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  "title": "टोंक नगर परिषद में कांग्रेस का परचम, 38 वोटों के साथ मयंक गोयल बने नए सभापति",
  "summary": "राजस्थान के टोंक में कांग्रेस ने निर्दलीयों की मदद से 38 मत हासिल कर नगर परिषद में बोर्ड बना लिया है, जहां मयंक गोयल सभापति बने। दूसरी ओर जिले की 8 नगरपालिकाओं में से 7 पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है।",
  "content": "राजस्थान के बहुचर्चित स्थानीय निकाय चुनावों में टोंक जिले की सियासत में दिलचस्प शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के राजनीतिक प्रभाव वाले इलाके टोंक नगर परिषद की शीर्ष कुर्सी पर आखिरकार कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा। 59 सदस्यों वाले नगर परिषद सदन में पार्टी के युवा चेहरे मयंक गोयल ने सभापति पद की शपथ ली। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के खुद के 32 पार्षदों के अलावा 6 निर्दलीय सदस्यों ने भी उनका साथ दिया, जिससे पार्टी का कुल आंकड़ा 38 पर पहुंच गया और उसने स्पष्ट बहुमत से अपना बोर्ड गठित कर लिया। इस मुकाबले में कांग्रेस संगठन के साथ-साथ सचिन पायलट के सियासी रसूख की भी कड़ी परीक्षा मानी जा रही थी।\n\nयुवा चेहरे पर दांव और अंदरूनी सियासी समीकरण\nटोंक नगर परिषद के सभापति पद के लिए कांग्रेस खेमे में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा के केंद्र में थे। दावेदारों की लंबी फेहरिस्त के बीच पार्टी नेतृत्व ने अंतिम समय में नौजवान चेहरे मयंक गोयल के नाम पर मुहर लगाकर सबको चौंका दिया। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम और रणनीति के पीछे हंसराज चौधरी की भूमिका को बेहद निर्णायक माना जा रहा है। टिकट वितरण की प्रक्रिया से लेकर सभापति के अंतिम चयन तक चौधरी लगातार सक्रिय रहे। स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनकी ठोस लामबंदी की वजह से ही पार्टी निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में एकजुट रखने में पूरी तरह सफल रही। नव निर्वाचित सभापति मयंक गोयल के कंधों पर अब शहर के विकास, आधारभूत ढांचे की मजबूती और नागरिक सुविधाओं को सुधारने की मुख्य जिम्मेदारी आ गई है।\n\nजिले की आठ नगरपालिकाओं में चला बीजेपी का दबदबा\nटोंक शहर में भले ही कांग्रेस ने अपनी साख बचा ली हो, लेकिन जिले की छोटी नगरपालिकाओं की तस्वीर पूरी तरह उलट रही। जिले की कुल 9 नगरपालिकाओं में से जिन 8 निकायों के अध्यक्ष पद के चुनावी नतीजे घोषित हुए, उनमें से 7 पर भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा परचम लहरा दिया। कांग्रेस केवल उनियारा नगरपालिका में ही अपनी जीत दर्ज कराने में सफल रही, जबकि बाकी सभी जगह भगवा खेमे का दबदबा देखने को मिला। कई नगरपालिकाओं में कड़े मुकाबले हुए, जहां मामूली वोटों के अंतर और आंतरिक उठापटक ने नतीजों का रुख तय कर दिया।\n\nउनियारा और डिग्गी के सीधे चुनावी मुकाबले\nजिले की उनियारा नगरपालिका में कांग्रेस के उम्मीदवार नरेश गुर्जर ने अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत हासिल की। चुनावी गणना में नरेश गुर्जर के पक्ष में 12 मत पड़े, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बीजेपी प्रत्याशी अभय सिंह को 8 पार्षदों का ही समर्थन मिल सका। इस परिणाम के साथ उनियारा में कांग्रेस अपना स्वतंत्र बोर्ड गठित करने में सफल रही। इसके विपरीत डिग्गी नगरपालिका में बीजेपी के अरविंद शर्मा ने बाजी मारी। अरविंद शर्मा को 15 पार्षदों का समर्थन हासिल हुआ, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार करमचंद मीणा 10 वोटों पर ही सिमट गए। इस जीत के साथ डिग्गी की सत्ता बीजेपी के हाथों में चली गई।\n\nनिवाई में उलटफेर और लांबाहरिसिंह का नतीजा\nनिवाई नगरपालिका का चुनाव राजनीतिक विश्लेषकों के लिए सबसे चौंकाने वाला रहा। 40 वार्डों वाली इस पालिका में कांग्रेस के 19 और बीजेपी के 18 पार्षद चुनाव जीतकर आए थे। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस आगे दिख रही थी, लेकिन क्रॉस वोटिंग ने पूरा खेल पलट दिया। बीजेपी के नरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस की प्रत्याशी रेखा जैन को 2 मतों के अंतर से पराजित कर अध्यक्ष की कुर्सी छीन ली। वहीं लांबाहरिसिंह नगरपालिका में बीजेपी प्रत्याशी सोनिया सोनी ने जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को 8 मतों के अंतर से मात दी। इस चुनाव में बीजेपी को 14 वोट हासिल हुए, जबकि कांग्रेस के खाते में महज 6 वोट ही दर्ज हुए। जीत की औपचारिक घोषणा होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।