाता, तब तक यह धरपकड़ निरंतर जारी रखी जाएगी। पारदर्शिता के लिए तैयार होगी वीडियो रिकॉर्डिंग वन्यजीवों के स्थानांतरण के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या प्रक्रियागत गड़बड़ी से बचने के लिए नगर परिषद ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। जब इन बंदरों को 100 किलोमीटर दूर जंगल में खुला छोड़ा जाएगा, तब नगर परिषद के अधिकृत प्रतिनिधियों का एक दल पूरे सफर और रिहाई के दौरान मौके पर मौजूद रहेगा। बंदरों को प्राकृतिक जंगल में मुक्त करने की हर एक गतिविधि की मौके पर ही वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इस प्रामाणिक फुटेज को बाद में मीडिया और आमजन के सामने सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे यह साफ हो सके कि सभी जीवों को बिना किसी नुकसान के उनके प्राकृतिक परिवेश में पहुंचा दिया गया है। पार्षद मुकेश कुमावत और नगर परिषद के कर्मचारी योगेश शर्मा ने इस पूरी कवायद को शहर के हित में बेहद जरूरी और ऐतिहासिक कदम करार दिया है। इसका आप पर असर पुष्कर में बंदरों के खिलाफ शुरू किए गए इस सघन अभियान से तीर्थयात्रियों, स्थानीय दुकानदारों और निवासियों की रोजमर्रा की सुरक्षा और दिनचर्या पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा। • भारत में: देश भर से पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अब बंदरों के झपटने और अचानक हमलों के डर से मुक्ति मिलेगी। इससे तीर्थस्थल पर आने वाले परिवार बिना किसी खौफ के धार्मिक अनुष्ठानों और भ्रमण का आनंद ले सकेंगे। • पुष्कर में: स्थानीय दुकानदारों और बाजार के व्यापारियों को दुकानों में होने वाले नुकसान और सामान छीनने की दैनिक घटनाओं से राहत मिलेगी। रिहायशी बस्तियों में रहने वाले लोग, महिलाएं और छोटे बच्चे अब अपनी छतों और गलियों में सुरक्षित महसूस कर सकेंगे। • पर्यटन व्यवसाय: देशी-विदेशी सैलानियों के लिए शहर का माहौल अधिक सुरक्षित और सुगम बनेगा। इससे पुष्कर के प्रमुख बाजारों और घाटों पर बिना किसी व्यवधान के व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। • वन्यजीव सुरक्षा: पकड़े गए बंदरों को मानवीय संघर्ष वाले वातावरण से दूर घने प्राकृतिक पर्यावास में शिफ्ट किया जाएगा। वहां उन्हें प्राकृतिक भोजन और खुला वातावरण मिलेगा, जिससे उनका अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा। ऐसा क्यों हुआ पुष्कर में यह बड़ा प्रशासनिक कदम लंबे समय से बेकाबू हो रही बंदरों की आबादी और आम जनता पर बढ़ रहे हमलों की वजह से उठाया गया है। • जनसंख्या में अनियंत्रित बढ़ोतरी: पिछले कुछ वर्षों में पुष्कर की शहरी परिधि में बंदरों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई थी। भोजन की आसान उपलब्धता और मानवीय बस्तियों के कारण इनके बड़े-बड़े झुंड बाजारों और आवासीय कॉलोनियों में जम गए थे। • आक्रामक हमले और नुकसान: बंदरों के झुंड लगातार घरों और दुकानों में घुसकर सामान छीन रहे थे। बुजुर्गों, महिलाओं और मासूम बच्चों पर जानलेवा हमलों की बढ़ती घटनाओं ने पूरे कस्बे में गंभीर भय पैदा कर दिया था। • प्रशासनिक निर्देश और पहल: आमजन और व्यापारियों की निरंतर शिकायतों के बाद राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत ने नगर परिषद को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इन्हीं स्पष्ट निर्देशों के बाद नगर परिषद ने विस्तृत योजना बनाकर धरपकड़ का यह अभियान प्रारंभ किया। सवाल-जवाब 1. पुष्कर में नगर परिषद ने अब तक कितने बंदर पकड़े हैं? नगर परिषद की टीम ने अब तक कुल 92 बंदरों को सुरक्षित पिंजरों में पकड़ा है, जिनमें 16 छोटे बच्चे भी शामिल हैं। 2. पकड़े गए बंदरों को कहां छोड़ा जाएगा? इन सभी बंदरों को पुष्कर की घनी आबादी से लगभग 100 किलोमीटर दूर एक सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। 3. यह अभियान किसके निर्देशन में संचालित किया जा रहा है? यह विशेष अभियान राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत के सीधे निर्देशन और मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। 4. बंदरों को जंगल में छोड़ने के दौरान पारदर्शिता कैसे रखी जाएगी? नगर परिषद के प्रतिनिधि दल की मौजूदगी में जंगल में रिहाई की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी और उसे सार्वजनिक किया जाएगा। https://trendkia.com/rajasthan/tirthanagari-pushkar-men-akramaka-bndaron-para-nagara-parishada-ka-shiknja-92-ko-surakshita-pakarakara-dura-jngala-bhejane-ki-taiy-40932 TrendKia — Har trend, sabse pehle.