टोंक के माधोगंज में नेटवर्क नहीं तो वोट नहीं का ऐलान, टावर न लगने से ग्रामीणों में आक्रोश राजस्थान के टोंक जिले के माधोगंज गांव में मोबाइल नेटवर्क न मिलने से परेशान ग्रामीणों ने आगामी पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। एक महीने पहले ज्ञापन देने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर लोगों ने यह कदम उठाया है। देशभर में जहां एक तरफ डिजिटल इंडिया और तेज रफ्तार इंटरनेट के दावे किए जा रहे हैं, वहीं राजस्थान के टोंक जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो इन विकास के दावों की सच्चाई बयां करती है। टोंक जिले के माधोगंज गांव और इसके आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी पूरी तरह फेल हो चुकी है, जिससे आजिज आकर ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपना लिया है। नेटवर्क की समस्या से परेशान होकर अब स्थानीय लोगों ने आगामी पंचायत चुनाव का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का बड़ा ऐलान कर दिया है। प्रशासन और विभाग की अनदेखी से बढ़ा गुस्सा दूरसंचार विभाग और स्थानीय प्रशासन की लगातार उपेक्षा के खिलाफ माधोगंज गांव के लोग एकजुट हो चुके हैं। किसान नेता रतन खोखर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों, युवाओं और ग्रामीणों ने गांव में इकट्ठा होकर जोरदार प्रदर्शन किया और 'नेटवर्क नहीं तो वोट नहीं' के नारे बुलंद किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले ही टोंक जिला कलेक्टर के जरिए राजस्थान के मुख्यमंत्री और केंद्रीय दूरसंचार मंत्री के नाम एक ज्ञापन भेजा था। इस ज्ञापन में गांव में नया मोबाइल टावर जल्द से जल्द लगाने और नेटवर्क की समस्या को दूर करने की मांग की गई थी, लेकिन एक महीना पूरा होने के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। डिजिटल विफलता से हर वर्ग हुआ बेहाल मोबाइल नेटवर्क के अभाव में माधोगंज गांव का विकास कार्य पूरी तरह से रुक गया है और समाज का हर वर्ग इस समस्या से जूझ रहा है। डिजिटल युग में कनेक्टिविटी न होने के कारण ग्रामीणों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि किसानों से लेकर छात्रों तक का जीवन प्रभावित हो रहा है। किसानों और छात्रों की बढ़ गईं मुश्किलें गांव के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, फसल बीमा कराने और सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन करते वक्त आने वाले ओटीपी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर ओटीपी न मिलने के कारण उनके कई महत्वपूर्ण सरकारी काम बीच में ही लटके रह जाते हैं। इसके साथ ही छात्रों की पढ़ाई भी पूरी तरह चौपट हो गई है। नेटवर्क न होने से युवा और विद्यार्थी ऑनलाइन क्लासेज नहीं ले पा रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उन्हें भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। बैंकिंग और ई-मित्र सेवाएं भी ठप गांव के ई-मित्र केंद्रों पर पेंशन से जुड़े कार्य, जाति प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। इसके अलावा बैंकिंग लेनदेन और अन्य आवश्यक ऑनलाइन कार्य पूरी तरह से बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी भारी असुविधा उठानी पड़ रही है। चुनावी बहिष्कार की दो टूक चेतावनी आज के डिजिटल दौर में कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधा से भी वंचित रहने वाले ग्रामीणों ने अब प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनके गांव में नया मोबाइल टावर नहीं लगाया जाता और नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वे किसी भी चुनाव में अपने मत का इस्तेमाल नहीं करेंगे। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित दूरसंचार विभाग इस गंभीर मामले पर कब नींद से जागता है और ग्रामीणों को इस डिजिटल संकट से कब मुक्ति मिलती है। इसका आप पर असर टोंक के माधोगंज गांव में मोबाइल नेटवर्क की अनुपस्थिति और चुनाव बहिष्कार के इस फैसले का सीधा असर स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा। • भारत में: डिजिटल इंडिया के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को यह घटना उजागर करती है, जहां दूरदराज के इलाकों में बुनियादी कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। • माधोगंज और टोंक में: ग्रामीणों द्वारा आगामी पंचायत चुनाव के बहिष्कार के ऐलान से स्थानीय प्रशासन पर तुरंत नया मोबाइल टावर लगवाने का भारी दबाव बन गया है। • किसानों और छात्रों के लिए: ओटीपी न मिलने के कारण सरकारी सब्सिडी और फसल बीमा के ऑनलाइन आवेदन अटक गए हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान और छात्रों को पढ़ाई में बाधा का सामना करना पड़ रहा है। • बैंकिंग सेवाओं पर असर: ई-मित्र और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं ठप होने से स्थानीय लोगों को पेंशन और जरूरी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। • प्रशासनिक चेतावनी: ग्रामीणों की इस दो टूक चेतावनी के बाद अब संबंधित विभागों को जल्द से जल्द कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। सवाल-जवाब 1. माधोगंज गांव के ग्रामीणों ने किस बात का विरोध किया है? ग्रामीणों ने मोबाइल नेटवर्क और कनेक्टिविटी न मिलने के कारण आगामी पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। 2. इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया? इस प्रदर्शन का नेतृत्व किसान नेता रतन खोखर ने किया, जिनके साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मौजूद रहे। 3. प्रशासन को ज्ञापन कब सौंपा गया था? ग्रामीणों ने घटना से लगभग एक महीने पहले टोंक जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और केंद्रीय दूरसंचार मंत्री को ज्ञापन सौंपा था। 4. नेटवर्क न होने से कौन सी मुख्य समस्याएं आ रही हैं? ओटीपी न मिलने से किसानों के सरकारी काम अटके हैं, छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई ठप है और ई-मित्र तथा बैंकिंग सेवाएं बंद पड़ी हैं। 5. ग्रामीणों ने प्रशासन को क्या चेतावनी दी है? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक नया मोबाइल टावर स्थापित नहीं होता, वे किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। https://trendkia.com/rajasthan/tonka-ke-madhognja-men-netavarka-nahin-to-vota-nahin-ka-ailana-tavara-na-lagane-se-graminon-men-akrosha-24010 TrendKia — Har trend, sabse pehle.