\n\nटोडारायसिंह, देवली, पीपलू और दूनी के चुनावी परिणाम\nटोडारायसिंह नगरपालिका में बीजेपी के संत कुमार जैन ने एकतरफा जीत दर्ज की। रिटर्निंग अधिकारी जयंत कुमार द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार संत कुमार जैन को 28 वोट प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी सत्यनारायण सैनी को केवल 7 मतों से संतोष करना पड़ा। देवली नगरपालिका में भी बीजेपी ने जोरदार जीत हासिल की, जहां कजोड़ी देवी ने 24 मत लेकर कांग्रेस के बनवारी बेरवा (11 वोट) को 13 मतों के बड़े अंतर से मात दी। पीपलू नगरपालिका अध्यक्ष पद के मुकाबले में बीजेपी के रमेश वर्मा ने 13 मत हासिल कर कांग्रेस के पंकज बैरवा को 6 मतों से हराया, जिन्हें कुल 7 वोट मिले थे। वहीं दूनी नगरपालिका में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां बीजेपी की अर्चना बलाई को 10 मत मिले और कांग्रेस प्रत्याशी 9 मतों पर अटक गए। इस तरह दूनी में बीजेपी ने महज 1 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।\n\nइसका आप पर असर\nइस चुनावी नतीजे के बाद टोंक नगर परिषद और जिले की सात नगरपालिकाओं में नई प्रशासनिक परिषदों के गठन से विकास कार्यों और नागरिक सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• टोंक शहर में: नगर परिषद में कांग्रेस का स्पष्ट बोर्ड बनने से शहर की सड़कों, जल निकासी और सफाई व्यवस्था से जुड़ी अटकी योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। युवा सभापति के आने से युवाओं और आम नागरिकों को मूलभूत समस्याओं के त्वरित समाधान की आस बंधी है।\n• निवाई, देवली और अन्य कस्बों में: सात निकायों में बीजेपी का बोर्ड बनने से स्थानीय स्तर पर राज्य और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन हो सकता है। आम निवासियों को वार्ड स्तर पर रुके हुए बजट और बुनियादी निर्माण कार्यों की फाइलें आगे बढ़ने का सीधा लाभ मिलेगा।\n• पार्षदों और स्थानीय राजनीति पर: क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों की महत्वपूर्ण भूमिका ने यह दिखा दिया है कि स्थानीय बोर्ड में पार्षदों की आवाज मजबूत रहेगी। स्थानीय जनता अपने वार्ड प्रतिनिधियों पर काम करवाने के लिए पहले से अधिक दबाव बना सकेगी।\n• नागरिक सेवाओं के निपटारे में: सभी 8 नगर निकायों को नए अध्यक्ष मिलने से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, निर्माण अनुमति और पट्टे जारी करने की नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। लंबे समय से चुनाव के चलते लंबित नागरिक कार्यों का निपटारा अब तेजी से हो सकेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nटोंक जिला मुख्यालय और ग्रामीण कस्बों के बीच राजनीतिक प्राथमिकताओं और स्थानीय लामबंदी के अलग-अलग रहने की वजह से यह मिला-जुला चुनावी परिणाम सामने आया।\n\n• पायलट का क्षेत्रीय प्रभाव: टोंक विधानसभा क्षेत्र सचिन पायलट का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, जहां कांग्रेस का जमीनी कैडर और व्यक्तिगत समर्थन काफी मजबूत है। इसी संगठनात्मक पकड़ के चलते कांग्रेस ने 32 पार्षद जिताए और 6 निर्दलीयों को जोड़कर 38 मतों के साथ अपना बोर्ड सुरक्षित कर लिया।\n• हंसराज चौधरी की रणनीतिक भूमिका: सभापति के लिए मयंक गोयल के चयन और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को जुटाने में स्थानीय नेता हंसराज चौधरी की सक्रियता निर्णायक साबित हुई। उन्होंने अंदरूनी असंतोष को थामते हुए सभी मतों को एकजुट रखा।\n• कस्बों में बीजेपी की मजबूत घेराबंदी: जिला मुख्यालय से इतर कस्बाई नगरपालिकाओं में बीजेपी ने संगठित चुनाव लड़ा और स्थानीय समीकरण साधे। निवाई जैसी पालिका में जहां कांग्रेस के पास 19 पार्षद थे, वहां भी बीजेपी ने क्रॉस वोटिंग करवाकर 18 की संख्या के बावजूद जीत दर्ज कर ली।\n• निर्दलीयों और एक-एक वोट की अहमियत: दूनी में महज 1 वोट और निवाई में 2 वोटों के अंतर से आए फैसलों ने साबित किया कि स्थानीय स्तर पर पार्षद स्तर की मान-मनौव्वल और जातीय समीकरणों ने नतीजों को पलटने में बड़ी भूमिका निभाई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टोंक नगर परिषद में कांग्रेस के मयंक गोयल को कुल कितने वोट मिले?\nमयंक गोयल को कुल 38 वोट मिले, जिनमें 32 कांग्रेस के और 6 निर्दलीय पार्षदों के मत शामिल थे।\n\n2. टोंक नगर परिषद में कुल कितने वार्ड हैं?\nटोंक नगर परिषद में कुल 59 वार्ड हैं।\n\n3. टोंक जिले की 8 नगरपालिकाओं में से कितनी पर बीजेपी ने कब्जा जमाया?\nबीजेपी ने जिले के 8 में से 7 नगरपालिका अध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की।\n\n4. कांग्रेस को किस नगरपालिका में जीत हासिल हुई और वहां कौन अध्यक्ष बना?\nकांग्रेस ने उनियारा नगरपालिका में जीत हासिल की, जहां नरेश गुर्जर अध्यक्ष चुने गए।\n\n5. निवाई नगरपालिका में अध्यक्ष पद का चुनाव किसने जीता?\nनिवाई में बीजेपी के नरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस की रेखा जैन को 2 वोटों से हराकर अध्यक्ष पद जीता।\n\n6. दूनी नगरपालिका में अध्यक्ष का फैसला कितने मतों के अंतर से हुआ?\nदूनी में बीजेपी की अर्चना बलाई ने महज 1 वोट के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज की।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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